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अयोध्या केस में सभी पुनर्विचार याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने कीं ख़ारिज: कैसे, क्या हुआ?

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इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने अयोध्या मामले में दाख़िल सभी 18 पुनर्विचार याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया है. बंद चैंबर में पाँच जजों की संवैधानिक बेंच ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई की और उन्हें ख़ारिज कर दिया. यानी अयोध्या राम मंदिर वाले फ़ैसले का रिव्यू नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार सुचित्र मोहंती के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के 9 नंवबर 2019 के राम जन्मभूमि-बाबरी फ़ैसले पर दिए गए फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की माँग करते हुए 18 याचिकाएं दायर की गई थीं. इनमें से 9 याचिकाएं पक्षकार की ओर से थीं, जबकि 9 अन्य याचिकाएं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाई गई थीं. इन सभी याचिकाओं की मेरिट पर गुरुवार को विचार किया गया. इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES पढ़ें कैसे क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार संवैधानिक बेंच ने बंद चैंबर में कुल 18 पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार किया. इस मामले में सबसे पहले 2 दिसंबर को पुनर्विचार

#BabriMasjid पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद बड़ी बड़ी हस्तियां और इंसाफपसंद लोग क्या कह रहे ? देखिये पूरा वीडियो

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#BabriMasjid_Verdict - स्वामी अग्निवेश के विचार , जरूर देखें पूरा वीडियो ।

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अयोध्या विवाद में पुनर्विचार याचिका से कुछ बदलेगा?

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सर्वप्रिया सांगवान बीबीसी संवाददाता इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES अयोध्या ज़मीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने नौ नवंबर को सर्वसम्मति से फ़ैसला दिया था. फ़ैसले में विवादित ज़मीन हिंदू पक्ष को दी गई, सरकार से मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने के लिए कहा गया और मुसलमान पक्ष को अयोध्या में किसी और जगह 5 एकड़ ज़मीन देने का आदेश दिया गया. इस फ़ैसले के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डालने का फ़ैसला किया है. बोर्ड के सचिव ज़फ़रयाब जिलानी के मुताबिक़ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में कई बिंदुओं पर विरोधाभास लगता है और उनके अनुसार कई बिंदुओं पर ये फ़ैसला समझ से परे है. हालांकि मुख्य पक्षकार इक़बाल अंसारी फ़िलहाल बोर्ड के इस फ़ैसले से दूरी बनाए हुए हैं. इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES Image caption ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की प्रेस कांफ्रेस में बोर्ड सचिव ज़फ़रयाब जिलानी बोलते हुए तो

#BabriMasjid_Verdict ! क्यों लोगों को लग रहा फैसला तो हुआ इंसाफ नहीं ।

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#BabriMasjid_Verdict ! फैसला हुआ इंसाफ नहीं ?

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अयोध्या फ़ैसले से बाबरी मस्जिद तोड़ने वालों की मांग पूरी: जस्टिस गांगुली

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14 नवंबर 2019 इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर को अयोध्या में विवादित ज़मीन पर फ़ैसला सुनाते हुए मंदिर बनाने का रास्ता साफ़ कर दिया है, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से फ़ैसला मंदिर के पक्ष में तो सुनाया लेकिन साथ में यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद तोड़ना एक अवैध कृत्य था. फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि मस्जिद के नीचे एक संरचना थी जो इलामी नहीं थी, लेकिन यह भी कहा है कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाए जाने का दावा भारतीय पुरातत्वविदों ने नहीं किया. जब यह फ़ैसला आया तो अलग-अलग तरह से व्याख्या शुरू हुई. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गांगुली उन पहले लोगों में थे जिन्होंने अयोध्या फ़ैसले पर कई सवाल खड़े किए. जस्टिस गांगुली का मुख्य सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस आधार पर हिन्दू पक्ष को विवादित ज़मीन देने का फ़ैसला किया है वो उनकी समझ से परे है. इ