Skip to main content

कहीं आपको मोबाइल की लत तो नहीं है?


रोरी सेलन जोन्स और लिली
हम आए दिन मोबाइल की आदत से होने वाले नुकसान की बात करते रहते हैं. तकनीकी कंपनियों की मदद से इसे कम करने के कई तरीके ढ़ूंढे जाते रहे हैं.
लेकिन, ये कैसे पता किया जाए कि किसी को मोबाइल की लत लग चुकी है? क्या फ़ोन इस्तेमाल करने की कोई सीमा भी तय हो सकती है?
ऐसे ही कई सवालों के जवाब एप्पल फोन के अपडेटेड वर्जन से पता चलेंगे. इसके लिए बीबीसी ने एक प्रयोग किया. इनमें दो ऐसे व्यक्तियों को चुना गया जो फ़ोन का बहुत अधिक उपयोग करते थे या कह सकते हैं कि उन्हें फ़ोन की लत थी.
इनमें से एक 12 साल की लड़की थीं और दूसरे व्यक्ति अधेड़ उम्र के थे.
अधेड़ उम्र वाले यूजर ने बताया, ''मेरा नाम रोरी सेलन जोन्स है और मुझे फ़ोन की लत लगी हुई है. ये मैं पहले से ही जानता हूं. फिर भी मैंने अपने सहकर्मी जेन वेकफिल्ड की 12 साल की बेटी लिली के साथ ये प्रयोग किया.''
फोन
''हमने एप्पल सॉफ्टवेयर डेवलपर प्रोग्राम पर साइन-इन किया ताकि हम नये मोबाईल ऑपरेटिंग सिस्टम iOS 12 को इंस्टॉल कर सकें जो सितम्बर से सबके लिए उपलब्ध होगा.''
इसमें एक स्क्रीनटाइम नाम का एक नया फीचर होगा, जिसकी मदद से पता चलेगा कि आईफ़ोन का इस्तेमाल किस तरह से हो रहा है और इससे आपके लिए वो एक सीमा भी निर्धारित करेगा. हालांकि, ये सुविधा एंड्रॉइड फ़ोन पर पहले से ही मौजूद है.
स्क्रीनटाइम की मदद से बच्चों के माता-पिता उन पर नजर रख सकेंगे.
रोरी सेलन जोन्स कहते हैं, ''ट्रायल वर्ज़न को इंस्टॉल करने के कुछ ही घंटों में ये पता चल गया कि मैं अपने फ़ोन का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करता हूं.''
''सुबह 10 बजे के बाद मैंने पाया कि मैं पहले ही फ़ोन पर दो घंटे 38 मिनट बिता चुका हूं. एक घंटे में लगभग नौ बार फ़ोन उठाया और मुझे लगभग 33 नोटिफिकेशन मिले.''
फोन

सुबह से रात तक फ़ोन

सेलन जोन्स बताते हैं, ''अब मेरा कुछ समय कुछ गंभीर कामों में जाता है जैसे मैं अपने मेल चेक कर लेता हूं और बीबीसी न्यूज़ के एप पर पढ़ लेता हूं. लेकिन, एक दिन और अन्य दिनों की तुलना करने पर मेरी एक ही गतिविधि मेरे फ़ोन पर हावी हो गई है.''
''मेरा एक घंटा ट्विटर पर बीता. इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं है कि मेरे लिए सुबह की पहली चीज और रात की आखिरी चीज फ़ोन बन चुका है. सोशल मीडिया के जरिए अपडेट रहना या न्यूज़ का पता करना मेरी दिनचर्या में शामिल हो चुका है.''
''जब मैं अपने नोट्स मिलाने के लिए लिली से मिला तो सोशल मीडिया के इस्तेमाल की कहानी मिलती-जुलती ही मिली. तीन बजे के बाद उसने अपने फ़ोन पर एक घंटा 44 मिनट बिताया था, जिसमें 38 मिनट इंस्टाग्राम और 9 मिनट स्नैपचैट पर बिताए थे.''
लिली

