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हिन्दुस्तानी पार्लियामेंट पर हमला , चंद अहम् सवालात ( अरुंधती रॉय )
हिन्दुस्तानी पार्लियामेंट पर हमला , चंद अहम् सवालात
( अरुंधती रॉय )
# संसद पर हमले के कुछ दिनों बाद सरकार ने घोषणा किया था के उसके पास हमले पकिस्तान के सामिल होने के बारे में आकाट प्रमाण मौजूद हैं। इसके बाद 5 लाख भारती फ़ौज भारत -पाक सीमा पर तैनात कर दी गई और दोनों देशों को एटमी जंग के दहाने पर लाकर खड़ा कर दिया गया। अफजल गुरु की स्विकारिक्ति जो के टार्चर के जरिये लिया गया था के अलावा और किस तरह के अकाट सबूत मौजूद हैं। अफजल गुरु के स्विकारिक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने अमान्य करार दिया था।
# क्या ये हकीकत नहीं है के भारत - पाक सीमा पर भारतीय फ़ौज की गति विधि 13 दिसंबर के हमले से काफी अरसा पहले शुरू हो गई थी ?
# सरहद पर भारत पाक फोर्सेज का आमना सामना जो कम व बेश एक साल तक जारी रहा था , उस पर कितनी लागत आई थी ?इस दौरान कितने सैनिक मारे गए थे ? बारूदी सुरंगों को घटिया तकनीक के साथ defused करने के दौरान कितने सैनिक और शहरी जान से हाथ धो बैठे थे ,और कितने किसान अपने घर बार , और खेत से हाथ धो बैठे ?कयोंके ट्रक और टैंक उनके गाँव से गुजर रहे थे और उनके खेतों में बारूदी सुरंगे फिट की गई थी ?
# अदालतें स्वीकार करतीं हैं के अफजल असक्रियत पसंद था , जिसने हथियार दाल दिए थे और बकायेदा सिक्यूरिटी फोर्सेज से सम्पर्क में रहता था , विशेष कर अफजल गुरु को जम्मू कश्मीर पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स के सामने पेश होना होता था , सिक्यूरिटी फोर्सेज इस बाज की कैसे वजाहत कर सकती है के उनकी निगरानी के तेहत रहने वाला अलगाववादी किस तरह अहम् ऑपरेशन या कार्रवाई को साजिश तैयार कर सकता है ?
#ये बात कैसे माना जा सकता है के लश्करे तैयेबा या जैश मोहम्मद ग्रुप एक ऐसे आदमी पर विश्वाश कर सकता था जो भारत की स्पेशल टास्क फ़ोर्स की निगरानी में रहता हो ?और विभिन्न मौकों पर उसके साथ टार्चर भी किया गया हो ?ऐसे आदमी को ये ग्रुप बड़ी कार्रवाई के लिए अहम् सम्पर्ककर्ता के तौर पर क्यों इस्तेमाल करते ?
# पर्लियेमेंट पर हमले 6 दिन बाद 19 दिसंबर 2001 को महाराष्ट्र के पुलिस कमिशनर ने हमले में मारे जाने वाले एक हमलावर का नाम मोहम्मद यासीन फतह मोहम्मद उर्फ़ अबू हमजा बताया था , उसका सम्बन्ध लश्करे तौयेबा जाहिर किया गया , ये सख्श नवम्बर 2000 में मुंबई से गिरफ्तार किया गया गया था , और उसे फौरी तौर पर गुलाम कश्मीर की पुलिस के हवाले कर दिया गया था , उसने तफ्सीलात से आगाह किया था। अगर पुलिस कमिशनर का बयान संच है तो फिर जम्मू कश्मीर पुलिस की जेरे हिरासत मोहम्मद यासीन पार्लियामेंट पर हमला में कैसे शामिल हो सकता है ? अगर पुलिस कमिशनर का बयान गलत है तो मोहम्मद यासीन कहाँ है ? हमें अभी तक पार्लियामेंट पर हमले में मरने वाले पाँचों दहशत गर्दों के बारे में क्यों नहीं बताया गया?
( लेख उर्दू मासिक पत्रिका "इफ्कर ए मिल्ली "के august 2013 के अंक से लिया गया है )
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( अरुंधती रॉय )
अरुंधती रॉय मशहूर लेखक ,एवं बेलाग विश्लेसक कर्ता मानी जाती हैं नीचे लेखे लेख में उनहोंने पार्लियामेंट पर हमले , और मुंबई बम धमाकों के बारे में पुलिस के आला अधिकारी सतीश वर्मा की जानीब से चौंका देने वाले पर्दाफाश की समर्थन करते हुए भारतीय प्रशाशन से इन्तहाई अहम् सवालात किये हैं
# भारतीय पार्लियामेंट पर हमले से चंद माह पूर्व तक हुकूमत और पुलिस का लगातार ये मानना था के पार्लियामेंट पर हमला हो सकता है , 12 दसंबर 2001 को एक मीटिंग में उस वक़्त के प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने भी पार्लियामेंट पर हमले से खबरदार किया था ,और 13 दिसंबर को पार्लियामेंट पर हमला हो गया , यहाँ ये सवाल पैदा होता है के पार्लियामेंट की मोकम्मल हिफाजत के लिए आवश्यक इन्तेजाम किया गया था , इस सिलसिले में सिक्यूरिटी की रिहल्सल भी हुई थी , इसके बावजूद विस्फोटक पदार्थ और बमों से भरी कार कैसे पार्लियामेंट कैंपस में दाखिल हो गई
# पार्लियामेंट पर हमले के चंद दिनों बाद डेल्ही पुलिस के स्पेशल सेल ने कहा था के जैश मोहम्मद और लश्कर तैयेबा ने हमले की मंसूबाबंदी की थी, जबके हमलावरों की अगुवाई मोहम्मद नाम के आदमी ने की थी , पुलिस का कहना था के ये शख्श 1998 में I C 814 प्लेन हाई जैक मामले में भी शामिल था , बाद में सीबीआई ने इस दावे को झूठला दिया था , अदालत में कोई भी इलज़ाम साबित नहीं हुआ ,आखिर स्पेशल सेल के पास अपने दावे के लिए क्या सबुत हैं ?
