मुसीबत के न जानें कितने रूप ? पल भर में न जानें अल्लाह (ईश्वर) कब किस की जिंदगी के किस्से तमाम कर दे ...इसलिए हम सब को चाहिए कि इंसान बन कर एक दूसरे के काम आए ... जो चले गए जैसे भी गए उनके रूह और आत्मा को अल्लाह सकून और शांति दे ।।











 

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