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अयोध्या केस में सभी पुनर्विचार याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने कीं ख़ारिज: कैसे, क्या हुआ?


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सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने अयोध्या मामले में दाख़िल सभी 18 पुनर्विचार याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया है.
बंद चैंबर में पाँच जजों की संवैधानिक बेंच ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई की और उन्हें ख़ारिज कर दिया. यानी अयोध्या राम मंदिर वाले फ़ैसले का रिव्यू नहीं होगा.
सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार सुचित्र मोहंती के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के 9 नंवबर 2019 के राम जन्मभूमि-बाबरी फ़ैसले पर दिए गए फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की माँग करते हुए 18 याचिकाएं दायर की गई थीं. इनमें से 9 याचिकाएं पक्षकार की ओर से थीं, जबकि 9 अन्य याचिकाएं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाई गई थीं. इन सभी याचिकाओं की मेरिट पर गुरुवार को विचार किया गया.

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पढ़ें कैसे क्या हुआ?

  • सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार संवैधानिक बेंच ने बंद चैंबर में कुल 18 पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार किया.
  • इस मामले में सबसे पहले 2 दिसंबर को पुनर्विचार याचिका मूल वादी एम सिद्दकी के क़ानूनी वारिस मौलाना सैयद अशहद रशीदी ने दायर की थी.
  • इसके बाद 6 दिसंबर को मौलाना मुफ़्ती हसबुल्ला, मोहम्मद उमर, मौलाना महफ़ूज़ुर्रहमान, हाजी महबूब और मिसबाहुद्दीन ने छह याचिकाएं दायर कीं. इन सभी पुनर्विचार याचिकाओं को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन प्राप्त था.
  • इसके बाद 9 दिसंबर को दो और पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं. इनमें से एक याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा की थी, जबकि दूसरी याचिका 40 से अधिक लोगों ने संयुक्त रूप से दायर की थी.
  • संयुक्त याचिका दायर करने वालों में इतिहासकार इरफ़ान हबीब, अर्थशास्त्री व राजनीतिक विश्लेषक प्रभात पटनायक, मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर, नंदिनी सुंदर और जॉन दयाल शामिल थे.
  • हिंदू महासभा ने अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर करके मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को आवंटित करने के आदेश पर सवाल उठाये थे.
  • साथ ही महासभा ने फ़ैसले से उस अंश को हटाने का अनुरोध किया था जिसमें विवादित ढांचे को मस्जिद घोषित किया गया है.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ये स्पष्ट कर दिया कि इनमें से किसी भी दलील के आधार पर वो अपने फ़ैसले को रिव्यू नहीं करेगा.
अयोध्या केस पर फ़ैसला तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया था जिसमें कुल पाँच जज थे. यह फ़ैसला सभी जजों ने सर्वसम्मति से सुनाया था.
जस्टिस गोगोई अब रिटायर हो चुके हैं. उनकी जगह जस्टिस एसए बोबडे ने ली है.
पुनर्विचार की याचिकाओं पर एकमुश्त फ़ैसला भी पाँच जजों की बेंच ने ही सुनाया है.
मुख्य न्यायाधीश बोबडे सहित चार वो जज हैं जिन्होंने नौ नवंबर को फ़ैसला सुनाया था. जबकि जस्टिस संजीव खन्ना को पाँचवें जज के तौर पर शामिल किया गया.

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इस फ़ैसले पर पुनर्विचार की माँग ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, हिंदू महासभा, निर्मोही अखाड़ा और कई एक्टिविस्टों ने की थी. उनका कहना था कि इस निर्णय में कई ग़लतियाँ हैं.
अपने नौ नवंबर के फ़ैसले में पाँच जजों की बेंच ने विवादित ज़मीन राम मंदिर बनाने के लिए देने, तीन महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाने और मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही कहीं और पाँच एकड़ ज़मीन देने का आदेश दिया था.
https://www.bbc.com/hindi/india-50758904

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