# पार्लियामेंट पर हमले की मुकम्मल कार्रवाई CCTV कैमरे पर लाइव रिकॉर्ड हुई , कांग्रेस के मेम्बर पार्लियामेंट कपिल सिब्बल ने पार्लियामेंट में मांग की थी के CCTV रिकॉर्डिंग को पार्लिमेंट के सदस्यों को दिखाई जाए , इनके मांग की राज्यसभा की डिप्टी चेयरमैन नज्म हेपतुल्लाह ने समर्थन की थी , इनका कहना था के घटना की डिटेल में confusion पाया जाता है ,कांग्रेस पार्टी के प्रिये रंजन दास मुंसी ने कहा के मैंने कार से 6 लोगों को उतरते देखा था , लेकिन सिर्फ 5 लोग मारे गए , कलोज सिर्किट कैमरे की रिकॉर्डिंग में भी साफ़ तौर से 6 लोगों को दिखलाये गए हैं , अगर दास मुन्सी की बात सही है तो फीर पुलिस क्यों जिद जरती रही के कार में सिर्फ 5 लोग थे?तो छठा सख्स कौन था , और वह सख्स अब कहाँ है ? cctv की रिकॉर्डिंग को मामलें की सुनवाई के दौरान बतौर सबुत पेश क्यों नहीं किया गया ? इसके अलावा वह रिकॉर्डिंग जनता के लिए क्यों नहीं जारी किया गया ?
# संसद पर हमले के कुछ दिनों बाद सरकार ने घोषणा किया था के उसके पास हमले पकिस्तान के सामिल होने के बारे में आकाट प्रमाण मौजूद हैं। इसके बाद 5 लाख भारती फ़ौज भारत -पाक सीमा पर तैनात कर दी गई और दोनों देशों को एटमी जंग के दहाने पर लाकर खड़ा कर दिया गया। अफजल गुरु की स्विकारिक्ति जो के टार्चर के जरिये लिया गया था के अलावा और किस तरह के अकाट सबूत मौजूद हैं। अफजल गुरु के स्विकारिक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने अमान्य करार दिया था।
# क्या ये हकीकत नहीं है के भारत - पाक सीमा पर भारतीय फ़ौज की गति विधि 13 दिसंबर के हमले से काफी अरसा पहले शुरू हो गई थी ?
# सरहद पर भारत पाक फोर्सेज का आमना सामना जो कम व बेश एक साल तक जारी रहा था , उस पर कितनी लागत आई थी ?इस दौरान कितने सैनिक मारे गए थे ? बारूदी सुरंगों को घटिया तकनीक के साथ defused करने के दौरान कितने सैनिक और शहरी जान से हाथ धो बैठे थे ,और कितने किसान अपने घर बार , और खेत से हाथ धो बैठे ?कयोंके ट्रक और टैंक उनके गाँव से गुजर रहे थे और उनके खेतों में बारूदी सुरंगे फिट की गई थी ?
# अपराधों की तफ्तीश के दौरान पुलिस के लिए आवश्यक होता है के वह उसके बारे में डिटेल में बताये के हमले की जगह से इकठ्ठा होने वाले सबूत ने पुलिस की कैसे आरोपी तक पहुंचाई , पुलिस मोहम्मद अफजल गुरु तक कैसे पहुंची ? स्पेशल सेल का कहना है के एस ए आर गिलानी ने अफजल गुरु की पहचान की थी , लेकिन अफजल गुरु तक पहुँच श्रीनगर पुलिस को हासिल हुई , उस वक़्त तक गिलानी गिरफ्तार नहीं हुए थे , फिर स्पेशल सेल अफजल गुरु को 13 दिसंबर के हमले से क्यों जोड़ा ?
# अदालतें स्वीकार करतीं हैं के अफजल असक्रियत पसंद था , जिसने हथियार दाल दिए थे और बकायेदा सिक्यूरिटी फोर्सेज से सम्पर्क में रहता था , विशेष कर अफजल गुरु को जम्मू कश्मीर पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स के सामने पेश होना होता था , सिक्यूरिटी फोर्सेज इस बाज की कैसे वजाहत कर सकती है के उनकी निगरानी के तेहत रहने वाला अलगाववादी किस तरह अहम् ऑपरेशन या कार्रवाई को साजिश तैयार कर सकता है ?
#ये बात कैसे माना जा सकता है के लश्करे तैयेबा या जैश मोहम्मद ग्रुप एक ऐसे आदमी पर विश्वाश कर सकता था जो भारत की स्पेशल टास्क फ़ोर्स की निगरानी में रहता हो ?और विभिन्न मौकों पर उसके साथ टार्चर भी किया गया हो ?ऐसे आदमी को ये ग्रुप बड़ी कार्रवाई के लिए अहम् सम्पर्ककर्ता के तौर पर क्यों इस्तेमाल करते ?
# अदालत के सामने अपने बयान में अफजल गुरु ने कहा था के उसे मोहम्मद नामी वैक्ति से मिलवाया गया और डेल्ही जाने की हुक्म दी गई थी , ये आदेश तारिक नामी वैक्ति ने दी , जो भारत के स्पेशल टास्क फाॅर्स के साथ काम कर रहा है , केकिन सवाल पैदा होता है के तारिक कौन है ?और इस वक़्त कहाँ है ?
# पर्लियेमेंट पर हमले 6 दिन बाद 19 दिसंबर 2001 को महाराष्ट्र के पुलिस कमिशनर ने हमले में मारे जाने वाले एक हमलावर का नाम मोहम्मद यासीन फतह मोहम्मद उर्फ़ अबू हमजा बताया था , उसका सम्बन्ध लश्करे तौयेबा जाहिर किया गया , ये सख्श नवम्बर 2000 में मुंबई से गिरफ्तार किया गया गया था , और उसे फौरी तौर पर गुलाम कश्मीर की पुलिस के हवाले कर दिया गया था , उसने तफ्सीलात से आगाह किया था। अगर पुलिस कमिशनर का बयान संच है तो फिर जम्मू कश्मीर पुलिस की जेरे हिरासत मोहम्मद यासीन पार्लियामेंट पर हमला में कैसे शामिल हो सकता है ? अगर पुलिस कमिशनर का बयान गलत है तो मोहम्मद यासीन कहाँ है ? हमें अभी तक पार्लियामेंट पर हमले में मरने वाले पाँचों दहशत गर्दों के बारे में क्यों नहीं बताया गया?
