कुत्तों के लिए प्रदर्शन करने उतरे लोगों को अंदाज़ा नहीं होगा कि उनका सामना सरकार से ज़्यादा समाज से होगा। उनके प्रदर्शन के ग़ैर राजनीतिक और सीमित होने को लेकर बहुत बातें हो रही हैं। कहा जा रहा है कि ये लोग कभी राजनीतिक मुद्दों पर नहीं बोलते हैं। यह बहस बहुत बड़ी हो गई है, इतनी कि कुत्ते पीछे छूट गए हैं।आज जिस स्तर पर संस्थाएं ढहा दी गई हैं, अत्याचार का स्केल इतना बड़ा हो गया है कि जो लोग बोलते हैं वे भी सभी मुद्दों पर नहीं बोल पाते। यह लड़ाई बोलने वालों के बीच भी है कि इस पर नहीं बोला, उस पर नहीं बोला लेकिन इस बार लड़ाई कुत्तों के लिए उतरने वाले प्रेमियों से हो गई है। उम्मीद है आप इस वीडियो को देखेंगे और अपने कमेंट के ज़रिए इस बहस को समृद्ध करेंगे।
"बक्श देता है 'खुदा' उनको, ... ! जिनकी 'किस्मत' ख़राब होती है ... !! वो हरगिज नहीं 'बक्शे' जाते है, ... ! जिनकी 'नियत' खराब होती है... !!"
सिमरन प्रजापति with Rekha Vinod Jain and 4 others Mon · क्या खुब लिखा है किसी ने ... "बक्श देता है 'खुदा' उनको, ... ! जिनकी 'किस्मत' ख़राब होती है ... !! वो हरगिज नहीं 'बक्शे' जाते है, ... ! जिनकी 'नियत' खराब होती है... !!" न मेरा 'एक' होगा, न तेरा 'लाख' होगा, ... ! न 'तारिफ' तेरी होगी, न 'मजाक' मेरा होगा ... !! गुरुर न कर "शाह-ए-शरीर" का, ... ! मेरा भी 'खाक' होगा, तेरा भी 'खाक' होगा ... !! जिन्दगी भर 'ब्रांडेड-ब्रांडेड' करने वालों ... ! याद रखना 'कफ़न' का कोई ब्रांड नहीं होता ... !! कोई रो कर 'दिल बहलाता' है ... ! और कोई हँस कर 'दर्द' छुपाता है ... !! क्या करामात है 'कुदरत' की, ... ! 'ज़िंदा इंसान' पानी में डूब जाता है और 'मुर्दा' तैर के दिखाता है ... !! 'मौत' को देखा तो नहीं, पर शायद 'वो' बहुत "खूबसूरत" होगी, ... ! "कम्बख़त" जो भी ...
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