[चीन ने ब्रहमपुत्र की सहायक नदी का पानी रोका - BBC हिंदी]

[चीन ने ब्रहमपुत्र की सहायक नदी का पानी रोका - BBC हिंदी]

1 अक्तूबर 2016
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चीन ने तिब्बत में अपनी एक पनबिजली परियोजना के लिए ब्रहमपुत्र की एक सहायक नदी का पानी रोक दिया है.
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चीन का कहना है कि वो इससे बिजली पैदा करेगा, पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए करेगा और साथ ही इससे बाढ़ पर क़ाबू पाने में मदद मिलेगी.
लेकिन भारत और बांग्लादेश इससे चिंतित हैं, क्योंकि इससे उनके इलाक़े में रहने वाले लाखों लोगों को पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती है.
चीन से निकलकर ब्रह्मपुत्र नदी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश और असम से होती हुई बांग्लादेश तक जाती है.
शिन्हुआ के मुताबिक, चीन ने इस पनबिजली परियोजना पर वर्ष 2014 में काम शुरू किया था जिसे वर्ष 2019 तक पूरा करना है.
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ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी के पानी रोकने की ख़बर ऐसे समय आई है जब भारत पाकिस्तान के साथ वर्षों पहले हुए सिंधु जल समझौते पर पुनर्विचार कर रहा है.
भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के उड़ी में चरमपंथी हमले के बाद एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 'ख़ून और पानी साथ नहीं बह सकते.'
उड़ी में हुए चरमपंथी हमले में 19 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई थी.
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भारत और पाकिस्तान दोनों ने एक-दूसरे पर सीमा पर गोलीबारी का आरोप लगाया है.
इससे पहले, भारत ने 'नियंत्रण रेखा के पास चरमपंथियों के ठिकाने पर सर्जिकल स्ट्राइक' का दावा किया था. हालांकि पाकिस्तान ने भारत के इस दावे को खारिज कर दिया था.
Source :- http://www.bbc.com/hindi/international-37529374

[पाकिस्तान ने उठाए सर्जिकल स्ट्राइक पर कई सवाल - The Siasat Daily]

[पाकिस्तान ने उठाए सर्जिकल स्ट्राइक पर कई सवाल - The Siasat Daily]

October 2, 2016 International 0 Comments

पाकिस्तानी सेना के सूचना विभाग आईएसपीआर के निदेशक लेफ़्टिनेंट जनरल आसिम सलीम बाजवा ने कहा है कि उनका देश पश्चिमी सीमाओं पर दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ लड़ रहा है इसलिए वो कभी नहीं चाहेगा कि उसकी सेना को पश्चिमी सीमा से पूर्वी सीमा पर लाई जाए। उन्होंने यह बातें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के भम्भर और तत्ता पानी सेक्टर के दौरे के दौरान पत्रकारों से कही।

बाजवा ने कहा कि हम पश्चिमी सीमाओं पर दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे हैं। ऐसे समय पर जब जंग ख़त्म होने को है अगर फौजी दस्तों का मूवमेंट दूसरे जगह किया गया तो नुक़सानदेह साबित होगा। पर बजवा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान हर उस क़दम को उठाएगा जो पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए ज़रूरी पेश आएगी।

भारत के सर्जिकल स्ट्राइक के दावे पर उन्होंने कहा कि भारत का दावा मनगढ़ंत, बेबुनियाद, सफ़ेद झूठ और ग़ैर ज़िम्मेदाराना है। उन्होंने यह भी कहा कि हमने उनको जवाब दिया था। हमें यक़ीन है कि ज़रूर उनकी ओर भी हताहत हुए हैं। लेकिन वो इस बात को क्यों छुपा रहे हैं यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए। भारत पहले ही अपने सैनिकों के मारे जाने की रिपोर्टों को ख़ारिज कर चुका है।

बाजवा ने बताया कि संघर्ष-विराम उल्लंघन के बाद हमारी ओर संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षको ने भी जांच की है। पर एसी क्या वजह है कि भारत न मीडिया को आने दे रहा है और न संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षकों को। उन्होंने कहा कि हमारा इलाक़ा आम लोगों, मीडिया और संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों के लिए खुला हुआ है। अगर भारत दावा कर रहा है कि उसने सर्जिकल स्ट्राइक किया तो पहले उसका सबूत पेश करे।

