जजों का गिरता सम्मान, क्या होगा इसका परिणाम


अपडेटेड 

26/05/202



09/05/2026
क्या पश्चिम बंगाल की राजनीति सिर्फ एक राज्य की लड़ाई नहीं… बल्कि भारतीय लोकतंत्र के भविष्य का संकेत है?

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#Dilse_with_Kapil_sibal 


 03/05/2026
जजों 
#judiciary 



8.01.2026

दिल्ली दंगों के केस में अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। इस मामले में गिरफ़्तार कुछ आरोपियों को तीन साल, चार साल में ज़मानत मिल गई लेकिन सात लोगों को पाँच साल से अधिक समय तक इंतज़ार करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने सात में से पाँच को ज़मानत दी है। मगर उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को ज़मानत नहीं दी। कोर्ट ने उमर और शरजील को बाकी से अलग कर दिया  और कहा कि इन दोनों की केंद्रीय भूमिका लगती है। लंबे समय तक यह सवाल कानून के गलियारे में गूंजता रहेगा कि एक ही मामले में सभी को ज़मानत दी गई और वह भी पाँच पाँच साल बाद। लेकिन दो लोगों को ज़मानत नहीं दी गई। उम्मीद है आप इस वीडियो को पूरा देखेंगे। यह 2026 का तीसरा वीडियो है।




“ये देश के खिलाफ़…” दिल्ली पुलिस ने किया Umar Khalid और दूसरों की बेल का विरोध, Update


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Umar Khalid Bail Reject होने पर Kapil Sibal ने Supreme Court, High Court पर उठाए सवाल? Delhi Riots

राज्यसभा सांसद और मशहूर वकील कपिल सिब्बल ने दिल्ली दंगा केस में उमर खालिद की जमानत याचिका रद्द होने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केस की बारीकियों का जिक्र करते हुए क्या-क्या कहा, सुनिए।

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जिस मामले में पाँच साल से ट्रायल शुरू नहीं हुई है उस मामले में आज एक बार फिर बेल ख़ारिज कर दी गई भीमा कोरेगाँव के बाद दिल्ली दंगे का मामला दूसरा ऐसा बड़ा उदाहरण बन गया है जहां बेल नहीं देने को एक कला बना दिया गया है। दिल्ली दंगों की बेल की याचिका बहुत सी अदालतों के गलियारों के चक्कर काटकर आज फिर से उसी रास्ते पर खड़ी हो गई है जहां से बेल का रास्ता बहुत दूर नज़र आता है। आज दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशां फातिमा, अथर ख़ान, ख़ालिद सैफ़ी, मोहम्मद सलीम ख़ान, शिफा ऊर रहमान, मीरन हैदर और शादाब अहमद की बेल याचिका ख़ारिज कर दी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि सिर्फ़ जेल में देर तक रहने के आधार पर बेल नहीं दी जा सकती है। आज तक इस मामले में ट्रायल नहीं शुरू हुई है। क्या किसी को यह बात परेशान नहीं करती है कि इन लोगों को बिना क़सूर साबित किए और कितने दिन तक जेल में रखा जाएगा? अदालत के सामने आज सिर्फ़ इन नौ लोगों के मामले का सवाल ही नहीं है। ऐसे बहुत से सवाल भारत की न्यायपालिका का मुंह ताक रहे हैं। मगर लगता है कि सारे सवालों को दिल्ली और गुरुग्राम की बारिश में बहा दिया गया है।

नोट- आज कल AI के इस्तेमाल से मेरी आवाज़ और तस्वीर का इस्तेमाल कर कई सारे चैनल बना दिए गए हैं। लेकिन इनमें से कोई भी मेरा चैनल नहीं है। प्लीज़ आप सतर्क हो जाएं। मेरे तीन ही चैनल हैं जिनके लिंक यहां दे रहा हूँ। 


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क्या उमर खालिद का गुनाह उसका मुसलामान होना है? 





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दिल्ली दंगों से जुड़े केस में हाईकोर्ट ने बड़ा फ़ैसला सुनाया।


Umar Khalid और Sharjeel Imam की ज़मानत याचिकाएँ खारिज कर दी गईं।
“All appeals are dismissed” — कोर्ट के इस फ़ैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।







In this report, we break down what the High Court said, what it means for the accused, and how this impacts the larger debate on justice and dissent in India.

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बेबाक़ भाषा के दो टूक कार्यक्रम में पत्रकार भाषा सिंह चर्चा कर रही हैं दिल्ली हाई कोर्ट के उस फ़ैसले की जिसमें बग़ैर सुनवाई, बग़ैर चार्जशीट पिछले पाँच साल से जेल में बंद उमर ख़ालिद, शरजील इमाम, गुलफ़िशा फातिमा समेत कुल नौ CAA-विरोधी छात्रों, कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों को एक बार फिर से ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया। कैसे यह क़ानून की हर मान्यता, परंपरा व नजरिये के उलट है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल का आईना है।
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