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दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारियों को खाना बांटने वाले जुनेद के परिवार के साथ पुलिस के दुर्व्यवहार की घटना के बाद मानवाधिकार संगठनों और वकीलों ने मोर्चा संभाल लिया है।

   दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारियों को खाना बांटने वाले जुनेद के परिवार के साथ पुलिस के दुर्व्यवहार की घटना के बाद मानवाधिकार संगठनों और वकीलों ने मोर्चा संभाल लिया है। इसी कड़ी में कल APCR (एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स) गाजियाबाद की टीम ने जुनेद के घर पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की थी और उन्हें हरसंभव कानूनी और सामाजिक मदद का पूरा भरोसा दिलाया था। ​मामले की गंभीरता को देखते हुए आज APCR की टीम ने मसूरी थाने के SHO हरेन्द्र मलिक और जुनेद के वालिद के बीच इस पूरे प्रकरण को लेकर लंबी और विस्तृत बातचीत कराई। इस दौरान टीम ने पुलिस अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी कि इस तरह की दमनकारी और अलोकतांत्रिक कार्रवाई का कड़ा विरोध किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर अदालतों में अधिकारियों को भी व्यक्तिगत रूप से पार्टी बनाया जाएगा। ​APCR के नदीम खान द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस पूरी कार्रवाई के दौरान एडवोकेट नदीम अख्तर एंड एसोसिएट्स के साथ मुजीबुर्रहमान, अफसर चौधरी, मोहसिन चौधरी और गुलफाम सिद्दीकी जैसे जाने-माने एडवोकेट साथी भी पूरी मुस्तैदी के साथ मौजूद...

बरतानवी राज से आज़ादी की जद्दोजहद के दौरान हमारे क़ायदीन मुल्क के बारे में एक अज़ीम त'सौयुर रखते थे( बिग इमेजिंग )ये जद्दोजेहद ( struggle) सिर्फ अंग्रेजी सामराज़ से मुल्क को आज़ाद करने के लिए ही नहीं बल्कि....

  हमारा मुल्क हिंदुस्तान दुनिया का एक बड़ा मुल्क है ,आबादी के लिहाज से सारी दुनिया में दूसरा सबसे जयादा आबादी रखने  वाला मुल्क है । हिंदुस्तान की शानदार त्वारीख(इतिहास)है चाहे कदीम दौर हो या अहदे वस्ता हो ,हिंदुस्तान की  त्वारीख (इतिहास)मालामाल है । जो अपने आवाम में रौशन मुस्तकबिल  ( ब्राइट फ्यूचर ) की तरफ बढ़ने का जज्बा जगाती है । बरतानवी राज से आज़ादी की जद्दोजहद के दौरान हमारे क़ायदीन  मुल्क के बारे में एक अज़ीम त'सौयुर  रखते थे( बिग इमेजिंग )ये जद्दोजेहद ( struggle) सिर्फ अंग्रेजी सामराज़ से मुल्क को आज़ाद करने के लिए ही नहीं बल्कि वह मुल्क को एक ऐसे रास्ते पर ले जाना चाहते थे । जिससे वह बाहमी मुफाहेमत और मसावात पर आधारित समाजी ढाँचे और मजाहिब के दरमियान हम आहंगी ( सामाजिक और धार्मिक  सौहार्द )के जरिये दुनिया की दूसरी कौमों के लिए एक नमूना साबित हो । और एक ऐसा मुल्क हो , जहाँ इन्साफ का दौर दौरा रहे ... ( मोहम्मद अब्दुल रहीम कुरैसी )उर्दू दैनिक पिन्दार दिनांक 6/5/14 पेज नंबर -से 

मुस्लिम बॉयफ्रेंड है तो भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी (लड़की की माँ )

  17.03.2026 प्रेमी के शक से परेशान MDS छात्रा ने की आत्महत्या, 6 पन्नों के सुसाइड नोट में लिखी पूरी कहानी । सुसाइड नोट में श्रद्धा वालकर की घटना का जिक्र , मृतक के दोस्त कहते थे मोहम्मद फैजुल के साथ रहने पर एक दिन फ्रीज़ में मिलेगी । स्तुति की माँ उषा ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में बताया की स्तुति पिछले कई दिनों से परेशान तो थी लेकिन इस परेशानी की वजह वो काम का ज़्यादा दबाव, सीनियर की डाँट फटकार , जिनके अंतर्गत स्तुति काम करती थी वो डॉ बंगा के व्यवहार पर सवाल उठाती थी । स्तुति की माँ का कहना है कि जिस डॉक्टर के अंतर्गत स्तुति प्रैक्टिस करती थी उन्हें वो फादर फिगर मानती थी लेकिन उनकी लूज़ टॉक उसे पसंद नहीं था । उषा सोनवाने का कहना है की उनकी बेटी ने कभी प्रेम प्रसंग के बारे में नहीं बताया ।  अगर वो कहती की उनका कोई मुस्लिम बॉयफ्रेंड है तो भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी  । stuticase ​  #justiceforstuti ​  #suicidenote ​  #breakingnews ​  #abpnews ​  #hindinews ​  #justiceformydaughter ​  #delhicrime ​  #mumbaicrime ​  #emotionalsto...