देशी-विदेशी पत्रकारों के इस दौरे के दौरान भम्भर सेक्टर में बाग़सर कमांड पोस्ट से पाकिस्तानी सेना की फ़ॉरवर्ड तैनातियां और नियंत्रण रेखा समेत भारतीय पोस्टें दिखाई गईं। पत्रकारों को भारतीय पोस्टों से केवल 2300 गज़ दरी पर मौजूद तत्ता पानी का दौरा भी कराया गया।

बाजवा ने दावा किया कि इस इलाक़े की आबादी तकरीबन एक लाख है। और जगह-जगह फौज तैनात हैं। इस तरह किसी सर्जिकल स्ट्राइक का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि उन्होंने अगर सर्जिकल स्ट्राइक किया है  और उसमें कोई जानी नुक़सान हुआ है तो वो कहां हैं। एक लाख की आबादी वाले इस इलाक़े में किसी को तो ख़बर होनी चाहिए।

उन्होंने ने यह भी कहा कि जगह-जगह फौजी दस्तों और तमाम हथियार प्रणालियों की मौजूदगी में न तो लाइन ऑफ़ कंट्रोल पार की जा सकती है और न ही हेलीकॉप्टर आ सकता है और न ही पैराट्रूपर। तो फिर भारत ने किस हिसाब से दावा किया कि फौजी दस्तों ने सरहद पार की, पैराट्रूपर उतरे, फिर चंद घंटों में कार्रवाई पूरी करके वापस चले गए। यहां न तो ख़ामोशी से हेलीकॉप्टर आ सकते हैं, न पैराट्रूपर उतर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत बताए कि उसके पैराट्रूपर नीचे आए तो वापस कैसे गए? लांचिंग पैड तबाह करने का दावा करने वाले बताएं कि लाशें कहां गईं?

बजवा ने यह भी कहा कि भारत की ओर से लाइन ऑफ़ कंट्रोल, वर्किंग बाउंड्री और सीमा पर लगातार आक्रामकता दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता है। युद्ध किसी के फ़ायदे में नहीं है। युद्धोन्माद को भारत में हवा दी जा रही है जिसका एक मक़सद कश्मीर में भारत की ज़्यादती पर पर्दा डालना है। भारतीय सैनिकों के सीमा पार करने के मामले में उन्होंने कहा कि ग़लती से सीमा पार करने के मामले अक्सर होते रहते हैं और उसके वापसी के तरीक़े मौजूद हैं।
Source :- http://hindi.siasat.com/news/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-836570/

[पाक मीडिया ने कहा झूठा है भारत के सर्जिकल स्ट्राइल का दावा - BBC हिंदी]

[पाक मीडिया ने कहा झूठा है भारत के सर्जिकल स्ट्राइल का दावा - BBC हिंदी]

