Modi ko vote dene walon ko fir mila inaam ........!!

राजधानी, शतादी और दुरंतो म सफर महंगा, लैसी फेयर कम होगी लागू

Jagran 07 September 2016, 19:31

नईिदी। रेलवे ने ीिमयम टेनके िकराएम बढ़ोतरीकएकनई यवथालागू कही। 9 सतंबर से राजधानी, शतादी और दुरंतो टेन के लए लैसी फेयर कम लागू होगी। इसके मुतािबकइन टेनम हरदसफसदी िटकटबुिकंगके बादिकराएम दसफसदीक बढ़ोतरीहोजाएगी। ऐसे म आखरी दस फसदी िटकट क बुिकंग करने वाले लोग को अधकतम डेढ़ गुना तकिकरायादेनापड़ेगा। डेढ़गुनािकरायाबढ़ने के बादये यवथालागू नहहोगी। जानकारी के मुतािबक फट लास और एजीयूिटव लास को छोड़कर बाक सभी लास पर ये यवथा लागू होगी। यह िनयम पहली साठ फसदी िटकट पर लागू होगा और बाक क 40 फसदी िटकट क बुिकंग के लए ाहक को डेढ़ गुना िकराया देना पड़ेगा। यानी जोयाी पहले िटकट बुिकंगकराएंगे उह बढ़ा हआिकराया वहननह करनापड़
  http://m.jagran.com/article1/news/national-government-will-imply-flexi-fare-system-in-premium-trains-14653413.html?src=ucbrowser&entry=app&entry1=shareback&uc_param_str=dnnivebichfrmintcpgieiwidsudsv&lang=hindi&channel_id=102&uc_biz_str=action:base.openwindow|param:S.object=infoflow;S.scene=1002;l.channel=102;end&uc_msg=agoo'1594477627863859200'1&entry2=widget_Whatsapp

Copied from  Dainik jagran. े

जरूर पढ़ें ! भारत में जरूरत की चीजें नहीं खरीदी जाती , बल्कि विज्ञापन देख कर जरुरत महसूस की जाती हैं ।

Fashionable India

यही है त्वरित न्याय ?10 महीने में होने वाला इन्साफ 10 साल बाद ।।

कब मिलेगा देश में पीड़ितों को त्वरित न्याय ?

ﺍﻟﻠﮧ ﮐﺎ ﺣﺘﻤﯽ ﻓﯿﺼﻠﮧ ﺻﺮﻑ ﺍﺱ ﺑﻨﯿﺎﺩ ﭘﺮ ﮨﻮﮔﺎ ﮐﮧ " ﮨﻢ ﻧﮯ ﺭﺏ ﭼﺎ ﮨﯽ ﺯﻧﺪﮔﯽ ﮔﺰﺍﺭﯼ ﯾﺎ ﻣﻥ ﻣﺎﻧﯽ ﺯﻧﺪﮔﯽ"-

