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देश में सब क्यों हो रहा ?

 Updated - 12.02.2026


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शादी

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राजस्थान के जयपुर में एक दलित व्यक्ति की बारात पर पथराव करने के आरोप में पुलिस ने दस लोगों को गिरफ़्तार किया है.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने पुलिस के हवाले से लिखा है कि यह घटना गुरुवार देर रात हुई. ये पथराव उस समय हुआ जब दलित दुल्हा घोड़ी पर सवार होकर अपनी बारात लेकर दुल्हन के घर किरोड़ी गांव पहुंचा.

दुल्हन पक्ष का आरोप है कि जिस समय लोगों ने पत्थर फेंके उस समय सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात थे लेकिन उनकी तैनाती के बावजूद लोगों ने बारात पर पत्थर फेंके.

दुल्हन के पिता हरिपाल बलई के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है, "हमारे गांव में दलित दूल्हे का घोड़ी पर चढ़कर बारात लेकर आना कोई आम बात नहीं है. मैं भेदभाव की इस परंपरा को तोड़ना चाहता था. मेरी बेटी और बेटे दोनों की शादी इसी महीने हो रही है. हमारे गांव में राजपूत समुदाय के लोग अक्सर ये कहते हैं कि वे हमें घोड़ी की सवारी नहीं करने देंगे. इस वजह से मुझे पहले से ही शक था कि कुछ गड़बड़ हो सकती है इसलिए मैंने इस संबंध में पुलिस प्रशासन और ज़िला प्रशासन के समक्ष आवेदन भी दिया था."

बलई कहते हैं कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि कोई अप्रिय घटना नहीं होगी.

गुरुवार रात की घटना का ज़िक्र करते हुए बलई कहते हैं कि 'कल जब मेरे दामाद घोड़ी पर सवार होकर हमारे घर के गेट पर पहुंचे तो पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद पत्थर फेंके गए. परिवार के क़रीब 10-15 लोगों पर पत्थर पड़े. मेरे भतीजे को तो इतनी चोट आयी है कि उसे टांके तक लगवाने पड़े हैं.'

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DANIEL BEREHULAK/GETTYIMAGES

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बलई का आरोप है कि पथराव करने वाले लोग राजपूत समुदाय के थे और वे उनके पड़ोस में ही रहते हैं.

बलई का आरोप है कि उनके दामाद और बारात पर पत्थर इसलिए फेंके गए क्योंकि वे लोग दलितों को घोड़ी पर चढ़कर बारात लाता नहीं देख सकते.

पुलिस का कहना है कि उन्होंने इस मामले में 10 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक़, "10 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. ये सभी राजपूत समुदाय से हैं."

पुलिस ने बताया कि उस दिन मौके पर 75 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. हमला केवल कुछ सेकेंड ही रहा और उसके बाद हमलावर झाड़ियों में भाग गए. इस पथराव में तीन लोग घायल हुए हैं.

कोटपुतली के सर्कल ऑफ़िसर दिनेश कुमार यादव के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि इस मामले में आईपीसी की धारा 323, 341 के तहत मामला दर्ज किया गया है. साथ ही एससी/एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

यात्री

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ऐप से ऑटो बुक कराने पर देना होगा जीएसटी

ओला, ऊबर और दूसरी ऐप आधारित ई-कॉमर्स कंपनियों से ऑटो बुक करने पर जनवरी महीने से पांच फीसदी जीएसटी देना होगा.

दैनिक हिंदुस्तान की ख़बर के अनुसार, राजस्व विभाग ने कहा है कि ई-कॉमर्स ऐप्स और प्लेटफ़ॉर्म्स के माध्यम से यात्री परिवहन सेवाएं देने वाले ऑटो रिक्शा के लिए अभी तक जीएसटी में जो छूट दी जा रही थी, उसे वापस लिया जा रहा है.

हिंदुस्तान की ख़बर के मुताबिक़, इससे ऑटो का सफ़र महंगा हो जाएगा. मसलन, अभी तक अगर आप ऑटो से कहीं जाने के लिए 100 रुपये का भुगतान करते थे तो अब आपको उसके लिए 105 रुपये देने होंगे.