इक़बाल अहमद
बीबीसी संवाददाता
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इस हफ़्ते पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो भारत-पाक नियंत्रण रेखा यानी एलओसी पर भारत का सर्जिकल स्ट्राइक का दावा और संयुक्त राष्ट्र आम सभा में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का भाषण सुर्ख़ियों में रहा.
भारत ने दावा किया है कि उसके सैनिकों ने एलओसी पर 28-29 सितंबर की दरम्यानी रात को सर्जिकल स्ट्राइक की थी.
भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ़्टिनेंट जनरल रनबीर सिंह ने 29 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी.
डीजीएमओ लेफ़्टिनेंट जनरल रनबीर सिंह ने कहा कि पुख़्ता इंटेलिजेन्स मिलने के बाद भारतीय सेना के विशेष दस्ते ने एलओसी पर मौजूद चरमपंथियों के लॉन्च पैड को निशाना बनाया और उनके कई ठिकानों को नष्ट कर दिया.
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लेकिन पाकिस्तान ने भारत के इन दावों को ख़ारिज करते हुए कहा कि भारत भ्रम फैला रहा है और दोनों ओर से गोलाबारी हुई जिसमें उसके दो सैनिक मारे गए हैं.
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू दैनिक नवा-ए-वक़्त ने लिखा, "कोई सबूत न गवाह आज़ाद कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक का नया भारतीय झूठ."
अख़बार ने पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ़ बाजवा के हवाले से लिखा है कि भारतीय जनता को ख़ुश करने के लिए ये झूठ गढ़ा गया है.
जंग ने लिखा कि सर्जिकल स्ट्राइक का दावा झूठा, पाकिस्तान ने किया ख़ारिज. अख़बार लिखता है कि बिना किसी उकसावे के भारतीय सेना ने सीज़फ़ायर का उल्लंघन करते हुए कई घंटों तक फ़ायरिंग की जिसमें दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए.
अख़बार आगे लिखता है कि पाकिस्तानी सेना की जवाबी कार्रवाई में आठ भारतीय सैनिक मारे गए और एक भारतीय सैनिक को बंदी बना लिया गया है.
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रोज़नामा दुनिया ने लिखा है कि कंट्रोल लाइन पर पाकिस्तानी सेना का भरपूर जवाब, आठ भारतीय फ़ौजी मारे गए, एक गिरफ़्तार.
अख़बार लिखता है कि भारत के सर्जिकल स्ट्राइक के दावे झूठ का पुलिंदा. भारतीय सेना की तरफ़ से गोलाबारी में दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए लेकिन पाकिस्तानी सेना ने इसका जमकर जवाब दिया.
अख़बार लिखता है कि भारत को अपने सैनिकों की लाश उठाने की भी हिम्मत न हुई.
रोज़नामा एक्सप्रेस ने लिखा है कि भारतीय सेना की फ़ायरिंग के जवाब में पाकिस्तानी सेना की तरफ़ से की गई फ़ायरिंग में 14 भारतीय सैनिक मारे गए.
'औसाफ़' ने शीर्षक लगाया है, 'कंट्रोल लाइन पर भारतीय दहशतगर्दी का जवाब, 14 भारतीय सैनिक मारे गए'.
अख़बार लिखता है कि भारतीय फ़ौज ने एक बार फिर अपनी पारंपरिक हठधर्मी का इज़हार करते हुए एलओसी पर बिना किसी वजह के गोलाबारी की जिसमें पाकिस्तान के दो सैनिक मारे गए.
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अख़बार आगे लिखता है कि भारत को ये कार्रवाई महंगी पड़ी और पाकिस्तानी सेना ने इसका करारा जवाब दिया.
अख़बार ने विदेशी मीडिया का हवाला देकर लिखा कि जवाबी कार्रवाई में 14 भारतीय फ़ौजी मारे गए.
अख़बार ने ये नहीं बताया कि किस विदेशी मीडिया के हवाले से वो ये बात लिख रहा है. लेकिन अख़बार आगे लिखता है पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई ने भारत के सर्जिकल स्ट्राइक के दावे की कलई खोल दी.
अख़बार लिखता है कि भारतीय सेना ने एलओसी पर गोलाबारी को सर्जिकल स्ट्राइक का नाम देकर अपनी मीडिया और अपनी जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की है.
नवा-ए-वक्त़ ने अगले दिन यानी शनिवार को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ़ के बयान का ज़िक्र करते हुए लिखा कि पाकिस्तान भी सर्जिकल स्ट्राइक की क्षमता रखता है और नकारात्मक प्रचार करके उसे दबाया नहीं जा सकता है.
औसाफ़ लिखता है कि पाकिस्तानी जनता, सेना के कंधे से कंधा मिलाकर देश की सुरक्षा के लिए तैयार.
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रोज़नामा एक्सप्रेस ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के बयान के हवाले से लिखा है कि भारतीय कार्रवाई क्षेत्रीय शांति के लिए ख़तरा है.
नवा-ए-वक़्त ने संपादकीय लिखा, दुनिया भारत की चालों को समझ गई, पाकिस्तान हालात से फ़ायदा उठाए.
अख़बार लिखता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव में पहली बार अमरीका खुलकर सामने आ गया है. अख़बार के अनुसार अमरीका ने भारत को चेतावनी दी है कि वो सीमा पर तनाव को और न बढ़ने दें और चीन ने भी दोनों को बातचीत पर ज़ोर दिया है.
भारत से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात करें तो भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की ख़बरें तो लगभग सारे अख़बार के पहले पन्ने पर हैं, लेकिन शनिवार को दिल्ली और देश के दूसरे शहरों से छपने वाले ज़्यादातर उर्दू अख़बारों ने बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेता शहाबुद्दीन की ज़मानत रद्द की ख़बर को प्रमुखता दी.
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सहाफ़त ने लिखा है, 'वापस जेल पहुंच
http://www.bbc.com/hindi/international-37531191

[लोगों का कहना, सेना नदारद, सरकार बना रही है बेवक़ूफ़ - BBC हिंदी] सालविंदर सिंह भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के गिलपन गांव से हैं. वो बेहद ग़ुस्से में हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया, "सरकार ने गांव खाली करने को तो बोल दिया है लेकिन हमारे लिए कोई इंतज़ाम नहीं किया है. हम अपने जानवर लेकर जाएं कहां." उन्होंने आगे कहा, " हमने 1971 की जंग देखी है. पहले गांवों में आर्मी आती है गांव की घेरा बंदी होती है. यहां ऐसा कोई माहौल दिखाई नहीं दे रहा है . ये सभी लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं."