ﺟﻮ ﮐﭽﮫ ﺑﮭﯽ ﻣﯿﮟ ﯾﮩﺎﮞ ﻟﮑﮫ ﺭﮨﺎ ﮨﻮﮞ ﻣﯿﮟ ﻣﻌﺎﺷﺮﮮ ﻣﯿﮟﻟﻮﮔﻮﮞ ﮐﮯ ﺳﺎﺗﮫ ﺑﺎﺕ ﭼﯿﺖ ﺳﮯ ﺣﺎﺻِﻞ ﺷُﺪﮦ ﺗﺠﺮﺑﮯ ﮐﯽ ﺑﻨﯿﺎﺩ ﭘﺮ ﻟﮑﮫ ﺭﮨﺎ ﮨﻮﮞ-ﮨﻢ ﺍﯾﮏ ﺍﻣﺖ ﮐﮯ ﻃﻮﺭ ﭘﺮ ﻣﺘﺤﺪ ﮨﻮﻧﮯ ﮐﺎ ﺩﻋﻮﯼ ﮐﺮﺗﮯ ﮨﯿﮟ. ﻟﯿﮑﻦ ﺫﺍﺕ ﮐﯽ ﺑﻨﯿﺎﺩ ﭘﺮ ؛ ﻣﺴﻠﮏ ﮐﯽ ﺑﻨﯿﺎﺩ ﭘﺮ ﻣﻨﻘﺴﻢ ﮨﯿﮟ ﺷﺪﺕ ﮐﮯ ﺳﺎﺗﮫ. ﺍﺏ ﺁﺝ ﮐﻞ ﮨﻢ ﺩﻧﯿﺎﻭﯼ ﮐﺎﻣﯿﺎﺑﯽ ﮐﯽ ﺑﻨﯿﺎﺩ ﭘﺮ ﺗﻘﺴﯿﻢ ﮨﻮ ﺭﮨﮯ ﮨﯿﮟ. ﭘﯿﺸﮧ ﻭﺭﺍﻧﮧ ﺗﻌﻠﯿﻢ ﯾﺎﻓﺘﮧ ﻣﺴﻠﻤﺎﻥ ﺩﯾﮕﺮ ﻣﺴﻠﻤﺎﻥ ﮐﻮ ﻧﻴﭽﯽ ﻧﻈﺮ ﺳﮯ ﺩﯾﮑﮭﺘﮯ ﮨﯿﮟ. ﺍﻣﯿﺮ ﻣﺴﻠﻤﺎﻥ ﻏﺮﯾﺐ ﻣﺴﻠﻤﺎﻧﻮﮞ ﮐﻮ ﻧﻴﭽﯽ ﻧﻈﺮ ﺳﮯﺩﯾﮑﮭﺘﮯ ﮨﯿﮟ. ﻣﺴﻠﻤﺎﻧﻮﮞ ﮐﯽ ﻣﺪﺩ ﺍﻣﺖ ﻣﺴﻠﻤﮧ ﮐﯽ ﺍﭘﻨﯽ ﺫﻣﮧ ﺩﺍﺭﯾﻮﮞ ﺍﻭﺭ ﻓﺮﺍﺋﺾ ﮐﮯ ﺍﺣﺴﺎﺱ ﮐﮯ ﺳﺎﺗﮫ ﻧﮩﯿﮟ ﮐﺮﻧﺎ ﭼﺎﮨﺘﮯ ﮨﯿﮟ. ﻭﮦ ﺍﭘﻨﯽ ﻧﯿﮑﯽ ﮐﺎ ﺍﻟﻠﮧ ﮐﯽ ﻃﺮﻑ ﺳﮯ ﻓﻮﺭﯼ ﺍﺣﺴﺎﻥ ﺑﺪﻝ ﭼﺎﮨﺘﮯ ﮨﯿﮟ. ﻧﺎﻡ ﻧﮩﺎﺩ ﺍﻣﯿﺮ ﺍﻭﺭ ﺗﻌﻠﯿﻢ ﯾﺎﻓﺘﮧ ﻣﺴﻠﻤﺎﻥ ﮐﺎ ﺩﻋﻮﯼ ﮨﮯ ﮐﮧ ﺍﻟﻠﮧ ﺍﻥ ﺳﮯ ﺭﺍﺿﯽ ﮨﮯ ﻭ ﮯ ﺻﺤﯿﺢ ﮨﯿﮟ ﺍﺱ ﻭﺟﮧ ﺳﮯ ﮐﺎﻣﯿﺎﺏ ﺍﻭﺭ ﺍﻣﯿﺮ ﮨﯿﮟ. ﮨﻤﯿﺸﮧ ﮐﮩﺘﮯ ﮨﯿﮟ ﺟﻮ ﻏﺮﯾﺐ ﺍﻭﺭ ﺯﯾﺎﺩﮦ ﮐﺎﻣﯿﺎﺏ ﻧﮩﯿﮟ ﺗﻮ ﺍﻟﻠﮧ ﺍﻥ ﺳﮯ ﺭﺍﺿﯽ ﻧﮩﯿﮟ ﮨﮯ ; ﺍﻟﻠﮧ ﺍﻥ ﺳﮯ ﻧﺎﺭﺍﺽ ﮨﮯ.
********
ﻟﯿﮑﻦ
********
ﮨﻤﯿﮟ ﮐﺒﮭﯽ ﻧﮩﯿﮟ ﺑﮭﻮﻟﻨﺎ ﭼﺎﮨﺌﮯ ﺁﺳﺎﻥ ﯾﺎ ﻣﺸﮑﻞ ، ﮐﺎﻣﯿﺎﺏ ﯾﺎ ﻧﺎﮐﺎﻡ ﺩﻧﯿﺎﻭﯼ ﺯﻧﺪﮔﯽﺍﻟﻠﮧ ﮐﯽ ﻃﺮﻑ ﺳﮯ ﺗﻤﺎﻡ ﭨﯿﺴﭧ ﺍﻭﺭ ﺍﻣﺘﺤﺎﻥ ﮨﯿﮟ; ﺯﻧﺪﮔﯽ ﺍﯾﮏ ﺳﺨﺖ ﺍﻣﺘﺤﺎﻥ ﺍﻭﺭ ﻓﺘﻨﮧ ﮨﮯ-
ﻣﻮﺕ ﺍﻭﺭ ﻗﺒﺮ ﮨﻤﯿﮟ" ﺩﻧﯿﺎﻭﯼ ﺯﻧﺪﮔﯽ ﻣﯿﮟ ﮨﻢ ﮐﻮﻥ ﺗﮭﮯ" ﮐﯽ ﺑﻨﯿﺎﺩ ﭘﺮ ﮐﺒﮭﯽ ﻣﻤﺘﺎﺯ ﻧﮩﯿﮟ ﺑﻨﺎﺘﮯ- ﮨﺮ ﮐﺴﯽ ﮐﻮ ﻣﻮﺕ ﺍﻭﺭ ﻗﺒﺮ ﮐﺎ ﺳﺎﻣﻨﺎ ﮐﺮﻧﺎ ﭘﮍﺗﺎ ﮨﮯ-ﺍﻟﻠﮧ ﮐﺎ ﺣﺘﻤﯽ ﻓﯿﺼﻠﮧ ﺻﺮﻑ ﺍﺱ ﺑﻨﯿﺎﺩ ﭘﺮ  ﮨﻮﮔﺎ ﮐﮧ " ﮨﻢ ﻧﮯ ﺭﺏ ﭼﺎ ﮨﯽ ﺯﻧﺪﮔﯽ ﮔﺰﺍﺭﯼ ﯾﺎ ﻣﻥ ﻣﺎﻧﯽ  ﺯﻧﺪﮔﯽ"-

