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बीजेपी प्रत्याशी का वीडियो, बटन कोई भी दबाओ वोट कमल कोः प्रेस रिव्यू
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हरियाणा और महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से एक दिन पहले ईवीएम को लेकर भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
वीडियो में हरियाणा की असंध सीट से बीजेपी विधायक बक्शीश सिंह विर्क को यह कहते सुना जा सकता है कि ईवीएम में बटन कोई भी दबाएंगे वोट बीजेपी को ही जाएगा.
इस वीडियो के वायरल होने से जुड़ी ख़बरें कई अख़बारों में प्रकाशित हुई हैं. अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद चुनाव आयोग ने पूर्व प्रशासनिक अधिकारी विनोद जुत्शी को हरियाणा की असंध सीट के लिए विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया है.
चुनाव आयोग ने इनेलो सहित अन्य विपक्षी दलों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए पूर्व उपचुनाव आयुक्त जुत्शी को करनाल ज़िले की असंध विधानसभा सीट के लिए विशेष पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्त करने का फ़ैसला लिया.
बक्शीश सिंह विर्क मौजूदा विधायक हैं और हरियाणा के असंध विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी हैं.
छोड़िए ट्विटर पोस्ट @DeependerSHooda
मनोहर लाल की नज़रें बहुत तेज़ हैं। कहीं भी डालो चाहे वोट, जाएगी फ़ुल पर ही।
बटन चाहे कोई मर्ज़ी दबा लेना, जाएगा भाजपा को ही। हमने मशीन(EVM) में पुर्जा फ़िट कर रखा है- बख्शीश सिंह विर्क, वर्तमान विधायक तथा भाजपा प्रत्याशी हल्का असंध।
ये घमंड इनको ले डूबेगा।
652 लोग इस बारे में बात कर रहे हैं
पोस्ट ट्विटर समाप्त @DeependerSHooda
पाकिस्तान ने पहली बार भारत से डाक सेवा रोकी
पाकिस्तान ने पहली बार भारत के साथ पहली बार पोस्टल सेवा रोक दी है.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित समाचार के अनुसार जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों क हटाने के जवाब में पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच सालों से चली आ रही पोस्टल सेवा को रोक दिया है.
पाकिस्तान ने करीब डेढ महीने पहले भारत से कोई डाक स्वीकार की थी. डाक सेवाओं के निदेशक आर वी चौधरी ने बताया है कि ऐसा पहली बार है जब पाकिस्तान की तरफ से डाक सेवाओं को रोका गया है.
भारत में कुल 28 फ़ॉरेन पोस्ट ऑफ़िस (एफ़पीओ) हैं, जो विदेशी डाक सेवाओं का काम देखते हैं. इनमें से दिल्ली और मुंबई के एफ़पीओ पाकिस्तान से जुड़ी डाक को देखते हैं.
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अयोध्या फ़ैसले का असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगाः मुस्लिम पक्ष
अयोध्या मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद मुस्लिम पक्ष ने पहली बार अपनी बात रखी है.
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला भले ही किसी के भी पक्ष में जाए लेकिन इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा.
मुस्लिम पक्ष की तरफ से कहा गया, ''इस फ़ैसले का देश की राजनीति पर भी व्यापक असर होगा. कोर्ट का फै़सला से उन लाखों लोगों के मन पर असर पड़ेगा जो इस देश के नागरिक हैं और जो 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र घोषित होने के समय अपनाए गए संवैधानिक मूल्यों पर विश्वास करते हैं.''
देश के इस सबसे पुराने मुकदमे में मुस्लिम पक्षकारों ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में सील बंद लिफाफे में 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़' दाखिल किया.
मुस्लिम पक्षकारों की ओर से 'मोल्डिंग ऑफ़ रिलीफ़' सील बंद लिफाफे में दाखिल करने पर हिन्दू पक्षकारों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने रविवार को अपनी याचिका सार्वजनिक कर दी.
न्यूज़ सॉर्स -
https://www.bbc.com/hindi/india-50119460
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आज़मगढ़ में क्या होने वाला है?- लोकसभा चुनाव 2019
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2014 लोक सभा चुनाव प्रचार अपने शबाब पर था. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल पर पूरे देश की नज़र थी क्योंकि भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी वाराणसी से भी चुनाव लड़ रहे थे.
इस फ़ैसले की वजह से समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ने के लिए बगल के आज़मगढ़ पहुँच गए थे.
पाँच साल पहले मई महीने की तपती हुई उस दोपहर, हम सब सिर पर गमछा बांधे आज़मगढ़ में मोदी की एक रैली में उन्हें सुन रहे थे.
उन्होंने मंच से कहा था, "प्रदेश में बाप-बेटे की सरकार है और केंद्र में माँ-बेटे की सरकार है. आप बताइए आपके जीवन में दस साल में कोई बदलाव आया है क्या? आप मुझे मज़बूत सरकार दीजिए, किसानों की और देश की दिशा और दशा सुधार दूँगा".
पूरे पाँच साल बाद आज़मगढ़ के उसी मैदान से थोड़ा आगे, प्रधानमंत्री मोदी अपने तीन हेलीकाप्टरों के क़ाफ़िले के साथ गुरुवार को उतरे.
तापमान 43 डिग्री था और हम इस बार भी सिर पर गमछा बांधे रैली में मौजूद थे.
मोदी के लैंड करने से कोई दस मिनट पहले फूलमती नाम की महिला मिली, जिनसे धूप बर्दाश्त नहीं हो पा रही थीं और वे अपने कुनबे के साथ वापस जा रही थीं.
आज़मगढ़ का समीकरण

