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कोरोना का दूसरी बार संक्रमण क्या ज़्यादा ख़तरनाक?

 


  • जेम्स गैलाघर
  • बीबीसी हेल्थ एंड साइंस रिपोर्टर
कोरोना वायरस

अमरीका में एक व्यक्ति को दो बार कोरोना का संक्रमण हुआ. डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक़, दूसरी बार हुआ संक्रमण ज़्यादा ख़तरनाक था.

25 साल के इस शख़्स को फेफड़ों में पर्याप्त ऑक्सीज़न नहीं मिल पा रहा था, तब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. हालांकि, अब वे ठीक हो चुके हैं.

दोबारा संक्रमण के मामले बहुत कम ही सामने आ रहे हैं, लेकिन लैंसेट के एक अध्ययन में यह सवाल खड़ा किया गया है कि 'आख़िर वायरस के ख़िलाफ़ कितनी इम्यूनिटी तैयार हो सकती है?'

मौजूदा मामले में अमरीका के इस शख़्स को कोई ऐसी ज्ञात स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं थी, जो उन्हें ख़ासतौर पर कोरोना संक्रमित होने के जोख़िम में डालती.

इस मामले में कब-क्या हुआ:

  • 25 मार्च - लक्षण दिखने का शुरुआती दौर जिसमें गले में ख़राश, खाँसी, सिरदर्द, जी मिचलाना और डायरिया हुआ.
  • 18 अप्रैल - वो पहली बार संक्रमित पाये गए.
  • 27 अप्रैल - शुरुआती लक्षण पूरी तरह से ख़त्म हो गए.
  • 9 और 26 मई - कोरोना वायरस का दो बार टेस्ट निगेटिव आया.
  • 28 मई - उनमें दोबारा से लक्षण दिखने शुरू हुए, इस बार उन्हें बुखार, सिरदर्द, चक्कर, खाँसी, जी मिचलाना और डायरिया हुआ.
  • 5 जून - वो दोबारा कोरोना संक्रमित पाये गए और उनके शरीर में ऑक्सीज़न का स्तर कम हो गया. उन्हें साँस लेने में दिक्कत महूसस होने लगी.
कोरोना

वैज्ञानिकों का कहना है कि 'इस मरीज़ को दो बार कोरोना संक्रमण हुआ.'

ऐसा बिल्कुल नहीं था कि पहले वाला संक्रमण पूरी तरह ख़त्म न हुआ हो और फिर से वही संक्रमण हो गया हो.

दोनों ही मामलों में जब वायरस के जेनेटिक कोड की तुलना की गई तो वो अलग-अलग पाये गए.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ नेवाडा के डॉक्टर मार्क पैंडोरी ने बताया, "हमारे नतीजों से यह पता चलता है कि पिछला संक्रमण आपको भविष्य में होने वाले संक्रमण से अनिवार्य तौर पर कतई नहीं बचाता है."

"दोबारा होने वाले संक्रमण की संभावना कोविड-19 की इम्यूनिटी को लेकर हमारी समझ के लिए काफ़ी अहम साबित हो सकती है."

उन्होंने कहा कि "जो लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं, उन्हें सोशल डिस्टेन्सिंग, मास्क और हाथ धोने जैसे गाइडलाइन का पालन करना चाहिए."

कोरोना टेस्ट

इम्यूनिटी को लेकर अभी भी उलझन

वैज्ञानिक कोरोना वायरस और उसकी इम्यूनिटी को लेकर अब भी स्पष्ट नहीं हैं.

क्या हर कोई संक्रमण के बाद इम्यून हो सकता है? क्या हल्के लक्षण वाले भी इम्यून हो सकते हैं? संक्रमण के बाद कि इम्यूनिटी कब तक काम कर सकती है?

ये कुछ अहम सवाल हैं - यह समझने के लिए कि वायरस लंबे समय तक हमें कैसे प्रभावित करने वाला है. साथ ही इन सवालों के जवाब का कोरोना वैक्सीन और हर्ड-इम्यूनिटी के आइडिया पर असर हो सकता है.