अब बलूचिस्तान ने दिया PM मोदी को तगड़ा झटका, यूएन में उठेगा मुद्दा |


( Times Media 24 Hindi )
अब बलूचिस्तान ने दिया PM मोदी को तगड़ा झटका, यूएन में उठेगा मुद्दा

बलूचिस्तान के लिए 15 अगस्त को आवाज उठाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तगड़ा झटका लगा है। यह झटका खुद बलूचिस्तान ने दिया है। पाकिस्तान के डॉन अखबार के मुताबिक बलूचिस्तान विधानसभा में शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया। बलूचिस्तान के नेताओं ने खुद पीएम मोदी से आजादी दिलाने की मांग की है। जबकि वहां की कई महिला नेता पीएम मोदी को अपना भाई मानती हैं। सर्वसम्मति से पास यह प्रस्ताव पीएम मोदी के 15 अगस्त को दिए उस बयान के खिलाफ था, जिसमें बलूचिस्तान की आजादी की बात कही गई थी। विधानसभा में यह प्रस्ताव पीएमएल-एन के नेता मोहम्मद खान लहरी ने पेश किया। इसके बाद पख्‍तूनवा मिली अवामी पार्टी, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम समेत सभी दलों ने प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी। बलूचिस्तान के मुख्‍यमंत्री नवाब सनाउल्लाह जेहरी समेत सभी नेताओं ने प्रस्ताव पर दस्तखत भी किए। इस प्रस्ताव में कहा गया कि भारतीय पीएम के बलूचिस्तान पर दिए बयान से साफ है कि यहां आतंकवाद की असल वजह भारत है। भारत ही बलूचिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। बलूचिस्तान के मुख्‍यमंत्री नवाब सनाउल्लाह जेहरी ने प्रस्ताव पर कहा कि भारत के पीएम ने पाकिस्तान की संप्रभुता के खिलाफ बयान दिया और यूनाइटेड नेशंस चार्टर के नियमों का उल्लंघन किया है। सदन ने एकमत से कहा कि भारत की इस नीति की पोल दुनिया के सामने खोली जाए। गृहमंत्री सरफराज बग्ती ने कहा कि मोदी का यह बयान दुनिया का ध्‍यान पाक अधिकृत कश्‍मीर से हटाने के लिए है।
http://timesmedia24.com/hindi/india-modi-balochistan-un/

