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देखा न मुसलमानों का बर्ताव ? दरअसल इस्लाम यही सबक देता है अपने मानने वालों को ।। जो देखते हैं , सुनते हैं #TV चैनलों पर वह तो नफरत के सौदागरों की करतूत है

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बड़े से बड़े शिक्षित और स्कॉलर इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मन तो सरेंडर कर जा रहे इस्लाम की असलियत जानने के बाद ।।

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Deepak Malhotra ki Zindagi mein Islam kaise Aaya ? Click kar dekhein pura video

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Islam Mazhab ko Gale Lagane wali Ek Aurat ki kahani suniye unhi ki zubani ..

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Namaz E Ghousia Ka Quran aur Hadees ki bazaye Barailvi Connection? Aise Na Jane kitne Fitna Faila rakhe hain

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Jashan E MiladunNabi SAW Sabit ho gaya ?Jashn E Miladun Nabi || Barah RabiAuwal || जश्न ए मिलादुन्नबी मनना सुन्नत या बिद्दत ? Part 2

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 Pura video Zaroor Dekhiye .... --------------------------------------------------------------------------- Agar hadees ki roshni mein ees k mutAlliq kuch maalumaat deni ho to De sakte hain  Wah bhi QurAn Aur Authentic Hadees k hawale se  Bagair Sar Pair wali Baat Nahin .....

Shariyat Kis liye hai ?

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कोरोना वाइरस, लाकडाउन और नेकियों के मौसमे बहार की आमद

✍🌹✍ डॉक्टर मुहम्मद नजीब क़ासमी  (www.najeebqasmi.com) 🌙🌙🌙 नेकियों का मौसमे बहार शुरू होने वाला है, मगर दुनिया में कोरोना वबाई मर्ज के फैलने के कारण इस वर्ष अल्लाह के घरों में प्रत्येक वर्ष की तरह नमाजियों की भीड़ भाड़ नहीं आयेगी, बल्कि प्रत्येक वर्ष तरावीह की नमाज में अल्लाह के पाक कलाम अर्थात कुरआन शरीफ सुनने और सुनाने वाले सज्जन भी अल्लाह तआला से मुआफी मांगते हुए अपने घरों में ही तरावीह की नमाज अदा करने पर मजबूर हैं। प्रत्येक मुसलमान चाहता है कि वह बरकतों वाले महीने में अपनी ईबादत की मिक़्दार बढ़ाये, इसलिए रमजानुल मुबारक में मस्जिदें विशेषकर जुमए की नमाज के लिए नमाजियों से भर जाती हैं। और यह भी कि नबी सललललाहु अलैहि व सललम के कथनानुसार रमजान के महीने में प्रत्येक मुसलमान अपनी हैसियत के अनुसार सखावत से काम लेता है, चुनांचे गरीबों और मिस्कीनों को भी इस महीने में सबसे ज्यादा याद किया जाता है। इन दिनों गरीब तबका हमारी मदद का खास मुहताज है, इसलिए इस माह में गरीबों की मदद में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें। हमें हालात से घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हमारे मौला ने हमारी शक्ति के अनुपा

पहले मुसलमानों के हाथ का पानी तक नहीं मगर अब क्या ?Corona Virus दुनिया को सीखा रहा जीने का सलीका, इस्लाम को गलत समझने वालों के लिए एक सबक भी ......

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निचे के लिंक पर क्लिक कर पढ़ें दास्तां पहले मुसलमानों के हाथ का पानी नहीं पीते थे लेकिन अब क्या ?

Jarur Janein ! Maujuda Halaat Mein 2 Jaruri Gujar E Shaat, (1)Shab E Barat k Mut'Alliq (2) Lockdown ki Pabandiyon k Mut'Alliq

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Shab E Barat Ki Haqiqat

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बीमारियों के रूहानी इलाज ! #Ruhani_Eelaz ।

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Dua E Qanoot E Najela ! Tamam Musalmanon se Gujarish hai k Har Farz Namaz ki Aakhri Rek'Aat k Rukoo k Baad Ees Dua ko Padhein,Namaz k Alawa bhi Ees Dua k wird karte rahein , InshaAllah , Allah Ta'Aala Halaat Zaroor Badlenge ...

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#Isalam ! जब अमेरिका जैसा पढ़ा लिखा देश का पूर्व गृह सचिव ही इस्लाम धर्म अपना रहा तो .......

