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विपक्ष के सीएम और मिनिस्टर को जेल भेजने की तैयारी ?

30 दिन तक जेल में रखना, ज़मानत नहीं मिलने देना, इस देश में कौन सी बड़ी बात है। विपक्ष के मंत्री और मुख्यमंत्री को अगर 30 दिन के लिए जेल में डाल दिया गया तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा। मोदी सरकार ने पहले बहुत कोशिश की। अब वह कानून के ज़रिए इस खेल को खेलना चाहती है। नाम के लिए इस बिल में प्रधानमंत्री को जोड़ा गया है लेकिन सभी को पता है कि इस देश में किसी एजेंसी की हिम्मत नहीं है कि वह प्रधानमंत्री मोदी की जाँच कर सके और गिरफ्तार कर सके। प्रधानमंत्री का गिरफ्तार होना बड़ी बात है। इतनी नैतिकता की उम्मीद तो की जाती है कि जेल जाने से पहले इस्तीफ़ा देंगे। इसके लिए कानून में मुख्यमंत्री के साथ प्रधानमंत्री को जोड़ने की ज़रूरत नहीं है। इससे बैलेंस नहीं बन रहा है। बल्कि दिख रहा है कि यह कानून मोदी सरकार विपक्ष के मुख्यमंत्रियों को डरना, धमकाने और हटाने के लिए ला रही है। उम्मीद है हमारा यह वीडियो आप अंत तक देखेंगे और लोकतंत्र का गला घोंटने के इस एक दशक को ठीक से समझेंगे अमित शाह का खतरनाक प्लान! जब चाहे बर्खास्त कर सकेंगे विपक्ष की सरकार? बोला विपक्ष: ये तानाशाही है!   #abhisarsharma #abhisar...

Congress नेता Kanhaiya Kumar ने Sasaram में लहका दिया मंच : Voter Adhikar Yatra Biha

Congress नेता Kanhaiya Kumar ने Sasaram में लहका दिया मंच :  Voter Adhikar Yatra Biha -----------------------------------------------  

लाल क़िले से पीएम मोदी ने आरएसएस को 'दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ' कहकर क्या संघ की ही बड़ी फजीहत करा दी है?

15 अगस्त के भाषण से कुछ ख़ास नहीं निकला, निकला तो घुसपैठिए का फर्ज़ी भूत और RSS की सतही तारीफ़। RSS का आज़ादी की लड़ाई में क्या योगदान है, यह तो नहीं बता सके लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के इस एक बयान से विपक्ष को बताने का मौका मिल गया कि आज़ादी की लड़ाई में RSS का कोई योगदान नहीं है। जैसे नेहरू को लेकर हज़ार बार बहस हो चुकी है, वैसा ही RSS को लेकर एक और बार क्यों बहस शुरू हुई? क्या प्रधानमंत्री मोदी यही चाहते थे? क्या RSS NGO बताए जाने की तारीफ़ से ख़ुश है? तब तो फिर मोहन भागवत से लेकर दूसरे प्रचारकों को इस तारीफ़ पर बोलना चाहिए था, स्वागत करना चाहिए था। देखिए हमारा वीडियो। हम डिस्क्रिप्शन में एक लिंक दे रहे हैं। यह द वायर में छपा एक लेख है जो आज़ादी की लड़ाई में RSS की भूमिका की पड़ताल करता है। आप चाहें तो उसे भी पढ़ सकते हैं। लिंक- https://thewire.in/his... ​ -----------------------&--------------- लाल क़िले से पीएम मोदी ने आरएसएस को 'दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ' कहकर क्या संघ की ही बड़ी फजीहत करा दी है? आरएसएस की अब लोग कुंडली निकाल रहे हैं। कांग्रेस ने तो सीधे PM मोदी से पूछ...

Bihar SIR ।। Rahul Gandhi ka Khauf? Tuta Ghamand

  चुनाव आयोग रविवार 17 अगस्त को प्रेस कांफ्रेंस करेगा। इसी दिन राहुल गांधी और तेजस्वी यादव बिहार से वोट अधिकार यात्रा की शुरुआत करने वाले हैं। आयोग ने यह तारीख़ क्यों चुनी है? पहले भी तो प्रेस कांफ्रेंस हो सकती थी। आठ अगस्त को बंगलुरु में राहुल गांधी ने इतने आरोप लगा तब भी आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस नहीं की। डेढ़ महीने की चुप्पी के बाद प्रेस कांफ्रेंस की सूचना आई है। क्या आयोग उन पत्रकारों को भी बुलाएगा जिन्होंने बिहार जाकर SIR कवर किया है? हमारा वीडियो पूरा देखिएगा नोट- आज कल AI के इस्तेमाल से मेरी आवाज़ और तस्वीर का इस्तेमाल कर कई सारे चैनल बना दिए गए हैं। लेकिन इनमें से कोई भी मेरा चैनल नहीं है। प्लीज़ आप सतर्क हो जाएं। मेरे तीन ही चैनल हैं जिनके लिंक यहां दे रहा हूँ।

Auraiya: भाई ने रक्षाबंधन पर बहन का किया रेप, शव फंदे पर लटकाया, घर जाकर सो गया | Uttar Prades

Auraiya: भाई ने रक्षाबंधन पर बहन का किया रेप, शव फंदे पर लटकाया, घर जाकर सो गया | Uttar Prades   #upnews ​  #auraiya ​  #rakshabandhan ​  #crimenews ​  #News ​  #News24 ​  #News24LIVE ​

क्या कुत्ता प्रेमी लोकतंत्र प्रेमी नहीं .?

  कुत्तों के लिए प्रदर्शन करने उतरे लोगों को अंदाज़ा नहीं होगा कि उनका सामना सरकार से ज़्यादा समाज से होगा। उनके प्रदर्शन के ग़ैर राजनीतिक और सीमित होने को लेकर बहुत बातें हो रही हैं। कहा जा रहा है कि ये लोग कभी राजनीतिक मुद्दों पर नहीं बोलते हैं। यह बहस बहुत बड़ी हो गई है, इतनी कि कुत्ते पीछे छूट गए हैं।आज जिस स्तर पर संस्थाएं ढहा दी गई हैं, अत्याचार का स्केल इतना बड़ा हो गया है कि जो लोग बोलते हैं वे भी सभी मुद्दों पर नहीं बोल पाते। यह लड़ाई बोलने वालों के बीच भी है कि इस पर नहीं बोला, उस पर नहीं बोला लेकिन इस बार लड़ाई कुत्तों के लिए उतरने वाले प्रेमियों से हो गई है।  उम्मीद है आप इस वीडियो को देखेंगे और अपने कमेंट के ज़रिए इस बहस को समृद्ध करेंगे।

Rahul Gandhi की जान को खतरा होने का दावा कैसे पलट गया? Pune Court Savarkar Defamation Case।

Rahul Gandhi की जान को खतरा होने का दावा कैसे पलट गया? Pune Court Savarkar Defamation Case।    Congress #rahulgandhideaththreat ​ #congress ​ #veersavarkar ​ राहुल गांधी की जान को खतरा वाले केस में नया मोड़ आ गया है. कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि, राहुल गांधी के वकील ने मानहानि मामले में सुनवाई कर रही पुणे की एक अदालत में उनकी सहमति के बिना ये दावा करते हुए आवेदन दिया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जान को खतरा है. जिसे वो अब वापस लेंगे