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भारत को वैक्सीन के लिए अभी करना होगा इंतज़ार

  इमेज स्रोत, PA MEDIA भारत में कोविड-19 वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति के लिए मिले तीन आवेदनों पर विचार कर रही विशेषज्ञों की समिति ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया और भारत बायोटेक से और डेटा मांगा है. समिति ने कंपनियों से कहा है कि वो अभी चल रहे अपने क्लीनिकल ट्रायल्स का लेट-स्टेज सेफ्टी और प्रभाव से जुड़ा अतिरिक्त डेटा भेजे. वहीं अमरीकी की फार्मा कंपनी फाइज़र ने अपना डेटा पेश करने के लिए और वक़्त मांगा है. सूत्रों ने  इंडियन एक्सप्रेस  अख़बार को बताया कि बुधवार को पहली बार मिली सब्जेक्ट एक्सपर्स कमिटी (एसईसी) ने अगली बैठक तक विस्तृत जवाब मांगे हैं. अगली बैठक की तारीख़ अभी तय नहीं की गई है. एसईसी ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया को सलाह देगी जिसके आधार पर वो वैक्सीन को लेकर कोई अंतिम निर्णय लेगा. इस पूरी प्रक्रिया में कुछ हफ़्तों का वक़्त लगेगा. एसईसी ने पुणे स्थित जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की ओर से विकसित की गई वैक्सीन को भी कुछ शर्तों के साथ पहले और दूसरे चरण के ट्रायल करने की मंज़ूरी दे दी है. https://www.bbc.com/hindi/india-55254636

रूस का दावा, कोविड मरीज़ों पर स्पुतनिक वी 92% तक कारगर

  रूस ने दावा किया है कि अंतरिम परीक्षण से जो परिणाम सामने आए हैं उनके अनुसार स्पुतनिक वी वैक्सीन कोरोना संक्रमण से लोगों की रक्षा करने में 92 फ़ीसद तक प्रभावी है. फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस  की ख़बर के मुताबिक़, रूस के सॉवरेन हेल्थ फ़ंड ने बुधवार को यह जानकारी दी. स्पुतनिक वी की मार्केटिंग करने वाली कंपनी रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड ने कहा कि अंतरिम नतीजे 16 हज़ार लोगों पर ट्रायल के डाटा पर आधारित है जिन्हें दो डोज़ वाली वैक्सीन के दो शॉट दिए गए. ट्रायल में शामिल 20 प्रतिभागियों में कोविड-19 के लक्षण आने के बाद ट्रायल का आकलन किया गया. रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड ने बयान जारी करके कहा है कि ट्रायल और छह महीने के लिए जारी रहेगा और उसके बाद जो डाटा सामने आएंगे उन्हें रिव्यू के बाद प्रकाशित किया जाएगा. ( बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप  यहां क्लिक  कर सकते हैं. आप हमें  फ़ेसबुक ,  ट्विटर ,  इंस्टाग्राम  और  यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

रूस ने कोरोना वैक्सीन पर शक करने वालों को दिया जवाब, कहा दो हफ़्ते में आएगी पहली खेप

  इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   इस पोस्ट को शेयर करें Twitter   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES रूस ने कोरोना के अपने टीके को लेकर उठी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को ख़ारिज करते हुए इसे 'बिल्कुल बेबुनियाद' बताया है. रूस ने मंगलवार को दावा किया था कि उसने अपने यहाँ एक टीका बना लिया है जिसका इंसानों पर लगभग दो महीने परीक्षण किया गया और फिर इसे मंज़ूरी दे दी गई. लेकिन जानकारों ने रूस के इतनी तेज़ी से टीका बना लेने के दावे पर संदेह जताया. जर्मनी, फ़्रांस, स्पेन और अमरीका में वैज्ञानिकों ने इसे लेकर सतर्क रहने के लिए कहा. इसके बाद रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने बुधवार को रूसी समाचार एजेंसी इंटरफ़ैक्स से कहा, "ऐसा लगता है जैसे हमारे विदेशी साथियों को रूसी दवा के प्रतियोगिता में आगे रहने के फ़ायदे का अंदाज़ा हो गया है और वो ऐसी बातें कर रहे हैं जो कि बिल्कुल ही बेबुनियाद हैं". रूसी मंत्री ने कहा कि इस टीके की पहली खेप अगले दो हफ़्तों में आ जाएगी और पहले ये मुख्य तौर पर डॉक्टरों को दिया जाए...

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कोरोना वायरस वैक्सीन: ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी को मिली बड़ी कामयाबी

इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES अमरीका और ब्रिटेन के कुछ शोधकर्ताओं ने समाचार एजेंसी  रॉयटर्स  से बताया है कि 'ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी में कोरोना वायरस की जिस वैक्सीन पर काम चल रहा है, उसके शुरुआती निष्कर्ष आशाजनक हैं. 'शोधकर्ताओं ने छह बंदरों के एक समूह पर इस वैक्सीन को आज़माया और पाया कि ये काम कर रही है. बताया गया है कि 'अब इस वैक्सीन का ट्रायल इंसानों पर चल रहा है. साथ ही कुछ अन्य वैज्ञानिकों से आने वाले दिनों में इस वैक्सीन का रिव्यू करवाया जाएगा.'ब्रिटेन के दवा निर्माता AZN.L ने पिछले महीने घोषणा की थी कि उसने ऑक्सफ़र्ड वैक्सीन ग्रुप और जेनर इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर कोरोना वायरस के टीके पर काम शुरू किया है. बंदरों पर ट्रायल शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 'छह बंदरों को कोरोना वायरस की भारी डोज़ देने से पहले, उन्हें यह टीका लगाया गया था. हमने पाया कि कुछ बंदरों के शरीर में इस टीके से 14 दिनों में...