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मुसलमान वन्दे मातरम क्यों नहीं कहते हैं?

Abrar Hussain  (Facebook)

मुसलमान वन्दे मातरम क्यों नहीं कहते हैं?

दुनिया में अलग अलग धर्म हैं और हर धर्म में अलग अलग भगवान और देवी-देवताओं की पूजा की जाती हैं। कोई पत्थरों को तराशकर उन्हें पूजते हैं। कोई इन्सानो को पूजते हैं। कोई जानवरों को पूजते हैं। कोई सूरज को पूजते हैं। कोई चान्द और सितारों को पूजते हैं। कोई धन को पूजते हैं। कोई पानी को पूजते हैं। कोई आग को पूजते हैं। कोई हवा को पूजते हैं। कोई प्रकृति को पूजते हैं। कोई पेड़-पौधों को पूजते हैं। इसी प्रकार हिन्दू धर्म में धरती को पूजा जाता हैं।

जबकि इस्लाम धर्म इन सभी वस्तुओं को पूजने से रोकता हैं और उसको पूजने का हुक्म देता हैं जिसने इन सभी वस्तुओं का निर्माण किया हैं। इस्लाम निर्माता को पूजने का हुक्म देता हैं न कि निर्मित को। क्योंकि पूजा के लायक तो सिर्फ वो हैं जो अमर हैं और सदैव रहने वाला हैं और अमर व सदैव रहने वाला तो सिर्फ ईश्वर हैं। ईश्वर के अलावा जो कुछ भी इस ब्रह्मांड में हैं सब नश्वर हैं।

वन्दे मातरम का अर्थ होता हैं ए धरती माँ हम तेरी वन्दना करते हैं। मतलब धरती माँ हम तुझे पूजते हैं। अब सवाल ये उठता हैं कि क्या हम धरती को पूज सकते हैं? क्योंकि जिसको पूजा जाएं उसकी इज्जत करना अति आवश्यक हैं। मगर लोग "वन्दे मातरम" भी कहते जाते हैं और उसी धरती पर अपना मलमूत्र भी त्यागते रहते हैं। क्या जिसकी पूजा की जाएं उसी पर मलमूत्र त्यागना उचित हैं? लोग जिस धरती की पूजा करते हैं उस पर जूते चप्पलें भी रखते हैं। लोग जिस धरती की पूजा करते हैं उस पर पिछवाड़े के बल बैठते भी हैं और पैरों के बल चलते भी हैं। क्या जिसकी पूजा की जाएं उस पर अपना पिछवाड़ा और पैर रखना उचित हैं?

जी नहीं यह बिल्कुल भी उचित नहीं की एक तरफ तो लोग धरती को पूजने का दावा करें और दुसरी तरफ उसी धरती की बेइज्जती भी करें। अत: जिसकी इज्जत नहीं की जा सकती उसकी पूजा भी नहीं की सकती। अगर आप वास्तव में धरती को पूजते हैं तो आज से ही ये सारे कार्य त्याग दीजिये जो आप धरती पर करते हैं। जो कि इन्सानो के लिए असम्भव हैं क्योंकि धरती को तो ईश्वर ने हमारी सुविधा के लिए बनाया हैं न कि पूजने के लिए।

इसीलिए मुसलमान वन्दे मातरम नहीं कहते हैं क्योंकि पूजा और वन्दना के लायक तो सिर्फ ईश्वर हैं।

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