छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित नारायणपुर ज़िले में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के एक कैंप में आपसी गोलीबारी में 6 जवानों के मारे जाने की ख़बर है.
नारायणपुर ज़िले के एसपी मोहित गर्ग ने बीबीसी से बातचीत में इसकी पुष्टि की है.
उन्होंने बताया कि ज़िले के कड़ेनार क्षेत्र में स्थित एक कैंप में बुधवार सुबह क़रीब 8 बजे जवानों के बीच गोलीबारी हुई जिसमें 6 जवान मारे गए हैं. इनके अलावा 2 और जवान हैं जो आपसी फ़ायरिंग में गंभीर रूप से घायल हुए हैं. ये सभी जवान भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की 45वीं बटालियन के हैं.
इस घटना में घायल जवानों को इलाज के लिए हेलिकॉप्टर से रायपुर ले जाने की तैयारी चल रही है.
घटना का ब्यौरा देते हुए स्थानीय पुलिस ने कहा कि मारे गए जवानों में से दो प्रधान आरक्षक और चार आरक्षक हैं.
इनमें हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के महेंद्र सिंह हैं.
पश्चिम बंगाल के वर्धमान के सुरजीत सरकार.
पंजाब के लुधियाना के दलजीत सिंह.
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया के विश्वरूप महतो
और केरल के कोझीकोड़ के बीजीश कुमार मृतकों में शामिल हैं
पुलिस के अनुसार इन पाँच लोगों पर फ़ायरिंग करने वाले जवान का नाम मसुद-उल-रहमान है जो पश्चिम बंगाल के नादिया ज़िले के रहने वाले थे.
इमेज कॉपीरइटCGKHABAR
घायल जवानों में केरल के तिरुवन्नतपुरम ज़िले के एसबी उल्लास और राजस्थान के नागौर ज़िले के रहने वाले सीताराम दून शामिल हैं.
जाँच अधिकारियों के मुताबिक़ आईटीबीपी की इस बटालियन में आपसी विवाद होने के बाद मसुद-उल-रहमान ने अपने स्वचालित हथियार से अपने ही साथियों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी जिसकी वजह से पाँच जवानों की मौक़े पर ही मौत हो गई. इसके बाद गोलीबारी करने वाले जवान ने ख़ुद को भी गोली मार ली.
एसपी मोहित गर्ग ने कहा कि जवानों के बीच हुई गोलीबारी का कारण अभी पता नहीं चल पाया है.
इमेज कॉपीरइटCGKHABAR
इस घटना के बाद भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं.
साथ ही ज़िला मुख्यालय से भी पुलिस अधिकारी मौक़े पर पहुंचे हैं.
राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने इस घटना पर दुख ज़ाहिर करते हुए कहा है कि नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक और बस्तर के आईजी (पुलिस) को मौक़े पर जाने के निर्देश दिए गए हैं.
आलोक प्रकाश पुतुलरायपुर (छत्तीसगढ़) से, बीबीसी हिंदी के लिए
प्रकाश दास और नबीउल हसन, दोनों की मौत की कहानियों में एक फ़ोन कॉल का ज़िक्र आता है, एक संदेहास्पद फ़ोन कॉल का.
प्रकाश की बीवी झिनुक मालादास पति को फ़ोन पर पेमेंट दिए जाने का वायदा कर बुलाए जाने और फिर उनकी मौत की ख़बर की बात कहती हैं.
तो नबीउल हसन की मां आसिया बीबी कहती हैं, "एक आदमी ने फ़ोन करके बुलाया कि कहीं जाना है फिर मेरा बेटा मारा गया."
(नबीउल हसन का नाम ज़्यादातर जगहों पर रबीउल इस्लाम लिखा गया है, लेकिन परिवार का कहना है कि उनका नाम नबीउल था)
प्रकाश और हसन को गाय चोरी के इलज़ाम में पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में पीट-पीटकर मार डाला गया था और उनकी गाड़ी फूंक दी गई थी.
