आमिर पीरज़ादा बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से इमेज स्रोत, SAJID RAINA इमेज कैप्शन, आक़िब जावीद भारत सरकार ने बीते साल जम्मू-कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा समाप्त कर दिया था. तब से ही भारत प्रशासित कश्मीर में पत्रकारिता को लेकर जोख़िम बढ़ गया है. इस सप्ताह भारत की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी(एनआईए) ने ग्रेटर कश्मीर के दफ़्तर और एएफ़पी के पत्रकार परवेज़ बुख़ारी के घर पर छापेमारी की. कुल मिलाकर एनआईए ने श्रीनगर और दिल्ली में नौ ठिकानों पर छापेमारी की जिनमें एनजीओ के दफ़्तर, शीर्ष कार्यकर्ताओं के घर शामिल हैं. एनआईए का कहना है कि ये छापे विश्वस्नीय सूचनाओं के आधार पर मारे गए थे. एनआईए का आरोप है कि ये एनजीओ और लोग विदेशों से पैसा ले रहे हैं और उसका इस्तेमाल अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में कर रहे हैं. विज्ञापन लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये छापे ऐसे समय में मारे गए हैं जब कश्मीर में पत्रकारिता और विरोध की आवाज़ें पहले से ही निशाने पर थीं. छोड़कर और ये भी पढ़ें आगे बढ़ें और ये भी पढ़ें कश्मीरी कार्यकर्ताओं और मीडिया पर एनआईए के छापे से उठे कई सवाल कश्मीर: पुलिस की लाठी और भीड़ के प...
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