टमाटर

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आने वाले दो महीनों में भी नहीं कम होंगे टमाटर के भाव

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क्रिसिल रिसर्च ने कहा है कि लगातार हुई बारिश के कारण सब्ज़ियों की पैदावर पर असर हुआ है और इस कारण सब्ज़ियों के दाम आसमान छू रहे हैं. लेकिन अमूमन 20 से 30 रुपये प्रति किलो बिकने वाला टमाटर दिल्ली समेत कई जगहों पर सौ से अस्सी रुपये प्रति किलो बिक रहा है.

जनसत्ता अख़बार के मुताबिक़, क्रिसिल रिसर्च ने बढ़ी कीमतों पर कहा है कि आने वाले दो महीने में भी टमाटर के भाव कम होने की उम्मीद नहीं है. क्रिसिल के मुतबिक, कर्नाटक टमाटर का मुख्य उत्पादक राज्य है लेकिन वहां टमाटर की पैदावर की स्थिति इतनी गंभीर है कि फिलहाल इसे लेकर राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

क्रिसिल के अनुसार, 25 नवंबर तक क़ीमतों में 142 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में एक बार फसलों की कटाई शुरू होने के बाद दाम कम होंगे लेकिन उसमें अभी कम से कम दो महीने का समय है.

किसान नेता

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ANI

संयुक्त किसान मोर्चा की आज बैठक

तीन कृषि क़ानूनों को रद्द होने के बावजूद प्रदर्शन कर रहे किसान दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे हुए हैं. किसानों का कहना है कि सरकार एमएसपी पर भी क़ानून लेकर आए.

तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते एक साल से प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि भले ही सरकार ने तीनों क़ानूनों को वापस ले लिया हो लेकिन जब तक संसद से यह पारित नहीं हो जाता और जब तक एमएसपी समेत अन्य मांगे नहीं स्वीकार कर ली जातीं वे प्रदर्शन स्थल पर बने रहेंगे.

द हिंदू की ख़बर के मुताबिक, आगे की रणनीति के लिए संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी आज 27 नवंबर को मीटिंग करेगी.

बीते दिन दिल्ली के सिंघू, टिकरी और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर बड़ी संख्या में किसानों ने जमा होकर अपनी ऐतिहासित जीत को दर्ज किया.

किसानों का कहना है कि यह एक बड़ी उपलब्धि है कि 12 महीने बाद किसानों ने प्रधानमंत्री को झुकने पर मजबूर कर दिया.