शिक्षक और शिष्य .....

शिक्षक और शिष्य .....
.
.
.
.
.
.
.

वसुंधरा दीदी एक छोटे से शहर के  प्राथमिक स्कूल में कक्षा 5 की शिक्षिका थीं। उनकी एक आदत थी कि वह कक्षा शुरू करने से पहले हमेशा "आई लव यू ऑल" बोला करतीं, मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं कहती, वह कक्षा के सभी बच्चों से उतना प्यार नहीं करती थीं।

कक्षा में एक ऐसा बच्चा था जो वसुंधरा को एक आंख नहीं भाता। उसका नाम आशीष था, आशीष मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आ जाया करता है। उसके बाल खराब होते, जूतों के बन्ध खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान।

व्याख्यान के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता। वसुंधरा के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखता तो लग जाता.. मगर उसकी खाली खाली नज़रों से उन्हें साफ पता लगता रहता कि आशीष शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब है।

धीरे-धीरे वसुंधरा को आशीष से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही आशीष वसुंधरा की आलोचना का निशाना बनने लगता। सब बुराई उदाहरण आशीष के नाम पर किये जाते। बच्चे उस पर खिलखिला कर हंसते और वसुंधरा उसको अपमानित कर के संतोष प्राप्त करतीं, आशीष ने हालांकि किसी बात का कभी कोई जवाब नहीं दिया था।

वसुंधरा को वह एक बेजान पत्थर की तरह लगता जिसके अंदर महसूस नाम की कोई चीज नहीं थी। प्रत्येक डांट, व्यंग्य और सजा के जवाब में वह बस अपनी भावनाओं से खाली नज़रों से उन्हें देखा करता और सिर झुका लेता ।

वसुंधरा को अब इससे गंभीर चिढ़ हो चुकी थी। पहला सेमेस्टर समाप्त हो गया और रिपोर्ट बनाने का चरण आया तो वसुंधरा ने आशीष की प्रगति रिपोर्ट में यह सब बुरी बातें लिख मारी। प्रगति रिपोर्ट कार्ड माता- पिता को दिखाने से पहले प्रधानाध्यापिका के पास जाया करता था, उन्होंने जब आशीष की रिपोर्ट देखी तो वसुंधरा को बुला लिया।

"वसुंधरा.. प्रगति रिपोर्ट में कुछ तो प्रगति भी लिखनी चाहिए। आपने तो जो कुछ लिखा है इससे आशीष के पिता इससे बिल्कुल निराश हो जाएंगे।"  "मैं माफी माँगती हूँ, लेकिन आशीष एक बिल्कुल ही अशिष्ट और निकम्मा बच्चा है, मुझे नहीं लगता कि मैं उसकी प्रगति के बारे में कुछ भी अच्छा लिख सकती हूँ।" वसुंधरा बेहद घृणित लहजे में बोलकर वहाँ से उठ आईं।

प्रधानाध्यापिका ने एक अजीब हरकत की। उन्होंने चपरासी के  हाथ वसुंधरा की डेस्क पर आशीष की पिछले वर्षों की प्रगति रिपोर्ट रखवा दी। अगले दिन वसुंधरा ने कक्षा में प्रवेश किया तो रिपोर्ट पर नजर पड़ी। पलट कर देखा तो पता लगा कि यह आशीष की रिपोर्ट हैं।

