18.11.2025
दिल्ली धमाका करने Dr Umar का आख़िरी Video Viral, हमले को लेकर बड़ा खुलासा
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श्री
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अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी की डॉक्टर शाहीन सईद के घर वालों ने क्या बताया?

- सैयद मोज़िज़ इमाम
- बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से
पुलिस ने फ़रीदाबाद की अल-फ़लाह मेडिकल यूनिवर्सिटी से कश्मीर के डॉक्टर मुज़म्मिल शकील गनाई और लखनऊ की डॉक्टर शाहीन सईद को गिरफ़्तार किया है.
अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉक्टर भूपिंदर कौर आनंद ने 12 नवंबर को एक बयान जारी किया.
उनके मुताबिक़, "हमें पता चला है कि जाँच एजेंसियों ने हमारे विश्वविद्यालय के दो डॉक्टरों को हिरासत में लिया है. उनका विश्वविद्यालय से केवल आधिकारिक संबंध था. हम पूरी तरह जाँच में सहयोग कर रहे हैं."
यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में चल रहे संयुक्त ऑपरेशन का हिस्सा है.
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Date 12.11.25
CCTV से सामने Dr. Umar का चेहरा , घबरा कर किया धमाका या थी सुनियोजित साज़िश? Latest Details
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दिल्ली में धमाके से पहले गिरफ़्तार हुए तीन डॉक्टरों के बारे में अब तक क्या पता है?

- सैयद मोज़िज इमाम
- बीबीसी संवाददाता
- माजिद जहांगीर
- बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
दिल्ली में 10 नवंबर की शाम को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक कार में हुए धमाके से कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई थी. कई लोग घायल हैं.
इस धमाके से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया. वहीं कुछ और लोगों को हिरासत में भी लिया गया है.
इन गिरफ़्तार लोगों में तीन ऐसे भी हैं जो पेशे से डॉक्टर हैं. इस ऑपरेशन पर फ़रीदाबाद के पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा, " ये 15 दिनों के संयुक्त ऑपरेशन का नतीजा है और ये ऑपरेशन जारी है."
हालाँकि पुलिस ने इन गिरफ़्तारियों का दिल्ली कार धमाके से कोई लिंक होने के बारे में कुछ नहीं कहा है.
दिल्ली धमाके की जांच अब एनआईए को सौंप दी गई है.
पुलिस का ऑपरेशन जारी
जम्मू-कश्मीर पुलिस की कार्रवाई मंगलवार को भी जारी रही. पुलिस की एक टीम ने राजधानी दिल्ली से सटे फ़रीदाबाद से गिरफ़्तार किए गए अभियुक्त के कार्यस्थल पर लोगों से पूछताछ की है.
वहीं, सहारनपुर और लखनऊ में भी तलाशी अभियान जारी है.
फ़रीदाबाद पुलिस के मुताबिक, अल फलाह यूनिवर्सिटी में और फ़रीदाबाद के कई क्षेत्रों में करीब 800 पुलिसकर्मी तलाशी अभियान में शामिल हैं. लेकिन पुलिस ने किसी को डिटेन या अरेस्ट नहीं किया है. अल-फलाह और आस-पास के लोगों से पूछताछ जारी है.
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हालाँकि, दिल्ली में धमाके से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 10 नवंबर को दावा किया था कि उन्होंने सात लोगों को गिरफ़्तार किया है. पुलिस का दावा है कि ये लोग प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद से जुड़े हुए थे. लेकिन इन गिरफ़्तारियों पर अभियुक्तों के परिजन सवाल खड़े कर रहे हैं.
इस बीच, सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टर अदील, डॉक्टर मुज़म्मिल शकील और शाहीन सईद के बीच कोई नेटवर्क लिंक तो नहीं है.

