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ममता बनर्जी बनाम CBI: पीएम मोदी पर हमला बोल धरने पर बैठीं मुख्यमंत्री

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ममता बनर्जीइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

पश्चिम बंगाल में बहुचर्चित शारदा चिटफ़ंड घोटाले की जाँच को लेकर एक नाटकीय घटनाक्रम में कोलकाता पुलिस और सीबीआई के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. अहम घटनाक्रमः
  • बिना किसी वॉरेंट के आई थी सीबीआई: कोलकाता पुलिस
  • केंद्रीय रिज़र्व सुरक्षा बल के जवान कोलकाता में सीबीआई मुख्यालय पहुँचे
  • ममता बनर्जी कोलकाता के मेट्रो सिनेमा के सामने धरने पर बैठीं
  • शेक्सपियर सारणी थाने पर रोकर रखी गई सीबीआई टीम को जाने दिया गया
  • सीबीआई की टीम पश्चिम बंगाल के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने पहुंची थी
  • सीबीआई शारदा चिटफंड घोटाले में मिलना चाहती थी
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीबीआई को ऐसा करने की इजाज़त नहीं दी



ममता बनर्जी
Image captionरात में ही धरने पर बैठीं ममता बनर्जी

सीबीआई की एक टीम कोलकाता पुलिस के प्रमुख राजीव कुमार से पूछताछ करने गई थी मगर पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोका और थाने में बिठा लिया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पुलिस कमिश्नर के घर पर पहुंची गई थीं.
मौक़े पर मौजूद बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया है कि सीबीआई अधिकारियों को थाने पर अब रोक कर नहीं रखा गया है.
ममता बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, '' मेरे घर पर भी सीबीआई भेज रहे हैं. 2011 में हमारी ही सरकार ने चिटफंड घोटाले के ख़िलाफ जांच शुरू की थी. हमने ग़रीबों के पैसे लौटाने के लिए काम किया था. हमने दोषियों को पकड़ने के लिए एक कमेटी बना दी थी. सीपीएम के वक़्त में चिटफंड शुरू हुआ था पर उनके ख़िलाफ़ जांच क्यों नहीं हुई?''
''मैं संविधान बचाने के लिए मेट्रो सिनेमा के सामने धरना दूंगी. मैं दुखी हूं. मैं डरने वाली नहीं हूं. मैं जानती हूं कि देश के लोग मेरा समर्थन करेंगे.''
सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में बजट पेश किया जाना है. मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि वो धरना स्थल से ही फ़ोन के ज़रिए बजट सत्र से जुड़ी रहेंगी.
ममता ने कहा, ''सीबीआई अधिकारियों पर पिछले कई दिनों से दबाव डाला जा रहा था कि कुछ तो करो, कुछ तो करो. जब-जब चुनाव आता है ये लोग चिटफंड का नाम लेने लगते हैं. डोभाल ही हैं जो ये सब करवा रहे हैं.''



राजीव कुमारइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
Image captionकोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार

ममता बनर्जी ने कहा, ''मेरी पार्टी के नेताओं को जेल में रखा गया. मैंने ये अपमान भी सहा. मैं राज्य की मुखिया हूं तो मेरा फ़र्ज़ है कि सबकी रक्षा करूं. आप कोलकाता पुलिस कमिश्नर के घर बिना वॉरेंट के आ जाते हैं. आपकी इतनी हिम्मत कैसे हुई. मैं सभी पार्टियों से बोलूंगी कि इस सरकार के ख़िलाफ़ एक होना होगा. मोदी-हटाओ, देश बचाओ.''
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पुलिस कमिश्नर घोटाले की जाँच करने वाली एक विशेष टीम का नेतृत्व कर रहे थे और सीबीआई उनसे कुछ लापता फ़ाइलों और दस्तावेज़ों के सिलसिले में पूछताछ करना चाहती है.
एजेंसी ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद पुलिस कमिश्नर सीबीआई के समक्ष नहीं आए.
हाल ही में आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने राज्य में सीबीआई के छापे और जांच को लेकर जो आम सहमति थी, उसे वापस ले लिया था. दोनों राज्यों का आरोप था कि केंद्र सरकार सीबीआई का ग़लत इस्तेमाल कर रही है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर लिखा, ''मोदी ने लोकतंत्र और संघीय ढांचे का मज़ाक बनाकर रखा है. कुछ साल पहले मोदी ने दिल्ली की एंटी-करप्शन ब्रांच पर कब्ज़ा किया था. अब मोदी-शाह की जोड़ी भारत और लोकतंत्र के लिए ख़तरा बने हुए हैं. हम इसकी निंदा करते हैं.''
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी ममता का समर्थन किया है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार सुबह इस मामले में पुलिस प्रमुख का बचाव करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर सीबीआई का ग़लत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था.



