काटजू के दावे: बिहार के सुशासन में है शक,शाबित हुवे पूरी तरह सच

         सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायेधिश एवं वर्तमान chairman प्रेस कौंसिल ऑफ़  इंडिया  काटजू साहेब का बिहार के सन्दर्भ में दिया गया बयान,बिहार के सुसाशन में है शक साबित होने लगा है बिलकुल सच.बिहार के पुरबी चम्पारण से जो खबरे आरही है वह बिलकुल काटजू के बयान के अनुरूप है.
बिहार के पुरबी चंपारण में इंद्रा आवास  योजना  का लाभ उठाने के लिए आला अधिकारिओं की मिली भगत से जिले के अधिकतर उची जाती के लोगों ने इंद्रा आवास का लाभ उठाने के लिए  दलित बन बैठे,वहीँ दूसरी बरी घोटाला बी पी  एल  एवं अन्त्योदय का आनाज प्राइवेट और सरकारी माफियाओं ने मिलकर बेच डाले और सरकार दोषियों पर करवाई करने के बजाये अन्दर ही अन्दर बचाने में लगी हुई है.कारन है जहाँ एक तरफ प्राइवेट माफिया उची सेयाशी पकर रखते हैं वही दूसरी तरफ आला अधिकारीयों नाराज न हो जाये सरकार करवाई करने से पीछे हट जारही है.
        उपरोक्त बातों को परमानित करने के लिए पुरबी चंपारण जिला के कल्यानपुर ब्लाक के manichapra पंचायत के एक समाज सेवी श्री रामजी  भगत ने अपने पंचायत के बी पी एल और अन्त्योदय कूपन की कुछ  छाया परती और कुछ original  परती भेजें हैं जो साबित करती है के साल २००८ में सात माह,कूपन संख्या ०३०१४६७ जिला कोड ११ साबित करती है के पुरबी चंपारण के उपरोक्त पंचायत में साल २००८ में जून ,जुलाई , अगस्त , सितेम्बर ,ओक्टुबर  नोवेम्बर एवं दिसंबर माह में गरीबों के अनाजो को माफियाओं ने बेच डाले,साल २००९ में १० माह जनुअरी ,फेब्रुअरी मार्च
मई जून जुलाई अगस्त सितम्बर ओक्टुबर नवम्बर माह का आनाज बेचा गया कूपन संख्या ०३०१४६७,०३१४६७९ एवं एसे हजारों कूपन धांधली  की पोल खोल रही.साल २०१० में ६ माह का घोटाला होगेया और सरकार पोषित माफिया खुले घूम रहे.सूत्रों की मानें तो पूरे पुरबी चंपारण का यही हाल रहा
             दूसरी सबसे बरी घोटाला ये है के पुरबी चंपारण के उची जाती के लोंगों ने इंद्रा आवास सरकार की मिली भगत से दलित बनकर गरीबों के इंद्रा आवास पे कब्ज़ा कर बैठा. अगर यकीं न हो तो सरकार जांच करले  मामला अस्पष्ट  हो जायेगा.
             नीचे चंद नाम उदहारण के लिए दिए जारहे हैं, कल्यानपुर पर्खंड के maichapra पंचायत  के  संभु कुमार सिंह ,बैधनाथ सिंह,मुकेश कुमार सिंह जैसे सैकरों लोगों ने सिर्फ एक पंचायत में दलित बनकर इंद्रा आवास योजना का लाभ उठालिया  जरा सोचिये पूरे जिला की गिनती की जाये तो सूत्रों
के अनुसार लाखों लोग सिर्फ एक जिला में दलित बकर इंद्रा आवास योजना उठाने वालों की  तादाद पुर जाये,परदेश अस्तर पर करोरों में जा सकती है,यही  सारी चीजें नीतीश  सरकार के असल दलित प्रेम को उजागर करने लगी है.यही हाल मंरेगा की कहानी में है सूत्रों की मानें तो उपरोक्त पंचायत में
पोस्ट ऑफिस कर्मचारी की मिली भगत से सरकार और गरीबों के लाखों रूपये का चुना मुखिया पंचायत सचिव और पोस्ट ऑफिस कर्मचारी मेहसी की मिली  भगत से  जाली नामो के आधार पर लगा दिए गए सरकार है के कान में जू तक न रेंग रही. सवाल पैदा होता है के सरकार आखिर भरष्टाचार के खिलाफ कमर कसे हुए है तो आखिर इस मामले  में सरकार की कमर ढीली क्यों हो जारही बिहार ही नहीं देश जानना चाहती है.
         काटजू के दावे बिहार के सुशासन में है शक,शाबित हुवे पूरी तरह सच

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