डॉक्टर उमर नबी पर शक, परिवार हैरान
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दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले डॉक्टर डॉ. उमर नबी को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार धमाके का मुख्य संदिग्ध बताया जा रहा है.
इस पर उनके परिवार ने हैरानी जताई है और कहा है कि डॉक्टर उमर निर्दोष हैं और वह पिछले कई महीनों से अपने काम में व्यस्त थे.
जांच एजेंसियों के अनुसार, 34 वर्षीय डॉक्टर नबी वही व्यक्ति हैं जो कथित तौर पर सफेद रंग की हुंडई आई20 कार चला रहे थे, जो लाल किला मेट्रो स्टेशन की पार्किंग के पास धमाके से उड़ गई.
बीबीसी इस दावे की पुष्टि नहीं करता है.
जांचकर्ताओं का कहना है कि धमाके में इस्तेमाल हुई कार और हरियाणा के फ़रीदाबाद में पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल के बीच संभावित कड़ी मिल रही है. फ़रीदाबाद में हाल ही में पुलिस ने बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की थी, पुलिस जिसकी जांच अब दिल्ली धमाके से जोड़कर कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में डॉक्टर उमर नबी का नाम जैश-ए-मोहम्मद और अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद जैसे चरमपंथी संगठनों से जुड़े इंटर-स्टेट नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है. हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी आधिकारिक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है.
परिवार में उनकी भाभी मुजम्मिला का कहना है कि शुक्रवार को नबी से बात हुई थी.
उन्होंने कहा कि उनके पति, सास और देवर को पुलिस साथ ले गई है. बाद में पुलिस ने नबी के पिता को भी हिरासत में ले लिया है.
उत्तर प्रदेश में सहारनपुर से गिरफ़्तारी

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, 7 नवंबर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से डॉक्टर अदील अहमद राथर को गिरफ़्तार किया गया. राथर के आधार कार्ड में अनंतनाग का पता लिखा है. यह गिरफ्तारी सहारनपुर के अंबाला रोड स्थित फेमस हॉस्पिटल से हुई.
डॉक्टर अदील पर चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने के आरोप हैं. डॉक्टर अदील जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग ज़िले के रहने वाले हैं. पुलिस का कहना है कि उन्होंने अनंतनाग में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पर्चे लगाए थे.
पुलिस का कहना है कि जाँच के दौरान श्रीनगर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें वह पोस्टर चिपकाते हुए नज़र आए. इसी फुटेज के आधार पर उन्हें सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया.
पुलिस के मुताबिक, डॉक्टर अदील करीब तीन साल से सहारनपुर में रह रहे थे. वह मानकमऊ इलाके में एक निजी स्कूल के पास किराए के मकान में रहते थे. इस दौरान उन्होंने वी-ब्रोस और फेमस मेडिकेयर हॉस्पिटल में नौकरी की थी. इससे पहले वे अनंतनाग स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर थे.
वे 24 अक्तूबर 2024 तक जीएमसी अनंतनाग में कार्यरत थे. यूपी पुलिस ने सहारनपुर के हॉस्पिटल में पहुँचकर उनके रिकॉर्ड की जांच की और कर्मचारियों से पूछताछ की. पुलिस की जाँच में पता चला कि अदील का अंबाला रोड स्थित एक्सिस बैंक में खाता है.
डॉक्टर अदील की शादी 4 अक्तूबर 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुई थी. वे 26 सितंबर को छुट्टी पर गए थे और स्टाफ के कुछ लोगों को उन्होंने शादी का कार्ड भी दिया था. अदील की गिरफ्तारी के बाद अस्पताल प्रशासन ने उनकी नेम प्लेट हटा दी है.

अस्पताल का क्या कहना है?

