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Showing posts from August, 2014

शंकर आचार्य जी कहते हैं कि साईं बाबा मुसलमान थे ,पुलाव खाते थे ,मस्जिद में रहते थे ,गोस्त खुद भी खाते थे और दूसरों को भी खिलाते थे ,और वह न भगवानहैं और न गुरु इसलिए उनकी पूजा नहीं करना चाहिए और न उनसे मुरादें मांगना चाहिए ,न चढ़ावे चढ़ाना चाहिए । आचार्या जी ये नहीं बताते की जो उनकी पूजा कर गया वह हिन्दू नहीं रहेगा .....और न ये बताते हैं की फिर वह क्या हो जाएगा ? दूसरी तरफ साईं के पुजारी कहते हैं की साईं बाबा के मानने वाले 60 करोड़ हैं और ताक़त नहीं है जो हमें उनकी पूजा से रोक सके या उनकी मूर्तियों को हाथ लगाले । जो मामला इतना संगीन हो उसमे अपने धर्म का सबसे बड़ा ठीकेदार समझने वाले मोहन भागवत जी खामोश क्यों हैं और क्यों दम साधे देख रहे हैं कि साठ करोड़ हिन्दू राम चंद्र जी ,लक्ष्मण जी , सीता जी ,और हनुमान जी की तरफ से मुंह फेरकर ऐसे बाबा की पूजा कर रहे हैं जो सैकड़ों धर्म गुरुओं के नजदीक न भगवान हैं न गुरु बल्कि आधा मुसलमान है ? हो सकता है भागवत जी ने सनातन धर्म के अलावा इस्लाम का भी अध्यन किया हो ? अगर नहीं किया तो हम बतलाते हैं की मुसलमानों के मुफ्तियों ने हज़ारों मुसलमानों को जो कादयानी कहलाते हैं सिर्फ इसलिए इस्लाम से खारिज कर दिया कि वह आखरी पैगम्बर हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को पैगम्बर तो मानते थे लेकिन आखरी नहीं मानते थे । इतनी सी बात पर वह मुसलमान नहीं रहे । अब मोहन भागवत जी बताएं की वह साठ करोड़ जो सिर्फ साईं की पूजा करते हैं वह हिन्दू हैं ? अगर हिन्दू नहीं रहे तो वह क्या हो गए ? और उनको फिर से हिन्दू बनाने के लिए भागवत जी क्या करेंगे ?

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Hafeez Nomani मोदी हुकूमत के तीन महीने पुरे हुए तो उसका जश्न इस तरह मनाया गया के कभी की जनसंघ और आजकी भाजपा के तीनो क़ुतुब मीनार अटल जी ,आडवाणी जी ,और मुरली मनोहर जोशी को "मार्गदर्शक मंडल " का बुजुर्ग रहनुमा बना दिया गया और पार्लियामेंट्री बोर्ड से भी उनको हटा दिया गया ।जहाँ तक मुसलमानों का संबंध है उनके लिए ये खबर इसलिए भी दिलचश्पी की नहीं की वह तीनों जब तक मैदान में रहें मुसलमान उनकी निशाने पर ही रहे और अगर वह भाजपा के अहम ओहदे पर होते तब भी मुसलमान उनके लिए बोझ ही होते .................. हमारे नजदीक मसला सिर्फ एहसान फरामोशी का है जिनकी फितरत में एहसान फरामोशी होती है वह किसी एक तबका या फिरका अथवा समुदाय के लिए नहीं बल्कि सबके लिए खतरनाक खतरनाक होते हैं । कल एक मंजर ये देखा के आर एस एस चीफ मोहन भागवत ने खुद प्रेस कांफ्रेंस में आये और उन्होंने बीजेपी के उन बुजुर्ग लीडरों के संबंध में जिन अल्फाजों का इस्तेमाल किये उसने हैरत जुदा यानी अचंभित कर दिया के आज तक आर एस एस के किसी सरबराह ने बीजेपी के मामलों में इस तरह की मुदाखेलत यानी हस्तक्षेप नहीं की थी जिस तरह भागवत जी कर रह
Ved Ved 06:03  ·  Edited  ·  धार्मिक पहचान छुपा कर हम किसी से एक दो बार मिल सकते हैं। किसी को गर्ल-फ्रेंड बना तो सकते हैं। पर इस रिश्ते को उस मुकाम (शादी/सेक्स) तक नहीं पहुंचा सकते। सिर्फ इसलिए नहीं कि हिन्दू और मुस्लिम लड़को के लिंग में असमानता होती है। बल्कि इसलिए भी कि दोनों धर्मों में बच्चों की परवरिश अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पहनावा, बोलचाल, सर्किल के लोग, मित्र मंडली, दिनचर्या व अन्य संस्कृति आदि कई पहलुओं में भी भिन्नताएं होती है। जिसे लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता। अगर फिर भी मुस्लिम लड़के लंबे समय तक खुद को हिन्दू बता कर हिन्दू लड़की को फंसा कर उससे शादी करने में सफल होते हैं। तो ऐसा भी हो सकता है कि कोई अपने और अपनी पार्टी के राजनितिक लाभ के लिए ऐसे लड़के को हिन्दू बनने की गंभीर एक्टिंग का गहन प्रशिक्षण भी देता हो। संभवतः आर्थिक मदद भी। क्योंकि जो जीतने के लिए दंगा करवा सकता है। वो लव जिहाद भी करवा सकता है। बुरा उसे लगे, जो दंगा करवाता हो..... -vEd™ Like · Comment · Share 64 people  like this.