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14 May 2019

गुजरात में क्यों रोकी गई दलितों की बारात

गुजरात, दलित
गुजरात में पिछले कुछ दिनों में गांवों में दलितों की बारात में दूल्हे को घोड़ी ना चढ़ने देने के मामले सामने आ रहे हैं.
पिछले दिनों मेहसाणा जिले के ल्होर गांव में दलित दूल्हे के घोड़ी चढ़ने पर ऊंची जाति के लोगों ने गांव के दलितों का बहिष्कार कर दिया था. इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था.
इसके बाद अरवल्ली ज़िले के मोढासाके खम्भीसर गांव में ऐसा ही एक मामला सामने आया है. यहां पर दलित दूल्हा जब घोड़ी पर चढ़ा तो ऊंची जाति के लोगों ने उसका रास्ता रोक लिया और मामले को काबू में करने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा. हालात की गंभीरता को देखते हुए यहां पुलिस फ़ोर्स तैनात करनी पड़ी.
आखिर गांव में हुआ क्या
खम्भीसर गांव में जयेश राठौड़ ने अपनी शादी में डीजे के साथ घोड़ी पर बैठ कर बारात निकालने का फ़ैसला किया. जैसे ही ये बात गांव वालों को पता चली उन्हें धमकियां मिलने लगीं.
इन धमकियों के बाद जयेश के परिवार ने बारात निकालने के लिए पुलिस से सुरक्षा की मांग की. पुलिस के आने के बावजूद गांव वालों ने जिस रास्ते से बारात जानी थी वहां हवन और राम भजन बजाने शुरू कर दिए.
गुजरात, दलित
Image captionजयेश राठौड़
जयेश के पिता डाह्या भाई ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, ''इस कारण हम बारात आगे नहीं ले जा सकते थे. पुलिस ने इन लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन इन लोगों ने हम दलितों को बहुत परेशान किया. ''
हालांकि काफ़ी मशक्कत के बाद पुलिस की मौजूदगी में जयेश की बारात निकल सकी.
पुलिस क्या कहती है
बीबीसी से बात करते हुए अरवल्ली के पुलिस अधिकारी मयूर पाटिल ने बताया, '' हमने लोगों को समझाने की रोशिश की लेकिन वे लोग काफ़ी उग्र थे. गांव में दो गुटों के बीच पत्थरबाज़ी हुई जिसे कंट्रोल करने के लिए हमें लाठीचार्ज करना पड़ा. इस मामले में हमने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है. ''
जिस हम इस गांव पहुंचे उस वक्त तक यहां पुलिस बल तैनात थी.
गुजरात, दलित
साबरकांठा में भी ऐसा मामले आया सामने
साबरकांठा के प्रांतीज में अनिल राठौड़ नामक दलित युवक की बारात में भी उनके घोड़ी चढ़ने पर ऊंची जाति के लोगों ने ऐसा ही बवाल मचाया था.
अनिल के पिता रमेश भाई राठौड़ ने बीबीसी को बताया, '' मंदिर जाने के बाद बारात निकलने वाली थी लेकिन हमें वहां जाने से रोका गया. हमें डीजे ना बजाने को भी कहा गया. हमें पहले से ही डर था इसीलिए हमने पुलिस से मदद मांगी थी. फिर भी तनाव बढ़ा और बारात को तीन घंटे तक रोक कर रखा गया. डर की वजह से हमारा डीजे वाला और फोटोग्राफ़र भी भाग गए. मंदिर पर ताले लगा दिए गए थे हमने ये ताले तोड़ कर दर्शन किए. इसके बाद हम बारात निकाल सके.''
गुजरात, दलित
इस गांव के सवर्ण इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखते. मनुभाई ठाकोर कहते हैं, ''इस विवाद के पीछे डीजे का शोर ही मुख्य कारण था. हमारे घर में दो लोग बीमार थे तो हमने इनसे कहा कि डीजे की आवाज़ कम कर दें. उन्होंने बिना सोचे समझे ही झगड़ा शुरु कर दिया. हमने मंदिर के दर्शन को लेकर और बारात को लेकर कोई दवाब नहीं बनाया. ''
दलित बनाम ठाकोर की लड़ाई
दलितों के नेता केवल सिंह राठौड़ ने बताया, ''शादी के कार्ड में सिंह लिखना हो या दलितों के मूंछ रखने की बात हो या उनके बारात में घोड़ी चढ़ने की बात हो, इन्हें लेकर दलितों को परेशान किया जा रहा है. इससे साफ़ होता है कि गुजरात में दलितों को अछूत और अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है.''
गुजरात, दलितइमेज कॉपीरइटFACEBOOK/ALPESH THAKOR
जबकि ठाकोर समुदाय के नेता और कांग्रेस से अलग हुए अल्पेश ठाकोर ने बीबीसी गुजराती से कहा, '' हाल ही में जो घटनाएं गुजरात में हुई हैं. उनमें ठाकोर सेना के शामिल होने की झूठी बातें फैलाकर ठाकोर सेना को बदनाम किया जा रहा है. इससे पहले उत्तर भारतीय और बाहरी राज्य के लोगों के आने के मामले में मुझे बदनाम करने की कोशिश की गई थी. मैं मेरे क्षेत्र में दलित भाइयों की शादी में ठाकोर सेना के साथ जाता हूं और वहां जय भीम के नारे भी लगाता हूं. मैं मानवता में यकीन रखता हूं. लेकिन ऐसी घटनाएं मुझे बदनाम करने के लिए की जा रही हैं. ''
इस मामले में राज्य के सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री ईश्वर परमार से हमने बात करने की कोशिश की संपर्क भी साधा लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला.
भार्गव परिख
बीबीसी हिंदी से साभार 

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