( लेख उर्दू मासिक पत्रिका "इफ्कर ए मिल्ली "के august 2013 के अंक से लिया गया है )
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www.biharbroadcasting.com: बिहार ब्राडकास्टिंग डॉट कॉम के जरिये मामला उठाये ज...
www.biharbroadcasting.com: बिहार ब्राडकास्टिंग डॉट कॉम के जरिये मामला उठाये ज...: बिहार ब्राडकास्टिंग डॉट कॉम के जरिये मामला उठाये जाने के बाद शुरू हुई कार्रवाई , मामला पूर्बी चंपारण के फेन्हारा थाना के इब्राहिमपुर परसौनी...
बिहार ब्राडकास्टिंग डॉट कॉम के जरिये मामला उठाये जाने के बाद शुरू हुई कार्रवाई
बिहार ब्राडकास्टिंग डॉट कॉम के जरिये मामला उठाये जाने के बाद शुरू हुई कार्रवाई , मामला पूर्बी चंपारण के फेन्हारा थाना के इब्राहिमपुर परसौनी गाँव से जुदा हुआ. उपरोक्त गाँव का एक दबंग अपने पड़ोसी अरुण राउत के जमीन बल पूर्वक कब्ज़ा करलिया था , मना करने पर दबंग ने पिटाई भी की थी , बेचारा अरुण जब थाना में इस बात की शिकायत की तो ऊँची पहुँच रखने वाला दबंग ने थाने को ही मैनेज कर लिया , अरुण को बाद में किसी ने मेरे बारे में बताया , उसके बाद उसने मुझसे संपर्क किया , उसके बाद मेरे सलाह पे एस पी पूर्वी चंपारण से संपर्क किया , लिखित शिकायत , एक साथ , एस पी , जिलाधिकारी पुरबी चंपारण के साथ शिकायत पत्र की चाय प्रति मुख्यमंत्री नितीश कुमार को भेजी गई, लेकिन ऊँची पहुँच रखने वाले दबंग ने फिर मामले को मैनेज कर लिया, 16 /06 /20013 को लिखे गए पत्र को बुनियाद बनाकर जब www.biharbroadcasting.com ने अभियान चलाया उसके बाद प्रशाशन के कान खरे हुए , लम्बे उन्तेजार के बाद दिनांक 1 /10 /2013 को फेन्हारा थाना ने अब जाकर जांच शुरू की है। ऐसे होता है बिहार में इन्साफ , बहर हाल biharbroadcasting.com का अभियान का फ़ायदा अब दिखने लगा है , अरुण राउत को इन्साफ मिलने की उमीद , जो पहले ना उमीद हो चुके थे ,जगी है। देखिये आगे आगे होता है क्या? www.biharbroadcasting.com
पूर्बी चंपारण के झोला छाप चिकित्सकों के खेलाफ चलेगा विशेष अभियान?
पूर्बी चंपारण के झोला छाप चिकित्सकों के खेलाफ चलेगा विशेष अभियान , आज इस बात की जानकारी जिले की महिला सिविल सर्जन श्री मती सरोज सिंह ने ,आज विशेष बात चीत में कही हैं , ऐसे बताते चलें के श्रीमती सरोज सिंह के आने से जिले में चिकित्सा विभाग में कई तरह के गलत कामों पर लगाम लगा है , उमीद की जा रही है के , श्रीमती सरोज गरीबों की जिंदगी से खेलवाड़ करने वाले फर्जी चिकत्सकों से निजात दिलाने में कामयाब हो जायेंगी।
दिल्ली पुलिस ! दहशतगर्द बनाने का कारखाना ?
उर्दू दैनिक फारुकी तंजीम के सम्पद्किये दिनांक (23. 8 . 1 3) से
जम्मू कश्मीर सरकार ने एक पोलिसी का एलान किया था , के दहशतगर्दी में शामिल लोग सीधे रास्ते पर आना चाहें इन रिहैबिलिटेशन प्रदेश सरकार करेगी , इस पोलिसी के घोसना के तेहत पकिस्तान और गुलाम कश्मीर में रह रहे बहुत सारे दहशतगर्दों आत्मसमर्पण की थी , सरकार की पोलिसी का फायेदा उठाकर नै जिंदगी शुरू की , २० मार्च 2013 को ऐसा हे एक दहशतगर्द सैयद लियाक़त अली वाया नेपाल भारत में दाखिल हुआ , उसके साथ उसकी बीवी और बच्चे भी थे उसका मकसद जम्मू कश्मीर सरकार की पोलिसी के तेहत आत्मसमर्पण करने के बाद , नई और शांत जिदगी की शुरुआत करना था , उसने अपने आमद और मकसद से कश्मीर सरकार को आगाह भी कर दिया था , ये इत्तेला देहली पुलिस को भी हाथ लग गई और इसने नेपाल , भारत सीमा पर सैयद लियाक़त अली और उसकी बीवी और बच्चों को गरफ्तार कर लिया , लियाक़त अली कहता रहा के वह दहशतगर्द था , लेकिन अब कश्मीर सरकार की नई घोषणा के मुताबिक़ REHABILITATION प्रोग्राम के तेहत गुलाम कश्मीर से आया है ,लेकिन डेल्ही पुलिस ने इस एक नहीं सुनी और इसे गिरफ्तार कर के डेल्ही ले आया , और कहा के सौयद लियाक़त अली डेल्ही में दहशत गर्दी की करवाई करने आया था , उसके सबुत में डेल्ही पुलिस ने जामा मस्जिद डेल्ही के इलाके के एक मुस्लिम होटल से चंद हथियार की बरामदगी देखाते हुए लियाक़त अली को पेश किया , जिसने इसे तेहार जेल भेज दिया , हमने तब अपने COLUMN में लिखा था के दहशतगर्दी के नियत से आने वाला कोई आदमी बीवी और बच्चों के साथ नहीं आते , लिहाज़ा इल्जाम झूठा है , वजीरे आला कश्मीर उम्र अब्दुल्लाह ने लियाक़त अली की गिरफ्तारी पर जबर्दश्त विरोध किया था ,और कहा के लियाक़त अली