फेमस मेडिकेयर हॉस्पिटल के प्रबंधक मनोज मिश्रा ने कहा, "जनवरी-फरवरी 2025 में अस्पताल में फिजीशियन का पद खाली था, जिस पर मार्च में अदील की नियुक्ति हुई. गिरफ्तारी के बाद अस्पताल ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं."
स्थानीय पुलिस जांच पड़ताल कर रही है लेकिन कुछ भी कहने से बच रही है. सहारनपुर के एसपी सिटी व्योम बिंदल ने मीडिया से कहा, "यह मामला जम्मू-कश्मीर पुलिस का है और यूपी पुलिस ने केवल सहयोग किया है."
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सहारनपुर में अदील किन लोगों के संपर्क में थे. इससे पहले डॉक्टर अदील अहमद राथर सहारनपुर में वी ब्रोस हॉस्पिटल में भी काम करते थे.
वहाँ की प्रशासक डॉक्टर ममता वर्मा ने कहा, "यहाँ डॉक्टर अदील ने लगभग चार महीने तक अपनी सेवाएं दी थीं. उन्होंने मेडिसिन विशेषज्ञ के पद पर कार्य किया था."
इस अस्पताल को 28 फ़रवरी को छोड़कर वह फ़ेमस हॉस्पिटल चले गए थे.
उनके साथ काम करने वाले लोगों ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि अदील अहमद राथर ने कहा था कि उनकी मंगनी हो चुकी है और उनकी मंगेतर भी डॉक्टर हैं जो जम्मू-कश्मीर की ही हैं.
वहीं उनके एक सहकर्मी डॉक्टर ने बताया कि उन्हें मेडिकल की बहुत अच्छी जानकारी थी और इसी बात को लेकर कई बार चर्चा भी होती थी. लेकिन निजी संपर्क बहुत कम था.
डॉक्टर कहाँ रहते थे, इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है. हालाँकि उनके साथ काम करने वालों ने बताया कि वे ऑटो से अस्पताल आते थे और खाना ऑनलाइन ऑर्डर किया करते थे.
हरियाणा के फ़रीदाबाद से गिरफ़्तारी
हरियाणा के धौज में अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले डॉक्टर मुज़म्मिल शकील को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.
इस संयुक्त अभियान में पुलिस ने दावा किया कि डॉक्टर मुज़म्मिल शकील के पास से आपत्तिजनक सामग्री मिली है.
डॉक्टर मुज़म्मिल की गिरफ्तारी 30 अक्तूबर को हुई थी. पुलिस का कहना है कि जाँच में सामने आया कि उनके किराये के मकान में विस्फोटक सामग्री छिपाई गई थी.
फ़रीदाबाद के पुलिस आयुक्त सतेंद्र गुप्ता ने कहा, "मुज़म्मिल अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाते थे. इनके पास से एक किर्निकोव राइफ़ल, एक पिस्टल और टाइमर बरामद किया गया है."
पुलिस के मुताबिक एक कार शाहीन सईद के नाम पर पंजीकृत मिली है. इसके बाद शाहीन को भी हिरासत में लिया गया.
सतेंद्र गुप्ता ने कहा, "360 किलो ज्वलनशील पदार्थ बरामद किया गया है, लेकिन यह आरडीएक्स नहीं है."
वहीं डॉक्टर मुज़म्मिल की मां नसीमा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो हमें दूसरों से पता चला. हमने उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने हमें मिलने नहीं दिया."
मुज़म्मिल की गिरफ्तारी के बाद फ़रीदाबाद से महिला डॉक्टर शाहीन सईद को हिरासत में लिया गया है. पुलिस के मुताबिक मुज़म्मिल के पास मिली कार शाहीन की बताई जा रही है.
हालाँकि पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलवामा में डॉक्टर मुज़म्मिल के भाई आज़ाद शकील ने कहा कि उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं. वह पिछले तीन सालों से दिल्ली में डॉक्टर हैं. उन्होंने कहा कि 'उन्हें भाई से मिलने नहीं दिया जा रहा है. वह साल में दो बार घर आते थे.'

लखनऊ कनेक्शन की जांच
फ़रीदाबाद से हिरासत में ली गई शाहीन सईद के लखनऊ स्थित घर पर पुलिस ने मंगलवार को जाँच-पड़ताल की है.
लखनऊ में डॉक्टर शाहीन सईद का परिवार लाल बाग के खंडारी बाज़ार में रहता है. उनके दो भाई हैं. बड़े भाई शोएब सईद अपने पिता के साथ रहते हैं, वहीं परवेज़ सईद आईआईएम के मड़ियांव इलाके के पास रहते हैं.
उनके पिता सईद अहमद अंसारी ने कहा, "मेरे तीन बच्चे हैं. शाहीन सईद दूसरे नंबर की हैं. उन्होंने एमबीबीएस और एमडी इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज से किया है."
सईद अहमद अंसारी ने कहा, "मुझे यक़ीन नहीं हो रहा है जैसा (ग़ैर क़ानूनी काम) आप बता रहे हैं... मुझसे अभी तक पुलिस ने कोई संपर्क नहीं किया है."
शाहीन सईद के भाई परवेज़ अंसारी के घर की भी पुलिस ने सहारनपुर और लखनऊ में तलाशी ली है. यूपी एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शाहीन सईद के पिता के घर की भी 11 नवंबर को तलाशी ली है.
सईद अंसारी ने बताया कि परवेज़ से हर हफ्ते बात होती है. वह इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं. वहीं सईद अहमद का कहना है कि उनकी शाहीन से एक महीने पहले बात हुई थी और डेढ़ साल पहले मुलाक़ात हुई थी.
उनके एक पड़ोसी ने नाम न ज़ाहिर करने पर बताया, "शाहीन सईद कई साल से यहाँ नहीं रहती हैं. उनका बहुत कम आना-जाना था."

