mAadhaar ऐप अपडेट हो गया है. इस ऐप के जरिए अपडेटेड सर्विस का इस्तेमाल करने के लिए आपको पुराने वर्जन को अनइंस्टॉल करके नया वर्जन अपने फोन में इंस्टॉल करना चाहिए. नए वर्जन में आप आधार से जुड़ी करीब 35 सर्विसेज का इस्तेमाल
आधार (Aadhaar) जारी करने वाली सरकारी संस्था UIDAI ने आधार में नाम, एड्रेस और जन्म तिथि बदलने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत अगर आपके पास कोई सही सर्टिफिकेट नहीं है तो भी आप आधार में आपनी ये जरूरी जानकारी अपडेट कर सकते हैं.
नई दिल्ली. आधार (Aadhaar) जारी करने वाली सरकारी संस्था UIDAI ने आधार में नाम, एड्रेस और जन्म तिथि बदलने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के तहत अगर आपके पास नाम, एड्रेस और जन्म तिथि बदलने के लिए कोई सही सर्टिफिकेट नहीं है तो भी आप आधार में आपनी ये जरूरी जानकारी अपडेट कर सकते हैं. इस प्रोसेस को आसान बनाने के लिए UIDAI ने आधार पर एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट तैयार किया है जिसकी जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर दी है. सरकारी संस्था ने कहा है कि बिना वैलिड डॉक्यूमेंट के अब बस इस सर्टिफिकेट के साथ आप आधार में अपनी जानकारी बदल सकेंगे.
UIDAI की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि अब आधार में किसी भी बदलाव के लिए अब आपको ग्रुप ए और ग्रुप बी गजेटेड ऑफिसर/गांव के प्रधान/अपने इलाके के एमपी (मेंबर ऑफ पार्लियमेंट)/एमएलए/एमसीडी काउंलर/तहसीलदार/सरकारी एजुकेशन संस्थान के अधिकारी/सुपरिटेंडेंट/वार्डन इत्यादि से आधार की संस्था UIDAI की ओर से जारी एक स्टैंडर्ड सर्टिफिकेट पर अपनी डिटेल्स भरकर उस पर हस्ताक्षर कराकर लाने होंगे.
आधार एनरोलमेंट- आधार एनरोलमेंट के लिए कोई भी चार्ज नहीं रखा गया है. मतलब अगर आप पहली बार आधार बनवाने के लिए एनरोल कर रहे हैं तो इसके लिए आपको कोई भी चार्ज नहीं देना होगा. यह बिल्कुल मुफ्त है.
आधार के लिए ऐसे बुक करें ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट-
- UIDAI की वेबसाइट पर जाएं जिस शहर के लिए अप्वॉइंटमेंट बुक करना चाहते हैं उस शहर को सेलेक्ट करें. अभी तक ये सुविधा कुछ शहरों के 114 सेंटर्स में उपलब्ध है जिसमें से 53 शहरों में जल्द ही ऑपरेशन शुरू होगा.
- आपको अपना मोबाइल नंबर देना होगा जिस पर ओटीपी भेजा जाएगा.
-आपको अपना आधार नंबर और नाम भरना होगा और अपनी भाषा सेलेक्ट करनी होगी.
- डेट और टाइम सेलेक्ट करने के बाद आपको अप्वॉइंटमेंट बुकिंग नंबर मिलेगा.
यहां करें शिकायत- इस बताई गई फीस के अलावा अगर कोई आपसे अवैध वसूली करने की कोशिश करे, तो इसकी आप शिकायत कर सकते हैं. ऐसे मामलों की शिकायत के लिए आप टोल फ्री नंबर 1947 पर कॉल कर सकते हैं. इसके साथ ही आप help@uidai.gov.in पर ई-मेल भी कर सकते हैं.
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में लगभग आठ करोड़ लोगों के आधार डेटा चोरी होने की ख़बर ने एक बार फिर आधार के सुरक्षित होने पर सवालिया निशान खड़े कर दिए.