राज सरकार के आत्मसमर्पण पोलिसी के तेहत आया है , दहशतगर्दी के नियत से नहीं , राज और केद्र सरकार ने इस मामले आमने सामने होगी थी , डेल्ही की तीस हजारी कोर्ट ने लियाक़त अली को जेल भेज दिया , लियाक़त अली के वकील अर्जी जमानत दी ,जब ये मामला एन आई ए के पास चला गया था ,जिसे लियाक़त अली के खेलाफ कोई सबूत नहीं मिला , लियाक़त अली ने जमानत के लिए जो अर्जी दी थी , जमानत के दौरान एन आई ए ने कहा के लियाक़त अली के खेलाफ कोई साबुत नहीं है ,लिहाजा इसे जमानत दी जाये , चुनांचे ३० मई 2013 को लियाक़त अली को जमानत दे दी , एन आई ए ने मामले की गहराई से जाँच शुरू की तो मालुम हुआ के लियाक़त अली माजी में दहशतगर्द था , और कश्मीर सरकार की नै पोलिसी के तेहत बाज आबादकारी के किये आया था ,के डेल्ही पुलिस झूठे इल्जाम के तेहत , के वह डेल्ही में क़त्ल व गारत के इरादे से आया है , गिरफ्तार कर लिया , एजेंसी ने ये भी कहा के , कोई दहशतगर्द बीवी और बच्चों के साथ दहशतगर्दी करने नहीं आ सकता है , अब सवाल ये था के जामा मस्जिद डेल्ही के होटल कमरे से जो हथियार और गोलियां डेल्ही पुलिस ने बरामद की इनका क्या मामला है , एजेंसी ने जब जांच शुरू की तो मालुम हुआ के हथियार और गोलियां डेल्ही पुलिस ने जामा मस्जिद डेल्ही के एक गेस्ट हाउस में , डेल्ही पुलिस ने अपने एक मुखबिर बशीर खान के जरिये रखवाया था , उसी ने होटल का एक कमरा बुक करवाया था , मजीद छानबीन में पाया गया के बशीर खान डेल्ही स्पेशल सेल का मुखबिर है , और इसने जो फ़ोन लिया है इसमें पता डेल्ही की स्पेशल का रखवाया है , फ़ोन नंबर को सर्विलांस पर डालने से पता चला ले, बशीर खान यू पी के मेरठ में है , एजेंसी ने इसके खेलाफ गैर जमानती वारंट हासिल कर लिया है ,फिलहाल उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सका है ,
बात साफ़ हो गई के लियाक़त अली आतंकी नहीं है ,न ही दहशतगर्दी के नियत से भारत आया , और डेल्ही की होटल से जो हथियार बरामद किये ,ओ इसके नहीं थे , बलके डेल्ही पुलिस ने अपने आदमियों के जरिये , रखकर ये इल्जाम लगाया था , के दहशतगर्दी करने आया था ,लियाक़त की गिरफ्तारी की खबर हिन्दू अखबार ,जिन्हें आप हिंदी और अंग्रेजी अखबार कहते हैं के पहले पेज पर बड़ी सुर्ख़ियों के साथ पढ़ीं होंगी के डेल्ही दहलने से बचा , पाकिस्तानी दहशतगर्द को डेल्ही पुलिस ने घटना से पहले गिरफ्तार कर लिया, , लेकिन इन हिन्दू अखबारों ने आपने ये खबर नहीं पढ़ी होगी के लियाक़त अली को 30 मई 2013 को डेल्ही की अदालत ने जमानत दे दी और जो हम अपने कोलम में लिख रहे हैं , इसकी भी खबर आपको नहीं होगी और हो कैसे ?ये हिन्दू अखबारात बे गुनाह मुसलामानों को दहशतगर्द बताकर गिरफ़्तारी की खबर तो छापते हैं , लेकिन अदालत के जरिये बेगुनाह करार देकर बाइज्ज़त बड़ी करने की खबर ये नहीं छापते हैं , हमने मार्च ३०१३ में ही
लियाक़त अली की बेगुनाही के बारे में लिखा था , जो अब सच साबित हो गया ,किसी उर्दू अखबार ने हिम्मत नहीं की थी लेकिन आपके अखबार ने हिम्मत की और सम्पद्किये लिखा , जो अब बिलकुल सच साबित हो गया , मालुम नहीं ऐसे हे कितने बे गुनाह मुसलमानों को दहशत गर्द कह कर जेलों में बंद रख्खा गया है
सैयद लियाक़त अली के बेगुनाही का साबुत मील गया , लेकिन डेल्ही पुलिस के जिन लोगों ने उसे फ़साने की कोशिश की उसे कब और कौन सजा देगा ? ये सवाल मुंह फाड़े खड़ा है , दिल्ली पुलिस को सजा मिलनी चाहिए जो दहशतगर्दी का कारखाना बनकर रह गया है।
फारुकी तंजीम dt 23. 8 . 1 3
इन्साफ करने वाले लोगों के कारनामे देखिये
इन्साफ करने वाले लोगों के कारनामे देखिये ! अरुण राउत , ग्राम इब्राहिमपुर परसौनी , थाना फेन्हारा , जिला पुरबी चंपारण ने अपने जिलाधिकारी और एस पी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री जनाब नीतीश कुमार के पास 16 /06 /2013 को पत्र लिख कर सूचना दी के हमारे जमीन को दबंगों ने बल पूर्वक कब्ज़ा कर लिया है , मगर आज तक इन अधिकारीयों ने इस मामले की ओर धेयान नहीं दिया , जरा सोंचिये इस आज़ाद हिन्दुस्तान के अधिकारी क्या करते हैं ? किस बात का पैसा खाते हैं , जब कोई बड़ी घटना घाट जाती है तो बड़े बड़े डायलाग मारने से बाज भी नहीं आते , अगर अरुण राउत के साथ कुछ हो जाता है , या अरुण राउत जैसे लोग कानून अपने हाथों में लेलें तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?
