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बांग्लादेश की भारत से बढ़ती दूरी हाल के दिनों में बांग्लादेश के अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट चीन को मिले हैं और चीन ने बांग्लादेश के माल को कई तरह के करों से छुटकारा देकर दोनों देशों के साझा व्यापार को भी बढ़ाया है. बांग्लादेश पाकिस्तान की तरह चीन के बेल्ट और रोड प्रोग्राम का भी हिस्सा है. बांग्लादेश में एक भावना ये भी है कि उसने पूर्वोत्तर भारत के कई उग्रवादी गुटों को अपने यहां पनाह न देने और उन्हें भारत के हवाले करने में जिस तरह पड़ोसी मुल्क (भारत) की मदद की, भारत उसके बदले तीस्ता और दूसरी साझा नदियों के पानी के बंटवारे तक को लेकर समझौता नहीं कर पाया है. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने बीते साल भारत के नए नागरिकता संशोधन अधिनियम को ग़ैरज़रूरी बताया था. बांग्लादेश राजनीति को क़रीब से समझने वाले बीबीसी के पूर्व संवाददाता सुबीर भौमिक कहते हैं भारत में मुसलमानों के अलावा कुछ पड़ोसी मुल्कों के दूसरे समुदायों को नागरिकता देनेवाला सीएए और भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं के बोल, जिसमें उन्होंने भारत में रह रहे ग़ैर-क़ानूनी लोगों और बांग्लादेशियों को पर्यायवाची बना दिया है, उससे बांग्लादेश में बहुत नाराज़गी है.

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भारत का ये कदम क्या बांग्लादेश से दूरियों को पाट पाएगा? 2 घंटे पहले इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   इस पोस्ट को शेयर करें Twitter   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट HINDUSTAN TIMES भारतीय विदेश सचिव हर्ष वी. श्रृंगला ने बांग्लादेश के एक दिवसीय दौरे के दौरान बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना से मुलाकात की. समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि दोनों देशों के बीच कोरोना महामारी से जंग, वैक्सीन और कोरोना के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिशों समेत अन्य मामलों पर बातचीत हुई. माना जा रहा है कि इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रिश्तों को बेहतर बनाना था. कोरोना संकट और लॉकडाउन के बाद यह श्रृंगला का पहला विदेश दौरा था. इस दौरे की वजह बांग्लादेश के चीन के साथ बढ़ती क़रीबी को भी माना जा रहा है. दरअसल, बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन, बांग्लादेश को तीस्ता नदी से जुड़े प्रोजेक्ट पर एक बिलियन डॉलर की मदद करने वाला है. null और ये भी पढ़ें बांग्लादेश: भारत

क्या पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान में चुनाव नहीं लड़ सकते अल्पसंख्यक? फ़ैक्ट चेक

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कीर्ति दूबे फ़ैक्ट चेक टीम इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES Image caption लाहौर में नागरिकता संशोधन अधिनियम को देश भर में विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह बार-बार इस अधिनियम के पक्ष में तर्क पेश कर रहे हैं. शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह ने कर्नाटक के हुबली में रैली के दौरान कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान में बुद्ध के पुतले को तोप से गोले दाग़ कर फूँक दिया गया. उन्हें (हिंदू-सिख अल्पसंख्यक) वहां (अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान) चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं दिया, स्वास्थ्य की सुविधाएं नहीं दी गई, शिक्षा की व्यवस्था उनके लिए नहीं की. जो सारे शरणार्थी थे हिंदू, सिख, जैन बौद्ध ईसाई वो भारत के अंदर शरण लेने आए.'' दरअसल अमित शाह नागरिकता संशोधन अधिनियम की वकालत में ये बता रहे थे कि कैसे अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले सिख, हिंदू शरणार्थी को उनके देश में सताया जा रहा है और उन्हें मौ