[लोगों का कहना, सेना नदारद, सरकार बना रही है बेवक़ूफ़ - BBC हिंदी]

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विनीत खरे
बीबीसी संवाददाता
2 घंटे पहले
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बैंका गांव के मिडिल स्कूल में चलाए जा रहे रिलीफ कैंप में बुजुर्ग महिलाएं डरी हुई हैं
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के उड़ी में हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव का माहौल बना हुआ है.
भारत सरकार ने पंजाब से सटी नियंत्रण रेखा के 10 किलोमीटर तक के गांवों को खाली करने का आदेश दिया है.
नियंत्रण रेखा से सटे गांवों से पलायन भी शुरू हो चुका है लेकिन लोगों को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है इसका बीबीसी ने जायज़ा लिया.
कई गांवों के किसानों में डर और अनिश्चितता के साथ गुस्सा भी है.
लोगों में एक सवाल ये भी है कि उन्हें कितने दिनों तक ऐसे रहना पड़ेगा?
नियंत्रण रेखा से सटे कुछ गांव तो पूरी तरह खाली कर दिए हैं लेकिन कुछ लोग रात में घर छोड़ देते हैं और सुबह घर वापस लौट आते हैं.

सालविंदर सिंह भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के गिलपन गांव से हैं. वो बेहद ग़ुस्से में हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "सरकार ने गांव खाली करने को तो बोल दिया है लेकिन हमारे लिए कोई इंतज़ाम नहीं किया है. हम अपने जानवर लेकर जाएं कहां."
उन्होंने आगे कहा, " हमने 1971 की जंग देखी है. पहले गांवों में आर्मी आती है गांव की घेरा बंदी होती है. यहां ऐसा कोई माहौल दिखाई नहीं दे रहा है . ये सभी लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं."
वहीं तरण तारण ज़िले के थेकला गांव के किसान गुरदीप सिंह ने बताया कि उनके खेत नियंत्रण रेखा से बिलकुल सटे हुए हैं, जहां सरकार ने बाड़ लगाई है. कुछ किसानों के खेत उस बाड़ के बाहर भी हैं.
उड़ी हमले के बाद से किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. हमले से पहले बाड़ के गेट खोल दिए जाते थे जिससे किसान खेत पर जाकर सिंचाई का काम किया करता था.
वहीं खड़े दूसरे किसान ने बताया, "हम शाम होते होते गांव खाली कर देते हैं लेकिन सुबह फिर से खेतों और घर पर आ जाते हैं."

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बैंका गांव के मिडिल स्कूल में चलाया जा रहा रिलीफ कैंप
पंजाब के ही बैंका गांव में लगे रिलीफ़ कैंप का नज़ारा कुछ अलग था. मिडिल स्कूल में बने इस गए रिलीफ़ कैंप में 30-35 परिवार के बच्चे और महिलाएं ठहरी हुईं हैं.
इसी रिलीफ़ कैंप की देखरेख कर रहीं हिंदी की शिक्षक सोना देवी ने बताया कि भारत पाकिस्तान के तनाव के बाद इस स्कूल को शरणार्थी कैंप बनाया गया है.
इस कैंप में रह रहीं एक बुजुर्ग महिला ने बताया, "हमें अधिकारियों ने आकर कहा कि यहां से दस किलोमीटर दूर कहीं चले जाएं. हमारा आस पास कोई रिश्तेदार नहीं है इसलिए हम इस कैंप में रुके हैं."
रिलीफ कैंप के इंचार्ज सुखा सिंह ने बताया कि इस ज़िले में 23 रिलीफ़ कैंप चलाए जा रहे हैं. जहां स्वास्थ्य से लेकर खाने पीने तक का पूरा इंतजाम किया गया है. इस रिलीफ कैंप में डॉक्टर भी बैठे थे, जिन्होंने बताया कि लोगों में तनाव की शिकायत है. थकान की वजह से लोगों को बुखार आ रहा है.
http://www.bbc.com/hindi/india-37533037

सर्जिकल स्ट्राइक: संयुक्त राष्ट्र ने उठाए सवाल




संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मूनइमेज कॉपीरइटAFP
Image captionसंयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भारत और पाकिस्तान से शांति की अपील की है.

