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कर्नाटकः दलितों के लिए अलग नाई की दुकानों की बात कहां से आई?

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  इमरान क़ुरैशी बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए 2 दिसंबर 2020 इमेज स्रोत, SARAH MORGAN इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर ऐसे वक़्त में जब सरकार कुछ सरकारी कम्पनियों से ख़ुद को अलग करने के रास्ते खोज रही है, तब मीडिया में एक ख़बर को लेकर काफ़ी चर्चा हो रही है. ख़बर ये है कि कर्नाटक के सामाजिक कल्याण विभाग ने हेयरकटिंग यानी नाई की दुकानें खोलने का प्रस्ताव रखा है क्योंकि स्थानीय इलाक़ों में ख़ुद को ऊँची जाति का मानने वाले या दबंग समुदाय के लोग उस दुकान में बाल कटवाने नहीं जाना चाहते जहां दलित जाते हैं. दरअसल, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति क़ानून की विजिलेंस और मॉनिटरिंग कमिटी के सामने ये प्रस्ताव आया था. ख़ुद मुख्यमंत्री इस कमिटी के अध्यक्ष होते हैं. प्रस्ताव में लिखा था, "कई गाँवों में दुकानदार दलितों के बाल काटने से मना करते हैं, ऐसे में अत्याचार के केस दर्ज हो रहे हैं. इसलिए, सही रहेगा कि सभी ग्राम पंचायतों में नाई की दुकान खोली जाए जिसे स्थानीय इकाई चलाए. इसके लिए सामाजिक कल्याण विभाग ज़रूरी आर्थिक मदद मुहैय्या करा सकता है." दलित नेता और विधायक एन महेश ने बीबीसी से कहा, "इ

ओडिशा: दलित किशोरी के फूल तोड़ने से लेकर महीनों तक चले दलितों के सामाजिक बहिष्कार की कहानी

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संदीप साहू बीबीसी हिंदी के लिए भुवनेश्वर से, इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   इस पोस्ट को शेयर करें Twitter   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट HINDUSTAN TIMES Image caption सांकेतिक तस्वीर ओडिशा के ढेंकानाल ज़िले की एक घटना बताती है कि आज़ादी के 73 साल बाद भी भारत में दलित किन हालातों में रह रहे हैं. ढेंकानाल ज़िले में एक मामूली बात से शुरू हुए विवाद के बाद सवर्णों ने दलितों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया जिसकी वजह से दलितों के लिए हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं. बहिष्कार के चार महीने बाद, मीडिया में रिपोर्टें आने के बाद अब प्रशासन ने इस मामले में दख़ल दिया है और सवर्णों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है. हालांकि सवर्णों ने सामाजिक बहिष्कार के आरोपों से इनकार करते हुए इसे अपने बचाव में उठाया गया क़दम बताया है. सवर्णों का दावा है कि दलित बात-बेबात दलित उत्पीड़न क़ानून के तहत कार्रवाई की धमकी देते हैं जिसके बाद 'आपसी सहमति से' दलितों से संपर्क न रखने का फ़ैसला लिया गया था. null और ये भी पढ