उन्होंने कहा, "क्या होने वाला है, ये होने वाला है कि जीत लिंहिए, अपना घरे चल दिहीनए, कांव-कांव कर के निरहुवा चल दिहीनए, और मरिहे जनता अपने में."
इसी समय प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंच से अपना भाषण दे रहे थे और कह रहे थे, "इस बार तो कमल खिलाना है आज़मगढ़ में".
थोड़ी देर बार मोदी के भाषण का प्रमुख निशाना था समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का महगठबंधन जिसे उन्होंने 'महामिलावटी महगठबंधन' बताया. किसानों की दशा और दिशा से ज़्यादा समय 'पाकिस्तान को सबक़ सिखाने' और 'राष्ट्रहित की रक्षा' करने वाले बयानों में बीता.
12 मई को लोक सभा चुनावों के तहत छठे चरण का मतदान होना है और इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश की आज़मगढ़ सीट ख़ासी अहम बताई जा रही है.
हमेशा की तरह इस बार भी आज़मगढ़ के चुनावी समीकरण बेहद दिलचस्प हैं.
आज़मगढ़ में चुनाव आमतौर से जाति और धर्म की दूरबीन से परख कर होते आए हैं.
यहाँ एक तरफ़ अल्पसंख्यकों की अच्छी आबादी है तो दूसरी तरफ़ पिछड़े वर्ग की आबादी भी ख़ासी है.
'अहीर-अहीर से लड़ा दिया'

पिछली बार अगर मुलायम सिंह यादव मैदान में थे तो इस बार उनके बेटे अखिलेश महागठबंधन के उम्मीदवार हैं.
कांग्रेस पार्टी ने यहाँ इस बार अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है. इलाक़े के जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने भी अपना कैंडिडेट ढूँढा.
पार्टी ने एक स्थानीय लेकिन बेहद लोकप्रिय भोजपुरी गायक दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को मैदान में उतारा है जिनके कैम्पेन की ख़ासी चर्चा हो रही है.
शहर के बीचोंबीच अखिलेश के एक समर्थक, आनंद कीर्ति बौद्ध से बात हुई.
उन्होंने कहा, "वो क्या है, दुश्मन भोला-भाला लगता है, मगर अंदर से कसाई के समान होता है. एक तीर से तेरह निशाना इसलिए भाई-भाई को, अहीर-अहीर से लड़ा दिया".

आज़मगढ़ जिले का अपना एक प्रगतिशील इतिहास भी रहा है जिसमें शिबली नोमानी और कैफ़ी आज़मी जैसे दिग्गजों की गिनती होती है.
'नज़र लग गई'

लेकिन हर चुनाव के पहले आम आदमियों के भी मसले होते हैं, अपनी राय होती है.
शहर से दूर लेकिन संसदीय क्षेत्र के भीतर आने वाले मुबारकपुर को ही ले लीजिए जहाँ का हथकरघा उद्योग एक ज़माने में विश्व विख्यात हुआ करता था.
घर-घर पावरलूम चला करती थीं और लोगों के मुताबिक़ ख़ुशहाली थी.
मुलाक़ात जमाल अहमद से हुई जिनकी साड़ी की दुकान है और पीछे पावरलूम मशीन बंद पड़ी है.
उन्होंने कहा, "बम धमाके और आतंकवाद के फ़िज़ूल मामलों की वजह से हमारे मुबारकपुर को तो नज़र लग गई. नोटबंदी ने दोहरी मार दे डाली. अब सोच रहे हैं किसी और व्यापार की तरफ़ बढ़ें, वरना खाने के लाले पड़ने लगेंगे".
ग़ौर करने वाली बात ये भी है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में आज़मगढ़ एकमात्र ऐसी सीट थी जिस पर साल 2014 की 'मोदी लहर' का असर नहीं दिखा था.
'अखिलेश की व्यस्तता'

