बीएचयू संस्कृत विवाद: फ़िरोज़ ख़ान को आयुर्वेद में भेजने की तैयारी?


फ़िरोज़ ख़ानइमेज कॉपीरइटFIROZ KHAN
फ़िरोज़ ख़ान बीएचयू में जॉइन करने के बाद से संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के गेट के भीतर पैर तक नहीं रख सके हैं. क्लास लेने की बात तो दूर की है.
वो बनारस में ही हैं लेकिन कहां हैं ये उनके सिवा शायद ही कोई जानता हो. यूनिवर्सिटी प्रशासन कुछ कहने की स्थिति में नहीं है, न ही वो यह बता पाया है कि वो फ़िरोज़ ख़ान का मज़हब के आधार पर बहिष्कार क्यों नहीं रोक पाया है.
जो छात्र विरोध कर रहे हैं उनका अब भी कहना है कि वो संकाय में फ़िरोज ख़ान को नहीं आने देंगे. इस पूरे विवाद के बीच फ़िरोज़ ख़ान ने बीएचयू के आयुर्वेद विभाग में इंटरव्यू दिया और उनका चयन भी हो गया है. संभव है कि आने वाले दिनों में फ़िरोज़ आयुर्वेद में जॉइन कर सकते हैं. चार दिसंबर को फ़िरोज़ का कला संकाय के संस्कृत विभाग में भी इंटरव्यू है.
एक संकाय में जॉइन करने के बाद कहीं और इंटरव्यू देना उन पर दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है. प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति पुरातत्व विभाग के प्रोफ़ेसर एमपी अहीरवार का कहना है कि फ़िरोज़ ने दबाव में आकर वहां इंटरव्यू दिया है और चयन होने के बाद वहां जॉइन करने के लिए भी वो मजबूर होंगे.
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कला संकाय में भी होना है इंटरव्यू

हालांकि यूनिवर्सिटी का कहना है कि कोई भी व्यक्ति एक विभाग में जॉइन करने के बाद भी दूसरे विभाग में आवेदन करने के लिए स्वतंत्र है. बीएचयू के एपीआरओ चंद्रशेखर का कहना है, ''फ़िरोज़ ने संस्कृति विद्या धर्म विज्ञान संकाय में जॉइन करने से पहले ही आयुर्वेद और कला संकाय में आवेदन किया था. इंटरव्यू देने या न देने या चयन होने पर जॉइन करना या न करना यह उनका अधिकार है.''
यूनिवर्सिटी का बयान इस लाइन पर ठीक है कि कोई किसी भी विभाग में इंटरव्यू दे सकता है लेकिन फ़िरोज़ ख़ान ने क्या अपनी इच्छा से वहां इंटरव्यू दिया है? इस सवाल का जवाब फ़िरोज़ ख़ान ख़ुद भी नहीं देना चाहते हैं. संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के कई छात्र अब भी इस बात पर अड़े हुए हैं वो फ़िरोज़ को संकाय के भीतर नहीं जाने देंगे.
विरोध कर रहे छात्रों में से एक चक्रपाणि ओझा कहते हैं, ''महामना मालवीय जी ने इस संकाय को सनातन धर्म के मूल्यों के हिसाब से बनाया था. इस संकाय में आने वाले विद्यार्थी तय गणवेष में होते हैं. फ़िरोज़ ख़ान के लिए इसका पालन करना आसान नहीं है. वो ख़ुद ही यहां आकर असहज महसूस करेंगे. हम लोगों का विरोध जारी है. यह तब तक नहीं थमेगा जब तक कि फ़िरोज़ ख़ान को किसी और डिपार्टमेंट में नहीं भेज दिया जाता है.''
चक्रपाणि ओझा का कहना है कि 10 दिसंबर से परीक्षा है और अगर फ़िरोज़ ख़ान पर कोई फ़ैसला नहीं होता है तो परीक्षा नहीं होने देंगे.