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मोहर्रम के महीने में ग़म और मातम का इतिहास

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10 सितंबर 2019 इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES Image caption तुर्की में एक शिया लड़की अशुरा का मातम मनाती हुई. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार साल का पहला महीना मोहर्रम होता है. इसे 'ग़म का महीना' भी माना जाता है. 12वीं शताब्दी में ग़ुलाम वंश के पहले शासक क़ुतुबुद्दीन ऐबक के समय से ही दिल्ली में इस मौक़े पर ताज़िये (मोहर्रम का जुलूस) निकाले जाते रहे हैं. उनके बाद जिस भी सुल्तान ने भारत में राज किया, उन्होंने 'ताज़िये की परंपरा' को चलने दिया. हालांकि वो मुख्य रूप से सुन्नी थे, शिया नहीं थे. पैग़ंबर-ए-इस्‍लाम हज़रत मोहम्‍मद के नाती हज़रत इमाम हुसैन को इसी मोहर्रम के महीने में कर्बला की जंग (680 ईसवी) में परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था. कर्बला की जंग हज़रत इमाम हुसैन और बादशाह यज़ीद की सेना के बीच हुई थी. null आपको ये भी रोचक लगेगा कश्मीर में हिंदू राज और ग़ज़नी की अपमानजनक हार की कहानी कश्मीर का सुल्तान जिसे बिहार मे

इस्लाम वो पौधा है काटो तो हरा होगा , क़ुरआन और मस्जिदों पर पाबंदी की बात करने वाले सख्स ने इस्लाम को गले लगा लिया ।

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مفکر اسلام جناب حضرت مولانا سید ابوالحسن علی ندوی رحمۃُ اللہ علیہ سابق ناظم دارالعلوم ندوۃ العلماء لکھنؤ کی شاہ فیصل سے* *ملاقات اور عجیب نصیحت* *

*مفکر اسلام جناب حضرت مولانا سید ابوالحسن علی ندوی رحمۃُ اللہ علیہ سابق ناظم دارالعلوم ندوۃ العلماء لکھنؤ کی شاہ فیصل سے* *ملاقات اور عجیب نصیحت* *مفکر اسلام حضرت مولانا سید ابوالحسن علی ندوی علیہ الرحمہ شاہ فیصل سے ملاقات کیلئے جب ان کے محل تشریف لے گئے، تو محل کی خوبصورتی، اس کی سجاوٹ اور اس کی آرائش و زیبائش دیکھ کر شاہ فیصل سے یوں گویا ہوئے:* *میں سوچ رہا ہوں اور مجھے یاد آرہا ہے کہ ہمارے ہندوستان میں بھی ایک بادشاہ گذرا ہے، اس کی سلطنت آج کے پورے ہندوستان اور پاکستان پر نہیں بلکہ نیپال، سری لنکا اور افغانستان تک پھیلی ہوئی تھی، اس نے 52 سال اتنی بڑی سلطنت پر حکومت کی، مگر اقتدار کے 52 سالوں میں سے 20 سال گھوڑے کی پیٹھ پر گذارے، اس کے دور میں مسلمان آزاد تھے، خوشحال تھے، ان کیلئے ہر قسم کی آسانیاں تھیں لیکن بادشاہ کا حال یہ تھا کہ وہ پیوند لگے کپڑے پہنتا تھا، قرآن مجید کی کتابت کر کے اور ٹوپیاں سی کر اپنا خرچ چلاتا تھا، خزانے کو ﷲ کی اور اس کی مخلوق کی امانت سمجھتا تھا، وہ خود روکھی سوکھی کھاتا، مگر دوسروں کیلئے لنگر چلاتاتھا، وہ خود تنگ دست تھا مگر دوسروں کیلئے موتی لٹاتا تھا،

पढ़ें इस्लाम के प्रति स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य जी की जुबानी :

18 Next Page ‎ Indian Muslims 1 hr मैंने कर्इ साल पहले दैनिक जागरण मे श्री बलराज मधोक का लेख ‘दंगे क्यों होते हैं ?’’ पढ़ा था। इस लेख में हिन्दू-मुस्लिम दंगा होने का कारण कुरआन मजीद में काफिरों से लड़ने के लिए अल्लाह के फरमान बताए गए थे। लेख मे कुरआन मजीद की वे आयते भी दी गर्इ थी। इसके बाद दिल्ली से प्रकाशित एक पैम्फलेट (पर्चा) ‘कुरआन की चौबीस आयतें, जो अन्य धर्मावलम्बियों से झगड़ा करने का आदेश देती हैं’ किसी व्यक्ति ने मुझे दिया। इसे पढ़ने के बाद मेरे मन में जिज्ञासा हुर्इ कि मैं कुरआन पढूं। इस्लामी पुस्तकों की दुकान से कुरआन का हिन्दी अनुवाद मुझे मिला। कुरआन मजीद के इस हिन्दी अनुवाद मे वे सभी आयतें मिली, जो पैम्फलेट (पर्चे) मे लिखी थी। इससे मेरे मन में यह गलत धारणा बनी कि इतिहास में हिन्दू राजाओं व मुस्लिम बादशाहों के बीच जंग में हुर्इ मार-काट तथा आज के दंगों और आतंकवाद का कारण इस्लाम हैं। दिमाग भ्रमित हो चुका था, इसलिए हर आतंकवादी घटना मुझे इस्लाम से जुड़ती दिखार्इ देने लगी। इस्लाम, इतिहास और आज की घटनाओं को जोड़त