संसद हमले पर आज तक कोई रिपोर्ट नहीं
संसद हमले पर आज तक कोई रिपोर्ट नहीं
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Posted on: 15-July-2013 Posted by: Afzal Hussain khan email: afzalhussain05@gmail.com
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Posted on: 13-July
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exposed
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Posted on: 15-July-2013
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लखनऊ : जिस तरह से गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आरवीएस मनी ने इशरत जहां मामले की जांच कर रहे सीबीआई और एसआईटी टीम का हिस्सा रहे आईपीएस अधिकारी सतीश वर्मा से हुई बातचीत कर खुलासा करते हुए कहा कि सतीश वर्मा ने उन्हें बताया था कि संसद पर हुआ आतंकी हमला और 26/11 को मुबंई पर हुए हमले दोनों ही आतंकी हमले सरकारों ने आतंकवाद से लड़ने के नाम पर सख्त कानूनों को बनाने के लिए करवाए थे, को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्तकाल संज्ञान में लेते हुए इन दोनों घटनाओं की जांच कराने की मांग करते हुए रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि ये दोनों ही घटनाएं शुरु से ही संदिग्ध रही हैं और तमाम मानवाधिकार संगठनों, प्रतिष्ठत पत्रकारों और यहां तक की कई सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों तक ने भी इन दोनों घटनाओं की सत्यता पर सवाल उठाए हैं. SC must take cognizense of new revelations regarding Govts role in Parliament attack and 26/11 & order probeमोहम्मद शुऐब ने कहा की यह बात सामने आ रही है कि देश में काले कानूनों को बनाने के लिए देश में आईबी आतंकी वारदातों को अंजाम देती है, और पिछले दिनों इशरत जहां के हत्यारे राजेन्द्र कुमार को बचाने के लिए जिस तरह आईबी प्रमुख आसिफ इब्राहिम और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया उससे यह आरोप और पुख्ता हो जाते हैं. काले कानूनों का शिकार देश का वंचित तबका मुस्लिम, दलित, आदिवासी ही होते हैं. जिन्हें आतंकवाद के नाम पर तो कभी माओवाद के नाम मारा जा रहा है. पिछले दिनों यूपी में बेगुनाह खालिद मुजाहिद की हत्या भी इसी कड़ी में हुई. ऐसे में हम माननीय सुप्रिम कोर्ट से अपील करते हैं कि वो इस संकटकाल में काले कानूनों की समीक्षा के लिए एक जांच आयोग गठित करे, जिससे इन काले कानूनों का खात्मा हो सके. रिहाई मंच के प्रवक्ताओं शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि ये दोनों ही घटनाएं और उनमें आए फैसले सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं रहे हैं. क्योंकि इनके बाद मुसलमानों की आतंकी छवि बनाने की कोशिशें लगातार की गयीं खास कर अफजल की फांसी की सजा जिसे ठोस सुबूतों के बजाए सिर्फ देश के एक हिस्से के उग्र हिंदुत्ववादी आकांक्षाओं को संतुष्ट करने के लिए सुनाया गया और अंततः न्यायिक प्रक्रिया को धता बताते हुये उसे फांसी पर भी चढ़ा दिया गया. जिसका न जाने कितने निर्दोषों को जो आतंक के आरोप में फंसाए गये हैं कि मुक़दमों और फैसलों पर गलत असर पड़ा. उन्होंने कहा कि इस खुलासे की जांच से हालांकि अफ़ज़ल वापस जिंदा तो नहीं हो सकता लेकिन इसकी जांच आईबी और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों की आतंकी और देश विरोधी गतिविधियों की पोल खोल देगा जो लोकतंत्र को बचाने के लिए ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि रिहाई मंच ने उत्तर प्रदेश की सपा सरकार से भी बार-बार यह मांग की है कि यूपी कचहरी धमाकों, रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हुए कथित आतंकी हमलों, वाराणसी में हुए धमाकों, गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट समेत यूपी में हई सभी आतंकी घटनाओं की एनआईए से जांच कराई जाए. क्योंकि रिहाई मंच का आरोप है कि जिस तरह से आईबी और पुलिस अधिकारियों ने मिलकर मौलाना खालिद की हत्या करवाई ऐसे में देश को तबाह करने में शिद्दत से लगी आईबी ने ही उत्तर प्रदेश समेत देश में आतंकी वारदातों को अंजाम दिया है. हमारा लगातार आरोप है कि इंडियन मुजाहिदीन आईबी द्वारा संचालित संगठन है. ऐसे में प्रदेश में हुई सभी आतंकी घटनाओं की एनआईए से जांच कराई जाए. इस खुलासे पर बात रखते हुये मुस्लिम मजलिस के प्रदेश प्रवक्ता जैद अहमद फारूकी और इंडियन नेशनल लीग के हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि जो बात आज गृह मंत्रालय के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मुम्बई में हुये 26/11 हमलों के संदर्भ में कह रहे हैं उसका खुलासा तो बहुत पहले महाराष्ट्र के सेवानिवृत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसएम मुशरिफ ने अपनी किताब �हू किल्ड करकरे� में कर दिया था कि 26/11 भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने करवाए थे. लेकिन अब जब सरकारी के ही सीनियर ब्यूरोक्रेट इस बात को कह रहे हैं तो ज़रूरी हो जाता है कि सुप्रीम कोर्ट इसे गम्भीरता से संज्ञान में लेते हुये इसकी पुनः जांच कराए. धरने को संबोधित करते हुए भारतीय एकता पार्टी के सैयद मोईद अहमद ने कहा कि एक के बाद एक घटनाओं में हकीकत सामने आ रही है कि हमारे रहबर ही रहजनी करने लगे हैं. खालिद मुजाहिद की मौत के बाद जिस तरीके से सरकार इस बात को भुलाने की कोशिश कर रही है और अखिलेश यादव ने वादा करके मानसून सत्र नहीं बुलाया और मौलाना खालिद मुजाहिद और तारिक कासमी को बेगुनाह साबित करने वाली आरडी निमेष रिपोर्ट पर एक्शन नहीं किया उससे साफ हो जाता है कि इस सरकार में मुसलमानों की कोई सुनवाई नहीं है. शायर जुबैर जौनपुरी ने शेर के माध्यम से इस बात को कहा कि 2014 में होने वाले चुनाव में खालिद का खून रंग लाएगा और इस कातिल सरकार का खात्मा कर देगा. उन्होंने कहा कि जो सरकार पाक रमजान के महीने में भी हमें सड़क के किनारे बैठने को मजबूर कर रही है ऐसी कातिल सपा सरकार के बुलाने पर कोई मुस्लिम भाई रोजे अफ्तार पार्टियों में न जाए और न ही उन्हें बुलाए. रिहाई मंच के प्रवक्ताओं ने बताया कि कल धरने के 55 वें दिन 15 जुलाई को सीपीएम के महासचिव प्रकाश करान धरने के समर्थन में आएंगे. धरने का संचालन रिहाई मंच के प्रवक्ता राजीव यादव ने किया. इस दौरान हरे राम मिश्र, भारतीय एकता पार्टी के राष्ट्रीय सदर सैयद मोईद अहमद, एएनसी के फरीद खान, मुस्लिम मजलिस के प्रवक्ता जैद अहमद फारूकी, मोहम्मद फैज, शाहनवाज आलम आदि उपस्थित रहे.
