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दिल्ली दंगे: शाहरुख़ को शामली में आख़िर कहां से गिरफ़्तार किया गया?


शाहरुख़इमेज कॉपीरइटANI
24 फ़रवरी को जाफ़राबाद-मौजपुर में हिंसा के दौरान एक पुलिसकर्मी पर पिस्तौल तानने और फ़ायरिंग करने के आरोप में शाहरुख़ ख़ान को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम गिरफ़्तार कर चुकी है.
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एसीपी अजीत कुमार सिंगला ने तीन मार्च को प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके बताया था कि शाहरुख़ को शामली के बस स्टैंड से गिरफ़्तार किया गया है.
उन्होंने यह भी जानकारी दी थी कि शाहरुख़ जाफ़राबाद में फ़ायरिंग करने के बाद अपनी कार से पंजाब चला गया था और फिर बरेली होते हुए शामली आया था, जहां उसे पकड़ लिया गया.
हालांकि, पुलिस की इस थ्यौरी पर लोग सवाल भी खड़े कर रहे हैं.

स्थानीय पुलिस को विश्वास में न लेना

पहला सवाल स्थानीय पुलिस को विश्वास में न लेने को लेकर है. किसी अन्य राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाती है तो उसे स्थानीय पुलिस को सूचित करना होता है लेकिन इस मामले में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने स्थानीय उत्तर प्रदेश पुलिस को विश्वास में नहीं लिया.
शामली ज़िले के पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने बीबीसी से कहा कि इस कार्रवाई को लेकर उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी, दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने आकर यहां कार्रवाई की और वो चली गई, अगर वो मदद मांगती तो उनकी मदद की जाती और अगर आगे वो मदद मांगेंगे तो उनकी सहायता की जाएगी.
इसके अलावा ऐसी भी ख़बरें थीं कि बुधवार शाम को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एक टीम शामली ज़िले के कैराना कोतवाली पहुंची थी.
शाहरुख़इमेज कॉपीरइटPTI
ऐसी ख़बरें थीं कि क्राइम ब्रांच की टीम शाहरुख़ को लेकर शामली आई थी और वो उन जगहों की तफ़्तीश करना चाह रही थी जहां-जहां वो ठहरा था और उसने जहां अपनी कार छोड़ी थी.
हालांकि, क्राइम ब्रांच की टीम कैराना कोतवाली में बिना कोई आधिकारिक आमद दर्ज कराए चली गई.
कैराना कोतवाली के प्रभारी यशपाल धामा ने बीबीसी से कहा, "बुधवार रात 9 बजे के क़रीब दिल्ली पुलिस की 3-4 लोगों की टीम यहां आई थी जो ख़ुद को क्राइम ब्रांच का बता रही थी. जब उनसे आने का कारण पूछा था तो उन्होंने कुछ नहीं बताया और न ही अपना पहचान पत्र दिखाया. बिना आमद-रवानगी के एक पर्ची पर नाम लिखकर वो चले गए."
यशपाल धामा कहते हैं कि स्थानीय पुलिस को नहीं मालूम है कि शाहरुख़ की गिरफ़्तारी कहां से की गई और न ही उसके लोकल इनपुट्स का पता चला है.
वो कहते हैं कि ऐसी ख़बरें पता चली हैं कि उसका कोई रिश्तेदार यहां रहता है लेकिन हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है, अगर दिल्ली पुलिस हमसे मदद मांगती है तो हम इसमें आगे की खोजबीन करेंगे.
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शामली में चार बस स्टेशन

