अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक ख़बर के मुताबिक़ फेसबुक इंडिया ने बजरंग दल को 'ख़तरनाक संगठन' मानने से इसलिए इनकार कर दिया था क्योंकि इससे उसके कर्मचारियों पर हमला हो सकता था और उसका कारोबार प्रभावित हो सकता था.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने ख़बर अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखी है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक बजरंग दल को ख़तरनाक संगठन में शामिल करने की मांग जून में दिल्ली के बाहर एक चर्च पर हमले के बाद से उठी थी.
बजरंग दल के सदस्यों ने इसकी जिम्मेदारी ली थी. हमला करने वालों का दावा था कि वो चर्च हिंदू मंदिर की जगह बनाया गया है.
अख़बार के मुताबिक रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि फेसबुक ने सनातन संस्था और श्री राम सेना पर प्रतिबंध के ख़तरे का भी ज़िक्र किया है.
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फेसबुक की सेफ्टी टीम इस साल की शुरुआत में इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि बजरंग दल पूरे भारत में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा का समर्थन करता है और एक ख़तरनाक संगठन माना जा सकता है. हालांकि, फेसबुक इंडिया ने इस सलाह को खारिज कर दिया थ.
अख़बार के मुताबिक वॉल स्ट्रीट जनरल ने फेसबुक प्रवक्ता एंडी स्टोन के हवाले से लिखा था कि बजरंग दल की वजह से उनके कर्मचारियों और कारोबार को मुश्किल हो सकती है और इसको लेकर चर्चा हुई थी. यह स्टैंडर्ड प्रक्रिया का हिस्सा था.
प्रतीकात्मक तस्वीर
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक न्यूज़ चैनल की वीडियो क्लिप शेयर की है जिसमें वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट दिखाई जा रही है. राहुल गांधी ने लिखा है, ''बीजेपी-आरएसएस के भारत में फेसबुक को नियंत्रित करने की एक और पुष्टि.''
वहीं, फेसबुक ने किसी राजनीतिक पार्टी के प्रति पक्षपात से इनकार किया है. फेसबुक के प्रवक्ता ने टीओआई से कहा है, ''हम अपनी ख़तरनाक संगठनों और व्यक्तियों की नीति बिना किसी राजनीतिक पक्ष या पार्टी से जुड़ाव के लागू करते हैं.''
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा है कि संगठन वॉल स्ट्रीट जर्नल के ख़िलाफ़ उसे बदनाम करने के लिए क़ानूनी कार्यवाही करेगा. बजरंग दल और वीएचपी संघ परिवार का हिस्सा है.
जियो का आरोप, उसके ग्राहकों को भड़का रहेएयरटेल-वोडाफ़ोन
बिज़नेस स्टैंडर्ड की ख़बर के मुताबिक, कृषि क्षेत्र से जुड़े 'तीन नए विवादित कानूनों के विरोध में' जारी किसान आंदोलन, टेलीकॉम कंपनियों के टकराव में बदलता नज़र आ रहा है.
ख़बर में कहा गया है कि ''रिलायंस जियो ने दूरसंचार नियामक से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाते हुए आरोप लगाया है कि प्रतिस्पर्धी कंपनियां- भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया किसानों के समर्थन की आड़ में अपने नेटवर्क से जोड़ने के लिए जियो के उपयोगकर्ताओं को बहला-फुसला रही हैं.''
ख़बर में ये भी कहा गया है कि नए कृषि कानूनों के विरोध में लगातार जारी प्रदर्शनों के बीच किसानों ने जियो के उत्पादों का बहिष्कार करने का फ़ैसला किया है.
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई को लिखे पत्र में जियो ने कहा है कि ''भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया दोनों कंपनियां मौजूदा किसान आंदोलन को भुनाने के लिए 'अनैतिक' और 'प्रतिस्पर्धी विरोधी' मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी अभियान चला रही थीं.
ख़बर के अनुसार, जियो ने कहा कि ''दोनों कंपनियां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रिलायंस जियो के कृषि क़ानूनों का अनुचित लाभार्थी होने के आरोपों और झूठी अफ़वाहों को आगे बढ़ाने में शामिल हैं.''
