कोरोना को लेकर जिस तरीके से मीडिया ने बिमारी को भी हिन्दू मुस्तिम में बॉट दिया है उसका शिकार आज मेरा हाउस खुद हो गया ।
ईशान हमारा फ्रंट लाइनर साथी है कल इसके मुहल्ले में एक कोरोना पॉजेटिव मरीज मिला है ।
आज जैसे ही ईशान आँफिस पहुँचा फिर क्या था ऐसा हंगामा शुरु हुआ कि चंद मिनट में ही उसे ऑफिस से बाहर कर दिया वह कहता रहा कि वो दूसरे गली में रहता है और उसके गली को प्रशासन ने सील कर दिया है हमारे इलाके में कोई समस्या नहीं है लेकिन कोई सूनने को तैयार नहीं था एक साथ आमने सामने बैठने वाला ,साथ नास्ता करने वाला भी उससे ऐसा व्यवहार करने लगा कि आप सोच नहीं सकते ।
कोई गर्म पानी से स्नान करने लगा ।तो कोई ईसान जिस कुर्सी और सिस्टम पर काम करता था उससे दूरी बनाने लगा ।
इतना ही नहीं जिसके साथ ईसान आता था उस लड़की के साथ अचानक पूरे आँफिस का व्यवहर बदल गया ।ऐसी स्थिति में एक कैप्टन के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी टीम का हौसला बनाये रखना होता है भागे भागे ऑफिस पहुंचे और फिर ईशान को बगल में खड़े करके बात करना शुरु किये और आज इस संकट के दौर में मीडिया कि क्या भूमिका है और अगर मीडिया ही हिन्दू मुस्लिम करने लगे तो फिर किस नैतिक बल के सहारे हमलोग पब्लिक को फेस करे ।
आँफिस ब्याय तक सवाल कर रहा था कि सर पूरे देश में मिया सब ही तो कोरोना फैला रहा है ये सही है कि आपना ईशान ऐसा मिया नहीं है ये दीदी भी ऐसी नहीं है ।
ठिक है अपने आँफिस में पाँच मुस्लिम काम करता है तुम्ही कह रहे हो एक गड़बड़ है बाकी सब ठिक है ।
ऎसा तो अपने हिन्दू समाज में भी है ना एक दो बदमाश होता है ।
ये स्थिति है जो जहर हमलोग फैला रहे हैं कैसे आप सोच लेते हैं कि उस जहर से आप बच जायेगे ।
तब तक नगर निगम से पूरे आँफिस को सेनेटाइज करने के एक टीम पहुंच गयी आते ही कहाँ सर इस स्थिति में भी हमलोगो को चार माह से वेतन नहीं मिला है।
ईशान हमारा फ्रंट लाइनर साथी है कल इसके मुहल्ले में एक कोरोना पॉजेटिव मरीज मिला है ।
आज जैसे ही ईशान आँफिस पहुँचा फिर क्या था ऐसा हंगामा शुरु हुआ कि चंद मिनट में ही उसे ऑफिस से बाहर कर दिया वह कहता रहा कि वो दूसरे गली में रहता है और उसके गली को प्रशासन ने सील कर दिया है हमारे इलाके में कोई समस्या नहीं है लेकिन कोई सूनने को तैयार नहीं था एक साथ आमने सामने बैठने वाला ,साथ नास्ता करने वाला भी उससे ऐसा व्यवहार करने लगा कि आप सोच नहीं सकते ।
कोई गर्म पानी से स्नान करने लगा ।तो कोई ईसान जिस कुर्सी और सिस्टम पर काम करता था उससे दूरी बनाने लगा ।
इतना ही नहीं जिसके साथ ईसान आता था उस लड़की के साथ अचानक पूरे आँफिस का व्यवहर बदल गया ।ऐसी स्थिति में एक कैप्टन के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी टीम का हौसला बनाये रखना होता है भागे भागे ऑफिस पहुंचे और फिर ईशान को बगल में खड़े करके बात करना शुरु किये और आज इस संकट के दौर में मीडिया कि क्या भूमिका है और अगर मीडिया ही हिन्दू मुस्लिम करने लगे तो फिर किस नैतिक बल के सहारे हमलोग पब्लिक को फेस करे ।
आँफिस ब्याय तक सवाल कर रहा था कि सर पूरे देश में मिया सब ही तो कोरोना फैला रहा है ये सही है कि आपना ईशान ऐसा मिया नहीं है ये दीदी भी ऐसी नहीं है ।
ठिक है अपने आँफिस में पाँच मुस्लिम काम करता है तुम्ही कह रहे हो एक गड़बड़ है बाकी सब ठिक है ।
ऎसा तो अपने हिन्दू समाज में भी है ना एक दो बदमाश होता है ।
ये स्थिति है जो जहर हमलोग फैला रहे हैं कैसे आप सोच लेते हैं कि उस जहर से आप बच जायेगे ।
तब तक नगर निगम से पूरे आँफिस को सेनेटाइज करने के एक टीम पहुंच गयी आते ही कहाँ सर इस स्थिति में भी हमलोगो को चार माह से वेतन नहीं मिला है।


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