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पाकिस्तानी एनएसए के दावे पर भारत ने कहा, अपनी नसीहतें अपनी सरकार तक रखें - आज की बड़ी ख़बरें

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  15 अक्टूबर 2020, इमेज स्रोत, REUTERS/GETTY भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसुफ़ के उस दावे पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ नए सिरे से बातचीत की इच्छा ज़ाहिर की थी. छोड़िए Twitter पोस्ट, 1 पोस्ट Twitter समाप्त, 1 मोईद युसुफ़ ने समाचार वेबसाइट द वायर के लिए वरिष्ठ पत्रकार को करन थापर को दिए इंटरव्यू में ये दावा किया था. हाँलाकि इस बारे में उन्होंने कोई और जानकारी देने से इनकार कर दिया था. भारतीय मीडिया में इस इंटरव्यू और युसुफ़ के दावों को लेकर काफ़ी चर्चा थी. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार शाम को मीडिया से बातचीत में पाकिस्तानी एनएसए के इस दावे का खंडन किया. विज्ञापन इमेज स्रोत, MOEED YUSUF/ TWITTER उन्होंने कहा, "हमने भारतीय मीडिया में पाकिस्तानी एनएसए का इंटरव्यू और भारत के आंतरिक मामलों पर उनकी टिप्पणियां देखीं. हमेशा की तरह पाकिस्तान इस बार भी अपनी घरेलू असफलताओं को छिपाने के लिए भारत को जबरन सुर्खियों में घसीटने की कोशिश कर रहा है." उन्होंने कहा,

पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के बारे में भारत का दावा कितना सही?

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रियलिटी चेक टीम बीबीसी न्यूज़ 12 दिसंबर 2019 इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES Image caption पाकिस्तान के कराची में दिवाली का उत्सव मनाती महिला क्या पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश में ग़ैर-मुसलमान आबादी यानी अल्पसंख्यकों के बारे में भारत सरकार का दावा सही है? भारत की संसद ने अपने तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए ग़ैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों को नागरिकता प्रदान करने वाला एक विवादास्पद विधेयक पारित किया है. इसके तहत भारत में अवैध रूप से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अगर यह साबित कर सकते हैं कि पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से आए हैं तो वे नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. विज्ञापन भारत सरकार का तर्क है कि इन तीन देशों में अल्पसंख्यकों की संख्या में लगातार कमी आ रही है और वे मज़हब के आधार पर उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं. संसद में इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए इसकी