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कफ़ील ख़ान प्रियंका गांधी के सुरक्षा के भरोसे पर पहुंचे राजस्थान - प्रेस रिव्यू
इमेज कॉपीरइटHIMANSHU VYAS/HINDUSTAN TIMES VIA GETTY IMAGES
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले पर मंगलवार को जेल रिहा गए डॉ. कफ़ील ख़ान, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की ओर से सुरक्षा का भरोसा दिए जाने के बाद राजस्थान पहुंच गए हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार की एक ख़बर के मुताबिक कफ़ील ख़ान और उनके परिवार वालों को आशंका थी कि योगी आदित्यनाथ की सरकार उन पर कोई अन्य मामला दर्ज कर गिरफ़्तार कर सकती थी.
अख़बार की ख़बर के मुताबिक कफ़ील ख़ान ने इस बाबत जयपुर में एक प्रेंस कांफ्रेंस कर लोगों को राजस्थान में आने की जानकारी दी.
उन्होंने कहा, "प्रियंका जी हमें राजस्थान में पूरी सुरक्षा का भरोसा दिया है. उन्होंने मेरी मां और मेरी पत्नी से बात की. उन्होंने भी कहा कि यूपी सरकार मुझे किसी दूसरे मामले में फंसा सकती है. राजस्थान में हमलोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं."
कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बाल रोग चिकित्सक कफ़ील ख़ान पिछले आठ महीनों से जेल में बंद थे, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उनपर एनएसए का मामला नहीं बनता है, इसके बाद उनकी रिहाई हो सकी.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता संशोधन क़ानून पर बोलने के बाद उन्हें 29 जनवरी को गिरफ़्तार किया गया था.
कफ़ील ख़ान ने जयपुर में यह भी कहा है कि वे गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अपने निलंबन को हटाने की अपील उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है और ज़रूरत पड़ने पर वे इसके लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं.
इमेज कॉपीरइटEPAभारत-चीन सीमा विवादः चीन ने मॉस्को में भारत से बातचीत की पेशकश की
पूर्वी-लद्दाख में जारी सैन्य तनाव के बीच चीन के रक्षा मंत्री वेई फ़ेंघे ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत का समय माँगा है.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेता इस समय शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के लिए मॉस्को में हैं और चीनी रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को बैठक करने की पेशकश की है.
चीन की ओर से भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ से बैठक करने का अनुरोध ऐसे समय में आया है, जब भारतीय और चीनी सैनिक पूर्वी-लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य गतिरोध में लगे हैं.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि गुरुवार रात को भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इस बैठक को मंज़ूरी दे दी है क्योंकि भारत को उम्मीद है कि बातचीत के ज़रिये ही वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बनी तनावपूर्ण स्थिति को सामान्य किया जा सकता है.
मॉस्को में मौजूद भारतीय और चीनी दूतावास ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देश शुक्रवार को अपने रक्षा मंत्रियों की एक औपचारिक बैठक के लिए आपसी संपर्क में हैं.
इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के सवाल पर कहा था कि दोनों देशों के बीच तनाव बातचीत से ही हल हो सकता है और उन्हें इस बात पर पूरा विश्वास है.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि एस जयशंकर जिन्होंने गुरुवार को जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया, वे शुक्रवार को ब्रिक्स की एक बैठक में भी शिरकत करने वाले हैं. इसके बाद जयशंकर मॉस्को की यात्रा पर होंगे जहाँ 9 सितंबर को उन्हें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में शामिल होना है. बताया गया है कि इन दोनों ही बैठकों में चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी मौजूद होंगे.
इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGESचुशूल सेक्टर में चीन ने बढ़ाई सेना की मौजूदगी, भारतीय आर्मी चीफ़ का दौरा
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भी पूर्वी-लद्दाख के चुशूल सेक्टर में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात किये हैं, यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की ओर भी काफ़ी संख्या में सेना जमा हो गई है.