जियो ने अपने पत्र में कहा, ''एयरटेल और वोडाफोन आइडिया अपने कर्मचारियों, एजेंटों और खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से एक 'शातिर' और 'विभाजनकारी' अभियान आगे बढ़ा रही हैं. ये कंपनियां नंबरों को पोर्ट कराने जैसे मामूली फ़ायदे के लिए जान-बूझकर रिलायंस जियो को किसानों के ख़िलाफ़ बताकर और खुद को किसान हितैषी के रूप में पेश करके कंपनी को बदनाम कर रही हैं. साथ ही साथ सरकार के विरोध को जानबूझकर हवा भी दे रही हैं.''
किसान आंदोलन कई राज्यों में तेज़ हुआ
किसान-आंदोलन में महिलाएं भी अपना योगदान दे रही हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक, किसान यूनियनों ने अपना मौजूदा प्रदर्शन पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में तेज़ कर दिया है.
सोमवार को किसान के प्रदर्शन और उपवास पर बैठने की वजह से कुछ जगहों पर कई घंटों तक जाम रहा. राजस्थान और दिल्ली को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-8 सबसे अधिक प्रभावित हुआ.
पंजाब और हरियाणा में किसानों ने सरकारी दफ्तरों का घेराव किया जहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर सड़कों पर निकले.
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक अन्य ख़बर के मुताबिक, किसानों के प्रदर्शन से आर्थिक मोर्चे की बेहतरी पर बुरा असर पड़ सकता है.
भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई का कहना है कि ''अर्थव्यवस्था को वृद्धि की राह पर लाने की चुनौती के बीच हम सभी अंशधारकों से आग्रह करते हैं कि वे मौजूदा विरोध-प्रदर्शन के बीच कोई रास्ता ढूंढे और आपसी सहमति के समाधान पर पहुंचें.''
सीआईआई का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन के दौरान सप्लाई चेन पहले ही बुरी तरह प्रभावित है और अब जब इसमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा था, किसान आंदोलन की वजह से इस पर दोबारा बुरा असर पड़ सकता है.
'बिहार में 40 फीसदी महिलाएं हिंसा की शिकार'
हिंदुस्तान की ख़बर के मुताबिक, भारत के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) से हैरान-परेशान करने वाले नतीजे मिले हैं.
सर्वेक्षण के नतीजों के मुताबिक, बिहार में लगभग 40 प्रतिशत महिलाओं को अपने पति के हाथों शारीरिक और यौन हिंसा झेलना पड़ी.
एनएफएचएस ने अपने सर्वेक्षण में पाया कि महिलाओं के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा के मामलों में पांच राज्यों में सबसे बुरा हाल हैं. ये राज्य हैं- बिहार, कर्नाटक, असम, मिजोरम, तेलंगाना.
इस प्रकार पांच राज्यों में 30 प्रतिशत से अधिक महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हैं.
ख़बर में कहा गया है कि कोरोना वायरस और लॉकडाउन से पैदा हुए हालात में भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा बढ़ी है.
यह सर्वेक्षण पूरे भारत में 6.1 लाख घरों में किया गया जिसमें महिलाओं से बात करके जनसंख्या, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और पोषण संबंधी मानकों के बारे में जानकारी जुटाई गई.
कोरोना की वैक्सीन के लिए पहले कराना होगा रजिस्ट्रेशन
दैनिक जागरण में छपी ख़बर के मुताबिक, केंद्र सरकार ने राज्यों को जारी टीकाकरण निर्देशों में कहा है कि हर केंद्र पर प्रतिदिन 100 लोगों को कोरोना वैक्सीन दी जाएगी जिसके लिए उन्हें पहले से रजिस्ट्रेशन कराना होगा.
दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि प्राथमिकता के आधार पर पहले 3 करोड़ लोगों के टीकाकरण की तैयारी हो रही है जिसमें कोरोना मरीज़ों के इलाज और देखभाल से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी.
टीकाकरण के लिए पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा और इसके लिए मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, पेंशन समेत 12 तरह के सरकारी दस्तावेज़ों में से किसी एक अनिवार्य रूप से आवश्यकता होगी.
टीकाकरण के लिए 50 साल और उससे अधिक आयु के लोगों की पहचान करने में लोकसभा और विधानसभा चुनावों की नवीनतम मतदाता सूची की मदद ली जाएगी.
ख़बर में दावा किया गया है कि भारत में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ कम से कम आठ वैक्सीन पर काम चल रहा है और उनमें से तीन-चार वैक्सीन जल्द उपलब्ध हो सकती हैं.










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