भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: गिरफ़्तारी के एक साल बाद ना तो जमानत और ना ही सुनवाई पृथ्वीराज बीबीसी तेलुगू के लिए 9 घंटे पहले इस पोस्ट को शेयर करें Facebook इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp इस पोस्ट को शेयर करें Messenger साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट FACEBOOK/BHASKER KOORAPATI "पुणे के नज़दीक भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा में माओवादी शामिल थे. जांच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश का भी पता चला. भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में गिरफ्तार कुछ लोग प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रच रहे थे." पुलिस का दावा कुछ ऐसा ही है. भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में रिवॉल्यूशनरी राइटर्स एसोसिएशन के संरक्षक वरवर राव सहित नौ कार्यकर्ता साल भर से जेल में हैं. इनके ज़मानत की याचिका अलग अलग अदालतों में कई बार ख़ारिज हो चुकी हैं. कुछ मामलों में सुनवाई और फ़ैसले स्थगित किए जा रहे हैं. इन मामलों में सुनवाई का स्थगित होना अब एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है. इन कार्यकर्ताओं के परिजन सवाल पूछ रहे हैं कि ज़मानत और सही ढंग की सुनवाई के बिना इन्हें कब तक जेल में...