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पाकिस्तान और तुर्की की दोस्ती से भारत की मुश्किलें बढ़ीं- प्रेस रिव्यू

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  4 मार्च 2021 इमेज स्रोत, GETTY IMAGES अब तक पाकिस्तान और चीन की दोस्ती भारत के लिए चुनौती थी अब पाकिस्तान और तुर्की की जुगलबंदी भी भारत को परेशान कर रही है. इकनॉमिक टाइम्स  में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में तुर्की और पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने के फ़ैसले से उन अटकलों को बल मिला है कि भूमध्यसागर और दक्षिण एशिया में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. तुर्की का कहना है कि उसका लक्ष्य युद्धग्रस्त मुल्क अफ़ग़ानिस्तान में आर्थिक प्रगति को लेकर काम करना है. पाकिस्तान और तुर्की दोनों मिलकर ईरान से होते हुए रेल का विस्तार कर रहे हैं. सऊदी गज़ट  में तीन दिन पहले एक लेख छपा था, जिसमें कहा गया है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन दक्षिण एशिया में पाकिस्तान से रणनीतिक गठबंधन को और मज़बूत करना चाहते हैं. कहा जा रहा है कि अर्दोआन का यह रुख़ ग्रीक विश्लेषकों की भारत-ग्रीस गठबंधन को मज़ूबत करने की अपील के बाद सामने आया है. ग्रीक विश्लेषकों ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन को मात देने के लिए दोनों देशों में रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने की ज़रूरत है. ग्रीस के विश्लेषकों ने

भीमा कोरेगाँव: तीन साल बाद भी पुलिस कुछ साबित नहीं कर पाई

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  दीपाली जगताप बीबीसी मराठी संवाददाता 1 जनवरी 2021 उस घटना के तीन साल बीत चुके हैं, जब भीमा कोरेगाँव एक जनवरी 2018 को हिंसक झड़पों का गवाह बना था. इसमें अब तक 16 सामाजिक कार्यकर्ताओं, कवियों और वकीलों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जिन लोगों को गिरफ़्तार किया है, उनमें आनंद तेलतुंबडे, मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा, कवि वरवर राव, स्टेन स्वामी, सुधा भारद्वाज, वर्नोन गोंजाल्विस समेत कई अन्य शामिल हैं. भीमा कोरेगाँव हिंसा का देश के सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर गंभीर असर पड़ा है. एक जनवरी 2018 को ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठों के बीच हुए युद्ध की 200वीं वर्षगांठ के जश्न के दौरान भीमा-कोरेगाँव में हिंसा भड़क उठी थी. हज़ारों दलित विजय स्तंभ के नज़दीक इकट्ठा हुए थे. लेकिन तनाव के बाद वहां आगज़नी और पथराव हुआ. इसमें कई गाड़ियों को नुक़सान पहुँचा और एक शख़्स की जान चली गई. छोड़कर और ये भी पढ़ें आगे बढ़ें और ये भी पढ़ें भीमा कोरेगाँव- इतिहास, वर्तमान और पुलिस की जांच भीमा कोरेगांवः आनंद तेलतुंबड़े, स्टेन स्वामी माओवादियों के इशारे पर काम करते थे - NIA सप्लीमेंट्री