धार्मिक पहचान छुपा कर हम किसी से एक दो बार मिल सकते हैं। किसी को गर्ल-फ्रेंड बना तो सकते हैं। पर इस रिश्ते को उस मुकाम (शादी/सेक्स) तक नहीं पहुंचा सकते। सिर्फ इसलिए नहीं कि हिन्दू और मुस्लिम लड़को के लिंग में असमानता होती है। बल्कि इसलिए भी कि दोनों धर्मों में बच्चों की परवरिश अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पहनावा, बोलचाल, सर्किल के लोग, मित्र मंडली, दिनचर्या व अन्य संस्कृति आदि कई पहलुओं में भी भिन्नताएं होती है। जिसे लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता।

Ved Ved 06:03  ·  Edited  ·  धार्मिक पहचान छुपा कर हम किसी से एक दो बार मिल सकते हैं। किसी को गर्ल-फ्रेंड बना तो सकते हैं। पर इस रिश्ते को उस मुकाम (शादी/सेक्स) तक नहीं पहुंचा सकते। सिर्फ इसलिए नहीं कि हिन्दू और मुस्लिम लड़को के लिंग में असमानता होती है। बल्कि इसलिए भी कि दोनों धर्मों में बच्चों की परवरिश अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पहनावा, बोलचाल, सर्किल के लोग, मित्र मंडली, दिनचर्या व अन्य संस्कृति आदि कई पहलुओं में भी भिन्नताएं होती है। जिसे लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता। अगर फिर भी मुस्लिम लड़के लंबे समय तक खुद को हिन्दू बता कर हिन्दू लड़की को फंसा कर उससे शादी करने में सफल होते हैं। तो ऐसा भी हो सकता है कि कोई अपने और अपनी पार्टी के राजनितिक लाभ के लिए ऐसे लड़के को हिन्दू बनने की गंभीर एक्टिंग का गहन प्रशिक्षण भी देता हो। संभवतः आर्थिक मदद भी। क्योंकि जो जीतने के लिए दंगा करवा सकता है। वो लव जिहाद भी करवा सकता है। बुरा उसे लगे, जो दंगा करवाता हो..... -vEd™ Like · Comment · Share 64 people  like this.

धार्मिक पहचान छुपा कर हम किसी से एक दो बार मिल सकते हैं। किसी को गर्ल-फ्रेंड बना तो सकते हैं। पर इस रिश्ते को उस मुकाम (शादी/सेक्स) तक नहीं पहुंचा सकते। सिर्फ इसलिए नहीं कि हिन्दू और मुस्लिम लड़को के लिंग में असमानता होती है। बल्कि इसलिए भी कि दोनों धर्मों में बच्चों की परवरिश अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पहनावा, बोलचाल, सर्किल के लोग, मित्र मंडली, दिनचर्या व अन्य संस्कृति आदि कई पहलुओं में भी भिन्नताएं होती है। जिसे लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता।