शायद यही वजह है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन चुनावों के बाद इस सीट पर फ़ोकस बनाए रखा है. उनके समर्थक भी सड़कों पर 'सांसद बदलो' के नारे लगाते मिल जाते हैं.
उन्हीं में से एक नंदू दहिकार ने कहा, "भाजपाई हैं और मोदी चाचा को चाहते हैं. यहाँ के जो सांसद थे (मुलायम) वो देखने भी नहीं आए. मोदी चाचा हैं तो पूरा देख रहे हैं, ग़रीबों को शौचालय दे रहे हैं, आवास दे रहे हैं. अब उनकी सरकार बने तो आज़मगढ़ के लिए और करेंगे. मोदी चाचा ज़िंदाबाद हैं और ज़िंदाबाद रहेंगे".
इलाक़े में कुछ ऐसे लोग भी मिले जिनको लगता है, "अखिलेश भैया यहाँ प्रचार के लिए समय नहीं दे सके. इससे उनके वोट कम हो सकते हैं".
हालाँकि अखिलेश यादव ख़ुद इस बात पर जवाब दे चुके हैं जब उन्होंने कहा था, "मेरे पास अस्सी सीटों में प्रचार की ज़िम्मेदारी है तो थोड़ा समय का अभाव रहता है. लेकिन मेरे प्रतिनिधि हर कोने, हर गाँव में पहुँचते हैं".
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हक़ीक़त ये भी है कि पिछले लोक सभा चुनाव की ही तरह इस बार भी अखिलेश के चाचा और 'मेंटॉर' राम गोपाल यादव ने आज़मगढ़ में डेरा डाल रखा है और उनकी मदद के लिए भतीजे और सपा सांसद धर्मेंद्र यादव भी मौजूद हैं.
अखिलेश को समर्थन देने के लिए मेरठ से साइकिल चला कर पहुँचे हैं मोहम्मद शेरू.
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उनके मुताबिक़, "उस ज़माने में नेताजी ने जो किया था, जो वादा किया था वो करके निभाया. ऐसे ही उनके बेटे हैं, कहते नहीं करते हैं. नेताजी ने जो किया, सच्चाई-कलम, वो तो हैं मुलायम. विकास का पहिया, अखिलेश भैया".
लेकिन पास ही खड़ी कुछ महिलाओं में से एक रीता राय ये सुनकर बात करने के लिए आगे बढ़ीं.
उन्होंने कहा, "मोदी इतना किए हैं जनता के लिए इसलिए उनका प्रचार है. हमको तो अभी कुछ नहीं मिला है लेकिन भरोसा है. हमारी दो लड़कियाँ हैं, एक लड़का है, पढ़ाई लिखाई में हमें कोई सुविधा नहीं है. उम्मीद लगाए हैं कि वोट देंगे तो फिर कहीं से मदद मिलेगी तो अपना कुछ कर सकेंगे."
हालाँकि पिछले पाँच साल में तीसरी दफ़ा आज़मगढ़ आने पर मुझे तो कुछ ख़ास बदलाव नहीं दिखे हैं. कुछ नए होटल खुल गए हैं, छोटे-छोटे शॉपिंग मॉल भी खुले हैं और स्थानीय लोगों के मुताबिक़ बिजली अब पहले से थोड़ी ज़्यादा आती है.

लेकिन सड़कों की हालत आज भी बदहाल है और शहर से थोड़ा बाहर ग्रामीण इलाक़े जस के तस ही दिखते हैं.
इस बात का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हैं कि इनमें से कितनी बातों के बारे में यहाँ के मतदाता गम्भीरता से सोच रहे हैं. क्योंकि कोई भी अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं.
शहर के दक्षिणी हिस्से में एक पेट्रोल पंप के सामने राजेश यादव मिले जिन्होंने इस बात को और बल दिया.
उन्होंने कहा, "कुछ तो हुआ है, जैसे चौराहे वग़ैरह तो बने हैं. मुलायम सिंह सांसद थे उनकी ही देन है. हाँ, नोटबंदी से शादी में लोग परेशान हुए, दो हज़ार का नोट निकालने के लिए लोग घंटों-घंटो लाइन में खड़े होते थे. अब पुलवामा हुआ है और उसमें भी जो सरकार ने यानी मोदी सरकार किया वो भी अच्छा है."
बीबीसी हिंदी से साभार ।
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