संयुक्त राष्ट्र ने नियंत्रण रेखा पर सर्जिकल स्ट्राइक करने के भारत के दावों पर सवाल उठाया है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के प्रवक्ता स्टीफ़ान दुजारिक ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के सैन्य प्रेक्षक दल ने भारत और पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर कोई गोलीबारी सीधे तौर पर नहीं देखी है.
बान की मून के प्रवक्ता स्टीफ़ान दुजारिक ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र के सैन्य प्रेक्षक दल ने भारत और पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर कोई गोलीबारी सीधे तौर पर नहीं देखी है. संघर्ष विराम के इन कथित उल्लंघन के बारे में हमें खबरों जानकारी मिली है. प्रेक्षक दल उस सिलसिले में संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर रहा है."
संयुक्त राष्ट्र का सैन्य प्रेक्षक दल भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर 1971 में लागू किए गए संघर्ष विराम की निगरानी करता है.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत सैय्यद अकबरउद्दीन ने संयुक्त राष्ट्र के दावों को ख़ारिज करते हुए कहा कि किसी के देखने या न देखने से सच्चाई बदल नहीं जाती.
सैय्यद अकबरउद्दीन ने कहा, "जो तथ्य हैं वह किसी के देखने या न देखने से बदल नहीं जाते हैं और न ही किसी के मानने या न मानने से सच बदल जाता है. जो तथ्य हैं वह तो तथ्य ही रहते हैं और हमने तथ्य सामने रख दिए हैं और हम उसी पर कायम हैं."



पाकिस्तानी सैनिकइमेज कॉपीरइटAP
Image captionसैनिकों को श्रद्धांजलि देती हुई पाकिस्तानी औरतें.

भारत ने दावा किया था कि उसकी फ़ौज ने जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर चरमपंथी ठिकानों को नष्ट करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की थी.
पाकिस्तान ने इन दावों को ख़ारिज किया था और कहा था कि ये वैसी ही झड़प थी जैसी इस इलाक़े में अकसर होती रहती है.
हालांकि पाकिस्तान ने माना कि उसके दो सैनिक हमलों में मारे गए थे.
https://www.bbc.com/hindi/international-37527986

खोखले सिस्टम को बेनक़ाब करती एक आवाज़ । पढ़ना न भूलें आप ......

Tahir Muradbas
"इनसान होने के नाते दर्द तो मुझे भी होता है "
#मुजफ्फरनगर_कांड #बिसाहड़ा_कांड #डिगरहेड़ी_कांड #बिजनौर_कांड #फरीदाबाद_कांड
#ओर_ना_जाने_कितनी_घटनायें
"सब मे एक जैसी समानता धार्मिक उन्माद"
हिंदुस्तान की इंसानियत को कहां ले जाने की कोशिश की जा रही है और ऐसा करने वाले जानवरों को बढ़ावा क्यों मिल रहा है इन पर लगाम लगाने के लिए क्या हमारे अंदर इतनी भी इंसानियत नहीं रही कि इन इंसान नाम के जानवरों को सबक सिखाया जा सके और देश की इज्जत आबरु को बचाया जा सके ...
अच्छी खासी पढ़ाई लिखाई कर कर अधिकारियों की कुर्सियों पर बैठकर जजमेंट की कुर्सियों पर बैठकर प्रशासन की कुर्सियों पर बैठकर क्या आंखों पर काली पट्टी बांध रखी है जो यह सब नजर नहीं आता यकीनन ऊंचे ओहदों पर बैठने वाले अधिकारियों पर सवाल तो उठता है कि यह क्या हो रहा है किसके इशारे पर हो रहा है क्यों हो रहा है और आप सभी लोग किस बात की तनख्वाह जनता के टैक्स से ले रहे हो साहब यह कोई सिनेमा की फिल्म नहीं है जिसको आप एंजॉय कर रहे हो और बहन बेटियों की इज्जत लुटना आपको छोटी मोटी घटना लगती है ...
शर्म आती है आप पर कि आप हमारे देश के रहनुमा व रहबर हो और उससे ज्यादा शर्म आती है खुद पर कि आप सभी को चुन्ने वाले भी तो हम ही लोग हैं ...
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