Ved Ved 06:03  ·  Edited  ·  धार्मिक पहचान छुपा कर हम किसी से एक दो बार मिल सकते हैं। किसी को गर्ल-फ्रेंड बना तो सकते हैं। पर इस रिश्ते को उस मुकाम (शादी/सेक्स) तक नहीं पहुंचा सकते। सिर्फ इसलिए नहीं कि हिन्दू और मुस्लिम लड़को के लिंग में असमानता होती है। बल्कि इसलिए भी कि दोनों धर्मों में बच्चों की परवरिश अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पहनावा, बोलचाल, सर्किल के लोग, मित्र मंडली, दिनचर्या व अन्य संस्कृति आदि कई पहलुओं में भी भिन्नताएं होती है। जिसे लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता। अगर फिर भी मुस्लिम लड़के लंबे समय तक खुद को हिन्दू बता कर हिन्दू लड़की को फंसा कर उससे शादी करने में सफल होते हैं। तो ऐसा भी हो सकता है कि कोई अपने और अपनी पार्टी के राजनितिक लाभ के लिए ऐसे लड़के को हिन्दू बनने की गंभीर एक्टिंग का गहन प्रशिक्षण भी देता हो। संभवतः आर्थिक मदद भी। क्योंकि जो जीतने के लिए दंगा करवा सकता है। वो लव जिहाद भी करवा सकता है। बुरा उसे लगे, जो दंगा करवाता हो..... -vEd™ Like · Comment · Share 64 people  like this.

धार्मिक पहचान छुपा कर हम किसी से एक दो बार मिल सकते हैं। किसी को गर्ल-फ्रेंड बना तो सकते हैं। पर इस रिश्ते को उस मुकाम (शादी/सेक्स) तक नहीं पहुंचा सकते। सिर्फ इसलिए नहीं कि हिन्दू और मुस्लिम लड़को के लिंग में असमानता होती है। बल्कि इसलिए भी कि दोनों धर्मों में बच्चों की परवरिश अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पहनावा, बोलचाल, सर्किल के लोग, मित्र मंडली, दिनचर्या व अन्य संस्कृति आदि कई पहलुओं में भी भिन्नताएं होती है। जिसे लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता।

Ved Ved 06:03  ·  Edited  ·  धार्मिक पहचान छुपा कर हम किसी से एक दो बार मिल सकते हैं। किसी को गर्ल-फ्रेंड बना तो सकते हैं। पर इस रिश्ते को उस मुकाम (शादी/सेक्स) तक नहीं पहुंचा सकते। सिर्फ इसलिए नहीं कि हिन्दू और मुस्लिम लड़को के लिंग में असमानता होती है। बल्कि इसलिए भी कि दोनों धर्मों में बच्चों की परवरिश अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पहनावा, बोलचाल, सर्किल के लोग, मित्र मंडली, दिनचर्या व अन्य संस्कृति आदि कई पहलुओं में भी भिन्नताएं होती है। जिसे लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता। अगर फिर भी मुस्लिम लड़के लंबे समय तक खुद को हिन्दू बता कर हिन्दू लड़की को फंसा कर उससे शादी करने में सफल होते हैं। तो ऐसा भी हो सकता है कि कोई अपने और अपनी पार्टी के राजनितिक लाभ के लिए ऐसे लड़के को हिन्दू बनने की गंभीर एक्टिंग का गहन प्रशिक्षण भी देता हो। संभवतः आर्थिक मदद भी। क्योंकि जो जीतने के लिए दंगा करवा सकता है। वो लव जिहाद भी करवा सकता है। बुरा उसे लगे, जो दंगा करवाता हो..... -vEd™ Like · Comment · Share 64 people  like this.

धार्मिक पहचान छुपा कर हम किसी से एक दो बार मिल सकते हैं। किसी को गर्ल-फ्रेंड बना तो सकते हैं। पर इस रिश्ते को उस मुकाम (शादी/सेक्स) तक नहीं पहुंचा सकते। सिर्फ इसलिए नहीं कि हिन्दू और मुस्लिम लड़को के लिंग में असमानता होती है। बल्कि इसलिए भी कि दोनों धर्मों में बच्चों की परवरिश अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पहनावा, बोलचाल, सर्किल के लोग, मित्र मंडली, दिनचर्या व अन्य संस्कृति आदि कई पहलुओं में भी भिन्नताएं होती है। जिसे लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता।

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धरमेंदर बन गए दिलावर खान और हेमा मालिनी बन गयीं आयशा तब नहीं हुआ बवाल ।