ममता बनर्जीइमेज कॉपीरइटAFP

बीजेपी सांसद बाबुल सुप्रियो ने की राष्ट्रपति शासन की मांग
ममता बनर्जी ने ट्विटर पर लिखा था, ''कोलकाता के पुलिस कमिश्नर दुनिया के सबसे अच्छे अधिकारियों में से एक हैं. उनकी ईमानदारी और बहादुरी पर सवाल नहीं किया जा सकता है. वो रात-दिन काम करते हैं. हाल ही में वो बस एक दिन की छुट्टी पर थे. आप जब झूठ फैलाते हैं तो वो झूठ ही रहता है.''
केंद्रीय राज्य मंत्री और आसनसोल से बीजेपी सांसद बाबुल सुप्रियो ने इस मुद्दे पर बीबीसी हिंदी से बात की.
बाबुल सुप्रियो ने कहा, ''हालात पश्चिम बंगाल में काफ़ी बिगड़ गए हैं. बीजेपी सांसद और नागरिक होने के नाते मैं राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग करता हूं. ये राजनीति नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक्शन लेने की बात है.''
बाबुल सुप्रियो ने कहा, ''मुझे ये समझ नहीं आता है कि जो हज़ारों करोड़ का रोज़ वैली और शारदा घोटाला हुआ है, क्या इसकी जांच नहीं होनी चाहिए. अगर कोई पुलिस कमिश्नर हो या अधिकारी हो और उसके ऊपर सीधे आरोप लग रहे हों तो क्या वो जांच नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की थी. नोटिस भेजने के बाद भी जब राजीव कुमार नहीं पहुंचे तो इसका जवाब देना होगा. ये बीजेपी और टीएमसी नहीं है. ये भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई है. ये आपातकाल जैसे हालात हैं.''
कोलकाता पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस बारे में ट्वीट कर कहा गया था, ''मीडिया में कुछ ऐसी ख़बरें चल रही हैं कि राजीव कुमार तीन दिन से दफ्तर नहीं आ रहे थे. कोलकाता पुलिस ऐसी ख़बरों को ख़ारिज करती है. ध्यान रहे कि वो लगातार दफ्तर आ रहे हैं, सिर्फ़ 31 जनवरी को छोड़कर.''
सुप्रीम कोर्ट ने शारदा घोटाले की जाँच 2014 में सीबीआई को सौंप दी थी. राजीव कुमार 2016 में कोलकाता पुलिस के प्रमुख बनाए गए थे.



राजीव कुमारइमेज कॉपीरइटAFP

क्या है शारदा चिटफंड स्कैम

शारदा कंपनी की शुरुआत जुलाई 2008 में हुई थी.
देखते ही देखते ये कंपनी हजारों करोड़ की मालिक बन गई. इस कंपनी ने आम लोगों से भारी निवेश करवाया था और वादों को पूरा करने में नाकाम साबित रही थी.
इस तरह की कंपनियों के मामलों में होता ये है कि कंपनी के एक एजेंट दो लोगों से पैसा लेते हैं फिर अगले साल उन्हें उनके पैसे वापस करने के लिए वो तीन और लोगों से पैसे लेते हैं और उन्हें वापस करने के लिए दस और लोगों से पैसे लेते हैं और इस तरह से ये सिलसिला चलता रहता है. लेकिन अगर नकारात्मक प्रचार हुआ तो निवेशक पैसे निवेश करना बंद कर देते हैं और कंपनी बैठ जाती है. शारदा के साथ भी यही हुआ था.
इस कंपनी के मालिक सुदिप्तो सेन ने 'सियासी प्रतिष्ठा और ताक़त' हासिल करने के लिए मीडिया में खूब पैसे लगाए और हर पार्टी के नेताओं से जान पहचान बढ़ाई थी.
कुछ ही सालों में वे अरबपति हो गए. शारदा ग्रुप के खिलाफ पहला मुक़दमा 2013 में 16 अप्रैल को दर्ज किया गया.
इसके बाद शारदा के सुदिप्तो सेन फरार हो गए. बाद में उन्हें कश्मीर से गिरफ्तार किया गया. उनके गिरफ्तार होते ही कंपनी ठप पड़ गई.
साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने शारदा चिट फंड घपले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया था. पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का विरोध करती रही है.



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क्या है रोज़ वैली चिटफंड मामला?

रोज़ वैली ने आम जनता से 17,000 करोड़ रुपए इकट्ठा किए थे. इसका बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल और पूर्व और पूर्वोत्तर के दूसरे राज्यों से वसूला गया.
कंपनी के मालिक गौतम कुंडू त्रिपुरा के रहने वाले हैं. उनके भाई, भाभी और भतीजा जिस गाड़ी से जा रहे थे, वह मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग के पास एक झील में डूब गई. इसमें गाड़ी का ड्राइवर बच गया और बाकी सभी मारे गए. यह एक रहस्य बना हुआ है.
यह समूह फ़िल्म और मीडिया के व्यवसाय में भी है. इसका अपना फ़िल्म डिवीज़न है, जिसने गौतम घोष निर्देशित 'मोनेर मानुष' का निर्माण किया था. इसका बांग्ला में मनोरंजन और न्यूज़ चैनल है, जो पश्चिम बंगाल और असम में बेहद लोकप्रिय है.
रोज़ वैली पर आरोप है कि इसने ग़ैर क़ानूनी तरीके से पैसे इकट्ठा किए हैं और उसका एक बड़ा हिस्सा ग़लत तरीके से निकाल लिया है. निकाले गए पैसे का बड़ा हिस्सा विदेश भेज दिए जाने का आरोप भी है.
कंपनी के मालिक कुंडू पर आरोप है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं की मदद से इकट्ठा किए हुए पैसे का एक हिस्सा देश के बाहर भेजा. आरोप यह भी है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कुछ नेताओं ने भी इसमें मदद की थी.
तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी एजेंसियों के ज़रिए पैसे ठिकाने लगाने में कुंडू की मदद की. उन्हें उसके बदले गाड़ियां, फ़्लैट और दूसरे मंहगे तोहफ़े दिए गए. रोज़वैली ने विदेश में उनके सैर सपाटे का खर्च भी उठाया.
प्रवर्तन निदेशालय (एनफ़ोर्समेंट डाइरेक्टरेट) ने मार्च 2015 में गौतम कुंडू को गिरफ़्तार कर लिया. सीबीआई ने उन्हें 2016 के जनवरी में उन पर आरोप तय किए गए.
सुदीप बंद्योपाध्याय पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120 (बी) और दूसरी धाराओं के तहत कई आरोप लगाए गए थे.

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