मौलाना मोहम्मद अली जौहर वो थे जिन्होंने ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई की, शानदार अंग्रेजी लिखते थे, चाहते तो पैसा कमाते लेकिन देश के लिए सब कुर्बान कर दिया। गांधी जी के साथ Non-Cooperation Movement चलाया, माँ ने कहा था - "अंग्रेज से माफी मत मांगना, जेल जाना पड़े तो जाओ।"


 योगी आदित्यनाथ जी ने कहा - देश के विभाजन के जिम्मेदार व्यक्ति के नाम पर विश्वविद्यालय बन रहा है।

इस पर वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

मौलाना मोहम्मद अली जौहर वो थे जिन्होंने ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई की, शानदार अंग्रेजी लिखते थे, चाहते तो पैसा कमाते लेकिन देश के लिए सब कुर्बान कर दिया।
गांधी जी के साथ Non-Cooperation Movement चलाया, माँ ने कहा था - "अंग्रेज से माफी मत मांगना, जेल जाना पड़े तो जाओ।"

उनका वो मशहूर जुमला - "I would die in a foreign country so long as it is a free country, and if you do not give me freedom in India, you will have to give me a grave"

1931 में Round Table Conference में ही उनकी मौत हो गई, फिलिस्तीन में दफन हैं। लाखों लोग उनके जनाजे में आए थे।

और 1978 में जब मोरारजी देसाई की सरकार थी, अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री और आडवाणी जी सूचना मंत्री थे, तब उसी सरकार ने Maulana Jauhar के सम्मान में डाक टिकट जारी किया था।

तो सवाल है - क्या इतिहास को राजनीति के चश्मे से देखना सही है?

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