इस पोस्ट को शेयर करें Facebook इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp इस पोस्ट को शेयर करें Messenger साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट FIROZ KHAN Image caption फ़िरोज़ ख़ान को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्य स्तरीय संस्कृत विद्वत सम्मान देते हुए. मशहूर अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन ने उन्नीसवीं सदी में कहा था, ''बनारस इतिहास से भी प्राचीन है, परंपरा से भी पुराना है और मिथकों से भी पहले से है. इतिहास, परंपरा और मिथ को साथ मिला दें तो बनारस और प्राचीन लगने लगता है.'' लेकिन बनारस अब नया हो चुका है. इस नए बनारस के छात्रों को किसी फ़िरोज़ ख़ान का संस्कृत पढ़ाना नहीं रास आ रहा. ये अड़े हुए हैं कि फ़िरोज़ ख़ान मुसलमान हैं और एक मुसलमान संस्कृत कैसे पढ़ा सकता है? एक मुसलमान गीता और वेद कैसे पढ़ा सकता है? फ़िरोज़ ख़ान कहते हैं. ''तीन-चार साल की उम्र में मैं पास के ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने जाया करता था. वहां की पढ़ाई मुझे ठीक नहीं लगी. मतलब मेरे मन की पढ़ाई नहीं थी. टीचर बोलते थे ये भी याद करके आना है वो भी याद करके आना है. पढ़ाई एकदम बोझ बन गई थ...