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पार्लियामेंट और मुंबई पर हमले हुकूमत ने ही करवाए थे
पार्लियामेंट और मुंबई पर हमले हुकूमत ने ही करवाए थे
न्यू डेल्ही 1 4 जुलाई ( एजेंसी ) इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में सी बी आई और आई बी के दरमयान जारी झगरे के दौरान गृहमंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी ने बेहद चौकाने वाला दावा किया है , अफसर का कहना है के 2 0 0 1 में पार्लियामेंट हिउसे पर 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले की साजिश खुद सरकार ने कराये थे , इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में अदालत को दिए एक हलफनामे में गृहमंत्रालय में तत्कालीन अंडर सेक्रेटरी आर वी एस मणि ने कहा है के आई पी एस अधिकारी सतीश वर्मा ने कहा था के ये दोनों आतंकी हमले दहशतगर्दी के खेलाफ बनाये जाने वाले कानून को मजबूत आधार प्रदान करने के लिए कराये गए थे , श्री वर्मा कुछ दिन पहले तक सी बी आई , एस आई टी की जाच टीम के सदस्य थे , मणि के मुताबिक़ बर्मा ने कहा था के 1 3 दिसंबर 2001 को पार्लियामेंट हाउस पर हमला पोटा कानून को पास कराने से पहले किया गया था , जबके 26/11 /2008 को मुंबई पर हुए हमले दह्शात्गार्दाना हमले के बाद गैर कानूनी रोक थाम अधिनियम में संसोधन
किया गया , गृहमंत्रालय के पूर्व अधिकारी का कहना है के इशरत जहाँ मामले की जाँच कर रही सी बी आई ,एस आई टी के एक सदस्य ने पार्लियामेंट और मुंबई पर 26/11 के दह्शात्गार्दाना हमले के लिए उस वक्त की सरकारों पर साजिश रचने का इल्जाम लगाया था ,एक अंग्रेजी अखबार के रिपोर्ट के मुताबिक़ इशरत जहाँ एनकाउंटर मामले की जांच में सरकार के तरफ से अदालत में हलफ़नामे पर दस्तखत करने वाले गृहमंत्रालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव आर वी एस मणि ने कहा के हाल तक सी बी आई ,एस आई टी के सदस्य रहे सतीश वर्मा ने बताया था के दोनों आतंकी घटना की साजिश उस वक्त की सरकार ने रची थी ,श्री मणि ने सतीश के हवाले से कहा के 13/12/2001 को पार्लियामेंट पर हमले के बाद पोटा कानून लागु किया गया ,फिर 26/11/2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद गैर कानूनी सरगर्मी रोक थाम सम्बंधित कानून में तबदीली की गई ,याद रहे के दोनों हमलों के वक़्त क्रमशः बी जे पी और कांग्रेस की सरकारें केंद्र में थी . गुजरात कैडर के आई पी एस अधिकारी सतीश वर्मा ने कहा था के मुझे पता नहीं क्या शिकायत है ? किसने की ?और कब की ? न इसे जान्ने में मेरी कोई दिलचश्पी है ,इस तरह के मामलों में मीडिया से बात नहीं कर सकते , आप सी बी आई से पूछिए , इशरत जहाँ मामले में गठित एस आई टी सदस्य सतीश वर्मा का हाल हे में जुनागर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में प्रिंसिपल की हैसियत से ट्रान्सफर किया गया है ,हाल ही में शहरी मंत्रालय में डिप्टी ऑफिसर बनाये गए आर वी एस मणि ने अपने आला अधिकारियों को लिखे ख़त में कहा है के सतीश वर्मा वही कह रहे जो पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आई एस आई कहती है , उनके मुताबिक़ ,बर्मा ने 2 2 जून को अहमदाबाद में उस वक़्त कही थी जब वह एनकाउंटर मामले में गृहमंत्रालय के दो हलफनामे पे उनसे पुच -ताछ कर रहे थे , मणि ने शहरी विकाश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी को लिखे ख़त में इल्जाम लगाया है के वर्मा ने उनके एक बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया थे , जिसमें कहा गया था के , एनकाउंटर मामले में पहला हलफनामा आई बी के दो अधिकारी ने तैयार किया था , मणि ने कहा के मै यह जानता था के ऐसा बयान मेरे अपने उस वक्त के सीनियर अधिकारी पर झूठे इल्जाम लगाने जैसा है , इसलिए मैंने इस बयान पर हस्ताषर करने से इनकार कर दिया (उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनाकं 15/7/2013 से लिया गया है )