शाहरुख़ की शामली से गिरफ़्तारी को लेकर जितनी बातें शामली के बाहर के लोगों को पता है, लगभग उतनी ही बातें शामली में रह रहे लोगों को पता हैं.
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एसीपी अजीत कुमार सिंगला ने 3 मार्च को अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि शाहरुख़ को शामली के बस स्टैंड से गिरफ़्तार किया गया है.
बीबीसी की टीम शामली पहुंची तो पता चला कि वहां चार बस स्टेशन हैं. जिनमें से एक सरकारी रोडवेज़ और बाक़ी के प्राइवेट बस स्टैंड हैं.
अजीत कुमार सिंगला ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में यह साफ़ नहीं किया था कि शाहरुख़ की गिरफ़्तारी किस बस स्टैंड से हुई थी.
कैराना बस स्टेशन, शामली के संचालक अरविंद कुमार
Image captionकैराना बस स्टेशन, शामली के संचालक अरविंद कुमार
1. कैराना बस स्टेशन, शामली
शामली शहर के बीचों-बीच कैराना बस स्टेशन है. यहां पर दिल्ली से लेकर कैराना और आस-पास के इलाक़ों के लिए निजी बसें चलती हैं.
यह बस स्टेशन सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक चालू रहता है और यहां पर आवाजाही जारी रहती है.
इस बस स्टेशन के संचालक अरविंद कुमार कहते हैं कि यहां पर कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है. वो कहते हैं कि अगर यहां पर कोई ऐसी कार्रवाई हुई होती तो इसके बारे में पता चल चुका होता.
2. रोडवेज़ बस स्टेशन, शामली
कैराना बस स्टेशन से 100 क़दम की दूरी पर ही उत्तर प्रदेश पथ परिवहन निगम का बस अड्डा है, जिसे लोकल ज़बान में रोडवेज़ बस स्टेशन और शामली बस स्टेशन भी कहा जाता है.
इस बस अड्डे से दिल्ली, करनाल, पानीपत, मेरठ, लखनऊ, सहारनपुर के अलावा अन्य आस-पास के ज़िलों की राज्य परिवहन की बसें चलती हैं. बस अड्डे पर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक लोगों की आवाजाही रहती है.
रोडवेज़ बस स्टेशन, शामली के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार वाजपेयी
Image captionरोडवेज़ बस स्टेशन, शामली के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार वाजपेयी
इस बस अड्डे के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार वाजपेयी कहते हैं कि इस बस अड्डे पर कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है और न ही उनको ऐसी कोई जानकारी है.
इसी बस अड्डे पर चाट का ठेला लगाने वाले सचिन कहते हैं कि बस अड्डे पर कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है लेकिन ऐसी ख़बरें हैं कि बाहर कहीं से शाहरुख़ को गिरफ़्तार किया गया है.
बस अड्डे के आस-पास चने बेचने वाले तालिब ख़ान कहते हैं कि अगर यहां आस-पास कोई गिरफ़्तारी हुई होती तो उस जगह की चर्चा हो चुकी होती क्योंकि यह छोटा-सा शहर है और ख़बरें तेज़ी से पता चल जाती हैं.
श्रवण कुमार और हर्षित
Image captionश्रवण कुमार और हर्षित
3. मुज़फ़्फ़रनगर बस स्टेशन, शामली
रोडवेज़ बस स्टेशन से एक किलोमीटर की दूरी पर मुज़फ़्फ़रनगर बस स्टेशन है जहां से मुज़फ़्फ़रनगर के लिए बसें चलती हैं, यह भी एक निजी बस स्टेशन है.
मुज़फ़्फ़रनगर बस स्टेशन के बगल में ही एक मिठाई की दुकान है. इस दुकान के संचालक हर्षित कहते हैं कि शाहरुख़ की कहां से गिरफ़्तारी हुई है यह साफ़ नहीं है.
वो कहते हैं कि उन्हें टीवी और अख़बारों से पता चला कि शाहरुख़ की गिरफ़्तारी शामली से हुई है.
बस स्टेशन के पास ही फ़र्नीचर की दुकान चलाने वाले श्रवण कुमार कहते हैं कि इस घटना के बारे में जब स्थानीय पुलिस को ही नहीं पता चला तो हमें क्या पता चलेगा.
उन्होंने कहा कि उन्हें अख़बारों और टीवी से पता चला कि इस घटना के बारे में स्थानीय पुलिस को कोई सूचना नहीं थी.
4. शामली बस स्टेशन, कैराना
शामली ज़िले में ही आने वाला कैराना क़स्बा मुस्लिम बहुल क्षेत्र है. एक अनुमान के मुताबिक़, सिर्फ़ इस क्षेत्र की मुस्लिम आबादी 60 फ़ीसदी से अधिक है.
ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि शाहरुख़ के किसी रिश्तेदार का यहीं घर है और शायद इसी बस स्टैंड से पुलिस ने उसे गिरफ़्तार किया हो.
शामली बस स्टेशन के ठीक बगल में फलों की दुकान लगाने वाले मोहम्मद हसीन कहते हैं कि यहां कल शाम में भी मीडिया का जमावड़ा लगा था लेकिन यहां से किसी को कोई सबूत नहीं मिला कि शाहरुख़ कहां का है और उसे कहां से गिरफ़्तार किया गया.
मोहम्मद हसीन
Image captionशामली बस स्टेशन, कैराना के बगल में ही हसीन की फलों की दुकान है

