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बिहार में ताड़ के पेड़ बचा रहे हैं ज़िंदगियां, कैसे?

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  BBC News,  हिंदी सामग्री को स्किप करें सेक्शन होम पेज भारत विदेश मनोरंजन खेल विज्ञान-टेक्नॉलॉजी सोशल वीडियो पॉडकास्ट चंदन कुमार जजवाड़े बीबीसी संवाददाता, पटना से 4 घंटे पहले इमेज स्रोत, ALAN HIGHTON "बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर, पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर" कबीर ने इस दोहे में ताड़ और खजूर जैसे पेड़ों के बारे में कहा है कि भले ही वो बड़े हैं लेकिन इससे राहगीर को ना तो छाया मिल पाती है और ना ही इसके फल तक पहुंचना आसान होता है. लेकिन ताड़ और खजूर की यही ऊंचाई बिहार के लिए वरदान भी है. इसलिए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इन पेड़ों को बचाने की सलाह दी है. बीएसडीएमए ने राज्य में आकाश से बिजली गिरने से हर साल होने वाली सैकड़ों मौतों पर अध्ययन किया है. इस अध्ययन में पाया गया है कि ताड़ जैसे ऊंचे पेड़ वज्रपात के समय लोगों की जान बचाते हैं. मौसम विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक सोमा सेन रॉय बताती हैं कि जब आप बिहार के ग्रामीण इलाकों में जाएंगे तो वहां कई ताड़ के ऐसे पेड़ दिखेंगे जो ऊपर से जले हुए होंगे. ताड़ के पेड़ आमतौर पर सबसे ऊंचे होते हैं और ये आकाश से गिरने वा