हालांकि, अब तक दोबारा से संक्रमण के मामले कम ही सामने आये हैं. कोरोना के कुल 3.7 करोड़ मामलों में से कुछ ही मामले दोबारा संक्रमण के हैं.

हॉन्ग-कॉन्ग, बेल्जियम और नीदरलैंड से आने वाली रिपोर्ट्स बताती हैं कि पहले संक्रमण के बाद दूसरी बार हुए संक्रमण के मामले उतने गंभीर नहीं थे.

दक्षिण अमरीकी देश इक्वाडोर में एक गंभीर मामला इस तरह का ज़रूर आया है, लेकिन उस मामले में भी अस्पताल जाने की नौबत नहीं आई थी.

हालांकि, महामारी के मामले में अभी किसी भी तरह की जल्दबाज़ी ठीक नहीं होगी और कोरोना वायरस से होने वाली दूसरी बीमारियों के इतिहास से पता चलता है कि एहतियात बरतना ज़रूरी है.

जैसे ही संक्रमण का दूसरा दौर शुरू होगा तब हमें इसे लेकर स्पष्ट जवाब मिलने शुरू हो सकते हैं.

अब तक यह माना गया था कि कोविड से दूसरी बार संक्रमित होने के वक़्त हल्के लक्षण दिखाई पड़ेंगे और मरीज़ गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ेगा.

वीडियो कैप्शन,

सर्दियों में कितना ख़तरनाक हो जाएगा कोरोना?

लेकिन अमरीका में दोबारा संक्रमित हुए मरीज़ के मामले में यह जवाब देना मुश्किल है कि वो गंभीर रूप से बीमार क्यों पड़े.

एक बात यह हो सकती है कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बड़ी मात्रा में वायरस का संक्रमण हुआ हो.

वहीं इस बात की भी संभावना है कि शुरुआती इम्यून रेस्पांस ने दूसरे संक्रमण को ज़्यादा ख़तरनाक बना दिया हो.

डेंगू के मामले में हमने ऐसा देखा है. डेंगू के मामले में डेंगू के एक किस्म के लिए तैयार एंटीबॉडी जब दूसरे किस्म के डेंगू के ऊपर काम करती हैं तो वो समस्या पैदा करती हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ ईस्ट एंजलिया के प्रोफ़ेसर पॉल हंटर ने बताया कि दो संक्रमणों के बीच कम अंतराल और दूसरे बार के संक्रमण का गंभीर होना 'काफ़ी चिंताजनक' है.

वे कहते हैं, "नई चीजें जो सामने आई हैं, उसे देखते हुए निश्चित तौर पर इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम के ऊपर इसके असर के बारे में कहना अभी जल्दबाज़ी होगी, लेकिन इन नतीजों से एक बात तो साफ़ होती है कि हमें इस संक्रमण से इम्यूनिटी को लेकर पर्याप्त जानकारी अब तक नहीं है."

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कोरोना वायरस: क्यों ख़तरे में हैं इलाज करने वाले डॉक्टर और नर्स


कोरोना वायरसइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
Image captionकोरोना वायरस संक्रमण की वजह से स्वास्थ्यकर्मियों के गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा भी ज़्यादा है
स्वास्थ्यकर्मी दुनिया भर में कोविड-19 के ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई की एक बड़ी कीमत चुका रहे हैं.
हज़ारों स्वास्थ्यकर्मी ख़ुद कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और वायरस की चपेट में आकर मरने वाले मेडिकल स्टाफ़ की संख्या बढ़ती जा रही है.
सुरक्षित कपड़े, मास्क और ग्लव्स पहनने के बावजूद डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी बाकी लोगों के मुकाबले संक्रमण के ज़्यादा शिकार हो रहे हैं.
स्वास्थ्यकर्मियों के गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा भी ज़्यादा है.
लेकिन ऐसा हो क्यों रहा है?
भारत या पाकिस्तान, सीरिया या ग्रीस सब कोरोनावायरस की वजह से एक जैसी तकलीफ़ें झेल रहे हैं.