"पिछली कक्षाओं में भी उसने निश्चय ही यही गुल खिलाए होंगे।" उन्होंने सोचा और कक्षा 3 की रिपोर्ट खोली। रिपोर्ट में टिप्पणी पढ़कर उनकी आश्चर्य की कोई सीमा न रही जब उन्होंने देखा कि रिपोर्ट उसकी तारीफों से भरी पड़ी है।  "आशीष जैसा बुद्धिमान बच्चा मैंने आज तक नहीं देखा।" "बेहद संवेदनशील बच्चा है और अपने मित्रों और शिक्षकों से बेहद लगाव रखता है।" अंतिम सेमेस्टर में भी आशीष ने प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया  है।

वसुंधरा दीदी ने अनिश्चित स्थिति में कक्षा 4 की रिपोर्ट खोली। "आशीष ने अपनी मां की बीमारी का बेहद प्रभाव लिया। उसका ध्यान पढ़ाई से हट रहा है।"  "आशीष की माँ को अंतिम चरण का कैंसर हुआ है।घर पर उसका और कोई ध्यान रखनेवाला नहीं है, जिसका गहरा प्रभाव उसकी पढ़ाई पर पड़ा है।" आशीष की माँ मर चुकी है और इसके साथ ही आशीष के जीवन की रमक और रौनक भी। उसे बचाना होगा...इससे पहले कि  बहुत देर हो जाए।

"वसुंधरा के दिमाग पर भयानक बोझ तारी हो गया। कांपते हाथों से उन्होंने प्रगति रिपोर्ट बंद की। आंसू उनकी आँखों से एक के बाद एक गिरने लगे, अगले दिन जब वसुंधरा कक्षा में दाख़िल हुईं तो उन्होंने अपनी आदत  के अनुसार अपना पारंपरिक वाक्यांश "आई लव यू ऑल" दोहराया। मगर वह जानती थीं कि वह आज भी झूठ बोल रही हैं। क्योंकि इसी क्लास में बैठे एक उलझे  बालों वाले बच्चे आशीष के लिए जो प्यार वह आज अपने दिल में महसूस कर रही थीं..वह कक्षा में बैठे और किसी भी बच्चे से हो ही नहीं सकता  था।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने रोजाना  दिनचर्या की तरह एक सवाल आशीष पर दागा और हमेशा की तरह आशीष ने सिर झुका लिया। जब कुछ देर तक वसुंधरा से कोई डांट फटकार और सहपाठी सहयोगियों से हंसी की आवाज उसके कानों में न पड़ी तो उसने गहन आश्चर्य से सिर उठाकर उनकी ओर देखा। अप्रत्याशित उनके माथे पर आज बल न थे, वह मुस्कुरा रही थीं।

उन्होंने आशीष को अपने पास बुलाया और उसे सवाल का जवाब बताकर जबरन दोहराने के लिए कहा। आशीष तीन चार बार के आग्रह के बाद अंतत:बोल ही पड़ा। इसके जवाब देते ही वसुंधरा ने न सिर्फ खुद खुशान्दाज़ होकर तालियाँ बजाईं बल्कि सभी से भी बजवायी.. फिर तो यह दिनचर्या बन गयी।

वसुंधरा अब हर सवाल का जवाब अपने आप बताती और फिर उसकी खूब सराहना तारीफ करतीं। प्रत्येक अच्छा उदाहरण आशीष के कारण दिया जाने लगा । धीरे-धीरे पुराना आशीष सन्नाटे की कब्र फाड़ कर बाहर आ गया। अब वसुंधरा को सवाल के साथ जवाब बताने की जरूरत नहीं पड़ती। वह रोज बिना कोई त्रुटि उत्तर देकर सभी को प्रभावित करता और नये  नए सवाल पूछ कर सबको हैरान भी करता।

उसके बाल अब कुछ हद तक सुधरे हुए होते, कपड़े भी काफी हद तक साफ होते जिन्हें शायद वह खुद धोने लगा था। देखते ही देखते साल समाप्त हो गया और आशीष ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया यानी दूसरी क्लास । विदाई समारोह में सभी बच्चे वसुंधरा दीदी के लिये सुंदर उपहार लेकर आए और वसुंधरा की  टेबल पर ढेर लग गये ।