Dekhiye desh mein Danga k karan ka Pata chal gaya .....

 

इमाम और उनके हिंदू दोस्त ने लेस्टर तनाव के दौरान कैसे किया लोगों को शांत

  जेरेमी बॉल बीबीसी न्यूज़ 1 अक्टूबर 2022, 19:09 IST अपडेटेड 3 घंटे पहले इमेज कैप्शन, अजय नागला (बाएं) और इमाम अहमद यहां के हाईफील्ड्स इलाके में ही पले बढ़े हैं भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप में खेले गए क्रिकेट मैच के बाद ब्रिटेन के लेस्टर में हिंदू और मुसलमानों के बीच पैदा हुए तनाव के दौरान दो दोस्त लोगों को शांत करने में जुटे थे. इनमें से एक हिंदू है तो दूसरा मुसलमान. ये दोनों बचपन के दोस्त हैं. उस मैच के बाद लेस्टर में हिंदू और मुसलमान समुदाय के बीच बना अशांति का माहौल 17 सितंबर को चरम पर था. पुलिस लाइन्स और एक हिंदू मंदिर के बाहर इन दोनों समुदायों के लोगों ने एक दूसरे पर बोतलें फेंकीं. इसी दौरान इमाम अहमद और उनके बचपन के दोस्त अजय नागला ने तनाव को शांत करने की कोशिश की. ये दोनों इसी शहर के हाईफील्ड्स इलाके में पले बढ़े हैं. इमाम ने बताया कि वे बेलग्रेव रोड पहुंच कर वहां माहौल को शांत करने की कोशिश में जुटे थे. वे बताते हैं, "इसके बाद वहां और अधिक संख्या में मुस्लिम युवक जमा हो गए फिर माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया." छोड़कर ये भी पढ़ें आगे बढ़ें ये भी पढ़ें ब्रिटेनः बर...

इंसान अगर इंसान के काम न आये तो फिर इंसान कैसा ?

 

ज़रूर सुनें.......

 

हिंदुओं और मुसलमानों ने जब दंगा करने के लिए मिलाया था हाथ

  दिनयार पटेल इतिहासकार इमेज स्रोत, GETTY IMAGES इमेज कैप्शन, प्रिंस ऑफ वेल्स आज से ठीक 100 साल पहले ग़ुलाम भारत के बॉम्बे (अब मुंबई) में एक ऐसा दंगा हुआ, जिसे भारतीय इतिहास के सबसे अलग तरह के दंगों में से एक माना गया. इस दंगे में हिंदू और मुसलमान एक-दूसरे के ख़िलाफ़ लड़ने के बजाय एक साथ मिलकर लड़े थे. वहीं इनके विरोध में दूसरे समूह खड़े थे. इतिहासकार दिनयार पटेल आज के भारत को उस घटना से मिले सबक़ के बारे में बताते हैं. बॉम्बे का ये दंगा नवंबर 1921 में हुआ. प्रिंस ऑफ वेल्स दंगे के नाम से भी जाने जानेवाले इस दंगे को वैसे अब भुला दिया गया है. पर आज जैसे बंटे हुए वक़्त में धार्मिक असहिष्णुता और बहुसंख्यकवाद को लेकर यह दंगा देश को कई अहम सबक़ देता है. असहयोग आंदोलन के समय हुआ ये दंगा हिंसा की उन घटनाओं में आज़ादी की लड़ाई के एक हीरो, भावी ब्रिटिश सम्राट और पतनशील तुर्क सुल्तान कहीं न कहीं शामिल थे. साथ ही कई विचारधाराओं और लक्ष्यों, जैसे: स्वराज, स्वदेशी (आर्थिक आत्मनिर्भरता), बहिष्कार और पैन-इस्लामिज़्म को भी इसकी वजह बताया गया. विज्ञापन ब्रिटेन के प्रिंस ऑफ वेल्स (एडवर्ड आठवें) नवंबर...