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लॉकडाउन: दिल्ली से मुरैना पैदल, व्यक्ति की हुई मौत- प्रेस रिव्यू


सांकेतिक तस्वीर
Image captionसांकेतिक तस्वीर

39 वर्षीय रणवीर सिंह लॉकडाउन के बाद दिल्ली से मध्य प्रदेश के मुरैना अपने घर जाने के लिए मजबूरी में पैदल ही निकल गए थे. लेकिन वो घर पहुंचते इससे पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के एक प्राइवेट रेस्तरां में होम डिलिवरी मैन के तौर पर काम करने वाले रणवीर की मौत आगरा में 200 किलोमीटर का सफ़र तय करने के बाद हुई.
तीन बच्चों के पिता रणवीर दिल्ली से पैदल ही मध्य प्रदेश जा रहे थे. पुलिस के अनुसार रणवीर पैदल चलते-चलते नेशनल हाइवे-2 के कैलाश मोड़ पर बेहोश होकर गिर पड़े.
सिकंदरा पुलिस स्टेशन के हाउस ऑफ़िसर अरविंद कुमार ने बताया कि रणवीर को सड़क पर बेहोश देखकर एक स्थानीय दुकानदार संजय गुप्ता उनकी ओर दौड़े.
अरविंद कुमार ने बताया, "स्थानीय दुकानदार ने रणवीर को दरी पर लिटाया और उनके लिए चाय-बिस्किट लेकर आए लेकिन रणवीर ने सीने में दर्द की शिक़ायत की और अपने साले को फ़ोन करके अपनी हालत के बारे में बताया. शाम साढ़े छह बजे के क़रीब उनकी मौत हो गई. बाद में पुलिस को इसकी जानकारी दी गई."
पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक को उनकी मौत की वजह बताया गया है. हालांकि उनके 200 किलोमीटर लंबे सफ़र को देखते हुए पुलिस थकान को भी मौत की एक वजह मान रही है.
21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मज़दूर बड़ी संख्या में अपने घरों को पैदल ही जा रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

जब पीएम ने किया एक नर्स को फ़ोन

"क्या सिस्टर छाया से बात हो रही है?
"हां."
"मैं प्रधानमंत्री आवास से बोल रहा हूं. प्रधानमंत्री आपसे बात करना चाहते हैं."
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़ोन लाइन पर आते हैं.
"नमस्ते, सिस्टर छाया."
अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित ख़बर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले एक हफ़्ते से ऐसे लोगों को फ़ोन कर रहे हैं जो कोरोना संकट के दौरान चुनौतीपूर्ण स्थितियों में काम कर रहे हैं.
इसी क्रम में उन्होंने शनिवार को पुणे के नायडू हॉस्पिटल में काम करने वाली नर्स को फ़ोन किया.
अख़बार लिखता है कि प्रधानमंत्री मोदी इस तरह लोगों को फ़ोन करके उनका हौसला बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. सिस्टर छाया से बातचीत में प्रधानमंत्री ने पूछा, "बताइए, आप अपना परिवार कैसे संभाल रही हैं? सब आपके लिए चिंतित होंगे."
जवाब में छाया ने कहा, "हां सर. लेकिन हमें अपना काम करना है. हम किसी तरह संभाल लेते हैं."
अख़बार ने एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया है कि प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों रोज़ 150-200 फ़ोन कॉल करते हैं. ये कॉल उन्होंने उसी दिन से करना शुरू कर दिया था जब उन्होंने 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया था.
अख़बार लिखता है कि लॉकडाउन के बाद से ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने आवास से बाहर नहीं निकले हैं.

कोरोना संक्रमणइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

कोरोना से लड़ने को पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं

कोरोना वायरस संकट से निबटने के लिए भारत के पास पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट कहती है कि मेडिकल इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार भारत में हर साल औसतन 8,000 वेंटिलेटर्स की ज़रूरत पड़ती है.
थिंक टैंक ब्रूकिंग्स इंडिया के अनुमान के मुताबिक़ अभी जिस तरह से कोरोना संक्रमण के मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए लगता है कि अगर हालात बहुत ख़राब हुए तो देश में 15 मई तक 1, 10,000-2,20,000 वेंटिलेटर्स की ज़रूरत होगी.
इन्हीं आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार पीएसयू (पब्लिक सेक्टर यूनिट) और प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर वेंटिलेटर समेत अन्य मेडिकल उपकरण तैयार करने की कोशिश कर रही है.
भारत सरकार भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एचएलएल लाइफ़केयर लिमिटेड, टाटा ग्रुप, महिंद्रा ग्रुप और मारुति सुज़ुकी के साथ मिलकर काम कर रही है.

लॉकडाउनइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

लॉकडाउन के पीछे विशेषज्ञों की चेतावनी

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ सरकार ने 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान स्वास्थ्य विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी के बाद किया था.
विशेषज्ञों का कहना था कि अगर विदेशों से आए लोग बाकियों के संपर्क में आए तो कोरोना संक्रमण के मरीज़ों की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ेगी और ऐसा होने से रोकने के लिए तत्काल कड़ा कदम उठाने की ज़रूरत है.
अख़बार लिखता है कि वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी इस बारे में एकमत थे कि देशव्यापी लॉकडाउन वक़्त की ज़रूरत है.
विशेषज्ञों की इसी चेतावनी और सलाह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन हफ़्तों के लॉकडाउन की घोषणा की. हालांकि आलोचकों का कहना है कि लॉकडाउन का फ़ैसला हड़बड़ी में और बिना पूरी तैयारी के किया गया.
आलोचक मज़दूरों और कामगरों के बड़ी संख्या में पलायन करने को लॉकडाउन की नाकामी के तौर पर देख रहे हैं. दूसरी तरफ़, स्वास्थ्य विशषज्ञों का मानना है कि लॉकडाउन का फ़ायदा आने वाले वक़्त में दिखेगा जब संक्रमण की दर स्थिर हो जाएगी.

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी


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