वायरल लोड

विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह स्वास्थ्यकर्मी वायरस के संपर्क में आ रहे हैं, उतना शायद कोई और नहीं. उनके बीमार होन की बड़ी वजह भी यही है.
जैसे ही वायरस शरीर में प्रवेश करता है, ये कोशिकाओं पर हमला करता है और अपनी कई प्रतियां बना लेता है.
ये प्रतियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं और इस तरह मरीज़ के शरीर में कई वायरस पैदा हो जाते हैं. इस वायरस की संख्याओं को 'वायरल लोड' कहा जाता है.
वायरल लोड जितना ज़्यादा होगा, किसी भी बीमारी की गंभीरता उतनी बढ़ जाएगी और मरीज़ के संक्रामक होने की आशंका भी उतनी ही बढ़ जाएगी.
इंपीरियल कॉलेज, लंदन में 'संक्रामक बीमारी विभाग' के प्रोफ़ेसर वेंडी बर्स्ले ने बीबीसी न्यूज़नाइट कार्यक्रम में बताया, "किसी के अंदर जितने ज़्यादा वायरस होंगे, उसके दूसरों को संक्रमित करने की आशंका भी उतनी ही ज़्यादा होगी."
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Image captionवायरल लोड जितना ज़्यादा होगा, किसी भी बीमारी की गंभीरता उतनी बढ़ जाएगी

इम्यून सिस्टम

डॉक्टर और नर्स अक्सर उन मरीज़ों के करीब रहते हैं जो बुरी तरह संक्रमित होते हैं यानी जिनके शरीर में बहुत से वायरस होते हैं. इसका मतलब है कि स्वास्थकर्मी वायरस के 'हाई डोज़' या ज़्यादा वायरल लोड के करीब होते हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वुहान (चीन) में एक मरीज़ की सर्जरी करने वाले 14 स्वास्थ्यकर्मी उससे संक्रमित हुए. वो भी तब, जब मरीज़ को बुख़ार तक नहीं हुआ था.
प्रोफ़ेसर बर्स्ले कहते हैं, "अगर आप स्वस्थ हैं और आपका प्रतिरक्षा तंत्र मज़बूत तब भी आपके शरीर को सभी वायरस से लड़ने में मुश्किल हो सकती है. यानी जितने कम वायरस आपके शरीर में होंगे, शरीर को उतनी कम मेहनत करनी होगी और जितने ज़्यादा वायरस होंगे, शरीर को उतनी ज़्यादा मेहनत भी करनी होगी. ये लड़ाई वायरस और आपके इम्यून सिस्टम के बीच होती है."
प्रोफ़ेसर बर्स्ले समझाते हैं, "मिसाल के तौर पर अगर आप किसी जानवर में वायरस के अलग-अलग डोज़ डालेंगे तो वो जानवर सबसे ज़्यादा बीमार होगा जिसमें सबसे ज़्यादा वायरस डोज़ होगा."
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कोविड-19 आपके शरीर में कैसे घुसता है?

अगर किसी में कोविड-19 वायरस है तो वो उसके श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में छिपा हो सकता है. ये वायरस सांस लेने या खांसने से फैलता है.
प्रोफ़ेसर बर्स्ले ने बताया, "हम जब भी सांस लेते हैं या बोलते हैं, हमारे नाक और गले में बनने वाली कुछ बूंदें सांस के साथ बाहर निकल आती हैं."
इनमें से कुछ बूंदें ज़मीन पर गिर सकती हैं और अलग-अलग सतहों को प्रदूषित कर सकती हैं. इसीलिए लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग रखने और बार-बार हाथ धोने के लिए कहा जा रहा है.
हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि कितनी बूंदें शरीर में जाने से कोई बीमार पड़ सकता है.
प्रोफ़ेसर बर्स्ले कहते हैं, "इंफ़्लुएंज़ा वायरस के बारे में हमें काफ़ी कुछ पता है. जैसे कि किसी को संक्रमित करने के लिए इसकी तीन बूंदें ही काफ़ी होती हैं. लेकिन कोविड-19 के बारे में हमें ये संख्या नहीं मालूम. हो सकता है कि सिर्फ़ एक या दो बूंदों के ज़रिए ही कोविड-19 लोगों को संक्रमित कर देता हो."
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Image captionस्पेन में लगभग 6,500 (लगभग 12%) संक्रमित लोग भी स्वास्थ्यकर्मी ही हैं