Image captionवो जगह जहां मृतक नबीउल हसन की गाड़ी जलाई गई
गाड़ी कहीं और जलाई गई
गाड़ी को तहस-नहस कर जलाए जाने के निशान सड़क पर तो नहीं, जहां पिकअप वैन को पकड़ा गया होगा बल्कि हाट से थोड़ा अलग एक प्राइमरी स्कूल के प्रांगण में दिखते हैं.
पुलिस के मुताबिक़ केदारहाट गांव के लोगों ने गाड़ी में गाय दिखने और पूछताछ का सही जवाब न मिलने पर प्रकाश दास और नबीउल हसन की बुरी तरह पिटाई की और गाड़ी में आग लगा दी गई.
ख़बरों के मुताबिक़ भीड़ ने कथित चोरी की गाय को खेत में छोड़ जाने दिया था.
परिवार का कहना है कि पिकअप वैन मुताबिक़ हसन की थी, जिसे प्रकाश ड्राइव कर रहा था. प्रकाश हालांकि हसन के लिए लगातार काम नहीं करता था.
Image captionप्रतीकात्मक तस्वीर
चाचा सबीदुल हक़ कहते हैं कि हसन के पास कोई परमानेंट ड्राइवर नहीं था और काम के हिसाब से उन्हें एक या चंद दिनों के लिए रख लेता था.
उन्होंने बताया, "हसन मसाला, चाय और रोज़मर्रा के दूसरे सामान बाज़ार में सप्लाई करता था और उसी काम से उसे दिन माथा भंगा गया था जब केदारहाट के पास क्लब के कुछ लड़कों ने चंदे के लिए उसे पकड़ा और फिर मार-धाड़ किया. बाद में गाय लाकर बांध दिया."
परिवार वाले हादसे के वक़्त हसन के पास एक मंहगा मोबाइल, कैश और सोने की अंगूठी वग़ैरह होने का भी दावा करते हैं.
चार कमरे, बरामदे, आंगन और दालान और पक्की दीवारों से बना घर हसन की माली हैसियत बयां करते हैं.
वो फ़ोन कॉल्स
हसन की मां आसिया बीबी कहती हैं, "जिस आदमी ने बुलाया उसी ने उसकी मौत की ख़बर दी, दो दिनों के बाद जब उससे फिर फ़ोन पर बात हुई तो उसने कहा कि ये फ़ोन किसी को मत दीजिएगा मुझे दिक्क़त होगी. वो बार-बार अपना फ़ोन न देने की बात क्यों कहता है?"
प्रकाश की पत्नी झिनुक कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि फ़ोन किसका है लेकिन उन्होंने किसी को कहते सुना कि पुराना पैसा मिल जाएगा.... फिर सुबह में उनकी मौत की ख़बर आई.
झिनुक का कहना है कि प्रकाश ने कुछ लोगों के लिए काम किया था जिसके पैसे उसे नहीं मिले थे.
Image captionनबीउल हसन की कब्र के साथ खड़ीं उनकी माँ आसिया बीबी
परिवारवाले बताते हैं कि प्रकाश कुछ दिनों पहले पुलिस की गिरफ्त में आ गया था. इक्का-दुक्का जगहों पर हसन के तस्करी से जुड़े होने की बात भी कही गई है.
बाबू मियां नाम के एक व्यक्ति का ज़िक्र भी उसके मां, पिता और दूसरे रिश्तेदारों की बातों में बार-बार आता है.
पिछले दो माह से वो बिल्कुल बदल गया था, उसके नए-नए दोस्त बन गए थे वो वक़्त-बेवक़्त उसे बुलाकर ले जाते थे और अपने साथ काम करने का ज़ोर दिया करते थे.
व्हॉट्सऐप से जानकारी
हक़ बताते हैं कि उन्हें भतीजे की मौत की ख़बर उस मैसेज से मिली जिसमें हसन की तस्वीर थी.