इससे पहले, पिछले सप्ताह के अंत तक भारत ने थाकुंग से लेकर रेकिन ला तक हथियारबंद सैनिकों की तैनाती कर दी थी ताकि चीन की ओर से अगर कोई कार्रवाई हो, तो स्थिति को संभाला जा सके.
अख़बार ने एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के हवाले से लिखा है कि "पूर्वी-लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति वाक़ई तनावपूर्ण है. दोनों ओर से काफ़ी सेना तैनात की जा चुकी है."
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ऐसी स्थिति में जब सीमा पर हज़ारों सैनिक, टैंक और बख्तरबंद वाहन एक-दूसरे की ओर निशाना लिये खड़े हैं, गुरुवार को भारतीय आर्मी चीफ़ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने चुशूल सेक्टर का दौरा किया.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, वहाँ आर्मी चीफ़ नरवणे ने नॉर्दन कमान की तैयारियों का जायज़ा लिया.
उनसे पहले, बुधवार को भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने पूर्वी कमान के सीमावर्ती हवाई ठिकानों का जायज़ा लिया था.
इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGESशिक्षण संस्थानों के ज़रिये चीन को 'चुनौती'
द टेलीग्राफ़ अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने उन सभी समझौतों का विवरण माँगा है, जिनपर भारतीय विश्वविद्यालयों ने विदेशी संस्थानों के साथ हस्ताक्षर किये हैं.
कुछ प्राध्यापकों और सरकारी अधिकारियों के मुताबिक़ इसका उद्देश्य यह जाँचना है कि चीनी विश्वविद्यालयों के साथ भारतीय संस्थान किस तरह का शैक्षणिक सहयोग कर रहे हैं.
अख़बार ने जेएनयू से जुड़े ए के मोहपात्रा (एबीवीपी के पूर्व सदस्य और वामपंथियों के तीखे आलोचक) से बातचीत के आधार पर लिखा है, "चीन अपने व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए अपने विश्वविद्यालयों का इस्तेमाल कर, भारतीय संस्थानों में अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है."
केंद्र के निर्देश पर, यूजीसी ने गुरुवार को सभी विश्वविद्यालयों से 15 सितंबर तक यह बताने को कहा है कि उन्होंने विदेशी संस्थानों के साथ किन-किन समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये हैं.
हाल ही में, शिक्षा मंत्री ने कई विश्वविद्यालयों से इस बात की जानकारी माँगी थी कि उनके यहाँ कितने चीनी शिक्षा केंद्र हैं. इन केंद्रों को चीन से फंड मिलता है और चीनी भाषा और संस्कृति के प्रचार के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है.
बहरहाल, यूजीसी का ताज़ा नोटिस ऐसे समय में आया है, जब भारत सरकार ने चीनी मोबाइल ऐप बैन करने का निर्णय लिया है और चीनी भाषा को स्कूली बच्चों के विदेशी भाषा के पाठ्यक्रम से निकाल दिया है.
इमेज कॉपीरइटAFPलोन खाते फ़िलहाल एनपीए घोषित ना किये जायें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों से कहा है कि वो अगले आदेश तक लोन खातों को एनपीए यानी नॉन परफ़ॉर्मिंग एसेट घोषित ना करें.
द हिन्दू अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को निर्देश दिया कि जिन बैंक खातों को 31 अगस्त तक एनपीए घोषित नहीं किया गया, उन्हें इस मामले की सुनवाई पूरी होने तक एनपीए घोषित नहीं किया जाएगा.
मोरेटोरियम पीरियड के दौरान ब्याज पर ब्याज लगाये जाने के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह निर्देश दिया. इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी.
सुप्रीम कोर्ट में इंडियन बैंक एसोसिएशन की ओर से हरीश साल्वे ने कहा कि बैंक समाधान लेकर आ सकता है. आम लोन के लेनदार और कॉरपोरेट अलग बातें हैं और दोनों के केस को अलग तरीक़े से देखा जा रहा है.
