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कांग्रेस ने जनता को कुछ देने का काम किया और बीजेपी अब छिनने का काम कर रही ।

मोदी सरकार ने RTI को क्या कमज़ोर कर दिया संदीप राय बीबीसी हिंदी के लिए 26 जुलाई 2019 साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES भारी विरोध और विपक्षी दलों की कड़ी आपत्ति के बावजूद राज्यसभा में भी आरटीआई संशोधन बिल 2019 पास हो गया. विपक्ष इसे सिलेक्ट कमिटी में भेजने की मांग कर रहा था, लेकिन इस पर हुए मतदान में विपक्ष को 117 के मुक़ाबले 75 मत ही मिले. राष्ट्रपति की मुहर के बाद आरटीआई में संशोधन लागू हो जाएगा. नए संशोधन के तहत केंद्रीय और राज्य स्तरीय सूचना आयुक्तों की सेवा शर्तें अब केंद्र सरकार तय करेगी. साथ ही सूचना आयुक्तों का सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर का दर्ज़ा भी ख़त्म हो जाएगा. विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने आरटीआई एक्ट को कमज़ोर करने के लिए संशोधन किया है जबकि न तो इसमें बदलाव की कोई मांग थी और ना ही ज़रूरत. हालांकि सरकार इन आरोपों को ख़ारिज कर रही है कि आरटीआई संशोधन बिल से इसकी स्वायत्तता कमज़ोर होगी. कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि इस तरह के आरोप बेबुनियाद हैं और इनका कोई आधार नहीं है. जितेंद्र सिंह ने कहा, ...

पढ़ना न भूलें ये दर्दनाक दास्ताँ ! लगभग रोते हुए अरशद कहते हैं कि हम कोर्ट के फ़ैसले से ख़ुश हैं लेकिन जब ज़िंदगी के क़ीमती साल गुज़र रहे थे तब कोर्ट चुप क्यों थी. कौन उन 23 सालों को वापस लेकर आएगा और अब अली क्या करेगा.

कश्मीर: जेल में बीती जवानी फिर सुबूत के अभाव में रिहा रियाज़ मसरूर बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर 25 जुलाई 2019 इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES जवानी, ज़िंदगी का वो पड़ाव जब शरीर में कुछ करने का जज़्बा तो होता ही है उसे पूरा करने की ताक़त और ऊर्जा भी होती है. लेकिन अगर किसी की जवानी जेल की दीवरों के भीतर क़ैदी बनकर गुज़र जाए, फिर दो दशक बीतने के बाद एक दिन उन्हें रिहा कर दिया जाए और बताया जाए कि पर्याप्त सुबूत नहीं मिले, इसलिए उन्हें रिहा किया जाता है. ऐसा ही हुआ 49 साल के मोहम्मद अली भट्ट, 40 साल के लतीफ़ वाज़ा और 44 साल के मिर्ज़ा निसार के साथ. अपनी पूरी जवानी जेल में बिताने के बाद मोहम्मद अली भट्ट, लतीफ़ वाज़ा और मिर्ज़ा निसार को सुबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया. इन सभी को दिल्ली के लाजपत नगर और सरोजिनी नगर में साल 1996 में हुए बम धमाकों में शामिल होने के शक में पुलिस ने हिरासत में लिया था. लेकिन उनके ख़िलाफ़ सुबूत नहीं थे और इसल...

खुल गई पोल ! मुस्लिम लड़कियों के द्वारा शिव मंदिर में जल चढ़ाने का मामला निकला फ़र्ज़ी

News हिंदी BBC News हिंदी Navigation सेक्शन कांवड़ यात्रा: मुस्लिम लड़कियों के शिव मंदिर में जल चढ़ाने का सच फ़ैक्ट चेक टीम बीबीसी न्यूज़ 24 जुलाई 2019 इस पोस्ट को शेयर करें Facebook   इस पोस्ट को शेयर करें WhatsApp   इस पोस्ट को शेयर करें Messenger   साझा कीजिए इमेज कॉपीरइट SM VIRAL POST सोशल मीडिया पर बुर्क़ा पहने हुए कांवड़ लेकर जातीं कुछ महिलाओं का एक वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि 'हलाला और तलाक़ से बचने के लिए कुछ मुस्लिम महिलाओं ने झारखंड के देवघर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में जल चढ़ाया'. इसी दावे के साथ फ़ेसबुक-ट्विटर पर बीते 48 घंटे में यह वीडियो सैकड़ों बार शेयर किया गया है और सात लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है. वीडियो में दिखता है कि कुछ बुर्कानशीं महिलाएं कंधे पर कांवड़ रखकर एक क़ाफ़िले में शामिल हैं. इस क़ाफ़िले में दिख रहीं अन्य महिलाओं भगवा वस्त्र पहने हुए हैं. एक मिनट के इस वीडियो को सोशल मीडिया पर जिन लोगों ने पोस्ट किया है, उन्होंने लगभग एक जैसा ही संदेश लिखा है. इमेज कॉ...