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­बस अल्लाह पर यकीन है कि उसने वादा किया है कि तुम मेहनत करो फल मैं दूंगा । तुम बच्चे पैदा करो रिज्क (खोराक )मैं दूंगा ये बात हिन्दू सोंचे कि उन्हें क्या करना है ?


तुम मेहनत करो फल मैं दूंगा । तुम बच्चे पैदा करो रिज्क (खोराक )मैं दूंगा ये बात हिन्दू सोंचे कि उन्ह��

Posted on 21st Jan 2015 11:25:29



जिसे अल्लाह पैदा करेगा उसका रिज्क भी वही देगा ।



आखरी बात साक्षी गौर से सुन ले मुसलमानों को चार शादियों की इजाजत उसी अल्लाह ने दी है जिसने उसे पैदा किया है और अगर चालीस बच्चे भी देगा तो उसके रिज्क (भोजन ) का इंतजाम भी वही करेगा ।अगर हिन्दू चार या पांच बच्चे पैदा करे तो मोदी डरें या सोनिया हमें कोई फ़िक्र इसलिए नहीं के हमारे सामने हमारी अपनी मिसाल है ,हम ने या हमारे बच्चों ने कोई नाजायज कारोबार नहीं किया बस मेहनत की ।



1936 में हम लखनऊ आये तो मकान का किराया देने के लिए भी पैसों का इंतेजाम मुश्किल से होता था ,आज तो हम बिमार हैं हमारे चार बेटों में हर बेटा करोड़पति है , हमारी दो बेटियों में दोनों करोड़ों में खेल रही हैं हमारे हर बेटे और हर बेटी के पास अपना मकान और अपना कारोबार है और इस बात की गवाही हमारे हिन्दू दोस्त भी देंगे और मुसलमान भी के हमने या बेटों ने कोई हराम नही किया ....................­बस अल्लाह पर यकीन है कि उसने वादा किया है कि तुम मेहनत करो फल मैं दूंगा । तुम बच्चे पैदा करो रिज्क (खोराक )मैं दूंगा ये बात हिन्दू सोंचे कि उन्हें क्या करना है ?







हफ़ीज़ नोमानी

हिंदुओं के धर्म आचार्यों ने खुद तो संन्यास ले लिया और दूसरे हिंदुओं के बच्चों का बटवारा करने के लिए फॉर्मूले बना दिए ।

पहले उनाव के MP शाक्षी ने मेरठ में कह दिया कि चार बीवियों और चालीस बच्चों का नजरिया हिन्दुस्तान में नहीं चलेगा ये हमें नहीं मालुम के हिंदु धर्म आचार्या को उसका धर्म कितना झूठ बोलने कई इजाज़त देता है ।

मेरठ तो एक जिला है पुरे उत्तर प्रदेश में अगर साक्षी किसी मुसलमान के चालीस नहीं बीस बच्चे भी दिखा दिए तो हम उन्हें साक्षी नहीं महाराज और आचार्या जी कहने लगेंगे ।

बात सिर्फ साक्षी की नहीं बंगाल के एक गोसवामी ने भी हिंदुओं को मश्विरा दिया है कि हर हिन्दू चार नहीं पांच बच्चे पैदा करे । जब बात चारों तरफ फ़ैल गई और मुसलमानों ने इस बेवकूफी की बहस में हिस्सा नहीं लिया तो प्रवीण तोगड़िया जो पढ़े लिखे कहे जाते हैं वह इस बहस में कूद पड़े और उन्होंने जो बात कह दी जो हर हिन्दू चाहता है कि सिर्फ दो बच्चों की पैदाइश के लिए क़ानून बनाया जाए ।उसके बाद उनकी अक़्ल जवाब दे गई और उन्होंने कहा कि मुसलमान दस बच्चे पैदा कर के मुल्क को गरीब कर रहे हैं , दस का हिंदसा ऐसा है कि हम उसके लिए लड़ नहीं सकते लेकिन ये एक मुसलमान की हैसियत से हम नहीं मान सकते कि 10 बच्चे पैदा करने से मुल्क गरीब हो जाएगा ।