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 ( सेराज अनवर ...........09835089114) धरमेंदर बन गए दिलावर खान और हेमा मालिनी बन गयीं आयशा तब नहीं हुआ बवाल । लव जिहाद की फेहरिस्त गिनाई जाए तो कई दिन गुजर जायें , आज फिरका परस्तों की तरफ से  "लव जिहाद " की जो वबा फैलाई जा रही है ,ऐसी मिशाल सदियों पहले भी मिलती है लेकिन तब न कोई बाबवाल मचता था और न हंगामा आराई होती थी , फिरकापरस्तों के लिए इस्लाम और मुस्लमान भले ही नफरत अंगेज शय हैं लेकिन अपने फायेदे के लिए इस्लाम का इस्ल्तेमान भी इन लोगों ने किया है , हिन्दू law के मुताबिक बीवी के रहते दूसरी शादी गैरकानूनी है ।इससे बचने के लिए कई लोग इस्लाम कबूल करते रहें हैं । मशहूर फिल्म एक्टर धरमेंदर को जब मशहूर फिल्म एक्ट्रेस  हेमा मालिनी से दूसरी शादी करनी थी तो वह मुसलमान हो गए और उन्होंने अपना नाम दिलावर खान रख लिया ...........हेमा मालिनी भी आयशा बन गयीं । आज इनकी शादी सिर्फ इसलिए बरक़रार है की कानूनन दोनों मुसलमान हैं । # फिल्म इंडस्ट्री में " लव जेहाद " को बेइन्तेहा पनाह मिली है । म्यूजिक डायरेक्टर अन्नू मल्लिक मुसलमान हैं ,उनका नाम अनवर मल्लिक है .....उन्होंने एक

लव जिहाद का मतलब प्रवीण तोगड़िया से पूछा जाए ......मजहब के इन ठीकेदारों के घरों में मुस्लिम नवजवानों से शादियाँ करने का रिवाज जेयादा रहा है । विश्व हिन्दू परिषद के लीडर अशोक सिंघल ने अपनी बेटी की शादी मुख्तार अब्बास नकवी से की है ,मुरली मनोहर जोशी ने अपनी बेटी की शादी शाहनवाज हुसैन से की हुई है , मोदी की भतीजी की शादी मुस्लिम नवजवान से हुई है , लाल कृष्ण अडवानी की बेटी ने दूसरी शादी मुस्लिम से की है , सुभ्रा मन्यम स्वामी की बेटी ने मुस्लिम से शादी की है ,शिव सेना के चीफ सवर्गिये बाल ठाकड़ेने अपनी पोती की शादी मुस्लिम नवजवान से ही की , मुसलमानों के खेलाफ सबसे जेयादा जहर उगलने के लिए कुख्यात विश्व हिन्दू परिषद के लीडर पर्वन तोगड़िया की बहन की शादी करने वाला मुसलमान आज बहुत बड़ा रईश है तोगड़िया आज भी अपनी बहन से मधुर संबंध रखता है ,तो क्या मजहब के इन ठीकेदारों को मुस्लिम दामाद जेयादा पशंद हैं? दोहरी पालिसी अपनाने और नफरत फैलाकर हिन्दू मुस्लिम एकता को खंडित करने वालों के चेहरों से नकाब और चोला उतारने वाली लेख ।

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             उर्दू दैनिक पिन्दार पटना ,दिनांक , 28/ 8 /2014 .            ( फैज अहमद फैज , लेखक विश्व शान्ति परिषद के चेयरमैन हैं )                 लव जिहाद का मतलब प्रवीण तोगड़िया से पूछा जाए मुल्क में विभाजन की सियासत करने वाली सांप्रदायिक ताक़तों को अमन व शान्ति बिगारने और सीधे सादे सेक्युलर सोंच के लोगों को फरेब देने का कोई न कोई बहाना मिल ही जाता है । इन दिनों उत्तर प्रदेश में "  लव जिहाद " यानी मुहब्बत के लिए जिहाद का परोपगंडा किया जा रहा है । यह भी इसी सांप्रदायिक तत्यों के नापाक मंसूबों की प्रदाख्त यानी उपज है । जिस खालिके काएनात ने इंसानियत और अमन व मुहब्बत और मजहबी खैरसगाली यानी धार्मिक सौहार्द जैसी खूबियों से नवाजा ही नहीं है बल्कि हकीकत ये है की शादी के लिए मजाहिब तब्दील कराने की किसी  कोशिश की इस्लाम मजहब कतई हौसला अफजाई यानी सुपोर्ट नहीं करता और न इस तरह के इस्लाम को ओलेमा ने कबूल किया है । पश्चमी उत्तर प्रदेश में गुजिस्ता एक साल क़ब्ल मजहब के नाम पर बेगुनाह लोगों के खून से होली खेलने के शर्मनाक खेल को दुनिया ने अपनी नंगी आँखों से देखा है उसका बीजेपी ने कितन