आरोप लगाए गए हैं कि ये आधार डेटा सेवा मित्र नामक मोबाइल एप के ज़रिए चोरी किए गए. यह मोबाइल ऐप तेलुगू देशम पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं के लिए बनाया है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए आधार जारी करने वाली एजेंसी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने तेलंगाना पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई है.
तेलंगाना पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने यूआईडीएआई के पास अपनी जो रिपोर्ट पेश की है उसके आधार पर यूआईडीएआई के डिप्टी डायरेक्टर ने हैदराबाद में माधेपुर पुलिस के पास एफ़आईआर दर्ज़ करवाई है.
तेलंगाना पुलिस की एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर यूआईडीएआई ने मामले की जांच की अपील की है.
यूआईडीएआई की ओर से दर्ज़ शिकायत में बताया गया है, ''हमें 2 मार्च 2019 को एक शिकायत प्राप्त हुई जिसमें बताया गया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने सेवा मित्र ऐप के ज़रिए सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों, वोटर आईडी और आधार की जानकारी जुटाई और उनका ग़लत इस्तेमाल किया. जांच के दौरान हमने पाया कि ऐप के ज़रिए आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोगों के वोटर आईडी और आधार की जानकारियां इकट्ठा की गई थीं. अपने तलाशी अभियान के दौरान हमने आईटी ग्रिड्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के परिसर से चार हार्ड डिस्क बरामद की. उन हार्ड डिस्क को तेलंगाना फ़ॉरेंसिक साइंस लैब में जांच के लिए भेजा गया. जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि इन चार हार्ड डिस्क में अच्छी खासी संख्या में लोगों के आधार कार्ड की जानकारियां थीं. शिकायतकर्ता लोकेश्वर रेड्डी सहित कई लोगों की जानकारियां उन हार्ड डिस्क में मिली. हमारा मानना है कि इस तमाम डेटा को या तो केंद्रीय पहचान डेटा कोष या फिर राज्य डेटा रेजिडेंट हब से हटा दिया गया है.''
आधार नियम 2016 के अनुसार यह अनुच्छेद 38(जी) और 38(एच) के तहत डेटा चोरी का अपराध है. इसके साथ ही सूचना क़ानून 2000 की धारा 29(3) के अनुसार सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का डेटा निकालना भी अपराध है.
इसके अलावा कोई प्राइवेट कंपनी आधार का डेटा नहीं निकाल सकती. आधार नियम की धारा 65, 66(बी) और 72(ए) के अनुसार यह ग़ैरक़ानूनी है.
शिकायत
यूआईडीएआई की शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि आधार का डेटा ग़लत तरीके से निकालने के बाद उसे अमेज़न के वेब प्लेटफॉर्म में रखा गया था.
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तेलंगाना एसआईटी के प्रमुख स्टीफन रविंद्र ने बीबीसी तेलुगू को बताया, ''यह मामला हमें साइबराबाद पुलिस के ज़रिए मिला. इसका मुख्य आरोपी अशोक दकावरम अभी फ़रार है और हम उसकी तलाश कर रहे हैं. एक बार वो हमारी पकड़ में आ जाए तो हम यह पता लगाएंगे कि उन्होंने यह आधार डेटा कहां से प्राप्त किया. हम अपनी जांच जारी रखेंगे.''
स्टीफन रविंद्र ने कहा, ''उन्होने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के आधार और वोटर आईडी का डेटा निकाला. शिकायतकर्ता ने बताया था कि डेटा के आधार पर वो वोटर की राजनीतिक इच्छा को भी जांचते और उसके बाद जो लोग टीडीपी को वोट देने वालों की सूची में नहीं होते उनके नाम वोटर लिस्ट से ही हटा दिया जाता. हम इस मामले की जांच भी कर रहे हैं.''
तेलंगाना एसआईटी ने आंध्र प्रदेश के अन्य विभागों को भी इस संबंध में पत्र लिखा है और उनसे स्पष्टिकरण मांगा. स्टीफन रविंद्र ने बताया कि अभी छह विभागों की तरफ से जवाब मिलना बाकी है.
