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24 मार्च 1971 से पूर्व आये तमाम बांग्लादेशी हिन्दुस्तानी शहरी ।

24 मार्च 1971 से पूर्व आये तमाम बांग्लादेशी हिन्दुस्तानी शहरी ।

मेघालय हाई कोर्ट का तारीखी फैसला ।

नयी दिल्ली ( यू एन आई )22/5/2014 .

मेघालय हाई कोर्ट ने अपने इतिहासिक फैसले में कहा है की जो बांग्लादेशी 24 मार्च 1971 से पहले हिन्दुस्तान आकर बस गए ,उन्हें हिन्दुस्तानी माना जाएगा । और उनके नाम वोटर लिस्ट में दर्ज किये जायेंगे । मेघालय हाई कोर्ट का ये फैसला उत्तर - पूर्वी राज्यों में रह रहे लाखों लोगों के लिए नजीर बन सकता है । जिन्हें बांग्लादेशी बता कर हिन्दुस्तानी शहरियत से महरूम रख्खा गया है । अदालत का ये फैसला उन 40 लोगों की दरखास्त पर सुनाया गया जिनके नाम रियासत मेघालय के रिभोई जिला के  डिप्टी कमिश्नर ने बांग्लादेशी शहरी बताते हुए वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने से इनकार कर दिया था और उन्हें बांग्लादेश भेजने का हुक्म सुना दिया था ।ये लोग आसाम मेघालय की सरहद पर स्थित  आम्जुंग गाँव के रहने वाले हैं । फाजीफ़ाज़िल जज एस आर सेन ने गुजिस्ता 15 मई को सुनाये गए फैसले में कहा है की ये बात वाजेह है जिन चालीस लोगों ने अपनी शहरियत के सिलसिले में अर्ज़ दास्त  दाखिल की थी उनके आबाओ अजदाद 24 मार्च 1971 से पहले हिन्दुस्तान आये थे और अब उन्हें इस मौका पर वापस भेजने का सवाल ही पैदा नहीं होता ।कयोंके वह वह आम्जुंग गाँव में मुश्तकिल रहने का हक हासिल कर चुके हैं । वाजेह रहे की राज सरकार ने ये अजर पेश किया था की अर्ज़ दास्त दाएर करने वाले और उनके आाओ अजदाद हिन्दुस्तान  के मुश्तकिल शहरी नहीं थे ।और इस बुनियाद पर उन्हें वापस बांग्लादेश  जाना चाहिये ।लेकिन अदालादत ने इस दलील को खारिज करते हुए राज सरकार को आदेश दिया की वह इस बात को यकीनी बनाए की उन्हें  किसी भीभी हालत में बंग्लबांग्लादेश वापस नहीं भेजा जाएगा। और केंद्र सरकार से कहा है की वह उन्हें परीशान न करे और उन्हें बसाने में बकायेदा तौर पर मदद करे । साथ ही अदालत ने रेभुई जिला की डिप्टी कमिश्नर पूजा पांडे को ये हुकम दिया की वह इन तमाम चालीस लोगों के सर्टिफिकेट और दुसरे कागजात वापस करे जो उन्होंने अपने कब्जे में लिए थे और आइन्दा चुनाव से पहले उन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में दायर करे।
वाजेह रहे की जिन चालीस लोगों ने अपनी शहरियत को लेकर ये मुक़दमा दाएर किये थे वह पैदाईश से हिन्दुस्तानी शहरी हैं और वह हिंदुस्तन की सरजमीं पर पैदा  हुए और पले बढे और उनके मोवर्रिस बरसों पहले हिन्दुस्तान आकर बस गए थे ,लेकिन बद किस्मती में उनके नाम  वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं किये गए थे और हुकूमते हिन्द ने शहरियत के जो सर्टिफिकेट उन्हें दिए थे वह जिला इंतेजामिया ने जब्त कर लिए थे ।
( उर्दू दैनिक कौमी तंजीम पटना दिनांक 22/5/14 से  )

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