'कोई तीसरा रास्ता निकलेगा'

फ़िरोज़ ख़ान की यह पहली नौकरी है. लेकिन वो मुसलमान होने के कारण नौकरी नहीं कर पा रहे हैं. जो उनका विरोध कर रहे हैं उनके ख़िलाफ़ प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है. ऐसे में कोई व्यक्ति किसी दूसरे विभाग में शिफ़्ट होने के लिए इंटरव्यू दे रहा है तो इसमें दबाव और मजबूरी को देखना बहुत अतार्किक नहीं लगता है.
बीएचयू में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफ़ेसर आरपी पाठक पूरे विवाद पर कहते हैं, ''यूनिवर्सिटी प्रशासन सख़्ती इसलिए नहीं दिखा रहा है क्योंकि छात्र भावनात्मक मुद्दा उठा रहे हैं. विरोध करने वाले छात्र धर्म औ परंपरा को ढाल बना रहे हैं. ऐसे में प्रशासन सख़्ती बरतने से बच रहा है. संभव है कि कोई तीसरा रास्ता निकल जाए. तीसरे रास्ते का मतलब है कि वो दूसरे विभाग में जॉइन कर ले. यह सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे वाली स्थिति होगी. लेकिन कोई व्यक्ति ख़ास धर्म के कारण उस संकाय में नहीं पढ़ा पाएगा यह ठीक नहीं है. वो अपनी प्रतिभा के दम पर यहां आया था और उसे यहीं रहना चाहिए.''
प्रोफ़ेसर आरपी पाठक कहते हैं कि फ़िरोज़ ख़ान के समर्थन में कई लोग खड़े हैं. वो कहते हैं, ''प्रशासन कुछ वैकल्पिक रास्ता देख रहा है जहां कोई विवाद ना हो. आयुर्वेद में उसका चयन हुआ है और वहां भी टॉप पर है. ऐसे में संभव है कि वहीं जॉइन कर ले.''

'फ़िरोज़ ख़ान कुछ ज़्यादा ही डरे हुए हैं'

फ़िरोज़ ख़ान के पिता रमज़ान ख़ान को भी लगता है कि उनका बेटा बिना किसी विवाद के नौकरी करे. वो कहते हैं, ''मेरा बेटा तो वही करेगा जो यूनिवर्सिटी प्रशासन चाहेगा. शांति से सब हो जाए. कोई झंझट की स्थिति न बने. मैं भी चाहता हूं कि वो आराम से नौकरी करे.''
कुछ लोगों को यह भी लगता है कि फ़िरोज़ ख़ान को किसी से डरना नहीं चाहिए था और उन्हें क्लास लेने जाना चाहिए था. बीएचयू के राजनीतिक विज्ञान से पीएचडी कर रहे विकास सिंह कहते हैं, ''फ़िरोज़ ख़ान कुछ ज़्यादा ही डरे हुए हैं. जितने लोग उनका विरोध कर रहे हैं उनसे ज़्यादा लोग उनके समर्थन में हैं. यूनिवर्सिटी प्रशासन भी उनके ख़िलाफ़ नहीं जा सकता है."
"फ़िरोज़ अगर संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में आते तो उन्हें कोई रोक नहीं देता और अगर कोई रोकता तो हर जगह मीडिया है, पुलिस और लोग हैं. उन्हें कोई मार नहीं सकता है और अगर ऐसा होता तो यूनिवर्सिटी प्रशासन पर सवाल खड़ा होता. आयुर्वेद में जाकर इंटरव्यू देना उनके डर को ही दिखाता है. उनका डरना विरोध करने वालों के लिए ऊर्जा है.''
बीएचयू
फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के संस्कृत साहित्य में हुई है लेकिन छात्र भ्रम फैला रहे हैं कि उन्हें धर्म और कर्मकांड पढ़ाना है. संभव है कि फ़िरोज़ को मुसलमान होने के कारण कहीं और जाना पड़े लेकिन जिनके कारण जाना पड़ेगा उनकी मांग यहीं रुक जाएगी इसे कोई नहीं जानता और फ़िरोज़ ख़ान जहाँ जाएंगे वहां इस तरह का विरोध नहीं होगा इसकी भी कोई गारंटी नहीं दे सकता.

