Skip to main content

भारत में कोरोना की क़यामत || इस्लामिक देशों से भी खुलकर मदद भारत को खाड़ी के इस्लामिक देशों से भी मुश्किल घड़ी में काफ़ी मदद मिल रही है. 25 अप्रैल को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ाएद अल नाह्यान से फ़ोन पर बात हुई थी. इस बातचीत के बाद गुरुवार को मेडिकल आपूर्ति से भरा एक कार्गो दिल्ली पहुँचा. भारत को सऊदी अरब, कुवैत और क़तर से भी मदद मिल रही है. विदेशी मदद स्वीकार करने का बचाव करते हुए श्रृंगला ने कहा कि भारत ने 80 से ज़्यादा देशों में कोरोना वैक्सीन की 6.5 करोड़ डोज पहुँचाई है. श्रृंगला ने कहा कि जिन देशों को लग रहा है कि भारत उनके लिए मुश्किल वक़्त में खड़ा रहा है, वे खुलकर मदद कर रहे हैं. यूएआई से आज यानी 30 अप्रैल को ऑक्सीजन की आपूर्ति आ सकती है. इसमें 140 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन होगी. बहरीन से भी ऑक्सीजन आने वाली है. कुवैत 1000 ऑक्सीजन सिलिंडर और 185 मिट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन भेजने वाला है. रेमेडिसिवर के मामले में भी भारत को मिस्र, बांग्लादेश, उज़्बेकिस्तान और यूएई से मदद मिल रही है.

 

पीएम मोदी विदेशी मदद पर घिरे, मनमोहन सिंह का पुराना बयान चर्चा में

मोदी

इमेज स्रोत,GETTY IMAGES

कोरोना महामारी की भयावहता ने भारत को विदेशों से मदद लेने पर मजबूर कर दिया है.

कहा जा रहा है कि मोदी सरकार को 16 साल पुरानी परंपरा मजबूरी में बदलनी पड़ी है, जिसमें विदेशी उपहार, दान और मदद नहीं लेने का फ़ैसला किया गया था.

लेकिन तेज़ी से फैलते कोरोना संक्रमण और उससे होने वाली मौतों के कारण भारत में कई बुनियादी चीज़ों के लिए मारामारी की स्थिति है. भारत में मेडिकल ऑक्सीजन, दवाइयां और कई तरह के उपकरण नाकाफ़ी साबित हो रहे हैं.

16 साल पहले मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने सुनामी संकट के समय फ़ैसला किया था कि भारत अब अपने दम पर अपनी लड़ाई लड़ सकता है, इसलिए किसी विदेशी मदद को नहीं स्वीकार किया जाएगा. लेकिन अब हालत यह है कि मोदी सरकार बांग्लादेश और चीन से भी मदद लेने को तैयार है.

गुरुवार को भारत के विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने विदेशी मदद स्वीकार करने के फ़ैसले का बचाव किया और पत्रकारों से कहा कि लोगों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए जो भी करना होगा, सरकार करेगी.

मोदी

इमेज स्रोत,GETTY IMAGES

सरकार ने किया बचाव

श्रृंगला ने कहा कि यह बहुत ही संकट का समय है. यह पहली बार है जब सरकार की ओर से इसका सार्वजनिक रूप से बचाव किया गया है.

श्रृंगला ने विदेशी मदद लेने का बचाव करते हुए कहा, ''हम इसे किसी नीति के तौर पर नहीं देख रहे हैं. हमने भी लोगों की मदद की है और हमें अब मदद मिल रही है. यह दिखाता है कि पूरी दुनिया एक दूसरे पर निर्भर है. इससे यह भी पता चलता है कि पूरी दुनिया साथ मिलकर काम कर रही है.''

गुरुवार को पाकिस्तान के एक फ़ैसले की भी तारीफ़ हो रही है. पाकिस्तान भारत का पड़ोसी देश है और उसने भी मुश्किल वक़्त में मदद की पेशकश है.

गुरुवार पाकिस्तान में यूरोपियन यूनियन की राजदूत एंद्रोउला कामिनारा ने ट्वीट कर कहा, ''हमें पाकिस्तान को तहे दिल से शुक्रिया कहना चाहिए कि उसने ईयू से भारत भेजी जा रही मानवीय मदद के लिए उसने एयरस्पेस के इस्तेमाल की तत्काल अनुमति दी.'' भारत और पाकिस्तान ने एक दूसर के एयरस्पेस के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रखी है.

छोड़िए Twitter पोस्ट, 1

पोस्ट Twitter समाप्त, 1

भारत को मदद केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि बांग्लादेश से भी मिल रही है.

