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JNU में नकाबपोशों का हमला, विरोध में दिल्ली-मुंबई में प्रदर्शन



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दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में रविवार शाम हिंसा हुई इस हिंसा में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष पर भी हमला हुआ.
यह हमला जेएनयू कैंपस के भीतर हुआ. टीवी रिपोर्ट्स के अनुसार नक़ाबपोश हमलावरों ने कई हॉस्टलों में जाकर हमला किया.
चश्मदीदों का कहना है कि जेएनयू कैंपस में 50 से ज़्यादा लोग घुस आए, जिन्होंने डंडे और लाठियाँ ले रखी थीं. अधिकांश ने अपने चेहरे पर कपड़े बांधे हुए थे. कैंपस में दाख़िल होते ही इन लोगों ने छात्रों पर हमला शुरू कर दिया.
इस हमले में कई छात्र ज़ख़्मी हुए हैं. दिल्ली सरकार ने कहा है कि जेएनयू कैंपस में घायल हुए छात्रों के लिए सात एंबुलेंस मौक़े पर भेजी गईं.
दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के मेन गेट पर भारी पुलिस दल तैनात कर दिये हैं. वहीं, जेएनयू के गेट के बाहर और आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं.


दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर छात्रों का विरोध प्रदर्शनइमेज कॉपीरइटPIYUSH NAGPAL/BBC
Image captionदिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर छात्रों का विरोध प्रदर्शन

इसके साथ ही जेएनयू में हुई हिंसा के विरोध में आधी रात को मुंबई में गेटवे ऑफ़ इंडिया के बाहर कई कॉलेजों के छात्रों ने प्रदर्शन किया है.
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और शिक्षकों के एक समूह ने दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता एमएस रंधावा से मुलाक़ात कर उन्हें अपनी मांगें बताईं.
इसमें छात्रों और शिक्षकों की मांग है कि घायल छात्रों को चिकित्सा सहायता दी जाए, हमलावरों को गिरफ़्तार किया जाए और कैंपस में सामान्य स्थिति बहाल की जाए.
छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को एम्स ट्रॉमा सेंटर में जाने की भी अनुमित दे दी गई है, जहां हिंसा में घायल छात्र भर्ती हैं.

हिंसा पर क्या बोला जेएनयू प्रशासन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में हुई हिंसा की जेएनयू प्रशासन ने निंदा की है.
हिंसा कैसे घटी इस पर जेएनयू रजिस्ट्रार ने बयान जारी किया है. उनका कहना है कि 1 जनवरी 2020 से विश्वविद्यालय का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ था जिसके बाद छात्रों का रजिस्ट्रेशन जारी था.
लेकिन 3 जनवरी को रजिस्ट्रेशन का विरोध कर रहा एक गुट कॉम्युनिकेशन एंड इन्फ़ॉर्मेशन सर्विसेज़ परिसर में घुस आया और इंटरनेट सर्वर को बेकार कर दिया. उन छात्रों की पहचान करने के बाद पुलिस में शिकायत की गई.
इसके बाद 4 जनवरी को फिर से रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ लेकिन इसके बाद फिर से एक छात्र समूह ने इंटरनेट के साथ-साथ बिजली की सप्लाई रोक दी. विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्र समूह ने कुछ स्कूलों की इमारत को भी बंद कर दिया.
जेएनयू प्रशासन ने आगे कहा है कि 5 जनवरी को रजिस्ट्रेशन करा चुके छात्र स्कूल बिल्डिंग में जा रहे थे जिनको रोका गया. इसके बाद 5 जनवरी की दोपहर को स्कूलों के साथ-साथ होस्टल परिसर में रजिस्ट्रेशन का विरोध करने वाले और रजिस्ट्रेशन करा चुके छात्रों में हाथापाई हुई.
प्रशासन का कहना है कि शाम 4.30 बजे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का विरोध कर रहे छात्रों के समूह ने रजिस्ट्रेशन करा रहे छात्रों को पीटा. इसके बाद नक़ाब पहने बदमाश पेरियार होस्टल के कमरों में घुसे और छात्रों पर डंडों और रोड से हमला किया.
जेएनयू प्रशासन ने आगे घटना की निंदा करते हुए कहा है कि वो उस हर छात्र के साथ खड़ा है जो शांतिपूर्ण तरीक़े से अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं.
जेएनयू प्रशासन ने कहा है कि नियमों का उल्लंघन करते हुए कैंपस के शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल को बाधित करने वालों को बख़्शा नहीं जाएगा. जेएनयू ने कहा है कि अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज की कराई गई है.