मोदी सरकार ने 32 हज़ार टन प्याज़ तो एक तरफ सड़ा दिए , दूसरी तरफ जनता को एक एक प्याज़ के लिए तरसा दिए ।


सरकारी स्टोरेज में सड़ गया 32 हजार टन प्याज, यहां 120 रुपये/किलो के पार पहुंचा भाव
केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Pawan) ने बुधवार को बताया कि सरकारी स्टोरेज में करीब 32,500 टन प्याज सड़ चुका है. केंद्र सरकार ने राज्यों से प्याज की स्टॉक लिमिट घटाने का भी​ निर्देश दिया है.
नई दिल्ली. एक तरफ देशभर में प्याज की कीमतें असामान छू रही हैं, वहीं दूसरी तरफ प्याज को लेकर अब सरकार हाथ खड़े करते हुए दिखाई दे रही है. बुधवार को संसद में केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि इस साल बारिश और बाढ़ के चलते प्याज की पैदावार में 26 फीसदी तक गिरावट आई है. उन्होंने यह भी कहा कि 65,000 टन प्याज का बफर स्टॉक था, जिसमें 50 फीसदी प्याज सड़ गया है.
सीएनबीसी आवाज़ ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि केंद्र सरकार ने राज्यों को प्याज की स्टॉक लिमिट घटाने का निर्देश दिया है. साथ ही, व्यापारियों पर भी सख्ती से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
आपको बता दें कि देश के बड़े महानगर- दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में प्याज के दाम 100 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए है. कारोबारियों का कहना है कि अगर मंडियों में प्याज की सप्लाई नहीं बढ़ती है तो कीमतें और बढ़ सकती हैं.
बुधवार को कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कोलकाता में प्याज की कीमतें 100 रुपये प्रति किलोग्राम के पार जा चुका है. लोकल सब्जी मंडियों में 120 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर प्याज बिक रहा है. व्यापारियों का कहना है कि लोकल वेयरहाउस में रखे गए प्याज की वजह से अभी तक कीमतें एक दायरे में था.
इसी प्रकार, चेन्नई में प्याज की खुदरा कीमत 120 रुपये प्रति किलोग्राम है. पिछले सप्ताह प्याज का होलसेल दाम 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम था, जिसके बाद खुदरा दाम 80 रुपये तक रहा था. कायम्बेदु के बाजार में हर रोज 50 ट्रक प्याज की आवक है लेकिन इसके बावजूद भी 40 फीसदी तक मांग न पूरा होने की वजह से कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रहा है.
https://hindi.news18.com/news/business/ram-vilas-paswan-says-more-than-32000-tonnes-of-onion-rotten-in-storage-price-spikes-upto-120-rs-per-kg-2644015.html

गले मे फंस गया मिर्ची । बंद आंखें खोलने वाली वीडियो , पूरा वीडियो जरूर देखें ।


तालिबान की क़ैद से रिहाई के बाद कहा, - कुछ तालिबानी 'प्यारे लोग'



टिमोथी वीक्सइमेज कॉपीरइटEPA
Image caption"अगर आप उम्मीद छोड़ देते हैं, तो आपके लिए बहुत कम बचता है."

तालिबान द्वारा रिहा किए गए ऑस्ट्रेलिया के एक शिक्षाविद् ने अफ़ग़ानिस्तान में एक बंधक के रूप में अपने लंबे और अत्याचारपूर्ण अनुभव के बारे में बात की है.
टिमोथी वीक्स ने कहा कि उनका मानना है कि अमरीका के विशेष बलों ने उन्हें और एक अमरीकी बंदी केविन किंग को बचाने के लिए छह बार प्रयास किया था. वीक्स के साथ किंग को भी रिहा किया गया है.
वीक्स ने कहा कि वो तालिबान से घृणा नहीं करते हैं. उन्होंने बताया कि उनके कुछ गार्ड 'प्यारे लोग' थे.
उन्होंने कहा, "मैंने कभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी थी... मुझे पता था कि आख़िरकार मैं रिहा हो जाऊंगा."
वीक्स और किंग एक शिक्षाविद् हैं. अफ़ग़ान अधिकारियों द्वारा बंधक बनाए गए तीन बड़े चरमपंथियों को रिहा किए जाने के एवज़ में इस महीने उन्हें रिहा किया गया. शांति वार्ता शुरू करने के उद्देश्य से ये अदला-बदली की गई है.
काबुल की अमरीकन यूनिवर्सिटी ऑफ अफ़ग़ानिस्तान के बाहर तीन साल पहले उन्हें बंधक बनाया गया था, जहां वो प्रोफ़ेसर के तौर पर काम कर रहे थे.
न्यू साउथ वेल्स में वोगा वोगा के रहने वाले 50 वर्षीय वीक्स गुरुवार रात को ऑस्ट्रेलिया लौटने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.