1947 में जब मुल्क आज़ाद हुआ तो आबादी 30 करोड़ के लगभग थी और आज़ादी के फ़ौरन बाद अमीनुद्दौला पार्क में कम्युनिस्ट पार्टी का दो दिन का कांफ्रेंस और जल्सा हुआ था उस जलसा में तेग इलाहाबादी ने एक नज्म पढ़ी थी जिसका एक शेर ये था ।

30 करोड़ इंसानों की नीलामी है नीलामी है

बोलो बोलो कितने डॉलर ,कितना गंदुम ,कितने चावल



मसला ये था कि हिन्दुस्तान की जितनी जमीन आज काश्त के लिए है जमीन तो उससे बहुत जियादा थी उस वक़्त न बड़े कारखाने लगे थे न उतनी रेलवे लाइने थीं न इतनी सड़कें थीं न उतने कॉलेज स्कूल न खेल के इतने मैदान न इतने मकान और कोठियां थीं बस उससे अंदाज कीजिये कि लखनऊ मशरिक (ईस्ट) में हजरत गंज से थोडा आगे जा कर ख़त्म हो जाता था मगरिब (वेस्ट )में चोटियाँ आखरी महल्ला था जुनूबी (south)में रेलवे स्टेशन के बाद जेल थी और शुमाल (नॉर्थ )में डॉली गंज या हसन गंज के बाद ख़त्म हो जाता था ।बाकी सब खेत थे । आज पोजीशन ये है कि चुंहट जो शहर से बाहर एक गाँव था वह आबादी के बहुत अंदर है और मगरिब में शहर की सरहद मलीहाबादी को छुने लगी है । इसी तरह शुमाल और जुनूबी का हाल है ये तो हम सिर्फ एक शहर की बात कर रहे इसी तरह हर शहर और हर गाँव हज़ारों एकड़ जमीन खा गए और आबादी 30 करोड़ से 100 करोड़ हो गई और उसके बाद भी बची हुई जमीन में ईतना पैदावार हो रहा है कि हज़ारों टन गेहू और हज़ारो टन चावल सड़ जाता है या चूहे खा जाते हैं । ये बात हम प्रवीण तोगड़िया कह रहे हैं जो कहते हैं मुसलमानों के दस बच्चे पैदा होंगे तो मुल्क गरीब हो जायेगा ।


हम जब 30 करोड़ थे और जमीन दोगुन्नी ऐसी थी जिस पर काश्त हो रही थी उस वक़्त बात ये थी के हम अमरीका के गेहू की खैरात ले या रूस के गेहूं और चावल की ?

हमारी उम्र या हम से कुछ छोटों को याद होगा कि अमेरिका से बहुत बारीक और सुर्ख रंग का गेहू आता था और वह भी राशन से मिलता था यही हाल पकिस्तान का भी था । इत्तेफाक से 1952 में हम पाकिस्तान में थे कराची में हमने देखा था कि समुन्दर के जहाजों से गेहूं उतार कर ऊंट गाड़ियों पर लाद कर लाया जा रहा है और हर ऊंट की गर्दन में एक बॉर्ड लटकाया हुआ था जिस पर लिखत था अमरीका तेरा शुक्रिया ।



यही हाल हिन्दुस्तान का था फिर जैसे जैसे आबादी गई पाक परवर दिगार ने अपने मुल्क की जमीन को ऐसा कर दिया कि 50 बरस से एक दाना न अमेरिका से आया और न रूस से और जितना गेहूं पैदा हो रहा उसे हुकूमत इसलिए खरीद रही है कि किसान के पास रखने की जगह नही है इसके बावजूद लाखों टन गल्ला मैदान में सड़ रहा है इसलिए कि उसके रखने के लिए गोदाम नहीं हैं । इसका मतलब ये नहीं है की हिन्दू भी अगर चार चार बच्चे पैदा करने शुरू कर दे तो कोई भूक से नही मरेगा और जो उन्होंने तकसीम की है कि चार में एक बच्चा सरहद पर जायेगा एक संतों को दे दो (शायद इसलिए कि संत आसाराम और उसका बेटा और हरियाणा का नटवर लाल बाबा सब जेल चले गए अब संतों की कमी पड़ गई है ) और एक को साइंस दान बना दो एक कारोबार संभाल ले ।

