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भारत-पाकिस्तान तनाव पर सऊदी अरब ने क्या कहा?

  सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान अल सऊद ने भारत और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर अपनी राय प्रकट की है और कहा है कि उनका देश दोनों के बीच तनाव कम करने को लेकर प्रयास करेगा. सऊदी विदेश मंत्री ने यह बात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के सऊदी अरब के तीन दिन के दौरे के दौरान एक इंटरव्यू में कही. प्रिंस फ़ैसल ने पाकिस्तान के सरकारी मीडिया को दिये इस इंटरव्यू में कहा, "पाकिस्तान-भारत संबंधों पर, मैं सचमुच इस बात की सराहना करना चाहता हूँ कि हाल के समय में तनाव कम हुआ है और युद्धविराम हुआ. ये सही दिशा में उठाया गया एक शानदार क़दम है." स्टोरीः टीम बीबीसी आवाज़ः विशाल शुक्ला वीडियो एडिटः देबलिन रॉय ( बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप  यहां क्लिक  कर सकते हैं. आप हमें  फ़ेसबुक ,  ट्विटर ,  इंस्टाग्राम  और  यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बड़ा झटका लगा है: रघुराम राजन -आज की बड़ी ख़बरें

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  20 मार्च 2021, 11:53 IST अपडेटेड 48 मिनट पहले इमेज स्रोत, MOHD ZAKIR/HINDUSTAN TIMES VIA GETTY IMAGES भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर और मशहूर अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने अशोका विश्वविद्यालय से प्रताप भानु मेहता और अरविंद सुब्रमण्यम के इस्तीफ़े पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि "भारत में इस हफ़्ते अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बड़ा झटका लगा है." राजन ने लिखा कि "अशोका विश्वविद्यालय इस हफ़्ते तक अगले एक दशक में केंब्रिज, हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड को टक्कर देने की क्षमता रखता था. लेकिन इस हफ़्ते के कदम के बाद इसकी उम्मीद कम रह गई है." रघुराम राजन ने प्रताप भानु मेहता को देश के बेहतरीन राजनीति विज्ञानियों में से एक करार दिया. उन्होंने कहा कि मेहता सरकार के लिए कांटे की तरह हैं. उन्होंने कहा कि वो कोई आम 'कांटा' नहीं हैं क्योंकि वो अपने तर्क से बड़े अधिकारियों, सरकार और सुप्रीम कोर्ट को सीख देते हैं. विज्ञापन हरियाणा के सोनीपत में स्थित अशोका विश्वविद्यालय सुर्खियों में उस वक़्त आया जब शिक्षाविद प्रताप भानु मेहता ने यूनिवर्सिटी से इस्तीफ़ा दे दिया. छोड़कर और ये भी पढ़

पाकिस्तान: पूर्व ISI चीफ़ पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

  बीते 70 सालों से पाकिस्तान में नेताओं पर देशद्रोह या भारतीय एजेंट होने के आरोप लगते रहे हैं. कई बड़े नेता इस इल्ज़ाम से बच नहीं पाए. लेकिन देश की रक्षा की ज़िम्मेदार सबसे अहम संस्था आईएसआई के किसी प्रमुख पर भारत से सांठगांठ के आरोप लगना चौंकाने वाला है. इस पूरे मामले पर देखिए कराची से वरिष्ठ पत्रकार वुसअतुल्लाह ख़ान की टिप्पणी. वीडियो एडिटिंग: रुबाइयत बिस्वास

सोने की स्मगलिंग में भारत का दबदबा ख़त्म करने वाला पाकिस्तान का 'गोल्ड किंग'

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  इलियास अहमद चट्ठा प्रोफ़ेसर, लुम्ज यूनिवर्सिटी 12 जनवरी 2021, 11:38 IST इमेज स्रोत, SOCIAL MEDIA इमेज कैप्शन, सेठ आबिद अप्रैल 1958 में, लाहौर जाने वाले एक यात्री को कराची हवाई अड्डे पर रोका गया, तो उस यात्री के पास से तीन हज़ार एक सौ तोला सोना बरामद हुआ. जब कराची कस्टम अधिकारियों ने प्रेस हैंडआउट में बताया, कि उन्होंने दो हज़ार तोला सोना ज़ब्त किया है, तो पुलिस हिरासत में मौजूद उस यात्री ने उनकी ग़लती को सही किया और कहा कि यह दो हज़ार नहीं बल्कि तीन हज़ार एक सौ तोला सोना था. वो व्यक्ति जल्द ही जेल से रिहा हो गया और केवल पांच महीने बाद ही, वह कसूर के पास एक सीमावर्ती गांव में दिखाई दिया. वहां से उसे अमृतसर पुलिस से बचने के लिए 45 सोने की ईंटें छोड़ कर भागना पड़ा. छह साल बाद, ये व्यक्ति एक बार फिर सामने आया जब दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ़्तार करने की कोशिश की. उस समय वह चांदनी चौक में मोती बाज़ार के एक व्यापारी के साथ सोने का सौदा कर रहा था. वह व्यक्ति तो पुलिस से बचने में कामयाब रहा, लेकिन उसका एक साथी पकड़ा गया और पुलिस ने उसके पास से 44 सोने की ईंटें भी बरामद कीं. विज्ञापन सन 1977 में,