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Image captionअपनी बहनों एलिसा कार्टर (बाएं) और जोन कार्टर (दाएं) के साथ टिमोथी वीक्स.

छह बार बचाने का किया गया प्रयास

उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि उन्हें रिहा करने के लिए कई प्रयास किए गए थे और उन्हें अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान दोनों जगहों पर अक्सर बिना खिड़की वाले छोटे-छोटे क़ैदख़ानों में रखा गया था.
वीक्स ने कहा, "मेरा मानना है और मुझे उम्मीद है कि यह सच है, कि वे (विशेष बल) हमें बचाने के लिए छह बार आए थे और कई बार वे कुछ समय के अंतराल के कारण हम तक नहीं पहुंच पाए."
उन्होंने अप्रैल के एक ऐसे मिशन को याद किया जब उनके गार्ड्स ने उन्हें बताया था कि प्रतिद्वंद्वी इस्लामिक स्टेट (आईएस) समूह के चरमपंथियों ने उन पर हमला किया है.
वीक्स ने कहा, "मेरा अब मानना है कि वे नेवी सील थे जो हमें रिहा कराने के लिए आ रहे थे."
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि ​वे हमारे दरवाज़े के ठीक बाहर थे. जिस समय हम सुरंग में घुसे, हम एक या दो मीटर भूमिगत थे और सामने के दरवाज़े पर एक बहुत बड़ा धमाका हुआ."
उन्होंने बताया, "और हमारे गार्ड ऊपर चले गए और मशीन गन से काफ़ी गोलीबारी हुई. उन्होंने मुझे ऊपर से सुरंगों में धकेल दिया और मैं पीछे की ओर गिर गया और लुढ़क गया और बेहोश हो गया."
उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वीकार कर लिया था कि उनके गार्ड आदेश के मुताबिक़ काम करने वाले जवान थे और ऐसे में उनके पास कोई विकल्प नहीं था.


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Image captionबंधक बनाए जाने के दौरान वीक्स (बाएं) और केविन किंग.

उन्होंने कहा, "मैं उनसे बिल्कुल भी नफ़रत नहीं करता."
"और उनमें से कुछ के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है और लगभग सभी के लिए बहुत प्यार है. उनमें से कुछ बहुत दयालु और बहुत प्यारे लोग थे. और वास्तव में यह मुझे सोचने के लिए प्रेरित करता है... उन्होंने इस तरह से इसका अंत कैसे किया."
अपनी रिहाई को याद करते हुए वीक्स ने कहा कि दो अमरीकी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर के आसमान से एकाएक उतरने के कारण उनकी कठिन परीक्षा ख़त्म हो गई.
उन्होंने बताया कि धूल के ग़ुबार से निकलकर छह विशेष बल हमारे पास आए और उनमें से एक मेरी ओर बढ़ा और मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और उन्होंने मुझसे पूछा 'क्या तुम ठीक हो?' और वह मुझे ब्लैक हॉक पर वापस ले गए.
वीक्स ने कहा कि एक समय में एक बंधक के रूप में उन पर गहरा और अकल्पनीय प्रभाव था.
हालांकि, उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी क्योंकि "अगर आप उम्मीद छोड़ देते हैं, तो आपके लिए बहुत कम समय बचता है."
उन्होंने कहा "कई बार, मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी मृत्यु निकट थी और मैं कभी भी उन लोगों को देखने के लिए नहीं लौटूंगा जिनसे मुझे प्यार था. लेकिन ईश्वर की इच्छा से मैं यहां हूं, मैं जीवित हूं और मैं सुरक्षित हूं और मैं स्वतंत्र हूं."
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