इस दौरान जस्टिस अशोक भूषण ने सवाल किया कि जो लोग कोविड काल से पहले के डिफ़ॉल्टर हैं, उन्हें कोविड स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा? तब हरीश साल्वे ने कहा कि जो 2019 से डिफ़ॉल्टर है, उन्हें अलग स्कीम में लाभ मिलेगा, कोविड स्कीम में नहीं.
सुप्रीम कोर्ट में साल्वे ने यह दलील भी दी कि एनपीए के डिफ़ॉल्ट पीरियड में 90 दिन का पीरियड काउंट नहीं होगा, बल्कि मोरेटोरियम अवधि पूरा होने के बाद 90 दिन की गिनती शुरू होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें लोन लेने वालों को प्रोटेक्ट करना होगा. अदालत ने बैंक और सॉलिसिटर जनरल के बयान को रेकॉर्ड पर लिया और कहा कि 31 अगस्त तक जो बैंक लोन अकाउंट एनपीए नहीं हुआ, वो अगले आदेश तक एनपीए नहीं होगा.
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#Corona के खिलाफ इस जंग में कांग्रेस की इस 72 वर्षीय नानी का योगदान याद रखेगी दुनिया ।
कांग्रेस कार्यकर्ता श्रीमती चमन रावत 72 वर्ष की उम्र में भी अपने हाथों से मास्क बनाकर इलाहाबाद में जरूरतमंदों में बाँट रही हैं।— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) April 19, 2020
इस महामारी में गरीबों की सेवा ही सच्चा मानव धर्म है। जनसेवा व राहत कार्यों में लगे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर मुझे गर्व है।#कांग्रेस_के_सिपाही pic.twitter.com/2aFAWmKMUI
आख़िर हर बार हर विपत्ति गरीबों और मजदूरों पर ही क्यों टूटती है? स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम क्यों नहीं किया गया? लॉकडाउन के दौरान रेलवे टिकटों की बुकिंग क्यों जारी थी? #Priyanka_Gandhi_Vadra
आख़िर हर बार हर विपत्ति गरीबों और मजदूरों पर ही क्यों टूटती है? उनकी स्थिति को ध्यान में रखकर फैसले क्यों नहीं लिए जाते? उन्हें भगवान भरोसे क्यों छोड़ दिया जाता है? लॉकडाउन के दौरान रेलवे टिकटों की बुकिंग क्यों जारी थी? स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम क्यों नहीं किया गया? उनके पैसे..1/2
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प्रियंका के साथ सेल्फी: सुरक्षा में चूक का मामला
इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGESप्रियंका गांधी के साथ सेल्फी
दिल्ली में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के आवास में सुरक्षा में चूक का एक बड़ा मामला सामने आया है जब एक कार में बैठे कुछ लोग सीधे उनके घर में पहुँच गए.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 26 नवंबर को एक कार में बैठे सात लोग प्रियंका गांधी के लोदी एस्टेट स्थित घर के परिसर में दाख़िल हुए, कार से उतरे और भीतर जाकर उनसे तस्वीरें खिंचवाने का आग्रह करने लगे.
बताया गया है कि कार में तीन पुरूष, तीन महिलाएँ और एक लड़की सवार थे. प्रियंका ने उनके साथ बातें कीं और तस्वीरें खिंचवाई जिसके बाद वो वापस लौट गए.
कांग्रेस महासचिव के दफ़्तर ने इसे सुरक्षा की भारी चूक का मामला बताते हुए इस घटना को केंद्रीय रिज़र्व सुरक्षा बल सीआरपीएफ़ के सामने उठाया है.
ये मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटा दी गई है और उन्हें जेड-प्लस सुरक्षा दी गई है जिसकी ज़िम्मेदारी सीआरपीएफ़ पर होती है.
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