इन खूबसूरती से पैक हुए उपहार में एक पुराने अखबार में बद सलीके से पैक हुआ एक उपहार भी पड़ा था। बच्चे उसे देखकर हंस पड़े। किसी को जानने में देर न लगी कि उपहार के नाम पर ये आशीष लाया होगा। वसुंधरा दीदी ने उपहार के इस छोटे से पहाड़ में से लपक कर उसे निकाला। खोलकर देखा तो उसके अंदर एक महिलाओं की इत्र की आधी इस्तेमाल की हुई शीशी और एक हाथ में पहनने वाला एक बड़ा सा कड़ा था जिसके ज्यादातर मोती झड़ चुके थे।

वसुंधरा ने चुपचाप इस इत्र को खुद पर छिड़का और हाथ में कंगन पहन लिया। बच्चे यह दृश्य देखकर हैरान रह गए। खुद आशीष भी। आखिर आशीष से रहा न गया और वो वसुंधरा दीदी के पास आकर खड़ा हो गया। कुछ देर बाद उसने अटक अटक कर वसुंधरा को बताया कि "आज आप में से  मेरी माँ जैसी खुशबू आ रही है।"

समय पर लगाकर उड़ने लगा। दिन सप्ताह, सप्ताह महीने और महीने साल में बदलते भला कहां देर लगती है ? मगर हर साल के अंत में वसुंधरा को आशीष से एक पत्र नियमित रूप से प्राप्त होता जिसमें लिखा होता कि "इस साल कई नए टीचर्स से मिला। मगर आप जैसा कोई नहीं था।"

फिर आशीष का स्कूल समाप्त हो गया और पत्रों का सिलसिला भी। कई साल आगे गुज़रे और अध्यापिका वसुंधरा अब रिटायर हो गईं। एक दिन उन्हें अपनी मेल में आशीष का पत्र मिला जिसमें लिखा था : "इस महीने के अंत में मेरी शादी है और आपकी अलावा शादी की बात मैं नहीं सोच सकता। एक और बात.. मैं जीवन में बहुत सारे लोगों से मिल चुका हूँ। आप जैसा कोई नहीं है... डॉक्टर आशीष

साथ ही विमान का आने जाने का टिकट भी लिफाफे में मौजूद था। वसुंधरा खुद को हरगिज़ न रोक सकती थीं। उन्होंने अपने पति से अनुमति ली और वह दूसरे शहर के लिए रवाना हो गईं। शादी के दिन जब वह शादी की जगह पहुंची तो थोड़ी लेट हो चुकी थीं। उन्हें लगा समारोह समाप्त हो चुका  होगा.. मगर यह देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रही कि शहर के सभी बड़े डॉ, बिजनेसमैन, अन्य अतिथि और यहां तक कि वहां मौजूद फेरे कराने वाले पंडित भी इन्तजार करते करते थक गये थे, कि आखिर कौन आना बाकी है...

मगर आशीष समारोह में फेरों और विवाह के बजाय गेट की तरफ टकटकी लगाए उनके आने का इंतजार कर रहा था। फिर सबने देखा कि जैसे ही यह पुरानी अध्यापिका वसुंधरा ने गेट से प्रवेश किया आशीष उनकी ओर तेजी से लपका और उनका वह हाथ पकड़ा जिसमें उन्होंने अब तक वह सड़ा हुआ सा कंगन पहना हुआ था और उन्हें सीधा वेदी पर ले गया।

वसुंधरा का हाथ में पकड़ कर उसने कुछ यूं बोला "दोस्तो आप सभी हमेशा मुझसे मेरी माँ के बारे में पूछा करते थे और मैं आप सबसे वादा किया करता था कि जल्द ही आप सबको अपनी माँ से मिलाऊँगा..! यह मेरी माँ हैं -- !"