"हम पहले पास के थाने और फिर अस्पताल गए, जब वहां पता नहीं चला तो उसके बाद कूच बिहार गए. वहां भतीजे की लाश पड़ी थी. जो पोस्टमॉर्टम के बाद हमें दे दी गई."
बातें करते-करते हक़ अचानक से भावुक हो जाते हैं और फफक-फफककर रोने लगते हैं और उसी दौरान कहते हैं, "अगर कोई चोर भी हो तो ये कहां का क़ानून है कि आप उसका क़त्ल कर देंगे. ये तो क़ानून को अपने हाथ में लेना है."
Image captionनबीउल हसन के चाचा सबीदुल हक़
मां सोइलो दास भर्राई आवाज़ में कहती हैं कि प्रकाश के पूरे जिस्म में कहीं चोट नहीं थी सिवाए कपाड़ के, "जैसे किसी ने किसी धारधार हथियार को माथे के चारों तरफ़ घुमा दिया हो."
सबीदुल हक़ जो सवाल पूछ रहे हैं, वही न सिर्फ कूच बिहार बल्कि देश भर में पूछा जा रहा है.
भारत-बांग्लादेश सीमा
केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के बनने के बाद लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं के मद्देनज़र इसपर अलग से क़ानून बनने की बात बार-बार उठती रही है लेकिन सरकार का रवैया पूरे मामले पर ठंडा ही रहा है.
पश्चिम बंगाल और राजस्थान की सरकारों ने इसको लेकर अलग से बिल पास किया भी है, मगर वो राज्यपालों के पास धूल खा रही हैं.
इस इलाक़े में एक सवाल और भी है.
Image captionभारत-बांग्लादेश सीमा
कूच बिहार की तक़रीबन साढ़े पांच सौ किलोमीटर सीमा बांग्लादेश से लगती है और पिछले सालों में तार की फेंसिग के बावजूद कई क्षेत्र ऐसे हैं जो कई भौगोलिक कारण जैसे नदियों, दलदल वग़ैरह की वजह से घेरे नहीं जा सकते.
मवेशी से लेकर नमक तक की तस्करी इन इलाक़ों में आम सी बात है और कहा जाता है कि इसकी पैठ बहुत गहरी और लंबी है.
पुलिस-प्रशासन की चुप्पी
शायद इसलिए जब बीबीसी ने कई सवालों के जवाब जानने के लिए पुलिस से लेकर, प्रशासन और सभी राजनीतिक दलों के स्थानीय नेताओं से बात करने की कोशिश की तो सब के सब बचते नज़र आए.
कुछ जगहों पर सरगोशी में बीजेपी के एक बड़े नेता का नाम किंगपिन के तौर पर लिया जाता है.
Image captionबीजेपी नेता दीप्तिमान सेन गुप्ता
हमें इस पर प्रतिक्रिया के लिए ढाई घंटे सफ़र कर 117 किलोमीटर दूर माल बाज़ार जाना पड़ा जहां पार्टी के सीनियर नेता दीप्तिमान सेनगुप्ता ने हमसे कहा कि चूंकि बीजेपी नॉर्थ बंगाल में मज़बूत है इसलिए इस पूरे मामले का राजनीतिकरण करके उसे बदनाम करने की कोशिश हो रही है.
दीप्तिमान कहते हैं कि बॉर्डर के इलाक़ों के लिए अलग से पॉलिसी बनाई जानी चाहिए ताकि लोगों को रोज़गार के बेहतर अवसर मिल सकें.
फ़ैसल मोहम्मद अलीबीबीसी संवाददाता, कूचबिहार, पश्चिम बंगाल से लौटकर
दिल्ली में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के आवास में सुरक्षा में चूक का एक बड़ा मामला सामने आया है जब एक कार में बैठे कुछ लोग सीधे उनके घर में पहुँच गए.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 26 नवंबर को एक कार में बैठे सात लोग प्रियंका गांधी के लोदी एस्टेट स्थित घर के परिसर में दाख़िल हुए, कार से उतरे और भीतर जाकर उनसे तस्वीरें खिंचवाने का आग्रह करने लगे.