फ़्रंटलाइन रिस्क

हमें अभी स्पष्ट रूप से नहीं मालूम कि स्वास्थकर्मी जिस तरह बार-बार संक्रमित लोगों के करीब आते हैं, उससे उन्हें कितना ख़तरा हो सकता है. लेकिन डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2002-03 में फैले सार्स संक्रमण के दौरान 21 फ़ीसदी संक्रमित लोग स्वास्थ्यकर्मी थे.
कुछ ऐसा ही हाल कोविड-19 के मरीज़ों का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों का भी है. इटली में 6,200 से ज़्यादा कोरोना संक्रमित लोग स्वास्थ्यकर्मी हैं. स्पेन में लगभग 6,500 (लगभग 12%) संक्रमित लोग भी स्वास्थ्यकर्मी ही हैं.
मार्च की शुरुआत में चीन ने बताया था कि 3,300 के करीब स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस संक्रमण का शिकार हुए थे. इसका मतलब है कि 4-12% के लगभग संक्रमित लोग हेल्थकेयर स्टाफ़ हैं.
ब्रिटेन के एक हेल्थकेयर चीफ़ एग्जिक्युटिव ने बीबीसी को बताया कि अस्पताल के 50 फ़ीसदी कर्मचारी किसी न किसी तरह से बीमार हैं. इतना ही नहीं, अगर संक्रमण को काबू में करने की व्यवस्था लड़खड़ाती है तो अस्पताल ही वायरस के हॉटस्पॉट बन जाएंगे.
डॉक्टरों ने बीबीसी को बताया है कि कैसे उन्होंने उन मरीज़ों को पूरी तरह ठीक होने से पहले अस्पताल से छुट्टी दे दी जिन्हें कोविड-19 संक्रमण नहीं था. ऐसा सिर्फ़ इसलिए किया गया ताकि उन्हें संक्रमण से बचाया जा सके.
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Image captionज़िम्बाब्वे में ज़रूरी सुरक्षा न मिलने पर डॉक्टर और नर्स हड़ताल पर चले गए हैं

कमज़ोर सुरक्षा

एक तो स्वास्थ्यकर्मी बाकी लोगों के मुक़ाबले संक्रमण के ख़तरे के ज़्यादा करीब हैं, दूसरे कई देशों में उनके लिए ज़रूरी सुरक्षा और उपकरण नहीं हैं. भारत समेत कई देशों में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यिपमेंट न मिलने की वजह से स्वास्थ्यकर्मी ग़ुस्से में हैं.
फ़्रांस में डॉक्टरों ने सरकार के ख़िलाफ़ क़ानूनी कदम उठाए हैं. उनका कहना है कि सरकार मास्क का उत्पादन बढ़ाने में नाकाम रही है और उन्हें ख़तरे में डाला गया है.
यूके ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ हेल्थकेयर वर्कर्स के चीफ़ एग्ज़िक्युटिव नील डिक्सन का कहना है कि सुरक्षा के अभाव की वजह से डॉक्टरों और नर्सों का विश्वास डगमगा गया है.
डिक्सन कहते हैं, “ब्रितानी सरकार ने मेडिकल स्टाफ़ को मास्क बंटवाने के लिए सेना की मदद लेनी शुरू कर दी है लेकिन उनका भरोस वापस लौटने कुछ वक़्त लगेगा. दूसरी समस्या ये है कि मास्क जैसे ज़रूरी सामानों के ज़्यादातर निर्माता एशिया और चीन में हैं. ऐसे में चीन के लिए लंबे वक़्त तक ये सप्लाई बनाए रखना एक चुनौती होगा.”
(न्यूज़नाइट स्वास्थ्य संवाददाता डेब्रा कोहेन के इनपुट्स के साथ)
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