मुंबई में प्रदर्शनकारीइमेज कॉपीरइटSUPRIYA SOGLE/BBC
Image captionजेएनयू हिंसा के विरोध में मुंबई के गेटवे ऑफ़ इंडिया पर प्रदर्शन करते छात्र

गृह मंत्री ने दिए जांच के आदेश

समाचार एजेंसी पीटीआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से कहा है कि जेएनयू कैंपस में फ़्लैग मार्च किया गया है और स्थिति नियंत्रण में है. वहीं, मानव संसाधन मंत्रालय ने जेएनयू रजिस्ट्रार से कैंपस की स्थिति पर तुरंत रिपोर्ट मांगी है.
गृह मंत्रालय ने ट्वीट किया है कि गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से जेएनयू हिंसा पर बात की है और उन्हें आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. गृह मंत्री ने संयुक्त पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी से इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं और जल्द से जल्द रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट किया है, "जेएनयू में जो हुआ उसकी तस्वीरें देखीं. स्पष्ट रूप से हिंसा की निंदा करते हैं. यह पूरी तरह से विश्वविद्यालय की संस्कृति और परंपरा के ख़िलाफ़ है."
उनके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी ट्वीट किया है. उन्होंने ट्वीट में लिखा, "जेएनयू से दहला देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जिस जगह को मैं जानती हूं वो भारी बहसों और विचारों के लिए जाना जाता है न कि हिंसा के लिए. इस हिंसा की मैं निंदा करती हूं. यह सरकार जो पिछले सप्ताह पहले भी कह चुकी है, वो विश्वविद्यालयों को सभी छात्रों के लिए सुरक्षित जगह बनाना चाहती है."
एस. जयशंकर और निर्मला सीतारमण जेएनयू के पूर्व छात्र भी हैं. वहीं, हिंसक घटना के बाद जेएनयू के बाहर पहुंचे स्वराज पार्टी के नेता योगेंद्र यादव के साथ खींचातानी की गई.
बीजेपी ने ट्वीट कर जेएनयू कैंपस में हिंसा की निंदा की है. बीजेपी ने कहा, "यह अराजक ताक़तों द्वारा एक हताश प्रयास है जो छात्रों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए अपनी सिकुड़ती राजनीति को चमकाना चाहते हैं. विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा और सीखने की जगह ही बने रहना देना चाहिए."
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जेएनयू में हुई हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने सभी छात्रों से विश्वविद्यालय में शांति और उसका गौरव बरकार रखने की मांग की है.





जेएनयू कैंपस में हिंसा, कई छात्र जख़्मी

समाचार एजेंसी एएनआई ने एम्स ट्रॉमा सेंटर के हवाले से बताया है कि जेएनयू से 18 लोगों को ट्रॉमा सेंटर लाया गया है जिनके सिर में चोट थी. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी घायलों से मिलने एम्स ट्रॉमा सेंटर भी पहुंचीं. उन्होंने कहा कि एम्स में वो ऐसे छात्रों से मिली हैं जिनके सिर में चोटें आई हैं और हाथ-पैर टूटे हैं.
उनके बाद बीजेपी नेता और सांसद मनोज तिवारी और विजय गोयल भी एम्स पहुंचे.
मनोज तिवारी ने कहा कि यह घटना दुखद और निंदनीय है, इसको राजनीतिक हवा देना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि घायल छात्रों को उपचार मिलना चाहिए और दोषियों को सज़ा होनी चाहिए.
विजय गोयल ने कहा कि जेएनयू में बहुत समय से फ़ीस वृद्धि और आदि चीज़ों के नाम पर राजनीति हो रही है.
उन्होंने कहा, "वामपंथी दलों के छात्रसंघ इस तरह की राजनीति कर रहे हैं. छात्रों का रजिस्ट्रेशन करने नहीं दिया जा रहा और वामपंथी छात्रों ने वाई-फ़ाई कमरों पर क़ब्ज़ा कर लिया है. मैंने घायल छात्रों को देखा बहुत सारे छात्रों ने कहा कि उन पर हमला किया गया, कइयों की स्थिति दयनीय है."