सांप्रदायिक सौहार्द की फ़ैक्ट्री है कैराना?

बातों ही बातों में हसीन शामली और कैराना में सांप्रदायिक सौहार्द की बातें करने लगते हैं. वो कहते हैं कि दिल्ली में दंगे हुए लेकिन उसका यहां कोई असर नहीं है.
वो कहते हैं कि कैराना मुस्लिम बहुल इलाक़ा है लेकिन यहां दोनों समुदायों के बीच कोई तनाव नहीं है.
कैराना संसदीय सीट पर इस समय बीजेपी का क़ब्ज़ा है. इससे पहले 2018 के उप-चुनावों में आरएलडी ने उससे यह सीट छीन ली थी.
इसी ज़िले की थाना भवन सीट से सुरेश राणा विधायक हैं जो राज्य सरकार में मंत्री हैं. एक विशेष समुदाय को लेकर उनके विवादित भाषण ख़ासी सुर्ख़ियां बटोर चुके हैं.
इस लिहाज़ से पूरे शामली क्षेत्र को सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल या फ़ैक्ट्री कह देना भी उचित नहीं होगा क्योंकि कैराना में ही किराने का व्यापार करने वाले रोहित (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि उन्हें शाहरुख़ की गिरफ़्तारी का नहीं पता लेकिन वो इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का अंदेशा जताते हैं.
वो कहते हैं कि इस क्षेत्र में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं और यहां पर व्यापारियों के पलायन जैसी ख़बरों के बारे में आप सुन चुके हैं, यहां असुरक्षा महसूस होती है लेकिन जब से बीजेपी सरकार है तब से ज़्यादा डर नहीं है.
शामली में सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ कोई प्रदर्शन नहीं चल रहे हैंइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
Image captionशामली में सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ कोई प्रदर्शन नहीं चल रहे हैं
एक स्थानीय पत्रकार अपना नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहते हैं कि शाहरुख़ की गिरफ़्तारी शायद इसलिए भी यहां से दिखाई गई है ताकि शामली और कैराना के मुद्दे को हवा दी जा सके क्योंकि हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां पर कहा था कि अब किसी व्यापारी का पलायन यहां से नहीं हो रहा है.
पूरे देश में 15 दिसंबर के बाद नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए तब कुछ प्रदर्शन कैराना में भी हुए लेकिन प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा मामले दर्ज करने के बाद फिर प्रदर्शन नहीं हुए.
हसीन कहते हैं कि नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ कैराना और शामली में कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं हो पाया क्योंकि यहां पर 'बड़े लोगों' ने समझाया कि यह सब करने की जगह शांत रहने की ज़रूरत है.
हसीन जैसे लोग विरोध प्रदर्शन न करने को सांप्रदायिक सौहार्द बता सकते हैं लेकिन नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जिस तरह की कार्रवाई की है, वो जगज़ाहिर है, रही बात शाहरुख़ की गिरफ़्तारी किस जगह से हुई उसके बारे में अभी तक साफ़ पता नहीं चल पाया है.
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