हम तो मुसलमान हैं हमारा ईमान है कि जिसे पैदा करता है उसे हमारा अल्लाह करता है और उसी अल्लाह ने वादा किया है कि मैं जिसे पैदा करूँगा उसका खाना मेरे जिम्मे है । हमारा ईमान है कि जिस के दस हैं उन्हें भी परवरदिगार पालेगा और जिनके एक हैं उसे भी परवरदिगार पालेगा । सबूत मौजूद है कि 65 साल पहले हम अमेरिका की ख़ैरात खाते थे और हम 130 करोड़ हैं और इतना गेहू बेकार पड़ा है कि हम अपने गरीबों को दो रूपये किलो और तीन रूपये गेहू और चावल दे रहे हैं ।



हमारे बचपन में हमारे दादा के घर हर चीज की खेती होती थी बहुत बड़ा कुम्बा था लेकिन गोश्त , सब्जी और कपड़े के अलावा बाजार से कुछ नहीं आता था सब कुछ अपने खेतों में पैदा होता था ।लेकिन 500 बीघा जमीन में बस इतना पैदा होता था के सारा कुम्बा आराम से खाता था , गेहू ,गन्ना ,अरहर ,मुंग ,मसूर ,मटर ,मकई ,जौ ,जवार ,सरसो ,कपास , आरद और भी हर चीज अपने दो बाग़ थे जो फरोख्त नही किये जाते थे और आम कोई खरीद कर नहीं खाता था ।



आज हम सब ने जमीने फरोख्त कर दी सिर्फ एक चाचा के लड़के अपने वालिद के हिस्से की जमीन में अपनी काश्त कर रहे हैं और उन्होंने ही दो भट्टे लगाये हैं । हमने खुद देखा है कि जिस तरह हमारे दादा कुम्बा परवरी करते थे उसी तरह हमारे चचाजाद भाई भी कर रहे हैं कि जो खानदान में कमजोर है उसकी भरपूर मदद और हज़ारों रूपये का गेहूं और चावल हर साल फरोख्त किया जाता है यानी जितना दादा अब्बा मई पांच सौ बीघा जमीन में पैदा होता था उतना 100बीघा जमीन में पैदा हो रहा । दादा एक रूपये का फरोख्त नही करते थे और भाई हज़ारों रूपये का फरोख्त करते हैं ।



हमारा ईमान है कि जमीन उतनी ही रहेगी और इंसान को पैदा करने वाला जमीन की पैदावार में बरकत देता रहेगा । हमें याद है कि हमारे बचपन में दादा अब्बा के खेत में एक बीघा में 6 मन गेहू एक साल पैदा हुए थे तो दूर दूर तक लोग मालुम करने आये थे कि सूफी जी आपने खेत में क्या डाला था ? (वाजेह रहे की उस वक़्त खाद का मतलब गोबर और कूड़ा हुआ करता था और दूसरे खाद तो बहुत बाद में आये हैं )दादा अब्बा ने कहा था डाला तो गोबर ही था मगर हर काम से पहले बिस्मिल्लाह बार बार पढ़ी थी । आप भी उसी पर अमल करें ।



आखरी बात साक्षी गौर से सुन ले मुसलमानों को चार शादियों की इजाजत उसी अल्लाह ने दी है जिसने उसे पैदा किया है और अगर चालीस बच्चे भी देगा तो उसके रिज्क (भोजन ) का इंतजाम भी वही करेगा ।अगर हिन्दू चार या पांच बच्चे पैदा करे तो मोदी डरें या सोनिया हमें कोई फ़िक्र इसलिए नहीं के हमारे सामने हमारी अपनी मिसाल है ,हम ने या हमारे बच्चों ने कोई नाजायज कारोबार नहीं किया बस मेहनत की ।



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उर्दू दैनिक पिन्दा

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