न्यू डेल्ही 1 4 जुलाई (एजेंसी) गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंदर मोदी की हत्या से सम्बंधित इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में फंसे आई बी के जॉइंट डायरेक्टर राजेंदर कुमार के ख़ुफ़िया जानकारी पर संगीन सवाल उठने लगे हैं , इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर के साथ सादिक जमाल एनकाउंटर मामले की जाँच कर रही सी बी आई को ऐसे पुख्ता सुराग मिले हैं .जिससे राजेंदर कुमार की यह जानकारी ,किसी खास मकसद के तेहत दी गई मालुम हो रही है , सरकार के आला सूत्रों के मुताबिक़ सादिक के फर्जी एनकाउंटर के तार अंडरवर्ल्ड से जुड़े है , राजेंदर कुमार ने ही गुजरात की आई बी ब्रांच के नेत्रित्व के दौरान 1 अक्तूबर 2002 को ख़ुफ़िया कानकारी मुहैया कराइ थी के सादिक जमाल लश्कर - ए -तैयेबा का दहशतगर्द है और मुख्य मंत्री नरेंदर मोदी की हत्या के लए तैयार बैठा है , सी बी आई के मुताबिक़ यही जानकारी 3 जनवरी 2003 को सादिक के कथित हरता की वजह बनी थी , वजेह रहे के इसके एक साल बाद राजेंदर कुमार ने इशरत जहाँ और इसके तीन दोस्तों के बारे में ठीक इसी तरह ख़ुफ़िया जानकारी उपलब्ध कराइ थी , आला सरकारी सूत्रों ने बताया के सादिक 1 9 दिसंबर 2002 को अपनी गिरफ्तारी से तक़रीबन आठ माह पहले दुबई से नौकरी कर के वापस आया था , वह दुबई में अंडर वर्ल्ड दाउद इब्राहिम के करीबी छोटा शकील के रिश्तेदार के यहाँ काम करता था , इस मामले में दायर चार्जशीट में कहा है के वहां सादिक का शमीम चक्लूं नाम के दाउद के गुर्गे से झगडा हो गया था , सूत्रों के मुताबिक यह बात भी सामने आई के सादिक ने इस खानदान की किसी औरत के साथ बदसलूकी की थी , सी बी आई ने इस बात को रिकॉर्ड नहीं किया है , झगडे की सुलह सफाई के बाद सादिक हिन्दुस्तान वापस आ गया , सूत्रों के मुताबिक़ इस झड़े के बाद से ही दाउद के लोगों ने सादिक को मारने का फैसला कर लिया था , दुबई की शख्त कानून की वजह से वहां छोड़ दिया गया , सी बी आई इस बात की भी जांच कर रही है के इस मामले से राजेंदर की ख़ुफ़िया जानकारी की किस हद तक सम्बन्ध है ?(उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनाकं 15/7/2013 से लिया गया है )
न्यू डेल्ही 1 4 जुलाई ( एजेंसी ) इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में सी बी आई और आई बी के दरमयान जारी झगरे के दौरान गृहमंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी ने बेहद चौकाने वाला दावा किया है , अफसर का कहना है के 2 0 0 1 में पार्लियामेंट हिउसे पर 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले की साजिश खुद सरकार ने कराये थे , इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में अदालत को दिए एक हलफनामे में गृहमंत्रालय में तत्कालीन अंडर सेक्रेटरी आर वी एस मणि ने कहा है के आई पी एस अधिकारी सतीश वर्मा ने कहा था के ये दोनों आतंकी हमले दहशतगर्दी के खेलाफ बनाये जाने वाले कानून को मजबूत आधार प्रदान करने के लिए कराये गए थे , श्री वर्मा कुछ दिन पहले तक सी बी आई , एस आई टी की जाच टीम के सदस्य थे , मणि के मुताबिक़ बर्मा ने कहा था के 1 3 दिसंबर 2001 को पार्लियामेंट हाउस पर हमला पोटा कानून को पास कराने से पहले किया गया था , जबके 26/11 /2008 को मुंबई पर हुए हमले दह्शात्गार्दाना हमले के बाद गैर कानूनी रोक थाम अधिनियम में संसोधन
किया गया , गृहमंत्रालय के पूर्व अधिकारी का कहना है के इशरत जहाँ मामले की जाँच कर रही सी बी आई ,एस आई टी के एक सदस्य ने पार्लियामेंट और मुंबई पर 26/11 के दह्शात्गार्दाना हमले के लिए उस वक्त की सरकारों पर साजिश रचने का इल्जाम लगाया था ,एक अंग्रेजी अखबार के रिपोर्ट के मुताबिक़ इशरत जहाँ एनकाउंटर मामले की जांच में सरकार के तरफ से अदालत में हलफ़नामे पर दस्तखत करने वाले गृहमंत्रालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव आर वी एस मणि ने कहा के हाल तक सी बी आई ,एस आई टी के सदस्य रहे सतीश वर्मा ने बताया था के दोनों आतंकी घटना की साजिश उस वक्त की सरकार ने रची थी ,श्री मणि ने सतीश के हवाले से कहा के 13/12/2001 को पार्लियामेंट पर हमले के बाद पोटा कानून लागु किया गया ,फिर 26/11/2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद गैर कानूनी सरगर्मी रोक थाम सम्बंधित कानून में तबदीली की गई ,याद रहे के दोनों हमलों के वक़्त क्रमशः बी जे पी और कांग्रेस की सरकारें केंद्र में थी . गुजरात कैडर के आई पी एस अधिकारी सतीश वर्मा ने कहा था के मुझे पता नहीं क्या शिकायत है ? किसने की ?