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Kamlesh_Tiwari हत्या के बाद खेले जा रहे सियासी खेल को बेनकाब करती एक रिपोर्ट !

कमलेश तिवारी हत्या की जांच को जान बूझ कर भटकाने की कोशिश ? पुलिस के दावे में कितनी सच्चाई? वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं, "जिस तरह से डीजीपी ने इस मामले को सुलझाने का दावा करते हुए इसे ख़त्म करने की कोशिश की है, उससे लगता है कि कुछ ज़्यादा ही जल्दबाज़ी दिखाई जा रही है. उनके बयान से साफ़ पता चलता है कि उसे एक ख़ास दिशा में मोड़ने की कोशिश हो रही है जबकि परिजनों के आरोपों से साफ़ तौर पर पता चलता है कि इसके पीछे आपसी रंज़िश और ज़मीनी विवाद से इनकार नहीं किया जा सकता." सुभाष मिश्र कहते हैं, "जिन लोगों ने एक सँकरी जगह पर जाकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी, उसे पुलिस ढूंढ नहीं पा रही है जबकि उसके पास सीसीटीवी फुटेज हैं, नौकर भी पहचानता है, दूसरे अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं. लेकिन एक ही दिशा में पुलिस अपनी तफ़्तीश को केंद्रित रखे है और वहीं से उसे ख़त्म भी करना चाह रही है."

कमलेश तिवारी हत्याकांड: पुलिस के दावे में कितनी सच्चाई? समीरात्मज मिश्र लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट KAMLESH TIWARI FB लखनऊ में शुक्रवार को हिन्दू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या को यूपी पुलिस चार साल पहले उनके एक बयान से जोड़कर देख रही है तो परिवार वालों ने एक स्थानीय बीजेपी नेता पर आरोप लगाते हुए सरकार और प्रशासन को भी संदेह के घेरे में लिया है. वहीं पुलिस के दावों पर कई तरह के सवाल भी उठाए जा रहे हैं. शनिवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह पत्रकारों के सामने आए और जानकारी दी कि पुलिस ने इस मामले का लगभग पर्दाफ़ाश कर लिया है. उन्होंने बताया कि गुजरात एटीएस ने तीन लोगों को गुजरात के सूरत से और दो लोगों को यूपी पुलिस ने बिजनौर से हिरासत में लिया है. ओपी सिंह का कहना था, "हत्या के पीछे कमलेश तिवारी का साल 2015 में दिया गया एक बयान था. पुलिस ने गुजरात से जिन लोगों को हिरासत में लिया है, उनमें मौलाना मोहसिन...