बताया गया है कि कार में तीन पुरूष, तीन महिलाएँ और एक लड़की सवार थे. प्रियंका ने उनके साथ बातें कीं और तस्वीरें खिंचवाई जिसके बाद वो वापस लौट गए.
कांग्रेस महासचिव के दफ़्तर ने इसे सुरक्षा की भारी चूक का मामला बताते हुए इस घटना को केंद्रीय रिज़र्व सुरक्षा बल सीआरपीएफ़ के सामने उठाया है.
ये मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटा दी गई है और उन्हें जेड-प्लस सुरक्षा दी गई है जिसकी ज़िम्मेदारी सीआरपीएफ़ पर होती है.
कर्नाटक से सांसद अनंत हेगड़े अपने बयानों के लिए मशहूर हैं. इस बार उन्होंने महाराष्ट्र में हाल ही के दिनों में हुई राजनीति पर चौंकाने वाला बयान दे डाला है. उन्होंने दावा किया है कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस ने रात में जिस तरह एनसीपी नेता अजित पवार को मिलाकर सुबह राज्य में सरकार बनाई थी, उसके पीछे 40 हजार करोड़ रुपया था. उन्होंने कहा कि फडणवीस ने राज्य के खजाने से चालीस हजार करोड़ रुपया का निकाल कर केंद्र को दे दिया. बीजेपी सांसद ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस 80 घंटे सीएम रहे थे और इतने ही घंटे में उन्होंने यह काम किया. हेगड़े ने हुए कहा, 'आपको पता है कि हमारे आदमी 80 घंटे के लिए महाराष्ट्र में सीएम बना था. इसके बाद फडणवीस ने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने यह ड्रामा क्यों किया था? क्या हमें पता नहीं था कि हमारे पास बहुमत नहीं है फिर भी वह मुख्यमंत्री बने. यह सवाल हर कोई पूछता है. मुख्यमंत्री के पास करीब 40 हजार करोड़ रुपये थे. अगर Congress-NCP और शिवसेना सत्ता में आ जाते तो वे इन पैसों का गलत इस्तेमाल करते. यह सब केंद्र का पैसा था और इसका इस्तेमाल राज्य के विकास में नहीं होता. यह सब कुछ बहुत पहले तय कर लिया गया था. इसलिए यह ड्रामा रचा गया. फडणवीस ने शपथ लेते ही 15 घंटे के अंदर सारा पैसा केंद्र को भेज दिया'.
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में जहां एक दिन पहले तक हो चुका था कि Congress-NCP और शिवसेना मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं और उद्धव ठाकरे सीएम होंगे लेकिन उसी रात बीजेपी ने एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार को तोड़ लिया और सुबह चौंकाते हुए देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद की शपथ ले ली और अजित पवार डिप्टी सीएम बन गए. इसके बाद Congress-NCP और शिवसेना सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और जहां फैसला हुआ कि देवेंद्र फडणवीस को बहुमत साबित करना होगा. इससे पहले दावा किया जा रहा था कि अजित पवार के साथ एनसीपी के कई विधायक आ गए हैं. लेकिन यह दवा हवा-हवाई साबित हुआ और बहुमत साबित करने से पहले अजित पवार फिर एनसीपी में वापस लौट गए. बाद में राज्य में उद्धव ठाकरे ने सीएम पद की शपथ ली और कांग्रेस के नेता नाना पटोले को विधानसभा स्पीकर बनाया गया है. https://khabar.ndtv.com/news/india/bjp-mp-ananth-hegde-says-devendra-fadnavis-become-cm-for-80-hours-for-40-thousand-crore-rupees-2141794