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BIG SCANDLE EXPOSE IN CBSE BOARD DELHI,GOVERNMENT NOT READY TO PROBE IT

         सी बी एस ई में महाघोटाला  सामने आया जाँच करेगा कौन?     
सी बी एस ई  बोर्ड  में महा घोटाला, एक स्कूल को दिया मान्यता ,तोरी नियम. अपने को बचाने के पर्यास  में सी बी एस ई बोर्ड
के  एक अधिकारी ने आनन् फानन में  जाली पत्र जारी कर सबूत को मिटाने के परयाश तेज करदिये हैं ,
              
सबसे पहले  ए.आई सी.टी.ई. उसके बाद एम्. सी.आई. और उसके और अब देश की एक और महतपूर्ण शिक्षण   संसथान  जाँच  के दाएरे  में  आगई है,मामला है गलत ढंग से एक अल्पसंख्यक  शिक्षण संसथान को
मान्यता प्रदान करने का.इस बात का खुलासा होते ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षण संसथान दिल्ली  के साथ साथ  बिहार शिक्छा विभाग में खलबली मच गई है.
               मामले में उंच पद पर बैठे लोगों के संलिप्त होने के कारन,लीपा पोती के पर्यास  तेज हो गये हैं
     मामले का खुलासा तब हुआ जब एक आर टी आई आवेदक  मोहम्मद कौशर नदीम ने अध्यक्छ  सी बी एस सी बोर्ड  से पूछा के ,पटना मुस्लिम हाई स्कूल बी.एम् .दास पटना ४ जिला  पटना को कैसे मान्यता पर्दान १९९९ में की थी, जबके, पटना मुस्लिम हाई स्कूल +२ को देश की आजाद  होने से पहले ही  १९३८ में  बिहार सरकार ने मान्यता प्रदान  की थी,
              लोक सूचना पदाधिकारी ने जहाँ एक तरफ कहता है की  पूर्वा में उस परिसर में पहले से कोई शिक्चक संसथान थी इस बात की जानकारी  सी बी एस ई दिल्ली  को नहीं थी,  वही दूसरी तरफ  प्रथम अपीलीय पराधिकार का दावा है   कि उपरोक्त स्कूल को मान्यता परदान करते समय ये शर्त रख्खी गई थी के निश्चित  समय सीमा के अन्दर स्कूल परबंधन  दुसरे बोर्ड की पढाई के कार्य  को वहां से हर हाल में हटा लेंगे,लेकिन सवाल पैदा होता है कि दो अधिकारिओं के बात में अंतर क्यों?
            इस मामले में घोटाला साफ़ दीख रहा है,कयोंके पर्थम अपीलीय परधकर ने जो लैटर आवेदक को भेजा है उसमें न तो लैटर संख्या है और न दिनांक ,जो  साफ़ तौर पर इस बात को बताती है के लैटर फर्जी तौर पर आवेदक को गुमराह और ,देश के एक  और  बरे घोटाले को दबाने के लिए किया गया  ऐसा लोगों ने मानना शुरू कर दिया है ,
  लोगों का मानना है के जब गर्बरी नहीं हुई तो ऐसी पत्र क्यों आवेदक को सचिव सह प्रथम अपीलीय पराधिकार ने आवेदक को भेजा क्यों?.
           इस पुरे परकरण में बिहार सरकार भी कम दोषी नहीं ,कयोंके उसके द्वारा  एन ओ सी  जारी किया गया था.यानी के भरष्टाचार देश में राज्य से लेकर केंद्र के शिक्षण शंस्थानो तक फैला हुवा है ,देश के शिक्षा माफियाओं का कब्ज़ा पुरे राष्ट्र में अपनी पकर इतनी मजबूत करली है कि देश के नौजवानों के भविष को चाहे ये शिक्षा माफिया जैसे चाहे वैसे तै करें.
शिक्चा कि कुँलिटी अथवा अस्तर से किसी को कोई लेना देना नहीं ,बस डिग्री थमाना बस इनलोगों लोगों का एक मात्र मकसद है,
        फर्जी पत्र भेजकर  स्कूल पर्बंधन और राज्य सरकार के शिक्चा विभाग कि मिली भगत से स्कूल पर्बंधन ने आनन् फानन  में बिहार विद्यालय परिक्चा समिति से मान्यता प्राप्त स्कूल को जल्दी बाजी में हतालिया है,जिला परशासन बे खबर कैसे है
लोंगों में इस बात कि चर्चा जोरों पर है.
      बिहार शिक्षा विभाग इसलिए भी जांच के दाएरे में आ गया है उसने पटना मुस्किम हाई स्कूल ,को अपना भब्य ईमारत होने के बावजूद  स्कूल को २६ लाख ईमारत बनाने हेतु जरी कैसे किया ? ये भी जाँच का विषय बन गया है.
                                                                                     
                                                                  
                

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