नागरिकता संशोधन बिल की गहन समझ रखने वाले चौधरी कहते है कि अगर ये बिल संसद में पास हो भी जाता है तो भी कई हिंदू बंगालियों को नागरिकता नहीं मिलेगी.
चौधरी बताते हैं, ''इस बील की शर्तों के अनुसार केवल वैध शरणार्थी ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इसके अलावा उन्हें बांग्लादेश के उन दस्तावेजों को आवेदन के साथ जमा करवाना पड़ेगा जिनसे ये बात सिद्ध हो सके कि आवेदनकारी सही में बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के चलते यहां आया हैं.''
वे इसी में आगे जोड़ते हैं, ''लेकिन इसमें भी कई तरह की समस्याएं है. दंगो से प्रभावित होकर जो लोग बाद में अपना सबकुछ छोड़कर यहां आए है उनके पास लीगल दस्तावेज कहां से आएंगे. जो लोग काफी पहले आ गए थे उनके पास शरणार्थी सेर्टिफिकेट जरूर मिलेगा. लेकिन बाद में आए अधिकतर लोगों के पास बांग्लादेश का कोई वैध दस्तावेत नहीं है. जबकि आवेदन करने की पहली शर्त है कि शरणार्थी को ये साबित करना होगा कि वो बांग्लादेश से भागकर आए दंगा प्रभावित पीड़ित है. इसके अलावा छह साल तक उसे बतौर शरणार्थी यहा रहना होगा. इस दौरान इन शरणार्थियों का आपराधिक रिकार्ड देखा जाएगा. अगर सबकुछ नियमों के अनुसार भी होता है तो भी अंतिम निर्णय सरकार लेगी कि वो उसे नागरिकता देगी या नहीं. कुल मिलाकर इस मुद्दे पर आगे लंबे समय तक राजनीति चलेगी और लोग परेशान ही रहेंगे."
https://www.biharbroadcasting.com/2019/12/blog-post_44.html?m=1
चौधरी बताते हैं, ''इस बील की शर्तों के अनुसार केवल वैध शरणार्थी ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इसके अलावा उन्हें बांग्लादेश के उन दस्तावेजों को आवेदन के साथ जमा करवाना पड़ेगा जिनसे ये बात सिद्ध हो सके कि आवेदनकारी सही में बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के चलते यहां आया हैं.''
वे इसी में आगे जोड़ते हैं, ''लेकिन इसमें भी कई तरह की समस्याएं है. दंगो से प्रभावित होकर जो लोग बाद में अपना सबकुछ छोड़कर यहां आए है उनके पास लीगल दस्तावेज कहां से आएंगे. जो लोग काफी पहले आ गए थे उनके पास शरणार्थी सेर्टिफिकेट जरूर मिलेगा. लेकिन बाद में आए अधिकतर लोगों के पास बांग्लादेश का कोई वैध दस्तावेत नहीं है. जबकि आवेदन करने की पहली शर्त है कि शरणार्थी को ये साबित करना होगा कि वो बांग्लादेश से भागकर आए दंगा प्रभावित पीड़ित है. इसके अलावा छह साल तक उसे बतौर शरणार्थी यहा रहना होगा. इस दौरान इन शरणार्थियों का आपराधिक रिकार्ड देखा जाएगा. अगर सबकुछ नियमों के अनुसार भी होता है तो भी अंतिम निर्णय सरकार लेगी कि वो उसे नागरिकता देगी या नहीं. कुल मिलाकर इस मुद्दे पर आगे लंबे समय तक राजनीति चलेगी और लोग परेशान ही रहेंगे."
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