आरटीआई के जरिए यह जानकारी मांगने वाले पानीपत के सूचनाधिकार कार्यकर्ता पीपी कपूर का कहना है कि जिस आधार पर पीएम मोदी को भारतीय नागरिक बताया जा रहा है, उससे तो भारत में जन्मा हर व्यक्ति भारतीय नागरिक हुआ। हैरानी की बात है कि जब कानून बनाने वाले केन्द्रीय मंत्रियों, राष्ट्रपति, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तक के नागरिकता सबूत सरकार के पास नहीं हैं, तो देश की 135 करोड़ जनता को एनआरसी, सीएए, एनपीआर के नाम पर क्यों आतंकित किया जा रहा है। शिक्षा, रोजगार, आर्थिक मंदी, किसानों-मजदूरों की बढ़ती आत्महत्याएं, कालाधन, मजदूरों की बदहाली जैसे सवालों से ध्यान हटाकर देश को नागरिकता जैसे बेमतलब के मुद्दे पर उलझाया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय में केन्द्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ व तीनों सेना प्रमुखों के नामों की जानकारी तक ना होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
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