आंध्र प्रदेश के तकनीकि सलाहकार वेमुरी हरि कृष्णा ने बीबीसी को बताया कि एफ़आईआर की कॉपी अच्छे तरीके से देखने पर कई सवालों के जवाब मिल जाते हैं.
डेटा चोरी होने का जिक्र नहीं
वो कहते हैं कि यूआईडीआईए ने कहीं पर भी डेटा चोरी होने का ज़िक्र नहीं किया है.
हरि कृष्णा ने कहा, ''तेलंगाना पुलिस ने अपने अधिकारी क्षेत्र से बाहर जाते हुए 23 फ़रवरी से आईटी ग्रिड कंपनी पर ग़ैरक़ानूनी छापे मारे. इन छापों के बाद उन्होंने सिर्फ़ 2 मार्च का मामला ही रिपोर्ट किया, वो लगातार ग़ैरक़ानूनी छापे मारते रहे और इसे छिपाने के लिए उन्होंने आधार का मामला सामने रख दिया. वो मीडिया और आम जनता को गुमराह करना चाहते हैं.''
वेमुरी हरि कृष्णा ने दावा किया, ''आईटी ग्रिड के पास किसी तरह के आधार से जुड़ा डेटा नहीं था. और अगर कोई डेटा रहा भी होगा तो वह तेलुगू देशम पार्टी की सदस्यता के दौरान जुटाया गया डेटा होगा. हमने सदस्यता देते वक़्त लोगों ने उनके अलग-अलग पहचान पत्र मांगे थे.''
उन्होंने बताया कि बाद में उन्होंने सदस्यता के लिए अलग-अलग पहचान पत्रों की जगह वोटर आईडी कार्ड को ही पहचान पत्र के प्रमाण के तौर पर मानना शुरू कर दिया.
हरि कृष्णा वायएसआरसीपी पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने चुनाव आयोग में फॉर्म-7 भरा है.
फॉर्म-7 असल में एक अपीलीय पत्र होता है जिसके ज़रिए किसी व्यक्ति के कहीं जाने या फिर मृत्यु होने से उसके नाम को निर्वाचक सूची में जोड़ा या हटाया जाता है.
हरि कृष्णा कहते हैं, ''जगनमोहन रेड्डी ने नेल्लोर की एक आम सभा में खुद यह कहा कि उनकी पार्टी ने फॉर्म-7 की अपील दायर की है. तो ऐसे में यह सवाल कैसे उठता है कि हम वोटरों के नाम काट रहे हैं. जो मामला दर्ज़ हुआ है वह ग़लत है. हमने बैंक खातों से जानकारियां नहीं जुटाई हैं. अगर उनके पास इन आरोपों को साबित करने के लिए सबूत हैं तो वे पेश करें.''
कार्रवाई की मांग
हालांकि वायएसआरसीपी के विधायक गडिकोटा श्रीकांत रेड्डी ने टीडीपी के ख़िलाफ़ कदम उठाने की मांग की है.
इमेज कॉपीरइटGOOGLE PLAY STOREImage captionसेवा मित्र एप
उन्होंने कहा, ''सेवा मित्र ऐप को चलाने के लिए डेटा चोरी किया गया. यह बिलकुल ग़लत है. ना सिर्फ आधार डेटा बल्की वोटरों की रंगीन आईडी भी ली गई. कई लोगों के बैंक खातों की जानकारियां ली गईं. इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए.''
आंध्र प्रदेश के चुनाव निगरानी संयोजक वी वी राव ने इस बात पर अफ़सोस जताया कि कोई भी सरकार के इस तरह की संवेदनशील जानकारियों पर नियंत्रण नहीं रख पाती. उन्होंने कहा कि सिर्फ आधार डेटा ही नहीं सरकारी एजेंसियों से भी कई जानकारियां चोरी होने की सूचना मिलती है.
उन्होंने कहा कि यह सब प्राइवेट संस्थानों के हाथों में आम नागरिकों की निजता की जानकारी सौंप देने का ही परिणाम है.