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बीएचयू संस्कृत विवाद: फ़िरोज़ ख़ान को आयुर्वेद में भेजने की तैयारी?

रजनीश कुमार बीबीसी संवाददाता, वाराणसी से इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट FIROZ KHAN फ़िरोज़ ख़ान बीएचयू में जॉइन करने के बाद से संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के गेट के भीतर पैर तक नहीं रख सके हैं. क्लास लेने की बात तो दूर की है. वो बनारस में ही हैं लेकिन कहां हैं ये उनके सिवा शायद ही कोई जानता हो. यूनिवर्सिटी प्रशासन कुछ कहने की स्थिति में नहीं है, न ही वो यह बता पाया है कि वो फ़िरोज़ ख़ान का मज़हब के आधार पर बहिष्कार क्यों नहीं रोक पाया है. जो छात्र विरोध कर रहे हैं उनका अब भी कहना है कि वो संकाय में फ़िरोज ख़ान को नहीं आने देंगे. इस पूरे विवाद के बीच फ़िरोज़ ख़ान ने बीएचयू के आयुर्वेद विभाग में इंटरव्यू दिया और उनका चयन भी हो गया है. संभव है कि आने वाले दिनों में फ़िरोज़ आयुर्वेद में जॉइन कर सकते हैं. चार दिसंबर को फ़िरोज़ का कला संकाय के संस्कृत विभाग में भी इंटरव्यू है. एक संकाय में जॉइन करने के बाद कहीं और इंटरव्यू देना उन पर दबाव से जोड़कर देख...

बीएचयू में संस्कृत प्रोफ़ेसर विवाद: ऐसे में फ़िरोज़ ख़ान तो मुसलमान ही नहीं होंगे

इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट FIROZ KHAN Image caption फ़िरोज़ ख़ान को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्य स्तरीय संस्कृत विद्वत सम्मान देते हुए. मशहूर अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन ने उन्नीसवीं सदी में कहा था, ''बनारस इतिहास से भी प्राचीन है, परंपरा से भी पुराना है और मिथकों से भी पहले से है. इतिहास, परंपरा और मिथ को साथ मिला दें तो बनारस और प्राचीन लगने लगता है.'' लेकिन बनारस अब नया हो चुका है. इस नए बनारस के छात्रों को किसी फ़िरोज़ ख़ान का संस्कृत पढ़ाना नहीं रास आ रहा. ये अड़े हुए हैं कि फ़िरोज़ ख़ान मुसलमान हैं और एक मुसलमान संस्कृत कैसे पढ़ा सकता है? एक मुसलमान गीता और वेद कैसे पढ़ा सकता है? फ़िरोज़ ख़ान कहते हैं. ''तीन-चार साल की उम्र में मैं पास के ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने जाया करता था. वहां की पढ़ाई मुझे ठीक नहीं लगी. मतलब मेरे मन की पढ़ाई नहीं थी. टीचर बोलते थे ये भी याद करके आना है वो भी याद करके आना है. पढ़ाई एकदम बोझ बन गई थ...