प्रयोग का फ़ायदा

लिली ने बताया कि उन्हें फ़ेसबुक पर फ़़ोटो शेयर करना पहुत पसंद है. वैसे तो इसमें बहुत सी चीजे हैं पर उन्हें अपने आप को देखना ज़्यादा पसंद है. वह कहती हैं कि वो इसे छह बजे शुरू करती हैं और पूरा दिन उस पर बिता देती हैं.
हालांकि, ये सेलन जोन्स के फ़ोन इस्तेमाल करने वाले समय की तुलना में कुछ भी नहीं है.
सेलन जोन्स कहते हैं, ''जैसे ही मैं लिली को अपना रिजल्ट दिखाता हूं तो वो कहती हैं कि आप फ़ोन बहुत इस्तेमाल करते हैं. मेरा स्क्रीनटाइम तीन घंटे और 44 मिनट था जिसमें मैंने दो घंटे ट्विटर पर बिताए थे.''
लिली की मां जेन खुश हैं और सामने बैठकर बताती हैं कि उनके फ़ोन का आज पूरे दिन में केवल 48 मिनट ही इस्तेमाल हुआ.
वो खुश हैं कि वे अब लिली के फ़ोन की गतिविधियों की निगरानी रख सकती हैं. हालांकि, उन्होंने फ़ोन के इस्तेमाल की कोई सीमा तय नहीं की है.
जेन का कहना है, "अगर वो ज़्यादातर समय अपने बेडरूम में बिताती है और मैं उसको पूरा दिन नहीं देख पा रही हूं तो मुझे कुछ नियम बनाने होंगे. ख़ासकर तब जब स्कूल की छुट्टियां हों."
लिली को अंदाजा नहीं है कि इसका कोई उल्टा असर होगा या नहीं लेकिन वो कहती हैं, "मेरे पास परिवार के साथ रहने का समय होगा और उनके साथ बाहर जा पाऊंगी."
लेकिन, इसके साथ ही वो परिवार के बारे में कई बातें बताने लगती हैं. वो कहती हैं परिवार के साथ बाहर जाने पर बच्चों को भी स्ट्रगल करना पड़ता है. जब परिवार बाहर खाने पर जाता है और माता-पिता अपने फ़ोन पर लग जाते हैं.
जेन अपनी बात को असल मुद्दे पर लाती हैं और कहती हैं कि उन्हें भी इस बीमारी से पीछा छुड़ाने की जरूरत है.
वो कहती हैं, ''मैं बहुत ज्यादा नहीं लेकिन रोजाना ट्विटर का कम इस्तेमाल करने के बारे में सोच रही हूं. चलो देखते हैं कि क्या इसके लिए दिन में दो घंटे काफी होंगे?''
रोरी सेलन जोन्स

Comments

Popular posts from this blog

"बक्श देता है 'खुदा' उनको, ... ! जिनकी 'किस्मत' ख़राब होती है ... !! वो हरगिज नहीं 'बक्शे' जाते है, ... ! जिनकी 'नियत' खराब होती है... !!"

सिमरन प्रजापति  with  Rekha Vinod Jain  and  4 others Mon  ·  क्या खुब लिखा है किसी ने ... "बक्श देता है 'खुदा' उनको, ... ! जिनकी 'किस्मत' ख़राब होती है ... !! वो हरगिज नहीं 'बक्शे' जाते है, ... ! जिनकी 'नियत' खराब होती है... !!" न मेरा 'एक' होगा, न तेरा 'लाख' होगा, ... ! न 'तारिफ' तेरी होगी, न 'मजाक' मेरा होगा ... !! गुरुर न कर "शाह-ए-शरीर" का, ... ! मेरा भी 'खाक' होगा, तेरा भी 'खाक' होगा ... !! जिन्दगी भर 'ब्रांडेड-ब्रांडेड' करने वालों ... ! याद रखना 'कफ़न' का कोई ब्रांड नहीं होता ... !! कोई रो कर 'दिल बहलाता' है ... ! और कोई हँस कर 'दर्द' छुपाता है ... !! क्या करामात है 'कुदरत' की, ... ! 'ज़िंदा इंसान' पानी में डूब जाता है और 'मुर्दा' तैर के दिखाता है ... !! 'मौत' को देखा तो नहीं, पर शायद 'वो' बहुत "खूबसूरत" होगी, ... ! "कम्बख़त" जो भी ...

छिनतई होती रही और सामने से चली गई पुलिस.....

 DB Gaya 28.08.23

Magar Momino pe Kushada hain rahen || Parashtish karen Shauq se Jis ki chahein

  करे गैर गर बूत की पूजा तो काफिर  जो ठहराए बेटा खुदा का तो काफिर  गिरे आग पर बहर सिजदा तो काफिर  कवाकिब में मानें करिश्मा तो काफिर  मगर मोमिनो पर कुशादा हैं राहें  परस्तिश करें शौक से जिस की चाहें  नबी को जो चाहें खुदा कर दिखाएं  इमामों का रुतबा नबी से बढ़ाएं  मज़ारों पे दिन रात नजरें चढ़ाएं  शहीदों से जा जा के मांगें दुआएं  न तौहीद में कुछ खलल इससे आये  न इस्लाम बिगड़े न ईमान जाए । ( मुसद्दस हाली ) __________________________________________________ Padhne k baad kya Samjhe ? Agar Gair Boot ki Puja , Murti Puja , Yani ek khuda k Awala ki kisi Dusre ki puja kare to Kafir  Eesha Alaihissalam ko manne wale Agar Ek Allah ki Parastish karne k sath Eesha Alaihissalam ko Khuda maan Liya to  Fir bhi Kaafir  Aag ki sijdah Jisne Kiya wah bhi kaafir ho gaya  Falkiyaat Aur chaand aur sitaron k Wajud ko Allah ka banaya hua n maan kar Sirf Karishma maan liya to bhi Kaafir ... Lekin Musalmano ki Rahen Aasan aur Wasi  kai...