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है वो एंटी-वायरल दवाई की 10,000 शीशियाँ, 30,000 पीपीई किट्स और ज़िंक, कैल्सियम, विटमीन सी के साथ अन्य ज़रूरी दवाइयां भारत भेजेगा. हर्ष श्रृंगला ने कहा कि क़रीब 40 देशों से ऑक्सीजन संबधित मदद को लेकर काम जारी है.

भारत ताक़तवर देश अमेरिका, रूस, जर्मनी और सऊदी अरब से लेकर मिस्र, उज़बेकिस्तान, बांग्लादेश और गुयाना तक से मदद ले रहा है. श्रृंगला ने कहा कि भारत को लोग दिल खोलकर मदद दे रहे हैं क्योंकि भारत ने भी अतीत में ऐसा किया है.

सोनिया गांधी

इमेज स्रोत,GETTY IMAGES

इस्लामिक देशों से भी खुलकर मदद

भारत को खाड़ी के इस्लामिक देशों से भी मुश्किल घड़ी में काफ़ी मदद मिल रही है. 25 अप्रैल को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ाएद अल नाह्यान से फ़ोन पर बात हुई थी. इस बातचीत के बाद गुरुवार को मेडिकल आपूर्ति से भरा एक कार्गो दिल्ली पहुँचा. भारत को सऊदी अरब, कुवैत और क़तर से भी मदद मिल रही है.

विदेशी मदद स्वीकार करने का बचाव करते हुए श्रृंगला ने कहा कि भारत ने 80 से ज़्यादा देशों में कोरोना वैक्सीन की 6.5 करोड़ डोज पहुँचाई है. श्रृंगला ने कहा कि जिन देशों को लग रहा है कि भारत उनके लिए मुश्किल वक़्त में खड़ा रहा है, वे खुलकर मदद कर रहे हैं.

यूएआई से आज यानी 30 अप्रैल को ऑक्सीजन की आपूर्ति आ सकती है. इसमें 140 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन होगी. बहरीन से भी ऑक्सीजन आने वाली है. कुवैत 1000 ऑक्सीजन सिलिंडर और 185 मिट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन भेजने वाला है. रेमेडिसिवर के मामले में भी भारत को मिस्र, बांग्लादेश, उज़्बेकिस्तान और यूएई से मदद मिल रही है.

सऊदी अरब

इमेज स्रोत,GETTY IMAGES

मनमोहन सिंह की याद

विदेशी मदद स्वीकार किए जाने पर 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का वह बयान याद किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने दिसंबर, 2004 में आई सुनामी के दौरान कहा था, ''हमें लगता है कि हम ख़ुद से ही हालात को संभाल लेंगे और लगेगा कि हमें मदद की ज़रूरत है तब मदद लेंगे.''

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 1991 में उत्तरकाशी भूकंप, 1993 में लातूर भूकंप, 2001 में गुजरात भूकंप, 2000 में बंगाल चक्रवात और 2004 में बिहार बाढ़ के बाद किसी भी तरह की विदेशी मदद नहीं ली.

यही नीति पिछले 16 सालों से चल रही थी और भारत ने उत्तराखंड में 2013 में आई बाढ़, 2005 में कश्मीर के भूकंप और 2014 में कश्मीर की बाढ़ के दौरान विदेशी मदद लेने से इनकार कर दिया था.

सबसे हाल में 2018 में केरल में जब बाढ़ आई तो और यूएई ने केरल को 700 करोड़ रुपए की मदद की पेशकश की थी पर मोदी सरकार ने ही लेने से इनकार कर दिया था.

शुक्रवार को कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने भी अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू को दिए इंटरव्यू में विदेशी मदद को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है.

कोरोना

इमेज स्रोत,GETTY IMAGES

सोनिया गांधी का निशाना

सोनिया गांधी ने कहा है, ''अंतरराष्ट्रीय मदद का स्वागत है लेकिन यह दयनीय स्थिति है कि इस तरह की मदद का भी प्रधानमंत्री की जय-जयकार में इस्तेमाल किया जा रहा है. मोदी सरकार की प्राथमिकता ही ग़लत है. एक तरफ सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है तो दूसरी तरफ़ देश विदेशों से मदद के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

सोनिया गांधी ने कहा, ''यह वक़्त ऐसा है कि बिना वाहावाही की चिंता किए हर कोई साथ मिलकर काम करे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से जिस तरह से मदद मिल रही है, उसे लेकर मैं उनका शुक्रगुज़ार हूँ. लेकिन यह तब और दयनीय लगता है जब इन अंतरराष्ट्रीय मदद को प्रधानमंत्री की जय-जयकार में इस्तेमाल किया जाता है जबकि सच यह है कि अंतरराष्ट्रीय मदद सरकार की अक्षमता, असंवेदनशीलता और प्राथमिकता की समझ नहीं होने का परिचायक है. क्या यह वक़्त सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाने का है?''

