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दिल्ली दंगा: पीट-पीटकर राष्ट्रगान गवाने के मामले में पुलिस ने क्या किया?

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  पीयूष नागपाल बीबीसी संवाददाता 27 फ़रवरी 2021 पाँच युवक ज़मीन पर गिरे हुए दर्द में कराह रहे हैं, हाथ जोड़े गिड़गिड़ा रहे हैं और बख़्श दिए जाने की विनती कर रहे हैं लेकिन उन्हें डंडे से पीटने वाले उन्हें गालियाँ देते हुए 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' गाने के लिए कह रहे हैं. इस घटना का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें इन युवकों को जो लोग क्रूरता से पीट रहे हैं और वे सब दिल्ली पुलिस की वर्दी में हैं. पिछले साल फ़रवरी में हुए दंगों के दौरान जिन मामलों की वजह से दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सबसे ज्यादा सवाल उठे हैं उनमें यह सबसे अहम मामला है. दिल्ली पुलिस ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि वे पुलिसकर्मी ही थे, दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा है कि उन पुलिसकर्मियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है. छोड़िए Twitter पोस्ट, 1 पोस्ट Twitter समाप्त, 1 बुरी तरह पिटाई की वजह से इस मामले में फैज़ान की मौत हो गई और चार अन्य लोग बुरी तरह से ज़ख्मी हुए लेकिन आज एक साल बाद भी इस मामले की जाँच में कोई प्रगति नहीं हुई है. छोड़कर और ये भी पढ़ें आगे बढ़ें और ये भी पढ़ें दिल्ली दंगे

दिल्ली हिंसा: पुलिस के रवैये पर बीबीसी संवाददाताओं की आंखों देखी

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26 फरवरी 2020 इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES उत्तर पूर्वी दिल्ली में बीते तीन दिनों से हिंसा की घटनाएं हो रही हैं. इलाक़े में हालात बिगड़े हुए हैं और तनाव पसरा हुआ है. कई इलाक़ों में हिंसा और आगज़नी की घटनाएं हुई हैं. जाफ़राबाद, भजनपुरा, खजूरी ख़ास इलाक़ों में झड़पें और पथराव के मामले भी सामने आए. इस सब के दौरान दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. कई इलाक़ों में लोगों ने इस बात के आरोप लगाए हैं कि जब पथराव और आगज़नी की घटनाएं हो रही थीं तो पुलिस कुछ नहीं कर रही थी. विज्ञापन बीबीसी संवाददाताओं ने कई इलाक़ों में जाकर हालात का जायज़ा लिया और कुछ जगहों पर उन्होंने भी पाया कि पुलिस निष्क्रिय रही. कई जगहों पर उपद्रवियों की भीड़ के आगे पुलिसवाले बेहद कम थे. पढ़िए, बीबीसी संवाददाताओं ने किस इलाक़े में कब क्या देखा... null और ये भी पढ़ें बारूद के ढेर पर बैठी दिख रही है दिल्ली: ग्राउंड रिपोर्ट दिल्ली हिंसा: तीन दिनों तक नफ़रत के