पहले गिरफ्तारी बाद में धमाके, उठ रहे हैं सवाल
दरअसल जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया है कि वह एक नेटवर्क पर काम कर रही थी. यह संयुक्त अभियान उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस के सहयोग से चलाया गया. जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, "यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही निगरानी और ख़ुफ़िया सूचनाओं के आधार पर की गई."
पुलिस का दावा है कि जाँच में पता चला कि यह मॉड्यूल जम्मू-कश्मीर के बाहर सक्रिय होकर आतंकवाद के समर्थन में प्रचार करने, युवाओं को भड़काने और आतंकी गतिविधियों के लिए लॉजिस्टिक जुटाने का काम कर रहा था.
कश्मीर पुलिस का दावा है कि छापों के दौरान कई डिजिटल उपकरण, पोस्टर और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स बरामद किए गए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि अभियुक्त प्रतिबंधित संगठनों की विचारधारा का प्रसार कर रहे थे.
इस मामले में ग़ैरक़ानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम यानी यूएपीए की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
भूटान के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली ब्लास्ट की घटना पर कहा कि 'धमाके की साज़िश रचने वालों को नहीं छोड़ा जाएगा. सभी ज़िम्मेदार लोगों को कड़ी सज़ा मिलेगी.'
वहीं, विपक्ष ने केंद्र सरकार को इस घटना पर घेरा है. कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर लिखा, ''राष्ट्र की राजधानी दिल्ली में बम धमाके में 13 लोग मारे गए. कल ही फ़रीदाबाद में 360 किलो विस्फोटक पकड़ा गया. वह वहां तक आया कैसे, कितनी बड़ी अनहोनी हो सकती थी.''
उन्होंने कहा, ''अभी मुश्किल से 7 महीने पहले पहलगाम में नृशंस आतंकी हमला हुआ था.अब दिल्ली में यह हुआ है - किसकी ज़िम्मेदारी है? कहाँ हैं गृह मंत्री? कहाँ हैं प्रधानमंत्री?''
विशेष इनपुट: श्रीनगर से माजिद जहाँगीर
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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दिल्ली धमाका: अब तक नहीं मिले इन चार सवालों के जवाब

दिल्ली के लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके की जांच के लिए मंगलवार सुबह से ही जांचकर्ताओं और अधिकारियों की टीम घटनास्थल पर मौजूद है और जांच जारी है.
सोमवार शाम को पुरानी दिल्ली स्थित लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के पास एक धमाका हुआ जिसमें आठ लोगों के मारे जाने की पुष्टि की जा चुकी है.
इसके फ़ौरन बाद पुलिस और जांच एजेंसियां घटनास्थल पर पहुंच गईं.
गृह मंत्री अमित शाह ने भी घटनास्थल का दौरा किया. फ़ोरेंसिक अधिकारियों ने घटनास्थल से सैंपल इकट्ठा कर उन्हें जांच के लिए लैब भेजा है.
लेकिन अब तक चार ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मिलने बाक़ी हैं.
पहला सवाल- विस्फोट कैसे हुआ?

दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने धमाके के बारे में जानकारी देते हुए मीडिया से कहा, "इस धमाके से आस-पास की गाड़ियों को भी क्षति हुई. जैसे ही इसकी सूचना मिली दिल्ली पुलिस, एफ़एसएल, एनआईए और एनएसजी की टीमें घटनास्थल पर आ चुकी हैं और हालात का जायज़ा ले रही हैं. इस धमाके की जांच की जा रही है और जल्दी ही इसका आकलन करके इसके बारे में बताया जाएगा."
लेकिन कार में धमाके की वजह के बारे में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.
ये विस्फ़ोट कैसे हुआ? क्या कार में पहले से कोई विस्फ़ोटक सामग्री रखी हुई थी या बम रखा हुआ था? क्या कार के फ़्यूल टैंक या सीएनजी टैंक में धमाका हुआ जिससे बाक़ी गाड़ियां भी चपेट में आ गईं? क्या कार में सवार लोगों को पहले से कोई जानकारी थी? इसके बारे में अब तक कुछ साफ़ नहीं हुआ है.
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दूसरा सवाल- क्या यह 'टेरर अटैक' था?

हमले को लेकर पुलिस प्रशासन ने साफ़ तौर पर कोई बयान नहीं दिया है. हालाँकि दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि घटना की जाँच कई एजेंसियां कर रही हैं.
फ़ोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के अधिकारी मोहम्मद वाहिद ने पत्रकारों से कहा, "घटनास्थल से इकट्ठा सैंपल लैब भेजे जा रहे हैं. उसके बाद ही हमें और जानकारी मिलेगी. सैंपल परीक्षण के बाद ही हम किसी नतीजे पर पहुंच पाएंगे."
धमाके को लेकर मीडिया में कई तरह की बातें की जा रही थी. कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से ये भी दावा किया गया था कि धमाका सीएनजी के कारण हुआ है, हालाँकि पुलिस ने इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा था.
हालांकि मंगलवार सुबह दिल्ली नॉर्थ के डीसीपी राजा बंथिया ने मीडिया से कहा, "दिल्ली धमाके में यूएपीए, एक्सप्लोसिव एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. फ़ोरेंसिक विशेषज्ञ, एफ़एसएल की टीम और दूसरी विशेषज्ञ टीमें भी घटनास्थल पर मौजूद हैं. हम सभी सबूत इकट्ठा कर रहे हैं."
तीसरा सवाल- कार का मालिक कौन?

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घटना के बारे में जानकारी देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने बताया, "सोमवार शाम क़रीब सात बजे दिल्ली में लाल क़िले के पास सुभाष मार्ग ट्रैफ़िक सिग्नल पर आई-20 ह्युंडई गाड़ी में एक ब्लास्ट हुआ. ब्लास्ट के कारण आसपास की कुछ गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं और कुछ लोगों के घायल होने का समाचार है. प्राथमिक सूचना जो मिली है, उसमें कुछ लोग हताहत भी हुए हैं."
इस कार के बारे में अब तक कोई साफ़ जानकारी निकल कर सामने नहीं आई है. कार का मालिक कौन था? कार कहां से आ रही थी? कहां जा रही थी? कार में कितने लोग सवार थे और धमाके में कार में सवार कितने लोग मारे गए, इस बारे में साफ़ साफ़ कुछ भी नहीं पता है.
जांच अधिकारी कार के मूवमेंट्स का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. जहां धमाका हुआ क्या कार उसी इलाके के आसपास बहुत पहले से खड़ी थी, इसका भी जवाब अभी प्रशासन के पास नहीं है. कहा जा रहा है कि ये कार एक पार्किंग में खड़ी थी और धमाके से थोड़ी देर पहले ही धीरे-धीरे बढ़ने लगी और जहां पर इस कार में ब्लास्ट हुआ वो जगह लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के बिलकुल पास थी.
लेकिन पुलिस या बीबीसी इस बात की पुष्टि नहीं करता.
चौथा सवाल- टारगेट कौन?

सवाल ये भी है कि धमाका घटनास्थल पर दुर्घटनावश हुआ या जानबूझकर इसे वहीं अंजाम दिया गया.
अगर ये जानबूझकर किया गया धमाका था तो टारगेट कौन था? क्या आम लोग ही इसके निशाने पर थे? घटना के तार क्या स्थानीय स्तर पर ही जुड़े थे या राज्य या देश से बाहर भी इनका कोई लिंक है.
इन सभी बातों की जानकारी अभी मिलना बाक़ी है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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