कोरोना

इमेज स्रोत,GETTY IMAGES

चीन से पिछले दो सालों से तनाव है लेकिन भारत को यहां से भी मदद लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है. भारत में चीन के राजदूत सुन वेइदोंग ने ट्वीट कर कहा है कि चीनी सप्लायर भारत को मदद पहुँचाने के लिए दिन-रात एक कर काम कर रहे हैं. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक पत्र भेजा था, जिसमें हर संभव मदद करने की बात कही गई थी.

कहां प्रधानमंत्री मोदी कुछ दिन पहले तक भारत को दुनिया का फार्मेसी बता रहे थे और अब भारत दवाइयों के लिए दूसरे देशों का मुँह ताक रहा है. कहा जा रहा है कि मोदी सरकार ने कोरोना महामारी को हल्के में लिया और अब इसका खामियाजा भारतीयों को भुगतना पड़ रहा है.

विदेशी मडिया में प्रधानमंत्री मोदी की जमकर आलोचना हो रही है. कहा जा रहा है कि पीएम मोदी की नीतियों के कारण भारत में कोरोना संक्रमण और तेज़ी से फैल रहा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Comments

Popular posts from this blog

"बक्श देता है 'खुदा' उनको, ... ! जिनकी 'किस्मत' ख़राब होती है ... !! वो हरगिज नहीं 'बक्शे' जाते है, ... ! जिनकी 'नियत' खराब होती है... !!"

सिमरन प्रजापति  with  Rekha Vinod Jain  and  4 others Mon  ·  क्या खुब लिखा है किसी ने ... "बक्श देता है 'खुदा' उनको, ... ! जिनकी 'किस्मत' ख़राब होती है ... !! वो हरगिज नहीं 'बक्शे' जाते है, ... ! जिनकी 'नियत' खराब होती है... !!" न मेरा 'एक' होगा, न तेरा 'लाख' होगा, ... ! न 'तारिफ' तेरी होगी, न 'मजाक' मेरा होगा ... !! गुरुर न कर "शाह-ए-शरीर" का, ... ! मेरा भी 'खाक' होगा, तेरा भी 'खाक' होगा ... !! जिन्दगी भर 'ब्रांडेड-ब्रांडेड' करने वालों ... ! याद रखना 'कफ़न' का कोई ब्रांड नहीं होता ... !! कोई रो कर 'दिल बहलाता' है ... ! और कोई हँस कर 'दर्द' छुपाता है ... !! क्या करामात है 'कुदरत' की, ... ! 'ज़िंदा इंसान' पानी में डूब जाता है और 'मुर्दा' तैर के दिखाता है ... !! 'मौत' को देखा तो नहीं, पर शायद 'वो' बहुत "खूबसूरत" होगी, ... ! "कम्बख़त" जो भी ...

छिनतई होती रही और सामने से चली गई पुलिस.....

 DB Gaya 28.08.23

Magar Momino pe Kushada hain rahen || Parashtish karen Shauq se Jis ki chahein

  करे गैर गर बूत की पूजा तो काफिर  जो ठहराए बेटा खुदा का तो काफिर  गिरे आग पर बहर सिजदा तो काफिर  कवाकिब में मानें करिश्मा तो काफिर  मगर मोमिनो पर कुशादा हैं राहें  परस्तिश करें शौक से जिस की चाहें  नबी को जो चाहें खुदा कर दिखाएं  इमामों का रुतबा नबी से बढ़ाएं  मज़ारों पे दिन रात नजरें चढ़ाएं  शहीदों से जा जा के मांगें दुआएं  न तौहीद में कुछ खलल इससे आये  न इस्लाम बिगड़े न ईमान जाए । ( मुसद्दस हाली ) __________________________________________________ Padhne k baad kya Samjhe ? Agar Gair Boot ki Puja , Murti Puja , Yani ek khuda k Awala ki kisi Dusre ki puja kare to Kafir  Eesha Alaihissalam ko manne wale Agar Ek Allah ki Parastish karne k sath Eesha Alaihissalam ko Khuda maan Liya to  Fir bhi Kaafir  Aag ki sijdah Jisne Kiya wah bhi kaafir ho gaya  Falkiyaat Aur chaand aur sitaron k Wajud ko Allah ka banaya hua n maan kar Sirf Karishma maan liya to bhi Kaafir ... Lekin Musalmano ki Rahen Aasan aur Wasi  kai...