प्रियंका गांधीइमेज कॉपीरइटANI
Image captionघायलों से मिलने एम्स पहुंचीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी

घटना का वीडियो

समाचार एजेंसी एएनआई ने हमलावरों का एक वीडियो जारी किया है. एजेंसी के अनुसार जब ये भीड़ एक हॉस्टल में घुसी तो छात्राओं को कहते सुना गया कि 'ये क्या हो रहा है? आप कौन लोग हैं? हॉस्टल से बाहर जाएं? क्या तुम हमें धमकाने आये हो.' इस वीडियो में छात्रों को नारे लगाते सुना जा सकता है: 'एबीवीपी गो बैक'.
जेएनयू के छात्रों का कहना है कि इन हमलावरों ने कैंपस में खड़ी कारें भी तोड़ी हैं.
जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष ऐशी घोष का जो वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है, उसमें उन्हें कहते सुना जा सकता है कि 'मेरे ऊपर बर्बर तरीक़े से हमला हुआ है. हमलावर नक़ाबपोश थे. देखिए कैसे ख़ून निकल रहा है. मुझे बुरी तरह से मारा गया है.'

एक-दूसरे पर आरोप

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मोहित कुमार पांडे ने फ़ेसुबक पर अपनी पोस्ट में इस हमले का इल्ज़ाम भारतीय जनता पार्टी की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पर लगाया है.
जेएनयू छात्र संघ ने भी कहा है कि 'इस हमले के पीछे एबीवीपी के गुंडों का हाथ है.' उनका दावा है कि एबीवीपी जेएनयू ने ना सिर्फ़ छात्रों, बल्कि प्रोफ़ेसरों पर भी हमला किया.
वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रेस रिलीज़ जारी कर ये दावा किया है कि इस हमले के पीछे लेफ़्ट विचारधारा वाले संगठनों (SFI, AISA और DSF) का हाथ है. एबीवीपी ने दावा किया है कि उनके संगठन के क़रीब 25 लोग घायल हुए हैं.
इस घटना पर समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा है, "दो गुटों के बीच बीते दो दिनों से तनाव था. जेएनयू प्रशासन की अनुमति के बाद आज दिल्ली पुलिस कैंपस के भीतर गई है."
सोशल मीडिया पर जेएनयू के छात्रों ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उन्हें देखकर हॉस्टलों में हुई तोड़फोड़ का अंदाज़ा लगता है.


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किसने क्या कहा?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस हमले की निंदा की है. उन्होंने ट्वीट किया है, 'जेएनयू में हिंसा की ख़बर सुनकर हैरान हूँ. छात्रों पर बर्बर हमला किया गया. पुलिस को तुरंत इस हिंसा को रोकना चाहिए और शांति बहाल होनी चाहिए. यह देश आगे कैसे बढ़ेगा अगर छात्रों को उनके यूनिवर्सिटी कैंपस में भी सुरक्षित नहीं रखा गया.'
दिल्ली के लेफ़्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल ने भी कैंपस के भीतर हुई हिंसा की निंदा की है.
उन्होंने ट्वीट किया है, "छात्रों और प्राध्यापकों के साथ हिंसा निंदनीय है. मैंने दिल्ली पुलिस को आदेश दिया है कि वो सभी संभव प्रयास करें और जेएनयू प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति पर नियंत्रण बनाएं. जो लोग हिंसा के पीछे हैं उनके ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो."
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया है, "जेएनयू में नकाबपोश हमलावरों का हमला, छात्रों और टीचरों को पीटा जाना, हैरान करने वाला है. सत्ता में बैठे फ़ासीवादी लोग बहादुर छात्रों से घबरा गए हैं. आज की हिंसा उनके डर का प्रतिबिंब है."
भारत के पूर्व गृहमंत्री पी चिंदबरम ने कहा है कि जेएनयू जैसी यूनिवर्सिटी में इतनी बड़ी संख्या में नकाबपोश घुसते हैं और छात्रों पर हमला बोलते हैं. पुलिस क्या कर रही है? दिल्ली के पुलिस कमिश्नर कहाँ हैं?
सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी ने छात्र संघ अध्यक्ष ऐशी घोष का वीडियो ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है, "ये वीडियो बताता है कि आरएसएस और बीजेपी इस देश को क्या बनाना चाहते हैं. पर हम उन्हें यह करने नहीं देंगे."
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है, "JNU में जिस तरह नक़ाबपोश अपराधियों ने छात्रों और अध्यापकों पर हिंसक हमला किया है वो बेहद निंदनीय है. इस विषय में तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक जाँच होनी चाहिए.
https://www.bbc.com/hindi/india-51000515

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