क्या ईरान ने भारतीय टैंकरों को होर्मुज़ से गुज़रने की अनुमति दी है? विदेश मंत्रालय ने क्या बताया

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि उन रिपोर्ट्स पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी, जिनमें दावा किया गया है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति देने पर राज़ी हो गया है.
हालांकि पत्रकारों के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय विदेश मंत्री ने ईरान के विदेश मंत्री से इस बारे में बातचीत की है.
जायसवाल ने कहा, "विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है. आखिरी बातचीत में शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. इसके अलावा अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी."
इससे पहले भारतीय मीडिया में ख़बरें छपी थीं कि ईरान ने दो भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से निकलने की इजाज़त दे दी थी.
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पीआईबी के अनुसार, पहले भारत के तेल आयात का आधा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होकर गुजरता था, जबकि आज 70 प्रतिशत दूसरे वैकल्पिक चैनलों से आयात होता है, जिससे आपूर्ति जोखिम में काफ़ी कमी आई है.
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पश्चिम और पूर्व में भारत के झंडे वाले 28 जहाज मौजूद हैं. इन जहाजों पर कम से कम 667 भारतीय नाविक सवार हैं.
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब बुधवार को गुजरात के कांडला बंदरगाह जा रहे एक थाईलैंड के जहाज पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में हमला हुआ था.
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इस हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा, "भारत इस बात की निंदा करता है कि जारी संघर्ष में व्यावसायिक जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना बनाया जा रहा है."
इसी बीच बीबीसी पर्शियन के मुताबिक़, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने ईरान के सरकारी टीवी पर कहा कि 'ईरान को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर लगातार निशाना साधते रहना चाहिए.'
उनके इस ताज़ा बयान ये आशंका बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में इस रास्ते तेल और गैस के आवागमन में मुश्किलें बनी रहेंगी.
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ख़ामेनेई की मौत के पांच दिन बाद शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर पर क्या बोले

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ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत पर पांच दिन बाद शोक जताने की ख़बरों पर रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि जिस दिन शोक पुस्तिका पहली बार खोली गई थी, उसी दिन पांच मार्च को विदेश सचिव ने भारत सरकार की ओर से ईरान दूतावास में इस पर हस्ताक्षर किए थे."
उन्होंने यह भी कहा, "टिप्पणीकारों को महत्वपूर्ण मामलों पर सार्वजनिक रूप से बोलने से पहले ख़ुद को अपडेट कर लेना चाहिए और इस तरह की ग़लत जानकारी पर आधारित टिप्पणियों से बचना चाहिए."
अली ख़ामेनेई के अमेरिका और इसराइल के हमले में मारे जाने के बाद भारत सरकार ने कोई बयान जारी नहीं किया था. पांच मार्च को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे.
उस वक़्त सरकार के इस रुख़ की काफ़ी आलोचना हुई थी.
ईरान के एक स्कूल पर बमबारी में बच्चों की मौत पर दुख जताते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा, "जारी संघर्ष को लेकर हम कई बयान जारी कर चुके हैं. हमने सभी नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की ज़रूरत पर जोर दिया है. क़ीमती ज़िंदगियों के नुकसान पर हमें गहरा दुख है और हम इस पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं."
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ईरान में 9000 भारतीय नागरिक

रणधीर जायसवाल ने कहा, "ईरान में इस समय क़रीब 9000 भारतीय नागरिक हैं. वहां ज़्यादातर लोग शिक्षा के लिए गए हैं, नाविक लोग भी हैं, व्यवसाय जगत से जुड़े लोग हैं और कुछ तीर्थयात्री हैं. जब 23 फ़रवरी को हमने एडवाइज़री जारी की उस समय ख़ासकर स्टूडेंट्स ने ईरान छोड़ दिया था."
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद जो लोग वहां रह गए उन्हें हमने तेहरान से दूसरे शहरों शिफ़्ट किया है और उनकी सुरक्षित रखने के इंतज़ाम किए गए. बहुत सारे नागरिक भारत वापसी के इच्छुक हैं और वो आर्मेनिया और अज़रबैज़ान होते हुए सड़क मार्ग से आने की कोशिश कर रहे हैं. उनको हमारी एंबेसी मदद कर रही है.
जायसवाल ने कहा कि जो लोग भी भारत वापस आना चाहते हैं वो हमारे दूतावास से संपर्क करें. उन लोगों के लिए हमने ख़ास तौर पर एडवाइज़री जारी की है जो सड़क मार्ग से आर्मेनिया और अज़रबैज़ान के रास्ते और वहां से हवाई रास्ते से भारत आना चाहते हैं.
तेहरान में हामारा मिशन पूरी तरह कार्यरत है और भारतीय समुदाय से पूरी तरह जुड़ा हुआ है, उनके हित के लिए और उनकी सुरक्षा के लिए.
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अफ़ग़ानिस्तान के हमलों को लेकर पाकिस्तान के आरोपों पर प्रतिक्रिया

अफ़ग़ानिस्तान की ओर से हुए हमले से जुड़े पाकिस्तान के आरोपों पर भी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया दी है.
पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि 'भारत ने पाकिस्तान में हमलों के लिए अफ़ग़ानिस्तान की मदद' की थी.
इस पर रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम ऐसे बेबुनियाद आरोपों को ख़ारिज करते हैं. यह पाकिस्तान का दूसरा नेचर बन गया है कि वह अपने कृत्यों का दोष भारत पर लगाता है."
उन्होंने कहा, "सीमा पार आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान की कोई विश्वसनीयता नहीं है. चाहे जितनी भी कहानियां गढ़ ली जाएं, यह सच्चाई नहीं बदलेगी और पाकिस्तान के ख़ुद को पीड़ित दिखाने से कोई भ्रमित नहीं होने वाला है."
मध्य-पूर्व संघर्ष की वजह से हवाई सेवाओं को लेकर पाकिस्तान से बातचीत से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के साथ हवाई सेवाओं के संबंध में कोई बातचीत नहीं हुई है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















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