और कब की ? न इसे जान्ने में मेरी कोई दिलचश्पी है ,इस तरह के मामलों में मीडिया से बात नहीं कर सकते , आप सी बी आई से पूछिए , इशरत जहाँ मामले में गठित एस आई टी सदस्य सतीश वर्मा का हाल हे में जुनागर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में प्रिंसिपल की हैसियत से ट्रान्सफर किया गया है ,हाल ही में शहरी मंत्रालय में डिप्टी ऑफिसर बनाये गए आर वी एस मणि ने अपने आला अधिकारियों को लिखे ख़त में कहा है के सतीश वर्मा वही कह रहे जो पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आई एस आई कहती है , उनके मुताबिक़ ,बर्मा ने 2 2 जून को अहमदाबाद में उस वक़्त कही थी जब वह एनकाउंटर मामले में गृहमंत्रालय के दो हलफनामे पे उनसे पुच -ताछ कर रहे थे , मणि ने शहरी विकाश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी को लिखे ख़त में इल्जाम लगाया है के वर्मा ने उनके एक बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया थे , जिसमें कहा गया था के , एनकाउंटर मामले में पहला हलफनामा आई बी के दो अधिकारी ने तैयार किया था , मणि ने कहा के मै यह जानता था के ऐसा बयान मेरे अपने उस वक्त के सीनियर अधिकारी पर झूठे इल्जाम लगाने जैसा है , इसलिए मैंने इस बयान पर हस्ताषर करने से इनकार कर दिया (उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनाकं 15/7/2013 से लिया गया है )
न्यू डेल्ही 1 4 जुलाई (एजेंसी) गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंदर मोदी की हत्या से सम्बंधित इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में फंसे आई बी के जॉइंट डायरेक्टर राजेंदर कुमार के ख़ुफ़िया जानकारी पर संगीन सवाल उठने लगे हैं , इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर के साथ सादिक जमाल एनकाउंटर मामले की जाँच कर रही सी बी आई को ऐसे पुख्ता सुराग मिले हैं .जिससे राजेंदर कुमार की यह जानकारी ,किसी खास मकसद के तेहत दी गई मालुम हो रही है , सरकार के आला सूत्रों के मुताबिक़ सादिक के फर्जी एनकाउंटर के तार अंडरवर्ल्ड से जुड़े है , राजेंदर कुमार ने ही गुजरात की आई बी ब्रांच के नेत्रित्व के दौरान 1 अक्तूबर 2002 को ख़ुफ़िया कानकारी मुहैया कराइ थी के सादिक जमाल लश्कर - ए -तैयेबा का दहशतगर्द है और मुख्य मंत्री नरेंदर मोदी की हत्या के लए तैयार बैठा है , सी बी आई के मुताबिक़ यही जानकारी 3 जनवरी 2003 को सादिक के कथित हरता की वजह बनी थी , वजेह रहे के इसके एक साल बाद राजेंदर कुमार ने इशरत जहाँ और इसके तीन दोस्तों के बारे में ठीक इसी तरह ख़ुफ़िया जानकारी उपलब्ध कराइ थी , आला सरकारी सूत्रों ने बताया के सादिक 1 9 दिसंबर 2002 को अपनी गिरफ्तारी से तक़रीबन आठ माह पहले दुबई से नौकरी कर के वापस आया था , वह दुबई में अंडर वर्ल्ड दाउद इब्राहिम के करीबी छोटा शकील के रिश्तेदार के यहाँ काम करता था , इस मामले में दायर चार्जशीट में कहा है के वहां सादिक का शमीम चक्लूं नाम के दाउद के गुर्गे से झगडा हो गया था , सूत्रों के मुताबिक यह बात भी सामने आई के सादिक ने इस खानदान की किसी औरत के साथ बदसलूकी की थी , सी बी आई ने इस बात को रिकॉर्ड नहीं किया है , झगडे की सुलह सफाई के बाद सादिक हिन्दुस्तान वापस आ गया , सूत्रों के मुताबिक़ इस झड़े के बाद से ही दाउद के लोगों ने सादिक को मारने का फैसला कर लिया था , दुबई की शख्त कानून की वजह से वहां छोड़ दिया गया , सी बी आई इस बात की भी जांच कर रही है के इस मामले से राजेंदर की ख़ुफ़िया जानकारी की किस हद तक सम्बन्ध है ?(उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनाकं 15/7/2013 से लिया गया है )
Aakhir samaj kalyan vibhag itna meharban keyon hai?
Aakhir samaj kalyan vibhag itna meharban keyon hai? PANCHAYAT MANICHAPRA,BLOCK KALYANPUR,JILA PURBI CHAMPARAN,KE WARD NO 1 ME CHALNE WALE ANGAN BARI KENRA KI BAHALE MEIN BARAY PAMANAY PAR DHANDHLI HUI THI, YE AB PURI TARAH PRAMANIT HOTA DIKH RAHA,KYON K RTI SE SUCHNA 2 BAR YANI 27.5.08, AWEDAK MD.KAUSAR NADEEM,AUR ALI NAWAJ K DAWARA MANGI GAYI SUCHNA DT.14.9.9 KA JAWAB ADHIKARIYON NE TAMAM KOSHISO K BAWAJUD NA DEKAR ADHIKARIYO NE KHUDKO SANDEH K GHERE ME GHER LIYA,MAGAR MANTRAY KI SPECIAL KIRPA KE KARAN DOSHIYON PAR SHIKANJA ABTAK NAHI KASA JA SAKA,SUTRON K ANUSAR BHARASHTACHARIYO KI PAKAR UPAR TAK HAI?
Gunjan patel&uske dosto ko chode jane par hangama keyon hai?
Gunjan patel&uske dosto ko chode jane par hangama keyon hai?Dunia wishwas par tiki hai,samaj ka smamaj aur qanun par se wishwash se khatm hona achchi bat nahi,mahabodhi mandir mandir me huye dhamake ki janch desh ki sabse wishwashniye agency kar rahi,agency ne abtak ki puch-tach se saticefied hone k bad he choda hoga,aisi halat me,ek wishesh political party k jariye mudda banate huye wirodh kiya jana kitna uchit tha,kisi ko aropy,kisi ghatna me mahaj kisi party & samudaye wishesh se sambadh rahne k karan nahi banaya jana chahiye.aisa dharm aur qanun dono lehaj se galat hai. www.biharbroadcasting.com
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