इस सुंदर कहानी को सिर्फ शिक्षक और शिष्य के रिश्ते के कारण ही मत सोचिएगा, अपने आसपास देखें, आशीष जैसे कई फूल मुरझा रहे हैं जिन्हें आप का जरा सा ध्यान, प्यार और स्नेह नया जीवन दे सकता  है..! यह कहानी वाकई बहुत ही मार्मिक हे आज तो मेरी भी अश्रु धरा भी बह निकली ।

ऐसे शिक्षक को मेरा बारम्बार सादर नमन �� ��
Copid from whatsapp Group :- नेता  नौकरशाह  एवं पत्रकार 

[बरी होते ही उसने रोते रोते कहा, ‘मुझे मेरे 10 साल चाहिये’, पढ़िये अब्दुल अजीम की कहानी |

World News
Home  देश  बरी होते ही उसने रोते रोते कहा, ‘मुझे मेरे 10 साल चाहिये’,...
देश
बरी होते ही उसने रोते रोते कहा, ‘मुझे मेरे 10 साल चाहिये’, पढ़िये अब्दुल अजीम की कहानी
3626 0

ये कहानी है अब्दुल अजीम राजा की जिन्हे 10 साल बाद मुबंई की अदालत ने बाइज्जत बरी कर किया है.

मुंबई : ‘बात मई 2006 की है. मुझे मुबंई मे सरकारी नौकरी मिलने जा रही थी. मेरी खुशी का ठिकाना नही था. इस बीच मेरी शादी को लेकर फाईनल बात भी चल रही थी. जिससे मे बेइतंहा प्यार करता था उसी से मे शादी करने जा रहा था, घर वाले भी मान गये थे’.

24 साल की उम्र मे मुझे जिंदगी का सब कुछ मिल रहा था. लेकिन तभी मुंबई पुलिस की एंटी क्राइम ब्रांच (ATS) टीम के एक दस्ते ने मुझे गिरफ्तार कर लिया. अगले ही दिन देश के अखबारों ने मुझे सबसे बड़ा आतंकवादी बना डाला.

ये कहानी है अब्दुल अजीम राजा की जिन्हे 10 साल बाद मुबंई की अदालत ने बाइज्जत बरी कर किया है. अदालत से निकलने के बाद अब्दुल अजीम ने पत्रकारों को बताया कि जिंन्दगी के इन 10 सालो को अब कौन लौटायेगा, कौन शादी करेगा, कौन सरकारी नौकरी देगा, कौन समाज मे इज्जत देगा. 34 साल की उम्र मे अब्दुल अजीम को बेगुनाह का सर्टिफिकेट तो मिल गया लेकिन नौकरी देने को कोई राजी नही है.

अब्दुल अजीम ने मुबई ATS पर आरोप लगाया कि उन्होने मेरी जिंदगी का एक दशक वर्बाद कर दिया. जो 10 साल मैने जेल मे बिताये वो मेरी जिंदगी के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे. क्यो कि मैं अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करना चाहता था. मैं अपने परिवार के साथ सेटल होकर अपना करियर बनाना चाहता था. मुझे नही पता कि मेरे गिरफ्तार होने के बाद वो अब कहां है.

अब्दुल अजीम कहते है कि एक चीज मुझे हमेशा याद रहेगी. जब 2008 मे मेरे पिता का इंतकाल हुआ. तो मुझे जेल से पैरोल तक नही मिल सकी. और में अपने अब्बू के जनाजे मे भी शामिल नही हो सका. लेकिन मे शुक्रिया अदा करता हूं अपने भाई का जिनके NGO जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मुझे मुफ्त मे कानूनी मदद दिलाई.
http://www.worldnewshindi.com/india/man-acquitted-in-2006-aurangabad-arms-haul-case/

इंडिया के दो रंग ।

इंडिया के दो रूप ।।

बक्सर ,सीवान , पूर्वी चंपारण समेत कई जिलों में खुलेंगे नए बीएड कॉलेज ।।

राशि भी हो गई इन संस्थानों को आवंटित

क़ुरबानी !

इस अवसर पर मुस्लिम भाइयों से विशेष अपील ।।
Biharbroadcasting.com

इंसान तो घर - घर में पैदा होते हैं , बस इंसानियत कहीं कहीं जन्म लेती है

इंसान तो घर - घर में पैदा होते हैं
बस इंसानियत कहीं कहीं जन्म लेती है !!

इरादे मेरे हमेशा साफ़ होते हैं

इरादे मेरे हमेशा साफ़ होते हैं
इसलिए कई लोग मेरे खिलाफ होते हैं ।।